Corona Lockdown

Prayagraj: A railway staff member distributes food packets among migrants sitting in Shramik Special train to reach their native places, during ongoing COVID-19 lockdown, at Prayagraj Railway Station, Sunday, May 31, 2020. (PTI Photo)(PTI31-05-2020_000074B)

श्रमिक ट्रेनों में हुई मौतों का डेटा तैयार कर रहा है रेलवे, सौ के पार जा सकता है आंकड़ा

लॉकडाउन के दौरान मज़दूरों को उनके घर ले जा रहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में हुई मुसाफ़िरों की मौतों की आलोचना के बाद रेलवे ने अधिकतर मामलों में मृतकों की पुरानी बीमारियों और उनकी शारीरिक अवस्था को ज़िम्मेदार ठहराया था.

Gurugram: Migrants wait to board a bus for Bihar at Tau Devi Lal Stadium, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Gurugram, Tuesday, June 2, 2020. (PTI Photo)(PTI02-06-2020_000216B)

कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने ईमानदार कोशिश नहीं की

कोरोना से बिगड़ती स्थितियों को संभालने में केंद्र सरकार की सारी नीतियां फेल हो चुकी हैं. सरकार की इस विफलता का ख़ामियाज़ा कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

भोपाल में कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों में 75 प्रतिशत गैस पीड़ित: रिपोर्ट

भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम रहे चार एनजीओ ने शहर में कोविड-19 से हुई मौतों पर जारी रिपोर्ट में बताया है कि 11 जून तक भोपाल में कोरोना से 60 मौतें हुई थीं, जिनमें से 48 गैस पीड़ित थे.

(फोटो: द वायर)

लॉकडाउन के दौरान 55 पत्रकारों को मिली धमकियां, मुक़दमे और गिरफ़्तारी: रिपोर्ट

कोविड-19 महामारी के दौरान मीडिया को लेकर जारी राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार 25 मार्च से 31 मई, 2020 के बीच विभिन्न पत्रकारों के ख़िलाफ़ 22 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि कम से कम 10 को गिरफ़्तार किया गया. इस अवधि में मीडियाकर्मियों पर सर्वाधिक 11 हमले उत्तर प्रदेश में हुए.

People are seen inside a temporary quarantine centre, during an extended nationwide lockdown to slow the spread of the coronavirus disease (COVID-19), in Kolkata, India, April 15, 2020. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच क्वारंटीन सेंटर क्यों बंद कर रही है बिहार सरकार?

बीते सप्ताह बिहार सरकार ने 15 जून के बाद से सभी प्रखंड स्तरीय क्वारंटीन सेंटर्स को बंद करने का आदेश दिया है. दूसरे राज्यों से आ रहे कामगारों में कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लिए गए सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि इन सेंटर्स की फंड संबंधी गड़बड़ियों के चलते यह निर्णय लिया गया है.

ओडिशा जनसंवाद रैली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

कोरोना से लड़ाई में हमसे गलती हुई होगी लेकिन विपक्ष ने क्या किया: अमित शाह

ओडिशा के लिए एक डिजिटल रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र, एक जन और एक मन’ के साथ कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाया जिसकी वजह से आज भारत, दुनिया में अच्छी स्थिति में है.

Dadri: Migrant workers wait in a queue while being lodged at a camp by the Uttar Pradesh government, during ongoing COVID-19 lockdown, at Dadri in Gautam Buddha Nagar district, Wednesday, May 20, 2020. (PTI Photo/Atul Yadav)  (PTI20-05-2020_000214B)

क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने कोरोना से जंग का मोर्चा छोड़ दिया है?

प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इस कठिन समय में उनकी सरकार के फ़ैसलों से गांवों में रोजगार, स्वरोजगार और लघु उद्योग से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुली हैं, लेकिन वे यह नहीं बता रहे कि जिसे ज़िंदा रहने के लिए तत्काल मदद की ज़रूरत हो, उसे मुंगेरीलाल जैसे भविष्य के हसीन सपने कैसे दिख सकते हैं?

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उत्तर प्रदेश: बांदा ज़िले में गुजरात से लौटे प्रवासी मज़दूर की मौत, कोरोना की आशंका

जिला प्रशासन ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान गुजरात के वापी शहर से अपने गांव लौटे इस श्रमिक को आने के बाद खांसी, ज़ुकाम और बुखार हुआ था. मंगलवार को सांस लेने में परेशानी होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई.

