Delhi University

​दौलत राम कॉलेज. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिल्ली विश्वविद्यालय की एडहॉक शिक्षक प्रिंसिपल पर जातिगत भेदभाव का आरोप क्यों लगा रही हैं?

दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग में एडहॉक शिक्षक डॉ. ऋतु सिंह ने दावा किया है कि बीते अगस्त महीने में पढ़ाने के लिए उनकी जॉइनिंग हो गई थी, लेकिन जातिगत आधार पर उन्हें पढ़ाने से मना कर दिया गया. वहीं कॉलेज की प्रिंसिपल का कहना है कि अगर ऐसा है तो वे प्रमाण दिखाएं. विवाद के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने डीयू के कुलपति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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जीएन साईबाबा की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज किए जाने के चार दिन बाद उनकी मां का निधन

दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा ने ज़मानत के लिए दाखिल याचिका में कहा था कि उनकी मां अंतिम सांसें गिन रही हैं और उन्हें अपने बेटे को देखने का अधिकार है. चार दिन पहले इसे बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने ख़ारिज कर दिया था. शनिवार को साईबाबा की मां का हैदराबाद में देहांत हो गया.

डीयू प्रोफेसर हनी बाबू एमटी (फोटो: Special Arrangement)

एनआईए ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, पत्रकार और तीन कार्यकर्ताओं को समन जारी किया

एनआईए ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को एल्गार परिषद मामले में मुंबई आकर गवाही देने के लिए कहा है. प्रोफेसर ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान वे अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं और यात्रा नहीं करना चाहते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

आज के परिवेश में गुरु की भूमिका क्या है

बचपन से ही सुनते आए हैं कि गुरु-शिष्य परंपरा के समाप्त हो जाने से ही शिक्षा व्यवस्था में सारी गड़बड़ी पैदा हुई है. लेकिन इस परंपरा की याद किसके लिए मधुर है और किसके लिए नहीं, इस सवाल पर विचार तो करना ही होगा.

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ओपेन बुक-ऑनलाइन एक्ज़ाम और दृष्टिबाधित छात्रों की चुनौतियां

वीडियो: दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर व नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड की उपाध्यक्ष कुसुमलता मलिक ने डीयू की ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा पर सवाल उठाए हैं. सृष्टि श्रीवास्तव के साथ बातचीत में उन्होंने दृष्टिबाधित छात्रों की चिंताओं को साझा किया.

दिल्ली यूनिवर्सिटी (फोटो: विकिमीडिया)

दिल्ली: डीयू की ओपन बुक परीक्षा के विरोध में दृष्टिहीन छात्र, हाईकोर्ट में याचिका दायर की

राष्ट्रीय दृष्टिहीन महासंघ ने कहा कि ओपन बुक परीक्षा के लिए दृष्टिहीन छात्रों के पास इंटरनेट या कंप्यूटर की सुविधाएं नहीं हैं, न ही वे ऑनलाइन परीक्षा के तकनीकी पहलुओं से परिचित हैं. महामारी के दौरान परीक्षा में लिखने के लिए उन्हें कोई राइटर भी नहीं मिल पाएगा.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली विश्वविद्यालय के ओपन बुक एग्जाम मोड का विरोध क्यों हो रहा है?

दिल्ली विश्वविद्यालय ने घरेलू परीक्षाओं को ‘ओपन बुक एग्जाम’ मोड में लेने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए तकनीकी संसाधन अनिवार्य हैं. लेकिन असमान वर्गों से आने वाले छात्रों के पास ये संसाधन हैं, यह कैसे सुनिश्चित किया गया? अगर विश्वविद्यालय ने उन्हें दाखिले के समय लैपटॉप या स्मार्ट फोन मुहैया नहीं करवाया तो वह इनके आधार पर परीक्षा लेने की बात कैसे कर सकता है?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के वीसी योगेश त्यागी.

