Communalism

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar speaks during the International Conference on Crop Residue Management in Patna, Monday, Oct. 14, 2019. (PTI Photo)(PTI10_14_2019_000064B)

सांप्रदायिक दंगों में बिहार अव्वल क्यों है?

एक साल की देरी से जारी किए गए एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 में देश में दंगों की कुल 58,729 वारदातें दर्ज की गईं. इनमें से 11,698 दंगे बिहार में हुए. वर्ष 2017 में ही देश में कुल 723 सांप्रदायिक/धार्मिक दंगे हुए. इनमें से अकेले बिहार में 163 वारदातें हुईं, जो किसी भी सूबे से ज़्यादा है.

झारखंड हाईकोर्ट. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

क़ुरान बांटने के आदेश पर चर्चा में आई छात्रा झारखंड पुलिस के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट पहुंची

रांची की एक छात्रा ऋचा भारती को सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं काे ठेस पहुंचाने वाले पोस्ट करने के आरोप में बीते 12 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था. स्थानीय अदालत ने उन्हें पांच क़ुरान बांटने की शर्त पर ज़मानत दी थी. बाद में अदालत ने क़ुरान बांटने का आदेश वापस ले लिया था.

हरियाणा के कैथल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (फोटो: ट्विटर)

2024 से पहले सभी घुसपैठियों को चुन-चुन के देश से बाहर निकाल देंगे: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के कैथल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि सत्तर वर्षों से घुसपैठियों ने देश की सुरक्षा को चुनौती दी है. एनआरसी के जरिए भाजपा सरकार सभी घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है.

New Delhi: Home Minister Amit Shah looks on during the 'Hindi Divas Samaroh' in New Delhi, Saturday, Sept. 14, 2019. Hindi Divas is observed to mark the decision of the Constituent Assembly to extend official language status to Hindi on this day in 1949. Hindi Divas was first observed in 1953. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI9_14_2019_000073B)

अमित शाह की एनआरसी योजना का मक़सद सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है

भाजपा मतदाताओं का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने के लिए बेताब है. ऐसे में एनआरसी का इस्तेमाल भारत का ध्रुवीकरण करने के लिए इस तरह से किया जा सकता है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

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गांधी के देश में अमित शाह की सांप्रदायिकता

वीडियो: हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता की एक रैली में कहा कि हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन को देश छोड़कर नहीं जाना होगा. उनके इस बयान पर चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

असहिष्णुता और हिंसा की घटनाओं से राजनीतिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में असिहष्णुता, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, कुछ समूहों द्वारा पैदा की गई घृणा तथा भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने से जुड़ी हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

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हिंदी साहित्य ने विभाजन को कैसे देखा

आज़ादी के 72 साल: जहां हिंदी लेखकों ने विभाजन पर बार-बार लिखा, हिंदी कवि इस पर तटस्थ बने रहे. कईयों ने आज़ादी मिलने के जश्न की कवितायें तो लिखीं, लेकिन देश बंटने के पीड़ादायी अनुभव पर उनकी चुप्पी बनी रही.

Pakistani Rangers and Indian Border Security Force personnel (obscured) lower the flags of the two countries during a daily flag lowering ceremony at the India-Pakistan joint border at Wagah, December 14, 2006. REUTERS/Mian Khursheed/Files

आज़ादी या बंटवारा?

आज़ादी के 72 साल: विभाजन का भय धीरे-धीरे आज़ादी के विचार को विस्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ये हालात अपने भीतर काफी बड़े ख़तरे की आहट थामे हुए हैं.

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हिंदुत्व भारत में धर्म और इस्लाम के एक-दूसरे पर पड़े प्रभाव की अनदेखी करता है

ऐतिहासिक नज़रिये से देखें, तो इस्लाम और हिंदू धर्म का आमना-सामना दोनों के लिए फायदेमंद ही रहा है.

