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योजनाएं सिर्फ़ काग़ज़ पर, महाराष्ट्र सरकार ने कुपोषण से मौत रोकने के लिए क्या क़दम उठाए: कोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट 2007 में दाख़िल एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अमरावती ज़िले के मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण की वजह से बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं की बड़ी संख्या में मृत्यु के मामलों को रेखांकित किया गया था. याचिका के अनुसार, इलाके में इस साल अगस्त से सितंबर के बीच कुपोषण तथा डॉक्टरों की कमी की वजह से 40 बच्चों की मौत हुई और 24 बच्चे मृत जन्मे.

भारत में 14-18 आयु वर्ग के 80 फ़ीसदी बच्चों में कोविड के दौरान सीखने के स्तर में गिरावट आई: यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूनिसेफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 6-13 वर्ष के बीच के 42 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल बंद होने के दौरान किसी भी प्रकार की दूरस्थ शिक्षा का उपयोग नहीं करने की सूचना दी. इसका मतलब है कि उन्होंने पढ़ने के लिए किताबें, वर्कशीट, फोन या वीडियो कॉल, वॉट्सऐप, यूट्यूब, वीडियो कक्षाएं आदि का इस्तेमाल नहीं किया है.

देश के आठ राज्यों ने ही अपने सभी स्कूलों में पेयजल की सुविधा सुनिश्चित की: संसदीय समिति

संसद में हाल ही में पेश एक स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि सिर्फ आठ राज्यों ने अपने सभी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा सुनिश्चित की है. समिति ने शिक्षा मंत्रालय से 2021-22 के अंत तक हर शैक्षणिक संस्थान में नल से जल मिशन के तहत सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है.

बाल मज़दूरी ख़त्म करने के लिए उठाए गए कदमों पर एनएचआरसी ने सभी राज्यों से रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान से बच्चों की तस्करी के संबंध में मिली शिकायत को लेकर कहा कि स्वतंत्रता के 70 साल बाद भी बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न क़ानूनों और योजनाओं के बावजूद बाल मज़दूरी और बच्चों की तस्करी का जारी रहना राज्य की मशीनरी पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है.

मध्य प्रदेशः सरकारी कार्यक्रम में अस्पताल में भर्ती बच्चों को घंटों धूप में बैठाया, मिला नोटिस

विदिशा ज़िला अस्पताल का मामला. आरोप है कि अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती बच्चों को एक सरकारी कार्यक्रम में चिलचिलाती धूप में घंटों तक बैठाए रखा. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर हफ़्ते भर में मामले की जांच कर दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा है.

म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के बाद से अब तक हज़ार से अधिक लोगों की मौत: अधिकार समूह

म्यांमार में प्रदर्शनों से जुड़ीं गिरफ़्तारियों और मौतों पर नज़र रखने वाले समूह असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिज़नर्स की ओर से कहा गया है कि मारे गए अधिकतर लोग सेना विरोधी कार्यकर्ता हैं और इनमें भी 40 से अधिक लोगों के सिर में गोली मारी गई है. बड़ी संख्या में लोगों की मौत पूछताछ केंद्रों और कारागार में गिरफ़्तारी के बाद हुई है.

आईवीएफ से जन्मे शिशु के जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए पिता की जानकारी मांगना उचित नहीं: कोर्ट

आईवीएफ के ज़रिये गर्भधारण करने वाली एक तलाक़शुदा महिला ने केरल जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमावली के पिता की जानकारी देने संबंधी नियम को चुनौती दी थी. केरल हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को ऐसी प्रक्रिया से जन्मे बच्चों के ऐसे पंजीकरण के लिए उचित फॉर्म मुहैया कराना चाहिए.

New Delhi: Petroleum & Natural Gas Minister Dharmendra Pradhan speaks during a cabinet briefing, in New Delhi, Wednesday, Sept 12, 2018. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI9_12_2018_000092B)

करीब 15 करोड़ बच्चे एवं युवा देश की औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर: शिक्षा मंत्री

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि क़रीब 25 करोड़ आबादी साक्षरता की बुनियादी परिभाषा के नीचे है. सरकारी, निजी एवं धर्मार्थ स्कूलों, आंगनवाड़ी, उच्च शिक्षण संस्थानों एवं कौशल से जुड़ी पूरी व्यवस्था में 3 से 22 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों एवं युवाओं की संख्या 35 करोड़ है, जबकि देश में इस आयु वर्ग की आबादी 50 करोड़ है. 

