Crime against Girl Child

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मध्य प्रदेश: यौन शोषण के बाद चार साल की बच्ची की हत्या

मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का है. पुलिस ने बताया कि बच्ची का शव गांववालों को 29 मई को कुएं में मिला था. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि लापरवाही के आरोप में संबंधित थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है.

Jodhpur: Senior Congress leader and former chief minister Ashok Gehlot leaves after filing his nomination from Sardarpura constituency ahead of the state Assembly elections, in Jodhpur district, Monday, Nov. 19, 2018. (PTI Photo)(PTI11_19_2018_000161B)

महिलाओं-बच्चों के प्रति होने वाले अपराध की जानकारी देने से क्यों कतरा रही है राजस्थान सरकार

राजस्थान विधानसभा में भाजपा के तीन और कांग्रेस के एक विधायक ने महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों से जुड़े सवाल पूछे थे. गृह विभाग ने इन सवालों के जवाब देने में असमर्थता जता दी है.

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झारखंड: तीन साल की बच्ची से बलात्कार, गला काटा, प्लास्टिक बैग में मिला शव

मामला झारखंड के जमशेदपुर का है. 26 जुलाई को टाटानगर स्टेशन से बच्ची का अपहरण किया गया था. बच्ची के गायब होने के पांचवें दिन मंगलवार रात 9 बजे रामधीन बगान से उसकी सिर कटी नग्न लाश बरामद की गई. बच्ची का सिर अभी नहीं मिला है.

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ऐसी कोई जगह नहीं, जहां बच्चों का लैंगिक शोषण न होता हो

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अध्ययन ‘चाइल्ड एब्यूज़ इन इंडिया’ के मुताबिक भारत में 53.22 प्रतिशत बच्चों के साथ एक या एक से ज़्यादा तरह का यौन दुर्व्यवहार और उत्पीड़न हुआ है. ऐसे में कौन कह सकता है कि मेरे घर में बच्चों का लैंगिक शोषण नहीं हुआ?

छात्रा से कथित तौर पर यौन उत्पी​ड़न के आरोपी. (फोटो साभार: एएनआई)

चेन्नई में 11 साल की लड़की से सात महीने तक कथित तौर पर गैंगरेप, 18 लोग गिरफ़्तार

चेन्नई के एक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स की घटना. मामले की सुनवाई के लिए ले जाते समय आरोपियों को वकीलों ने पीटा. कॉम्प्लेक्स के सिक्योरिटी गार्ड के अलावा लिफ्ट आॅपरेटर और पानी सप्लाई करने वाले 22 लोग हैं आरोपी.

A girl in Kochi, in the south-western state of Kerala, protests against the rape in Kathua, near Jammu, northern India. Photograph: Sivaram V/Reuters

बच्चे यौन हिंसा नहीं बल्कि यौनिक युद्ध का सामना कर रहे हैं, वे न घर में सुरक्षित हैं और न बाहर

विकास के दावों के बीच भारत के अनुभव और ज़मीनी सच्चाई बता रही है कि समाज और सरकारें बच्चों का संरक्षण सुनिश्चित कर पाने में तो नाकाम हैं ही आगे भी इनके नाकाम रहने की आशंका है.