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झारखंडः सोशल मीडिया पोस्ट के लिए गिरफ़्तार छात्रा को पांच क़ुरान दान करने की शर्त पर ज़मानत

रांची की एक 19 वर्षीय छात्रा ऋचा भारती को सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं काे ठेस पहुंचाने वाले पोस्ट करने के आरोप में 12 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था. स्थानीय अदालत ने उन्हें 5 क़ुरान दान करने की शर्त पर ज़मानत दी है. छात्रा का कहना है कि वे ऐसा नहीं करना चाहतीं.

(फोटो साभार: IndiaRail Info)

यूपी: जय श्रीराम न बोलने पर मदरसे के छात्रों से मारपीट का आरोप, एक गिरफ़्तार

घटना उत्तर प्रदेश के उन्नाव की है. आरोप है कि क्रिकेट खेलने पहुंचे एक मदरसे के छात्रों को भला-बुरा कहते हुए कुछ युवकों ने कथित तौर पर ‘जय श्रीराम’ बोलने को कहा. मना करने पर उन्हें बैट से पीटा गया और भागने पर पथराव भी किया गया.

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शिवकुटी लाल वर्मा: फैक्ट्रियों, मिलों की इमारतों के बीच किसी झोपड़पट्टी की ख़ाली ज़मीन हूं मैं

शिवकुटी लाल वर्मा ने अपनी कविता में वह सब महसूस किया, जिसे देश की दलित, पीड़ित व शोषित जनता आज तक महसूस करती आई है. उन्होंने न केवल इसे महसूस किया बल्कि इसे लेकर लगातार सवाल भी किए.

(फोटो: गूगल मैप)

उत्तर प्रदेशः कानपुर में ‘जय श्री राम’ नहीं कहने पर 16 साल के मुस्लिम बच्चे को पीटा

यह घटना कानपुर के बर्रा इलाके की है. मुस्लिम किशोर का आरोप है कि 28 जून को मस्जिद से नमाज़ पढ़ कर लौटने के दौरान तीन से चार बाइक सवारों ने उसके टोपी पहने होने का विरोध करते हुए मारपीट की. इसके साथ ही दोबारा टोपी पहनकर इलाके में नहीं आने की भी धमकी भी दी गई.

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प्रधानमंत्री जी! ‘धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा’ आप पर भी चरितार्थ होता है

मोदी सरकार और उनके समर्थक लगातार मीठा-मीठा गप और कड़वा-कड़वा थू की कहावत को चरितार्थ करते नज़र आ रहे हैं. विचार या निष्कर्ष उनके अनुकूल हुए तो उसके सौ खोट भी सिर माथे और प्रतिकूल हुए तो ईमानदार विश्लेषण भी टके सेर.

(फोटो: पीटीआई)

महाराष्ट्रः ठाणे में टैक्सी ड्राइवर के साथ मारपीट, जबरन ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाए गए

मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह घटना महाराष्ट्र के ठाणे में 24 जून को उस समय हुई, जब मुस्लिम टैक्सी ड्राइवर सवारी को लेकर लौट रहा था और बीच रास्ते में उसकी टैक्सी खराब हो गई.

Mohammad Shahrukh

‘उन्होंने मुझसे जबरदस्ती जय श्री राम बुलवाया, ये बात पुलिस ने एफआईआर से गायब कर दी’

बीते हफ्ते पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर ‘जय श्री राम’ न कहने पर ट्रेन से फेंके गए मदरसा शिक्षक मोहम्मद शाहरुख का दावा है कि उनके द्वारा हमला करने वाले लोगों और उनके संगठन के बारे में पुलिस को बताने के बावजूद किसी आरोपी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

Canning West Bengal

पश्चिम बंगालः कथित तौर पर जय श्री राम नहीं बोलने पर मदरसा टीचर को चलती ट्रेन से फेंका

पश्चिम बंगाल के एक मदरसा टीचर का कहना है कि यह घटना 20 जून को उस समय हुई, जब वह ट्रेन से दक्षिण 24 परगना जिले से हुगली जा रहे थे. आरोप है कि ट्रेन में कुछ लोग जय श्री राम के नारे लगा रहे थे, उन्होंने उन्हें भी नारे लगाने को कहा, इनकार करने पर मारपीट की गई और ट्रेन से धक्का दे दिया गया.

