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सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

अयोध्या मामले में 15 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करे मध्यस्थता समिति: सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई तीन महीने के लिए टालते हुए दोनों पक्षों से 30 जून तक मध्यस्थता समिति के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई. (फोटो: पीटीआई)

अयोध्या में पूजा की मांग वाली याचिका ख़ारिज, सीजेआई ने कहा- आप इस देश में शांति नहीं रहने देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अयोध्या में ‘67.7 एकड़ भूमि के अविवादित हिस्से’ पर पूजा करने की अनुमति देने की याचिका खारिज कर दी. इसके अलावा याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए पांच लाख रुपये के जुर्माने के फैसले को भी बरकरार रखा.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

‘राम की जन्मभूमि’ फिल्म की रिलीज रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि फिल्म की रिलीज अयोध्या भूमि विवाद मामले में चल रही मध्यस्थता कार्यवाही को प्रभावित करेगी. इस पर अदालत ने कहा, ‘मध्यस्थता की कार्यवाही और फिल्म की रिलीज के बीच कोई संबंध नहीं है.’

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

आर्थिक असमानता लोगों को मजबूर कर रही है कि वे बीमार तो हों पर इलाज न करा पाएं

सबसे ग़रीब तबकों में बाल मृत्यु दर और कुपोषण के स्तर को देखते हुए यह समझ लेना होगा कि लोक सेवाओं और अधिकारों के संरक्षण के बिना न तो ग़ैर-बराबरी ख़त्म की जा सकेगी, न ही भुखमरी, कुपोषण और बाल मृत्यु को सीमित करने के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

उदारीकरण के बाद बनीं आर्थिक नीतियों से ग़रीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती गई

जब से नई आर्थिक नीतियां आईं, चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए खुलेआम जनविरोधी नीतियां बनाई जाने लगीं, तभी से देश राष्ट्र में तब्दील किया गया. इन नीतियों से भुखमरी, कुपोषण और ग़रीबी का चेहरा और विद्रूप होने लगा तो देश के सामने राष्ट्र को खड़ा कर दिया गया. खेती, खेत, बारिश और तापमान के बजाय मंदिर और मस्जिद ज़्यादा बड़े मुद्दे बना दिए गए.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: द वायर)

ऐसा लगता है कि पटाखों की तुलना में वाहनों से कहीं ज़्यादा प्रदूषण होता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा निर्माण और बिक्री में शामिल लोगों का रोज़गार ख़त्म होने पर चिंता जताई. कोर्ट ने केंद्र सरकार से जानना चाहा कि क्या उसने पटाखों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण के बीच कोई तुलनात्मक अध्ययन कराया है.

(फोटो: पीटीआई)

अयोध्या विवाद: क्या मध्यस्थता या कोई भी सुलहनामा किसी के क़ानूनी हक़ों का विकल्प बन सकता है?

अयोध्या विवाद का साल दर साल तार्किक परिणति से दूर और लाइलाज होते जाना जहां देश की व्यवस्थापिका व कार्यपालिका के ख़िलाफ़ बड़ी टिप्पणी है, वहीं न्यायपालिका के ख़िलाफ़ भी है, जिसने इन दोनों की ही तरह विवाद के ख़ात्मे के लिए ज़रूरी जीवट और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन नहीं किया.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

बातचीत से सुलझेगा अयोध्या विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्यस्थता के लिए सौंपा

शीर्ष अदालत ने कहा फ़ैज़ाबाद में होगी मध्यस्थता. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एफएम खलीफुल्ला की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय समिति में श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, कहा- मध्यस्थता के लिए नाम सुझाएं सभी पक्ष

उत्तर प्रदेश सरकार सहित राम मंदिर निर्माण का समर्थन करने वाले सभी पक्षों ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मध्यस्थता को सौंपने के फै़सले का विरोध करते हुए कहा कि अदालत ही मामले का समाधान करे.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की संभावना पर विचार करने को कहा

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि क्या आप गंभीरता से यह समझते हैं कि इतने सालों से चल रहा यह पूरा विवाद संपत्ति के लिए है? हम सिर्फ संपत्ति के अधिकारों के बारे में निर्णय कर सकते हैं परंतु हम रिश्तों को सुधारने की संभावना पर विचार कर रहे हैं.