डीयू: वीसी ने प्रधानमंत्री राहत कोष को दी गई राशि पीएम केयर्स में डाली, शिक्षकों ने जताई आपत्ति

दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि कुलपति योगेश त्यागी ने यूनिवर्सिटी के स्टाफ द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के लिए दिए गए करीब चार करोड़ रुपये बिना किसी की सलाह के पीएम केयर्स फंड में ट्रांसफर किए हैं.

(फोटो: ट्विटर/@aishe_ghosh)

जेएनयू की एक सड़क का नाम ‘सावरकर मार्ग’ किया गया, छात्र संघ ने बताया शर्मनाक

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष ओईशी घोष ने कहा कि यह जेएनयू की विरासत के लिए शर्मनाक है कि इस विश्वविद्यालय में इस आदमी का नाम डाल दिया गया है.

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एनजीटी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में 39 मंजिला इमारत के निर्माण पर रोक लगाई

यह प्रोजेक्ट क्षेत्र दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा रक्षा मंत्रालय से अधिग्रहीत की गई 3.05 हेक्टेयर भूमि का हिस्सा था. मेट्रो स्टेशन एक हेक्टेयर भूमि पर बनाया गया था और बाकी एक कंपनी को दिया गया था, जो आवासीय फ्लैट बनाने की योजना बना रही है.

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जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष की चोट को फ़र्ज़ी बताने वाली तस्वीरें फ़र्ज़ी हैं

शुक्रवार को सोशल मीडिया जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ओईशी घोष की दो तस्वीरों को यह कहकर साझा किया गया कि अलग-अलग समय पर उनके हाथ में बंधी पट्टी एक बार दाहिनी तरफ और एक समय बायीं ओर बंधी है और उनकी चोट फ़र्ज़ी है. ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल में यह दावा झूठा पाया गया है.

Police in riot gear stand guard outside the Jawaharlal Nehru University (JNU) after clashes between students in New Delhi, India, January 5, 2020. REUTERS/Adnan Abidi

उच्च शिक्षण संस्थानों में उपजे वैचारिक मतभेद का हल हिंसा नहीं है

शिक्षण संस्थानों का जब-जब राजनीतिकरण होगा, उसकी परिणति अक्सर हिंसा के रूप में ही होती है. जेएनयू को लेकर हुए विवाद में आज देश दो धड़े में विभाजित है और यह विभाजन धार्मिक या जातीय नहीं बल्कि वैचारिक है.

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जेएनयू हिंसा: छात्रों का आरोप- जो एबीवीपी के नहीं थे, उन्हें निशाना बनाया गया

वीडियो: नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पांच जनवरी की रात हिंसा के शिकार छात्रों, प्रोफेसरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से विशाल जायसवाल की बातचीत.

New Delhi: Students outside the violence-affected Sabarmati Hostel of the Jawaharlal Nehru University (JNU), in New Delhi, Monday, Jan. 6, 2020. A group of masked men and women armed with sticks, rods and acid allegedly unleashed violence on the campus  of the University, Sunday evening. (PTI Photo/Atul Yadav)  (PTI1_6_2020_000070B)

जेएनयू में टूटे शीशों की रात

जो लोग जेएनयू गेट पर लाठियां लेकर खड़े थे और भीतर जो लोग लाठियां लेकर शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की लिंचिंग पर उतारू थे, उनकी मंशा को समझना क्या इतना मुश्किल है?

Police in riot gear stand guard outside the Jawaharlal Nehru University (JNU) after clashes between students in New Delhi, India, January 5, 2020. REUTERS/Adnan Abidi

जेएनयू हिंसा: 2.30 से छह बजे के बीच 23 पीसीआर कॉल के घंटों बाद पहुंची पुलिस

सूत्रों ने कहा कि रिपोर्ट में सुबह 8 बजे जेएनयू प्रशासनिक ब्लॉक में महिला पुलिसकर्मियों के साथ कुल 27 पुलिसकर्मियों के सादे कपड़ों में ड्यूटी पर तैनात होने और रात की पाली के बाद हटने तक की घटनाओं का जिक्र है. दिल्ली पुलिस कमिश्ननर अमूल्य पटनायक को सौंपी गई यह रिपोर्ट संभवतया केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी.