Communal Riot

वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा (फोटो साभारः ट्विटर)

दिल्ली: वकील महमूद प्राचा के दफ़्तर में छापेमारी के बाद कोर्ट ने सर्च वारंट पर रोक लगाई

महमूद प्राचा दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामलों में वकील हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने मंगलवार से पहले दिसंबर 2020 में भी प्राचा के दफ़्तर पर छापेमारी की थी. इस दौरान सर्च टीम ने उनके कंप्यूटर और विभिन्न दस्तावेज़ों को जब्त करने पर जोर दिया, जिनमें केस की विस्तृत जानकारी थी.

देवांगना कलीता. (फोटो: अखिल कुमार)

दिल्ली दंगा: अदालत ने यूएपीए मामले में कलीता की ज़मानत याचिका ख़ारिज की

पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना कलीता को दिल्ली दंगा संबंधी मामले में गिरफ़्तार किया गया था. दंगों से संबंधित तीन मामलों में उन्हें ज़मानत मिल चुकी है. कलीता के ख़िलाफ़ गै़रक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज है.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: अदालत ने दो आरोपियों को ज़मानत दी, कहा- पुलिसकर्मियों की गवाही पर संदेह

आरोपियों को ज़मानत देते हुए अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मियों द्वारा की गई शिनाख़्त का बमुश्किल कोई अर्थ है, क्योंकि भले ही वे घटना के वक़्त क्षेत्र में तैनात थे, पर उन्होंने आरोपियों का नाम लेने के लिए अप्रैल तक का इंतज़ार किया, जबकि उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उन्होंने आरोपियों को 25 फरवरी, 2020 को दंगे में कथित रूप से शामिल देखा था.

वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा (फोटो साभारः ट्विटर)

दिल्ली दंगा: आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा डालने का केस दर्ज

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने दिल्ली दंगों के आरोपियों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा के ऑफिस पर छापेमारी की थी. सर्च टीम ने प्राचा के कंप्यूटर और विभिन्न दस्तावेज़ों को ज़ब्त किए थे, जिनमें केस की विस्तृत जानकारी है.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगाः राष्ट्रगान गाने पर मजबूर किए गए युवक की मौत की जांच की मांग को लेकर याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगे के दौरान 23 साल के फ़ैज़ान की मौत के मामले में अदालत की निगरानी में जांच की मांग से संबंधित याचिका पर दिल्ली सरकार और क्राइम ब्रांच को नोटिस जारी किया है. दंगों के दौरान एक वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी ज़मीन पर फ़ैज़ान समेत कुछ घायल युवकों से राष्ट्रगान गाने को कहते दिख रहे थे. फ़ैज़ान की अस्पताल में मौत हो गई थी.

शरजील इमाम. (फोटो साभार: फेसबुक)

शरजील इमाम की रिहाई भारत में मुसलमानों के यक़ीन के लिए ज़रूरी है

आरोप है कि शरजील इमाम ने उत्तर-पूर्व को भारत से काट देने का उकसावा देते हुए भाषण दिए थे. उन्होंने इतना ही किया था कि सरकार पर दबाव डालने के लिए रास्ता जाम करने की बात कही थी. किसान अभी चारों तरफ़ से दिल्ली का रास्ता बंद करने की बात कह रहे हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़े और वह अपना अड़ियलपन छोड़े. क्या इसे आतंकवादी कार्रवाई कहा जाएगा?

वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा (फोटो साभारः ट्विटर)

दिल्ली दंगा: आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील के ऑफिस में छापेमारी, कंप्यूटर और दस्तावेज़ ज़ब्त

वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा दिल्ली दंगों के आरोपियों की अदालत में पैरवी कर रहे हैं. प्राचा के सहयोगी वकीलों का आरोप है कि पुलिस की यह छापेमारी सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज़ नष्ट करने का प्रयास था.

इशरत जहां. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिल्ली दंगा: चोट और कोविड-19 के आधार पर दाख़िल इशरत जहां की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज

कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में इस साल फरवरी में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में 26 फरवरी को गिरफ़्तार किया गया था. उनके ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

मद्रास हाईकोर्ट ने सीएए प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ केस ख़ारिज किया, कहा- विरोध शांतिपूर्ण था

मद्रास हाईकोर्ट की पीठ सीएए और एनआरसी को लेकर प्रदर्शन कर दो व्यक्तियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने इसे लेकर अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को ख़ारिज करने की मांग की थी.

शरजील इमाम और उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/द वायर)

दिल्ली दंगा: उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के ख़िलाफ़ यूएपीए मामले में चार्जशीट दाख़िल

पुलिस ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर ख़ालिद को 14 सितंबर और छात्र शरजील इमाम को 25 अगस्त को यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया था.

delhi-riots-minors-pti

यूपी: सीएए विरोधी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं रहे मुस्लिम नाबालिग को 11 महीने बाद मिली रिहाई

ठाकुरगंज के रहने वाले 16 साल के हुसैन को सीएए विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में 25 दिसंबर 2019 को उनके दोस्त के घर से गिरफ़्तार किया गया था. हुसैन का कहना है कि उन्होंने सीएए विरोधी किसी भी प्रदर्शन में कभी हिस्सा नहीं लिया था.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: गवाहों के नाम सार्वजनिक करने पर कोर्ट ने जांच अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया

दिल्ली पुलिस ने दंगा मामले में गवाही देने वाले 15 सार्वजनिक गवाहों ने जान को ख़तरा बताया था, जिसके चलते छद्मनामों का इस्तेमाल कर उनकी पहचान गुप्त रखी गई थी. पिछले दिनों अदालत में दाख़िल पुलिस की 17,000 पन्नों की चार्जशीट में इन सभी के नाम-पते सहित पूरी पहचान ज़ाहिर कर दी गई थी.

delhi riot

दिल्ली दंगों की स्वतंत्र जांच के लिए पूर्व जजों, वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की समिति बनी

केंद्र एवं राज्य सरकारों में काम कर चुके पूर्व लोक सेवकों के एक समूह ‘कॉन्स्ट्यूटिशनल कंडक्ट ग्रुप’ द्वारा गठित इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन लोकुर हैं. यह दिल्ली दंगों के संबंध में सरकार, पुलिस और मीडिया की भी भूमिका की जांच करेगी.

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा. (फाइल फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: दिल्ली सरकार ने सात वीडियो सौंपे, दंगाइयों के साथ पथराव करती दिखी पुलिस

दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने पांच अक्टूबर को ऐसे सात वीडियो क्लिप दिल्ली पुलिस को सौंपे हैं, जिसमें से कुछ में दिल्ली में हुए दंगों के दौरान दो पुलिसकर्मी कथित दंगाइयों के साथ मिलकर ईंट और अंडे फेंक रहे हैं.

दिल्ली पुलिस कर्मचारियों के साथ पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: पुलिस ने जिन ‘सीक्रेट’ गवाहों की पहचान छिपाने की बात कही, चार्जशीट में दिए उनके नाम

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली दंगा मामले में गवाही देने वाले 15 सार्वजनिक गवाहों ने जान को ख़तरा बताया है, जिसके चलते छद्मनामों का इस्तेमाल कर उनकी पहचान गुप्त रखी गई है. पिछले दिनों दायर पुलिस की 17,000 पन्नों की चार्जशीट में इन सभी के नाम-पते सहित पूरी पहचान ज़ाहिर कर दी गई है.