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Kothari-Julka

मोदी सरकार ने नए सीवीसी और सीआईसी की नियुक्ति की, चयन प्रक्रिया पर उठ रहे कई सवाल

आलम ये है कि चयन समिति के एक सदस्य वित्त सचिव राजीव कुमार ने भी सीवीसी पद के लिए आवेदन किया था और उन्हें इसके लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था.

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केंद्रीय सूचना आयुक्त का पद फिर हुआ खाली, कुल पांच रिक्तियां, 34,500 मामले लंबित

साल 2014 के बाद से ये चौथा मौका है जब फिर से मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली हुआ है लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है. आयोग में कुल पांच पद खाली हैं जिसमें से चार पद नवंबर 2018 से खाली पड़े हुए हैं.

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चंदा देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की मांग करने वालों के नाम बताए केंद्र: सीआईसी

इस विषय को लेकर दायर किए गए आरटीआई आवेदन पर सही से कार्रवाई नहीं करने को लेकर सीआईसी ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग, आर्थिक कार्य विभाग तथा राजस्व विभाग और चुनाव आयोग को कारण बताओं नोटिस जारी किया है.

(फोटो: पीटीआई/विकिपीडिया)

सीजेआई के इस दावे में कितनी सच्चाई है कि आरटीआई का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए हो रहा है?

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दावा किया कि आरटीआई का इस्तेमाल लोग ब्लैकमेलिंग के लिए कर रहे हैं. हालांकि ख़ुद केंद्र सरकार ने पिछले साल लोकसभा में बताया था कि बड़े स्तर पर आरटीआई के दुरुपयोग का कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

केंद्र और राज्य सरकारें तीन महीने के भीतर सूचना आयुक्त नियुक्त करें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि नियुक्तियां करना शुरू कर दें. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह दो हफ्ते के भीतर उस खोज समिति के सदस्यों के नाम सरकारी वेबसाइट पर डालें, जिन्हें सीआईसी के सूचना आयुक्त चुनने की ज़िम्मेदारी दी गई है.

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सीबीआई भ्रष्टाचार मामलों में सूचना से इनकार के लिए आरटीआई में छूट की आड़ नहीं ले सकती: सीआईसी

सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में सहमत है और सूचना देने से इनकार के लिए आरटीआई कानून की धारा 24 का सहारा नहीं लिया जा सकता है.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने राज्य के आरटीआई मामलों को जल्द निपटाने में अटकाया रोड़ा

आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने जम्मू कश्मीर में आरटीआई के तहत लंबित मामलों का निस्तारण केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा करने का फैसला लिया था. हालांकि अब जम्मू कश्मीर प्रशासन ने एक समिति बना दी है जिसके बाद ही इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा.

(फोटो साभार: सतर्क नागरिक संगठन)

आरटीआई के नए नियम सूचना आयुक्तों को सरकार की कठपुतली बनाने की कोशिश हैं

हाल ही में लाए गए नए नियमों के तहत केंद्र सरकार को केंद्रीय और राज्य सूचना आयोग के ऊपर नियंत्रण देना यह सुनिश्चित करेगा कि आरटीआई की अपील पर सरकार की मर्ज़ी के मुताबिक काम हो.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने सूचना आयुक्तों के खाली पद भरने के लिए केंद्र-राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 15 फरवरी 2019 के फैसले में कहा था कि पारदर्शिता बरतते हुए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति समय पर की जानी चाहिए. हालांकि अभी भी केंद्र और राज्यों में सूचना आयुक्तों के कई पद खाली हैं.

(फोटो साभार: इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स- आईसीआईजे)

ईडी को पनामा पेपर में शामिल कर चोरों के नामों का खुलासा न करने का अधिकार: सीआईसी

आरटीआई कानून की धारा 24 (1) कुछ खुफिया तथा सुरक्षा संगठनों को जानकारी साझा करने से छूट देती है. हालांकि, यदि मांगी गई सूचना भ्रष्टाचार और मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़ी है तो यह नियम लागू नहीं होता है.

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सीआईसी ने वित्त मंत्रालय से कहा, राजनीतिक दलों को चंदा देने वालों के बारे में जानकारी दें

वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में आरटीआई दाखिल कर राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के दौरान पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के संबंध में दानकर्ताओं द्वारा लिखे गए पत्र और इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के ड्राफ्ट की प्रति के बारे में जानकारी मांगी गई थी.

