Chief Justice of India

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न्यायपालिका अपने अधिकार क्षेत्र से परे जा चुकी है, उसे लक्ष्मण रेखा खींचनी होगी: रोहतगी

पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग दोनों स्तंभों के बीच टकराव की एक बड़ी वजह है.

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‘कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच खींचतान लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है’

सरकार का तर्क-अदालतें कार्यपालिका का काम नहीं कर सकतीं. मुख्य न्यायाधीश ने कहा- कोई भी संस्था सर्वोच्चता का दावा नहीं कर सकती, नागरिक अधिकार सर्वोच्च.

फोटो: पीटीआई

मौलिक अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता: मुख्य न्यायाधीश

संविधान दिवस: केंद्रीय क़ानून मंत्री ने कहा, शासन का काम उनके पास रहना चाहिए जो इसके लिए निर्वाचित हुए हों. सीजेआई बोले, नागरिकों का अधिकार सर्वोच्च होना चाहिए.

Shourie Loya SC

‘सुप्रीम कोर्ट एक संपादकीय पर स्वतः संज्ञान ले सकता है, तो जज की मौत पर क्यों नहीं’

सीबीआई जज बृजगोपाल हरकिशन लोया की मौत और न्यायपालिका पर उनके परिवार द्वारा उठाए गए सवालों पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार अरुण शौरी का नज़रिया.

Ap SHah on judge Loya

एक्सक्लूसिव: बृजगोपाल लोया की ‘संदिग्ध मौत’ की जांच बेहद ज़रूरी: जस्टिस एपी शाह

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस का मानना है कि जज बृजगोपाल लोया की संदिग्ध मौत के बारे जांच ज़रूरी है क्योंकि ऐसे मामले में लगे आरोप न्यायपालिका की साख कलंकित कर सकते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास का एक दुखद क्षण

पूर्व क़ानून मंत्री शांति भूषण बता रहे हैं कि 10 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश की अदालत में जो हुआ, वह सर्वोच्च न्यायालय और भारत की न्यायपालिका के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

Justice Dipak Misra - Copy

क्या जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हों, उसे देश का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाना चाहिए?

जस्टिस दीपक मिश्रा को देश का मुख्य न्यायाधीश बनाये जाने पर सवाल उठा रहे हैं पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण.

(फोटो: पीटीआई)

गर्मी की छुट्टियों में करीब 5,300 मामलों पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

उच्चतम न्यायालय 11 मई से शुरू हो रही गर्मी की छुट्टियों के दौरान करीब 5,300 मामलों पर सुनवाई करेगा. इसके लिए नियमित सुनवाई मामलों की एक सूची जारी की गई है जिन पर दो अवकाश पीठ सुनवाई करेंगी.

Justice Karnan 1

मा​नसिक प्रताड़ना के लिए जस्टिस कर्णन ने चीफ जस्टिस से मांगे 14 करोड़

कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने भारत के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर 14 करोड़ रुपये बतौर मुआवज़ा देने की मांग की है. उन्होंने यह रकम मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमान सहने के लिए मांगी है.