Communal Harmony

कंपनी के नए दिवाली विज्ञापन में अभिनेत्री नीना गुप्ता, निमरत कौर, सयानी गुप्ता और अलाया एफ. ने काम किया है. (फोटो साभार: ट्विटर)

दिवाली पर पटाखे न जलाने की सलाह पर तनिष्क़ के एक और विज्ञापन को लेकर फ़िर विवाद

दिवाली को लेकर बनाए गए तनिष्क़ के इस विज्ञापन में पटाखे न जलाने की बात कहीं गई थी, जिस पर सोशल मीडिया पर एक धड़े की भावनाएं आहत हो गईं. इन लोगों ने हिंदुओं के त्योहारों को कैसे मनाया जाए इस पर ज्ञान न देने की सलाह दी. विवाद के बाद कंपनी के ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पेज से इसे हटा लिया गया है.

मथुरा के नंदबाबा मंदिर में नमाज़ पढ़ते फैजल और उनके साथी. (फोटो: वीडियोग्रैब/सोशल मीडिया)

मंदिर में नमाज़: क्या पवित्रता की साझेदारी संभव नहीं है

यह वही मुल्क़ है जहां ताजिये पीपल की डाल से न टकराए, इसका ख़ास ध्यान रखा जाता है, हिंदू मांएं भी ताजिये का इंतज़ार करती हैं कि उसके नीचे से बच्चे को गुजारकर आशीर्वाद ले सकें. हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह में चादर चढ़ाते हिंदुओं को क्या अलग कर सकते हैं? लेकिन अब साझा पवित्रता का विचार अपराध है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

तनिष्क के बहाने बशीर चूड़ीवाले की याद…

जहां टाटा हिंदू बहू और मुस्लिम सास के प्रेम का सामना करने से डर गया, वहीं बशीर चूड़ीवाले अपने शहर की हिंदू बहू-बेटियों के प्रति अपने स्नेह के लिए आज भी आम लोगों की स्मृति में ज़िंदा हैं.

(फोटो: travelwayoflive/Flickr CC BY SA 2.0/पीटीआई)

यह धर्मांधता को पहचानने का वक़्त है

तनिष्क का विज्ञापन इस बात का संकेत है कि सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता की भारतीय भावना जीवित है. यह समय अपने खोल में छिपने और सिर झुकाकर चलने की जगह भारत के असली मूल्यों को दिखाने वाले विज्ञापन और फिल्में बनाने और धर्मांधों को यह दिखाने का है कि नफ़रत का उनका प्रोपगेंडा कामयाब नहीं होगा.

(फोटो साभार: ट्विटर/@beastoftraal/Tanishq)

टाटा का नया भारत

तनिष्क के आभूषण उस विज्ञापन के बावजूद बिकते रहेंगे. टाटा को इसका अंदाज़ा है कि उनके ख़रीददारों में बहुसंख्या उनकी है जो उनकी दुकानों पर हमला करने नहीं आएंगे, लेकिन इससे भी ज़्यादा उन्हें ये मालूम है कि उनके ग्राहकों का मौन समर्थन हुल्लड़बाज़ों को है. उनके दिल-दिमाग का लफंगीकरण हो चुका है.

Madan Lokur.00_11_13_15.Still001

तनिष्क़ का विज्ञापन और लव-जिहाद का झूठ

वीडियो: अंतर धार्मिक विवाह पर आधारित एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क़ ने इसे वापस ले लिया है. इस मुद्दे पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

तनिष्क ​के विज्ञापन का वीडियोग्रैब.

सोशल मीडिया पर विवाद के बाद तनिष्क़ ने अंतर धार्मिक विवाह आधारित आभूषण का विज्ञापन हटाया

तनिष्क़ के एकत्वम श्रेणी के ज्वेलरी के विज्ञापन में दिखाया गया था कि एक मुस्लिम परिवार अपनी हिंदू बहू के लिए पारंपरिक हिंदू गोदभराई की रस्म की तैयारियां कर रहा है. विज्ञापन आने के बाद ट्विटर पर कुछ लोग इसे लव जिहाद बताते हुए #BoycottTanishq ट्रेंड कराने लगे, जिसके बाद तनिष्क़ ने इस विज्ञापन का हटा लिया है.

thumbnail

द वायर बुलेटिन: उत्तर प्रदेश में होलिका दहन की रात मुस्लिम बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या

पिछले छह साल में रोजगार की तलाश करने वाली ग्रामीण महिलाओं की संख्या में आई 2.8 करोड़ की गिरावट समेत आज की बड़ी ख़बरें. दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट.

Radha_celebrating_Holi wikimedia commons

आज रंग है ऐ मां रंग है, मेरे महबूब के घर रंग है री…

सूफ़िया-ए-किराम हों या पीर-फ़क़ीर, दरवेश हों या साधू-संत सब अपने-अपने पीर-ओ-मुर्शिद और ख़ुदा से रिश्ता क़ायम करने के लिए इश्क़ पर ज़ोर देते हैं. इश्क़ के अनेक रंगों में एक रंग होली का है.

Narendra Modi Reuters

सब कुछ बदलने का वादा करके आए मोदी ने भ्रष्ट आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया

आज जब दुनिया में नाना प्रकार के खोट उजागर होने के बाद भूमंडलीकरण की ख़राब ​नीतियों पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हमारे यहां उन्हीं को गले लगाए रखकर सौ-सौ जूते खाने और तमाशा देखने पर ज़ोर है.

हिन्दू एकता मंच द्वारा कठुआ में कथित बलात्कार आरोपी के समर्थन में रैली (फोटो: ट्विटर/@nazir_masoodi)

क्या तिरंगा यात्राएं शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनती जा रही हैं?

देश के झंडे को भी क्यों सांप्रदायिक आधार पर बांटा जा रहा है? क्या हम लड़ते-लड़ते इतने दूर आ गए हैं कि देश के झंडे का भी बंटवारा कर देंगे?

Gandhi

गांधी का वो उपवास, जो उनके लिए आख़िरी साबित हुआ

वीडियो: आज़ादी के बाद भारत में ख़ूनखराबे का सिलसिला जारी था. इसके विरोध में गांधीजी ने अपना आख़िरी उपवास 13 जनवरी 1948 को शुरू किया था. इस घटना पर इतिहासकार दिलीप सिमीओन से चर्चा कर रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद.

Mahatma Gandhi PTI

आज के दिन शुरू हुआ वो उपवास जो गांधीजी के लिए आख़िरी साबित हुआ

आज़ादी के बाद दिल्ली में ख़ूनखराबे का सिलसिला जारी था. इसके विरोध में गांधीजी ने 12 जनवरी 1948 को घोषणा की कि वह अगले दिन यानी 13 जनवरी से उपवास शुरू करेंगे.

नेशनल कॉन्फेंस अध्यक्ष फ़ारूक अब्दुल्ला. फोटो: पीटीआई

केंद्र सांप्रदायिकता रोकने में नाकाम, देश का धर्मनिरपेक्ष तानाबाना तबाह हो जाएगा: अब्दुल्ला

भाजपा बोली- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग, इसे नहीं मानने वालों को पाकिस्तान में शरण लेनी होगी.

KP-Ramanunni

मलयाली लेखक को धमकी: 6 महीने में इस्लाम क़ुबूलो वरना सज़ा के लिए तैयार रहो

केरल साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित मलयाली लेखक केपी रमनउन्नी को मिली एक अनाम चिट्ठी में उनके लेखों से लोगों के आस्था के रास्ते से भटकने का आरोप लगाते हुए ऐसा न करने की चेतावनी दी गई है.