New Delhi: A view of the Supreme Court, in New Delhi, on Thursday. (PTI Photo / Vijay Verma)(PTI5_17_2018_000040B)

अयोध्या में भूमि अधिग्रहण के 1993 के क़ानून की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

नई याचिका में दलील दी गई है कि संसद राज्य की भूमि का अधिग्रहण करने के लिए क़ानून बनाने में सक्षम नहीं है. राज्य की सीमा के भीतर धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के लिए क़ानून बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल के पास है.

संत गोपाल दास. (फोटो साभार: फेसबुक)

गंगा सफाई के लिए आंदोलन कर रहे संत गोपाल दास लापता, चार दिन बाद भी कोई जानकारी नहीं

संत गोपाल दास पिछले 24 जून से आंदोलनरत हैं और इस दौरान तबियत बिगड़ने पर उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. गोपाल दास के सहयोगियों का आरोप है कि वे लापता नहीं हुए हैं बल्कि उन्हें लापता कराया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल. (फोटो: पीटीआई)

पीएमओ में दो महीने तक पड़ी रहीं जीडी अग्रवाल की चिट्ठियां, नहीं हुई कार्रवाई: आरटीआई

पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल गंगा सफाई के लिए 112 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठे थे. बीते 11 अक्टूबर को उनका निधन हो गया. गंगा को लेकर अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन बार पत्र लिखा था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

Haridwar: In this photo dated Oct 10, 2018, is seen environmentalist G D Agarwal, who was on fast unto death since June 22 for a clean River Ganga, being forcibly taken to the hospital after his health detriorated in Haridwar. Agarwal passed away on Thursday, Oct 11, 2018 at AIIMS Rishikesh following a heart attack. (PTI Photo) (PTI10_11_2018_000109)

प्रो. जीडी अग्रवाल के शव पर विवाद, हाईकोर्ट द्वारा अंतिम दर्शन का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने रोका

गंगा सफाई के लिए अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् प्रो. जीडी अग्रवाल के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को लेकर विवाद शुरू हो गया है. उन्होंने अपना शरीर एम्स को दान में दे दिया था. उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच गया है.

Haridwar: In this photo dated Oct 10, 2018, is seen environmentalist G D Agarwal, who was on fast unto death since June 22 for a clean River Ganga, being forcibly taken to the hospital after his health detriorated in Haridwar. Agarwal passed away on Thursday, Oct 11, 2018 at AIIMS Rishikesh following a heart attack. (PTI Photo) (PTI10_11_2018_000109)

सत्ताधीश ‘नमामि गंगे’ का सब्ज़बाग दिखाते रहे और प्रो. जीडी अग्रवाल की बलि चढ़ गई

पर्यावरणविद् प्रो. जीडी अग्रवाल ने 100 से ज़्यादा दिनों तक अपना अनशन जारी रखा तो सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकारों की असंवेदनशीलता के बावजूद उनके दिलोदिमाग में लोकतंत्र को लेकर कोई न कोई उम्मीद ज़रूर बाकी रही होगी. उनके जाने का दुख इस अर्थ में कहीं ज़्यादा सालता है कि ऐसा अनशन के अस्त्र के प्रणेता महात्मा गांधी के जन्म के एक 150वें वर्ष में हुआ है.

New Delhi: Senior citizens during a protest demanding entitlement of universal old age pension, at Jantar Mantar in New Delhi, Sunday, Sept. 30, 2018. (PTI Photo/Arun Sharma)(PTI9_30_2018_000097B)

‘मुखिया ने मुझसे कहा, पहले माथे का सिंदूर मिटाकर आओ तब पेंशन मिलेगी’

भारत सरकार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत वृद्धों को पेंशन देती है. इसमें केंद्र सरकार का योगदान केवल 200 रुपये प्रति माह है. पेंशन मिलने में आ रही दिक्कतों और पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर विभिन्न राज्यों से आए ​बुज़ुर्गों ने नई दिल्ली में प्रदर्शन किया.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

आदिवासियों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक सरकारी रिपोर्ट बताती है कि उनकी स्थिति बेहद ख़राब है

स्वास्थ्य एवं आदिवासी मामलों के मंत्रालयों द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति द्वारा आदिवासी स्वास्थ्य को लेकर किए गए अध्ययन में पता चला है कि आदिवासियों के स्वास्थ्य की स्थिति बेहद चिंताजनक है.