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आरटीआई के तहत सूचना देने से छूट प्राप्त धाराओं का उल्लेख करने पर उचित कारण दे सीबीआई: सीआईसी

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीआईसी ने अनेक आदेशों में स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जानकारी देने से छूट नहीं मिली है लेकिन सीबीआई में आरटीआई अर्जियों को देखने वाले अधिकारियों के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

आरटीआई के तहत 20 साल पहले की निजी जानकारी दी जा सकती है या नहीं, सीआईसी करेगा फैसला

साल 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट के एक दोषी एहतेशाम सिद्दिकी ने आरटीआई एक्ट के तहत भारतीय पुलिस सेवा के 12 अधिकारियों के संघ लोक सेवा आयोग में जमा फार्मों व अन्य रिकॉर्ड की प्रतियां मांगी थी, जिसे गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया था. अब सीआईसी इस पर अंतिम निर्णय लेगा.

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केंद्रीय सूचना आयोग में करीब 32 हज़ार अपील और शिकायतें लंबित, पिछले दो सालों में सर्वाधिक

कार्यकर्ताओं का कहना है कि मोदी सरकार को सूचना का अधिकार क़ानून में संशोधन करने के बजाय सूचना आयोगों में आयुक्तों की नियुक्ति करनी चाहिए ताकि आरटीआई क़ानून और मज़बूत बने.

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु. (फोटो साभार: फेसबुक)

पूर्व सूचना आयुक्त की सांसदों से अपील, आरटीआई को खत्म करने वाले संशोधन का साथ न दें

सांसदों को लिखे एक पत्र में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा, ‘मैं संसद के प्रत्येक सदस्य से अनुरोध करता हूं कि वे आरटीआई को बचाएं और सरकार को सूचना आयोगों और इस मूल्यवान अधिकार को मारने की अनुमति न दें.’

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आरटीआई एक्ट की सूचना देने से छूट प्राप्त धाराओं का बिना सोचे समझे उल्लेख करना गलत: सीआईसी

सीआईसी ने एक मामले की सुनवाई के दौरान डीओपीटी को कड़ी फटकार लगाते हुए ये टिप्पणी की. आयोग ने कहा, ऐसा करना आरटीआई कानून की भावना का गला घोटने जैसा है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

प्रधानमंत्री कार्यालय के पास पूर्व प्रधानमंत्रियों के आयकर रिफंड का कोई रिकॉर्ड नहीं: आरटीआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आयकर रिफंड की सूचना मांगने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने ब्योरा देने से इनकार करते हुए कहा कि सूचना के अधिकार कानून के तहत इसकी जानकारी देने की ज़रूरत नहीं है.

Home Ministry Twitter

गोहत्या के शक में मारे गए लोगों की जानकारी आरटीआई नियमों के तहत दे गृह मंत्रालय: सीआईसी

समीर ख़ान नाम के एक व्यक्ति ने गृह मंत्रालय से गोहत्या के शक में मारे गए और घायल हुए लोगों के नाम और सरकारों द्वारा उनके परिवारों को दिये गए मुआवज़े का राज्यवार आंकड़ा मांगा था.

Right to Information. Illustration-The Wire

सभी राजनीतिक दलों को आरटीआई क़ानून को बचाने का संकल्प लेना चाहिए

केंद्र और राज्यों में सूचना आयोग स्वतंत्र होने चाहिए. रीढ़विहीन बाबुओं को यह अनुमति नहीं दी जानी चाहिए कि वे आयोग को भी रीढ़विहीन बना दें. लोकसभा चुनाव में उतर रहे राजनीतिक दलों को केंद्रीय सूचना आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए.

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु. (फोटो साभार: फेसबुक)

‘सूचना आयुक्तों के ख़िलाफ़ जांच के लिए प्रस्तावित समिति सूचना आयोग को ख़त्म करने का षड्यंत्र’

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि यह एक हास्यास्पद प्रस्ताव है, जिन अधिकारियों को सूचना आयुक्तों के निर्देशों का पालन करना होता है, उन्हें सीआईसी के ख़िलाफ़ शिकायतों की जांच करने वाला उच्च प्राधिकार बना दिया गया है. यह उस संस्था को खत्म करने का एक और षड्यंत्रकारी प्रयास है.

