Economy

कोयले और बिजली के संभावित संकट के लिए ख़ुद मोदी सरकार ज़िम्मेदार है

नरेंद्र मोदी सरकार के लिए मौजूदा संकट के लिए यूपीए को दोष देना आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि वह ख़ुद कोयले के भंडार जमा करने और बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने में बुरी तरह विफल रही है.

प्रधानमंत्री मोदी की सालगिरह पर ट्विटर पर ट्रेंड हुआ ‘राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस और जुमला दिवस’

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 71वें जन्मदिन के अवसर पर ट्विटर पर दिनभर कई ऐसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे, जिनसे ट्विटर यूज़र्स ने देश में बढ़ती बेरोज़गारी और देश में गहराते आर्थिक संकट की तरफ ध्यान आकर्षित किया और इस बारे में प्रधानमंत्री से जवाब मांगा.

कोविड-19 लॉकडाउन: सरकार द्वारा जीडीपी में काफ़ी ज़्यादा वृद्धि का भ्रम फैलाया जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की पूरी प्रचार मशीनरी अप्रैल-जून 2021 के दौरान भारत की जीडीपी में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि को बड़े आर्थिक सुधार के रूप में दिखा रही है. हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अप्रैल-जून 2021 की यह वृद्धि साल 2019 और 2018 के आंकड़ों से कम है. पिछले साल लॉकडाउन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में काफ़ी ज़्यादा गिरावट आई थी, इसलिए पिछले साल से तुलना कर काफ़ी ज़्यादा वृद्धि का भ्रम फैलाया जा रहा है.

क्या श्रमिकों का फैक्ट्रियों से खेतों में बड़ी संख्या में पलायन ‘विकास’ की गाड़ी का उल्टी दिशा में जाना है

सतत आर्थिक विकास के किसी भी दौर के साथ-साथ ग़रीबी में कमी आती है और श्रमबल कृषि से उद्योगों और सेवा क्षेत्रों की तरफ गतिशील होता है. हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि देश में एक साल में क़रीब 1.3 करोड़ श्रमिक ऐसे क्षेत्रों से निकलकर खेती से जुड़े हैं. वैश्विक महामारी एक कारण हो सकता है, लेकिन मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने इसकी ज़मीन पहले ही तैयार कर दी थी.

विकास की धीमी रफ़्तार और बढ़ता नौकरियों का संकट

सांख्यिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय सर्वेक्षण संगठन ने 2017-18 में वार्षिक श्रम बल सर्वेक्षण करना शुरू किया, जो अब तक केवल हर पांच वर्षों पर होता था. हाल में एनएसओ ने अपना तीसरा वार्षिक सर्वेक्षण 2019-20 जारी किया, जिसके आंकड़ों से पता चलता है कि श्रम बल भागीदारी की स्थिति अब भी दुरुस्त नहीं है.

मध्य प्रदेश के मंत्री ने कहा- नेहरू के 1947 के भाषण से शुरू हुई अर्थव्यवस्था की बदहाली

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि देश की आज़ादी के बाद अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर महंगाई बढ़ाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह नेहरू परिवार है. महंगाई एक-दो दिन में नहीं बढ़ती. अर्थव्यवस्था की नींव एक-दो दिन में नहीं रखी जाती है. 15 अगस्त 1947 को लाल क़िले की प्राचीर से प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए भाषण की ग़लतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई.

वित्त वर्ष 2020-21 में 12 सरकारी बैंकों में 81,921 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धोखाधड़ी: आरटीआई

भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि कोविड-19 संकट से बुरी तरह प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 में बैंक ऑफ इंडिया में सबसे ज़्यादा 12,184.66 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 177 मामले सूचित किए. उसके बाद भारतीय स्टेट बैंक में 10,879.28 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 5,725 मामले सामने आए हैं.