Supporters of the Vishva Hindu Parishad (VHP), a Hindu nationalist organisation, arrive to attend "Dharma Sabha" or a religious congregation organised by the VHP in New Delhi, India, December 9, 2018. REUTERS/Adnan Abidi

राजनीतिक समाज का नया हथियार बनता जय श्री राम

क़ानून का राज होने के बाद भी भीड़ का राज क़ायम है. इस भीड़ को धर्म, जाति और परंपरा के नाम पर छूट मिली है. किसी औरत को डायन बताकर मार देती है, जाति तोड़कर शादी करने वालों की हत्या कर देती है. इसी कड़ी में अब यह शामिल हो गया है कि अपराध करने वाला या झगड़े की ज़द में आ जाने वाले मुसलमान को जय श्री राम के नाम पर मार दिया जाएगा.

Patna: Bhim Army chief Chandrashekhar Azad addresses a public rally at Gandhi Maidan in Patna, Wednesday, November 21, 2018. (PTI Photo) (PTI11_21_2018_000059B)

उत्तर प्रदेश: भीम आर्मी प्रमुख के पास रायफल मिली, पुलिस ने हिरासत में लिया

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद ज़िले के एक गांव में किसी धार्मिक ढांचे को गिराए जाने की जानकारी मिलने के बाद चंद्रशेखर अपने साथियों के साथ वहां पहुंचे थे.

Kolkata: West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee addresses media after comes out from Kolkata Police Commissioner Rajeev Kumar's residence, in Kolkata, Sunday late evening, Feb 03, 2019. (PTI Photo/Swapan Mahapatra) (PTI2_3_2019_000234B)

क्या ममता बनर्जी बंगाल को अपना खिलौना मान बैठी हैं?

‘बंगाल खिलौना नहीं है,’ यह कहा था ममता बनर्जी ने कुछ रोज़ पहले, लेकिन अब उनके आचरण से यही लगता है कि वे बंगाल को अपना खिलौना ही मान बैठी हैं, वरना वे राज्य में डॉक्टरों की हड़ताल चार दिन तक न खिंचने देतीं.

BJP President Amit Shah and Indian Prime Minister Narendra Modi react after the election results in New Delhi, India, May 23, 2019. REUTERS/Adnan Abidi.

क्या 2019 की नरेंद्र मोदी सरकार 2014 की सरकार से अलग होगी?

क्या नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार जल्द ही उन्हें हासिल जनादेश की ग़लत व्याख्या करने और उसको अपनी सारी कारस्तानियों पर जनता की मुहर मान लेने की ग़लती करने लगेगी?

लोकसभा चुनाव रुझानों में भाजपा गठबंधन का बढ़त मिलने के बाद नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

क्या भाजपा की जीत को ‘भारत की जीत’ कहा जा सकता है?

नरेंद्र मोदी की जीत का भारत के लिए क्या अर्थ निकलता है? एक हद तक यह उन्हें और भाजपा को दावा करने का मौका देता है कि पिछले पांच सालों में उन्होंने जो कुछ भी किया है, उसके प्रति जनता ने अपना विश्वास जताया है. पर क्या यह सच है?

Hum Bhi Bharat Bahraich

हम भी भारत: बहराइच लोकसभा क्षेत्र में कुपोषण और बेरोज़गारी पर भारी सांप्रदायिकता

हम भी भारत की इस कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी बहराइच लोकसभा क्षेत्र में बच्चों के कुपोषण, ग़रीबी और बेरोज़गारी के मुद्दों पर ग़ैर सरकारी संगठन देहात एनजीओ के कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार सलीम सिद्दीक़ी, शिक्षिका डॉ. अनुपमा झा और वरिष्ठ पत्रकार अज़ीम मिर्ज़ा से चर्चा कर रही हैं.

किताब का कवर.