Home Ministry Twitter

लुकआउट नोटिस जारी करने के लिए 40 साल पहले निकाले गए सर्कुलर को सार्वजनिक करे सरकार: सीआईसी

यह मामला गौरव दीप गुप्ता नाम के व्यक्ति से जुड़ा है जिन्होंने आरटीआई कानून के तहत गृह मंत्रालय की तरफ से पांच सितंबर 1979 को जारी लुकआउट सर्कुलर को निकालने से जुड़े सर्कुलरों की प्रतियां मांगी थी.

पूर्व चुनाव आयुक्त ​टीएस कृष्णमूर्ति. (फोटो: पीटीआई)

लोकसभा चुनावों में धनबल, हिंसा और नफ़रत का बोलबाला होगा: पूर्व सीईसी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा कि जिस तरह से राजनीतिक दल आपस में लड़ रहे हैं, ऐसी स्थिति में निर्वाचन आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती चुनाव आचार संहिता लागू करने की होगी.

FILE PHOTO: A security personnel member stands guard at the entrance of the Reserve Bank of India (RBI) headquarters in Mumbai, India, August 2, 2017. REUTERS/Shailesh Andrade/File Photo

आरटीआई के तहत नोटबंदी से जुड़ी जानकारी नहीं देने पर सीआईसी ने आरबीआई को लगाई फटकार

सूचना आयुक्त सुरेश चंद्रा ने जानकारी नहीं देने के कारण आरबीआई के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. आरटीआई के तहत आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की उन सभी बैठकों से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी जिसके तहत नोटबंदी के निर्णय पर पहुंचा गया.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सूचना आयुक्त की नियुक्ति में पारदर्शिता हो, सिर्फ रिटायर्ड नौकरशाह न भरे जाएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र एवं राज्य के सूचना आयोगों में खाली पदों पर छह महीने के भीतर भर्तियां की जानी चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो और केंद्रीय सूचना आयुक्त का दर्जा केंद्रीय चुनाव आयुक्त के बराबर होना चाहिए.

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, सूचना आयुक्त के पद पर सिर्फ नौकरशाहों की ही नियुक्ति क्यों हुई

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाई गई कमेटी ने 14 नामों को शॉर्टलिस्ट किया था जिसमें से 13 नौकरशाह थे. जिस पर जस्टिस सीकरी ने कहा कि हम नियुक्तियों को दोष नहीं दे रहे हैं. लेकिन गैर-नौकरशाह नाम भी थे, पर उनमें से किसी को भी नियुक्त नहीं किया गया.

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

क्यों मोदी सरकार सूचना आयुक्त पद के लिए नौकरशाहों को तरजीह दे रही है

केंद्रीय सूचना आयोग में हाल ही में नियुक्त चार सूचना आयुक्त पूर्व नौकरशाह हैं. हालांकि आरटीआई क़ानून की धारा 12 (5) बताती है कि सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, संचार मीडिया, प्रशासन या शासन के क्षेत्र से नियुक्त किए जाने चाहिए.

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सीआईसी के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए पांच में से चार उम्मीदवारों ने नहीं किया था आवेदन

सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेज़ों से यह खुलासा हुआ है कि इस पद के लिए आवेदन करने वाले दो वरिष्ठ सूचना आयुक्तों को भी शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया था. हालांकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि आवेदन करने वालों में से ही सर्च कमेटी द्वारा शॉर्टलिस्ट किया जाएगा.

पूर्व विधि सचिव सुरेश चंद्रा. (फोटो साभार: केंद्रीय सूचना आयोग)

मोदी सरकार ने पूर्व कानून सचिव सुरेश चंद्रा को आवेदन किए बगैर ही बनाया सूचना आयुक्त

आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि आवेदन करने वाले उम्मीदवारों में से ही सर्च कमेटी सूचना आयुक्त के लिए योग्य लोगों को शॉर्टलिस्ट करेगी. अगर सरकार को अपने मन से ही नियुक्ति करनी है तो आवेदन क्यों मंगाए गए.

M Sridhar Acharyulu Alok Verma FB PTI

पूर्व सीआईसी का राष्ट्रपति को पत्र, आलोक वर्मा को हटाने संबंधी रिपोर्ट का खुलासा करने की मांग

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में पूर्व सीआईसी श्रीधर आचार्युलु ने सीबीआई और सीआईसी की नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है.