पिछले साल नवंबर तक नौ लाख से अधिक बच्चे थे अत्यंत कुपोषित

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह के एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि आईसीडीएस-आरएसएस पोर्टल के मुताबिक, मंत्रालय ने 30 नवंबर 2020 तक देश में ऐसे नौ लाख से अधिक बच्चों की पहचान की है, जो अत्यंत कुपोषित हैं. इन बच्चों की उम्र छह महीने से छह साल के बीच है. इनमें से तकरीबन चार लाख बच्चे उत्तर प्रदेश से थे.

देश के एक तिहाई से अधिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक नल से जलापूर्ति नहीं हो सकी

पिछले साल दो अक्टूबर को स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक नल से पानी पहुंचाने के लिए 100 दिन के अभियान की शुरुआत की गई थी. यह अभियान जल जीवन मिशन का हिस्सा था. हालांकि 100 दिवसीय अभियान शुरू करने के 10 महीने बाद भी सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी है.

कोविड-19 की दूसरी लहर में 645 बच्चों ने अपने अभिभावक खोए: केंद्र सरकार

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि महामारी की दूसरी लहर में सबसे अधिक 158 बच्चे उत्तर प्रदेश में अनाथ हुए हैं. इसके बाद आंध्र प्रदेश में 119, महाराष्ट्र में 83, मध्य प्रदेश 73 और गुजरात में 45 बच्चों ने अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोया है.

महामारी के पहले 14 महीनों के दौरान 1.19 लाख भारतीय बच्चों ने माता-पिता, अभिभावकों को खोयाः रिपोर्ट

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज़ और नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ के अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया के 21 देशों में 15 लाख से अधिक बच्चों ने संक्रमण के कारण अपने माता-पिता या उन अभिभावकों को खो दिया, जो उनकी देखभाल करते थे. भारत में 25,500 बच्चों ने कोविड-19 के कारण अपनी मां को खो दिया, जबकि 90,751 बच्चों ने अपने पिता को और 12 बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया.

ऐसे बच्चों की संख्या सबसे ज़्यादा भारत में है, जिन्हें कोई टीका नहीं लगा हैः यूनिसेफ़

दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के बीच यूनिसेफ ने कहा कि भारत में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़कर 35 लाख हो गई है, जिन्हें कोई टीका नहीं लगा है. यह 2019 की अपेक्षा इस संख्या में 14 लाख की वृद्धि हुई है. इसके मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में किसी भी नियमित टीकाकरण में विफलता के मामले में दक्षिण एशिया सबसे ऊपर रहा और 2020 में ऐसे बच्चों की संख्या क़रीब 44 लाख थी.

55% लाभार्थियों को पोषक आहार न मिलने की रिपोर्ट पर झारखंड सरकार को एनएचआरसी का नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड के 159 प्रखंडों में एक सरकारी योजना के तहत 55 फीसदी लाभार्थियों को पूरक पोषक आहार न मिलने की रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजे नोटिस में कहा कि यदि मीडिया की ख़बर में मौजूद तथ्य सही हैं तो यह भोजन के अधिकार के हनन का एक गंभीर मुद्दा है.

कोरोना की तीसरी लहर में वयस्कों की तुलना में बच्चों को कम ख़तरा: डब्ल्यूएचओ-एम्स सर्वे

डब्ल्यूएचओ और एम्स के ताज़ा सीरो प्रिवलेंस अध्ययन के अनुसार सार्स-सीओवी-2 की सीरो पॉजिटिविटी दर वयस्क आबादी की तुलना में बच्चों में अधिक है इसलिए ऐसी संभावना नहीं है कि भविष्य में कोविड-19 का मौजूदा स्वरूप दो साल और इससे अधिक उम्र के बच्चों को तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभावित करेगा.