भारतीय लोकतंत्र ने बहुत-सारी अलोकतांत्रिक शक्तियों को भी जन्म दिया है

पुस्तक समीक्षा: अपनी किताब ‘बदलता गांव बदलता देहात: नयी सामाजिकता का उदय’ में सत्येंद्र कुमार ग्रामीण भारतीय जीवन को देखने की बनी-बनाई समझ और उससे पैदा हुई बहसों से परे जाकर उसे उसके रोज़मर्रा के जीवन में समझने की कोशिश करते हैं.

हनुमानगढ़ी अयोध्या (फोटो साभार: फेसबुक/@HanumanGarhi.Ayodhya)

क्यों राम जन्मभूमि की रट लगाने वाली जमातें अयोध्या की हनुमानगढ़ी का नाम नहीं लेतीं?

अयोध्या की ऐतिहासिक हनुमानगढ़ी ने आज़ादी के पहले से ही अपनी व्यवस्था में लोकतंत्र और चुनाव का ऐसा अनूठा और देश का संभवतः पहला प्रयोग कर रखा है, जिसका ज़िक्र तक करना सांप्रदायिक घृणा की राजनीति करने वालों को रास नहीं आता.

Jabalpur: A shopkeeper poses with political parties' campaign materials ahead of Lok Sabha elections 2019, in Jabalpur, Wednesday, March 13, 2019. (PTI Photo) (PTI3_13_2019_000028B)

लोकसभा चुनाव का पलड़ा अभी किसी एक तरफ नहीं झुका है

राष्ट्रवाद और सैन्य बलों को चुनाव प्रचार में घसीटकर उनका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश मतदाताओं को आकर्षित करने की गारंटी नहीं है और इसका उलटा असर भी हो सकता है. चुनाव की तैयारी कर रहीं पार्टियों की रणनीति देखते हुए यह साफ़ हो रहा है कि कोई भी अपनी निर्णायक जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है.

Sadak Se Sansad Alwar

सड़क से संसद: अलवर- कलाकंद की मिठास से लिंचिंग की कड़वाहट तक

सड़क से संसद की इस कड़ी में हम अलवर लोकसभा क्षेत्र में पहुंचे हैं. कलाकंद के लिए मशहूर अलवर हालिया सालों में यहां गोरक्षा के नाम पर हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के लिए सुर्ख़ियों में रहा.

India's Prime Minister Narendra Modi visits the National Cemetery in Seoul, South Korea, February 22, 2019. REUTERS/Kim Hong-Ji

राष्ट्रवाद की आड़ लेकर सवालों को दबाया जा रहा है

मीडिया का एक बड़ा तबका, जिसका धर्म सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछना होना चाहिए, घुटने टेक चुका है और देश के कुछ सबसे शक्तिशाली लोगों ने चुप्पी ओढ़ ली है, लेकिन आम लोग ऐसा नहीं करने वाले हैं. उनकी आवाज़ ऊंचे तख़्तों पर बैठे लोगों को सुनाई नहीं देती, लेकिन जब वक़्त आता है वे अपना फ़ैसला सुनाते हैं.

Sadak Se Sansad Mewat

सड़क से संसद: मेवात क्षेत्र के ग़मज़दा मेव मुसलमान

सड़क से संसद की इस कड़ी में कहानी नूह गांव के मेव मुसलमानों की. नीति आयोग द्वारा जारी देश के सबसे पिछड़े 101 ज़िलों की सूची में यह हिस्सा भी आता है. यहां के रहवासी ग़रीबी, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ सांप्रदायिकता से भी लड़ रहे हैं. वर्तमान सत्ता से नाराज़ ये लोग उम्मीद करते हैं कि इस बार क्षेत्र से आम चुनाव में खड़े हो रहे उम्मीदवार उनके मुद्दों को गंभीरता से उठाएंगे.