दिल्ली स्थित एम्स. (फोटो साभार: फेसबुक)

कोविड-19: कामकाज के हालात को लेकर दिल्ली एम्स की नर्स यूनियन का प्रदर्शन जारी

दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक को लिखे पत्र में नर्स यूनियन ने अस्पताल के कोविड-19 क्षेत्रों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के साथ चार घंटे की समान पाली, कोविड-19 और ग़ैर कोविड-19 क्षेत्रों के बीच समान रोटेशन नीति लागू करने समेत कई मांगें रखी हैं.

Jabalpur: Railway official provides drinking water from a distance to migrants travelling by a train to their native places, during the ongoing nationwide COVID-19 lockdown, at a railway station in Jabalpur, Wednesday, May 27, 2020. (PTI Photo) (PTI27-05-2020 000149B)(PTI27-05-2020 000198B)

‘मुंबई से गांव आने के लिए निकले, लेकिन उनका सफ़र रास्ते में ही ख़त्म हो गया’

बीते 26 मई को झांसी से गोरखपुर जा रही एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार आज़मगढ़ के 45 वर्षीय प्रवासी श्रमिक रामभवन मुंबई से अपने परिवार सहित घर लौट रहे थे, जब रास्ते में अचानक उनकी तबियत ख़राब होने लगी. परिजनों का कहना है कि समय पर उचित मेडिकल सहायता न मिलने के कारण उन्होंने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर दम तोड़ दिया.

Nagpur: Labourers wearing face masks look through the windows of a building where they are sheltered, during ongoing COVID-19 lockdown in Nagpur, Thursday, April 23, 2020. (PTI Photo) (PTI23-04-2020_000182B)

क्या बिहार में कोरोना से ज़्यादा मौतें क्वारंटीन सेंटर्स में हुई हैं?

बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार शाम तक राज्य में कोरोना संक्रमण से 25 मौतें हुई हैं. सरकार द्वारा क्वारंटीन सेंटर्स में हुई मौतों के बारे में कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब तक 10 ज़िलों के क्वारंटीन सेंटर्स में 20 से अधिक जानें जा चुकी हैं.

A team of doctors wearing protective suits check slum dwellers during a house-to-house health survey at Vallabh Nagar during the nationwide lockdown imposed in wake of the coronavirus pandemic in Bhopal Monday April 20 2020. (Photo | PTI)

‘भोपाल में कोरोना से हुई 36 मौतों में से 32 गैस पीड़ित हैं’

गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले भोपाल ग्रुप ऑफ इंफॉर्मेशन एंड एक्शन और संभावना ट्रस्ट ने भोपाल में अब तक हुई कुल मौतों में से 36 की जानकारी निकाली है, जिसमें सामने आया है कि इनमें से बत्तीस गैस पीड़ित हैं. संगठनों का दावा है कि गैस जनित दुष्प्रभावों के चलते कोरोना का पीड़ितों पर गंभीर असर हो रहा है. इसके बावजूद सरकार इनके लिए आवश्यक क़दम उठाने में कोताही बरत रही है.

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फंसे श्रमिकों की सूचना न देने से सीआईसी नाराज़, श्रम मंत्रालय को डेटा अपडेट करने को कहा

आरटीआई आवेदन दायर कर देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे श्रमिकों की संख्या के बारे में जानकारी मांगी गई थी. केंद्रीय श्रम आयुक्त कार्यालय ने इस जानकारी का खुलासा करने से मना करते हुए कहा था कि उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अब तक कम से कम 80 लोगों की मौत: आरपीएफ

रेलवे सुरक्षा बल के आंकड़ों के मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में करीब 80 लोगों की मौत 9 मई से 27 मई के बीच हुई है. इनमें चार वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक के यात्री शामिल थे.

Prayagraj: A mother covers her childs head to beat the heat while waiting to board a bus to reach her native place after arriving via special train at Prayagraj Junction, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Prayagraj, Tuesday, May 26, 2020. (PTI Photo)(PTI26-05-2020 000043B)

स्पेशल ट्रेन चलने के बाद भी क्यों श्रमिकों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं?

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अपने घरों को लौट रहे प्रवासी मज़दूरों को न सिर्फ़ खाने-पीने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, बल्कि रेलवे द्वारा रूट बदलने के कारण कई दिनों की देरी से वे अपने गंतव्य तक पहुंच पा रहे हैं. इस दौरान भूख-प्यास और भीषण गर्मी के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोग दम तोड़ चुके हैं.