book

2407 Ritu Blank Thumbnail

‘गांधी और जिन्ना ने एक दूसरे को समझा होता तो देश का इतिहास कुछ और होता’

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका शीला रेड्डी से उनकी किताब ‘मिस्टर एंड मिसेज़ जिन्नाः द मैरिज दैट शूक इंडिया’ को लेकर रीतू तोमर से बातचीत.

WhatsApp Image 2019-08-26 at 1.46.58 PM (1)

क्यों बंद हो गया दिल्ली की पहचान रहा संडे बुक मार्केट

नई दिल्ली स्थित दरियागंज के चर्चित संडे बुक मार्केट को ट्रैफिक पुलिस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद बंद कर दिया गया है. इस फैसले के बाद यहां किताब की दुकान लगाने वाले व्यापारियों के सामने रोज़गार का संकट पैदा हो गया है.

The Anatomy of Hate (1)

‘साल 2002 में गुजरात दो हिस्सों में बंट गया, वही राजनीति अब पूरे देश में फैल गई है’

वीडियो: गुजरात दंगों पर आधारित किताब ‘द एनाटमी ऑफ हेट’ की लेखिका वरिष्ठ पत्रकार रेवती लाल से द वायर हिंदी के कार्यकारी संपादक बृजेश सिंह की बातचीत.

साभार: राधाकृष्ण प्रकाशन

क्या ‘जूठन’ पाठ्यक्रमों से बाहर कर दी जाएगी?

हिमाचल विश्वविद्यालय में ओम प्रकाश वाल्मीकि की ‘जूठन’ बीते 3 सालों से पढ़ाई जा रही थी, तब भावनाएं अचानक कहां से आहत हो गईं? क्या इसका ताल्लुक़ राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन से है?

kancha book

कांचा इलैया की किताब बैन करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

इलैया की किताब बैन करने की याचिका ख़ारिज करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि हम किताबों पर प्रतिबंध लगाने के लिए यहां नहीं बैठे हैं. किसी किताब को सिर्फ इसलिए बैन नहीं किया जा सकता क्योंकि वो विवादित है.

DD-Kosambi

डीडी कोसंबी: एक अनोखी प्रतिभा की ज़िद्दी धुन

डीडी कोसंबी हमारे सामने एक अनोखे रोल मॉडल के तौर पर सामने आते हैं, जिनकी गणितीय प्रतिभा उनके इतिहास ज्ञान और अटल राजनीतिक विचारों पर छा गई थी. प्रतिभाओं का ऐसा मिलान किसी सपने की तरह है.

PTI6_11_2017_000102B

इंदिरा ने गोवध पर रोक के लिए समिति बनाई थी, गोलवरकर की सदस्यता वाली समिति ने नहीं दी रिपोर्ट

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की नई किताब ‘इंदिरा गांधी: अ लाइफ इन नेचर’ का नई दिल्ली में विमोचन हुआ.

Asha Parekh IANS 1

पद्म भूषण के लिए पीछे पड़ने वाले गडकरी के बयान ने मुझे दुख पहुंचाया: आशा पारेख

बीते ज़माने की मशहूर अभिनेत्री आशा पारेख ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान कि पद्मभूषण पुरस्कार पाने के लिए मैं उनके पीछे पड़ी थी, काफी दुखद था.

book

‘ये लेखन की परिपक्व उम्र नहीं, अभी थोड़ा और पकिए’

किस दिन, किस मुहूर्त में लेखक बना, याद नहीं न इसका जरा भी भान हुआ. बस याद रही इस यात्रा की वो सारी बातें जो खुद में एक उपन्यास है.