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जब नेहरू ने कहा- वही संस्कृति के बारे में सबसे ज़्यादा बात कर रहे हैं, जिनमें इसका क़तरा तक नहीं है

पुस्तक अंश: 1950 में नेहरू ने लिखा, ‘यूपी कांग्रेस कमेटी की आवाज़ उस कांग्रेस की आवाज़ नहीं है, जिसे मैं जानता हूं, बल्कि यह उस तरह की आवाज़ है जिसका मैं पूरी ज़िंदगी विरोध करता रहा हूं. कुछ कांग्रेसी नेता लगातार ऐसे आपत्तिजनक भाषण दे रहे हैं, जैसे हिंदू महासभा के लोग देते हैं.’

New Delhi: Union Minister for Road Transport, Highways and Shipping Nitin Gadkari speaks during the workshop on industries issues on Road Safety in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI4_26_2018_000052B)

मेरे क्षेत्र में जातिवाद की बात की, तो पिटाई कर दूंगाः नितिन गडकरी

पुणे के पिंपड़ी चिंचवाड़ में एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक समानता के आधार पर समाज को एक साथ लाने की ज़रूरत है और इसमें जातिवाद और सांप्रदायिकता की जगह नहीं है.

केंद्रीय रोज़गार और कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े. (फोटो साभार/फेसबुक)

अगर हिंदू लड़की को कोई मुस्लिम छूता है तो उसका हाथ काट देना चाहिए: केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े

कर्नाटक के कांग्रेस नेता दिनेश राव ने उनकी इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए केंद्रीय मंत्री या बतौर सांसद उनकी उपलब्धियों को लेकर सवाल पूछ लिया. इस पर हेगड़े ने उनकी शादी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक मुस्लिम महिला के पीछे चलते हैं.

एक नाटक के दौरान नसीरुद्दीन शाह (फोटो साभार: फेसबुक/Motley Theater)

भारत को नसीरुद्दीन शाह जैसे और लोगों की ज़रूरत है

जहां बॉलीवुड के अधिकतर अभिनेता सच से मुंह मोड़ने और चुप्पी ओढ़ने के लिए जाने जाते हैं, वहीं मुखरता नसीरुद्दीन शाह की पहचान रही है. उनका व्यक्तित्व उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की उस भीड़ से अलग करता है, जिसके लिए शक्तिशाली की शरण में जाना, गिड़गिड़ाते हुए माफ़ी मांगना और कभी भी मन की बात न कहना एक रिवाज़-सा बन चुका है.

Naseruddin Shah Photo Hindi Kavita

नसीरुद्दीन शाह के बयान पर विवाद- न तड़पने की इजाज़त है, न फ़रियाद की

देश में निचले सामाजिक स्तर तक भय व अविश्वास का ऐसा माहौल बना दिया गया है कि प्रतिरोध की सारी आवाजें घुटकर रह गईं और अब ऊपरी स्तर पर कोई आमिर ख़ान अपना डर या नसीरुद्दीन शाह ग़ुस्सा जताने लगता है, तो उनका मुंह नोंचने की सिरफिरी कोशिशें शुरू कर दी जाती हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अयोध्या ज़मीन विवाद मामले की जल्द सुनवाई के लिए दायर याचिका ख़ारिज

बीते 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए जनवरी में तारीख तय की जाएगी और मामले को उचित पीठ के पास भेजा जाएगा.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, जनवरी में तय होगी अगली तारीख़

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में दायर अपीलों को जनवरी, 2019 में एक उचित पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.

Ayodhya Babri Masjid PTI

अयोध्या संबंधी मामले को पांच जजों की पीठ के पास भेजने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने ‘मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है या नहीं’ के बारे में शीर्ष अदालत के 1994 के फैसले को फिर से विचार के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया.

फोटो: पीटीआई

क्या गाय के नाम पर मुस्लिमों के साथ हिंसा मोदी राज की देन है?

गोरक्षा के नाम पर देश भर में मुस्लिमों के साथ हिंसा की घटनाएं नई नहीं हैं. हाल के समय में बढ़ी लिंचिंग की घटनाओं और उनकी रिपोर्टिंग के पीछे ज़रूरी तौर पर भारतीय समाज में आया कोई बुनियादी बदलाव नहीं, बल्कि कुछ हद तक इसके लिए इंटरनेट के विस्तार की भूमिका है.