आर्थिक उदारीकरण के 30 साल पूरे होने पर मनमोहन सिंह ने कहा, आगे का रास्ता 1991 से ज़्यादा चुनौतीपूर्ण

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1991 के ऐतिहासिक बजट के 30 साल पूरा होने के मौके पर कहा कि पिछले तीन दशकों में हमारे देश ने शानदार आर्थिक प्रगति की, परंतु वह कोविड-19 के कारण हुई तबाही और करोड़ों नौकरियां जाने से बहुत दुखी हैं. मनमोहन सिंह 1991 में नरसिंह राव की अगुवाई में बनी सरकार में वित्त मंत्री थे और 24 जुलाई, 1991 को अपना पहला बजट पेश किया था. इस बजट को देश में आर्थिक उदारीकरण की बुनियाद माना जाता है.

करेंसी छापकर राजकोषीय घाटे का वित्तपोषण न करे रिज़र्व बैंक: अर्थशास्त्री पिनाकी चक्रवर्ती

हाल के समय में विभिन्न हलकों से यह मांग की जा रही है कि भारतीय रिज़र्व बैंक को करेंसी की छपाई कर राजकोषीय घाटे का वित्तपोषण करना चाहिए. रिज़र्व बैंक द्वारा राजकोषीय घाटे के मौद्रिकरण का आशय यह है कि केंद्रीय बैंक सरकार के किसी आपात ख़र्च को पूरा करने के लिए करेंसी छापे और राजकोषीय घाटे को पूरा करे. पिनाकी चक्रवर्ती ने उम्मीद जताई कि कोरोना वायरस की यदि कोई बड़ी तीसरी लहर नहीं होती है, तो भारत का आर्थिक पुनरुद्धार अधिक तेज़ी से होगा.

गुजरात: एक साल में राष्ट्रीयकृत बैंकों की 278 शाखाएं कम हुईं, निजी बैंकों की शाखाओं में बढ़ोतरी

गुजरात राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 में राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा संचालित 5,257 शाखाओं की तुलना में 2020-21 में यह संख्या घटकर 4,979 हो गई ​है. दूसरी ओर निजी बैंकों की शाखाओं में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. मार्च 2021 के अंत में 116 शाखाओं के जुड़ने के बाद इनकी शाखाओं की संख्या बढ़कर 2,225 हो गई है.

भारत सरकार के भ्रम के कारण कोविड-19 संकट पैदा हुआ: अमर्त्य सेन

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि भारत सरकार ने भ्रम में रहते हुए कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए काम करने के बजाय अपने कामों का श्रेय लेने पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने कहा कि श्रेय पाने की कोशिश करना और श्रेय पाने वाला अच्छा काम न करना बौद्धिक नादानी का एक स्तर दिखाता है, जिससे बचना चाहिए. भारत ने यही करने की कोशिश की.

कोरोना महामारी की दूसरी लहर से एक करोड़ लोग हुए बेरोज़गार: सीएमआईई

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आकलन के अनुसार, बेरोज़गारी दर मई में 12 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 8 प्रतिशत थी. यानी इस दौरान क़रीब एक करोड़ भारतीयों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. इसका मुख्य कारण कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर है.

स्वतंत्रता के बाद कोविड-19 देश की शायद सबसे बड़ी चुनौती: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के कहा कि महामारी के बाद यदि हम समाज के बारे में गंभीरता से सवाल नहीं उठाते हैं तो यह महामारी जितनी ही बड़ी त्रासदी होगी. उन्होंने कहा कि महामारी के चलते भारत के लिए यह त्रासदी भरा समय है और इस महामारी का एक प्रभाव यह है कि कई जगहों पर विभिन्न कारणों के चलते सरकार लोगों की मदद के लिए मौजूद नहीं थी.

नया सामाजिक सुरक्षा क़ानून मज़दूरों के हक़ में कितना हितकारी होगा

सितंबर 2020 में भारत सरकार द्वारा मज़दूरों के हित का दावा करते हुए लाए गए सामाजिक सुरक्षा क़ानून में असंगठित मज़दूरों के लिए बहुत कुछ नहीं है, जबकि देश के कार्यबल में उनकी 91 प्रतिशत भागीदारी है.