Custodial torture

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: हिरासत में पिता-पुत्र मौत मामले की जांच सीबीआई ने संभाली, दो केस दर्ज किया

तमिलनाडु के सथनकुलम क़स्बे में लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में बीते 19 जून को पिता-पुत्र को गिरफ़्तार किया गया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस संबंध में छह पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज किया है और पांच पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए गए हैं.

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: हिरासत में पिता-पुत्र की मौत मामले में फरार पुलिसकर्मी गिरफ़्तार

तमिलनाडु के सथनकुलम क़स्बे में लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में बीते 19 जून को पिता-पुत्र को गिरफ़्तार किया गया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में बीते एक जुलाई को छह पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया था.

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: हिरासत में पिता-पुत्र की मौत मामले में तीन और पुलिसकर्मी गिरफ़्तार

तमिलनाडु के तुथुकुडी ज़िले के सथकुलम क़स्बे में पी. जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन में समय से देर तक अपनी मोबाइल की दुकान खोलने के लिए बीते 19 जून को पुलिस ने हिरासत में लिया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में छह पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में छह पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज

तमिलनाडु के तुथुकुडी ज़िले के सथकुलम क़स्बे में पी. जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन में समय से देर तक अपनी मोबाइल की दुकान खोलने के लिए बीते 19 जून को पुलिस ने हिरासत में लिया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. मामले की जांच सीबी-सीआईडी को सौंप दी गई है.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

तमिलनाडु: हिरासत में मौत की जांच कर रही टीम को धमकाने का आरोप, राजस्व विभाग को सौंपा गया थाना

तुथुकुडी ज़िले में कथित तौर पर हिरासत में हुई पिता-पुत्र की मौत की जांच कर रही न्यायिक टीम की शिकायत पर मद्रास हाईकोर्ट ने तीन पुलिसकर्मियों पर अवमानना की कार्रवाई शुरू की है. साथ ही सथनकुलम पुलिस स्टेशन का नियंत्रण राजस्व अधिकारियों को सौंपने का आदेश दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

हिरासत में अत्याचार: भारतीय पुलिस का निकृष्टम चेहरा

यूं तो भारतीय पुलिस द्वारा रोज़ाना सैंकड़ों लोगों को प्रताड़ित करने की बात कही जाती है लेकिन गरीब, पिछड़े, और अल्पसंख्यक उनके विशेष निशाने पर होते हैं. एक पूर्व पुलिस महानिदेशक द्वारा सभ्य जनतांत्रिक समाज के इस बदनुमा दाग़ का विस्तृत विश्लेषण.