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(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना ने शिक्षा क्षेत्र में अवरोध पैदा किया, 1.6 अरब छात्र प्रभावित: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि प्रारंभिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक के क़रीब 2.38 करोड़ बच्चे और युवा केवल महामारी के आर्थिक असर की वजह से अगले साल पढ़ाई छोड़ सकते हैं या उससे वंचित रह सकते हैं.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी (फोटोः पीटीआई)

तमिलनाडु में लागू नहीं होने देंगे तीन भाषा फॉर्मूलाः पलानीस्वामी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर निराशा जताते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य में कई दशकों से दो भाषा नीति का पालन किया जा रहा है, इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोबारा विचार करने का भी आग्रह किया.

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क्या भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सूरत बदलने में कारगर होगी नई शिक्षा नीति?

वीडियो: बीते दिनों केंद्रीय कैबिनेट ने देश की नई शिक्षा नीति को मंज़ूरी दी है. 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में हुए इस बदलाव को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. इस बारे में विभिन्न विशेषज्ञों से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (फोटो: पीटीआई)

नई शिक्षा नीति अत्यधिक विनियमित, कमज़ोर फंडिग मॉडल पेश करती है: मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने नई शिक्षा नीति को ‘प्रगतिशील दस्तावेज़’ बताते हुए कहा कि इसमें मौजूदा शिक्षा प्रणाली की ख़ामियों की पहचान तो की गई है, लेकिन यह पुरानी परंपराओं के दबाव से मुक्त नहीं हो पा रहा है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय बना शिक्षा मंत्रालय, नई शिक्षा नीति की घोषणा

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि देश में 34 साल बाद शिक्षा नीति में परिवर्तन किया गया है. नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है, साथ ही एमफिल को ख़त्म किया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 179 कॉलेज बंद हुए, नौ साल में सर्वाधिक: एआईसीटीई

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अनुसार 2020-21 शैक्षणिक वर्ष में 179 संस्थानों के बंद होने के अलावा पिछले पांच सालों में बड़ी संख्या में खाली रही सीटों के कारण इस साल क़रीब 134 संस्थानों ने अकादमिक सत्र की मंज़ूरी ही नहीं मांगी.

(फोटोः पीटीआई)

क्या स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए हमारी सरकारों के पास पर्याप्त योजनाएं हैं

स्कूली शिक्षा से जुड़े कुछ अधिकारियों का कहना है कि वे दाखिले की तैयारी कर रहे हैं, कुछ पाठ्यक्रम छोटा करने पर ध्यान दे रहे हैं, तो कुछ परीक्षाओं को लेकर चिंतित हैं. लेकिन कोई भी बच्चों और शिक्षकों की भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक ज़रूरतों पर बात करता नहीं दिखता.

Jodhpur: Women, wearing masks, look out from a window of their house during the complete lockdown imposed in the wake of the novel coronavirus pandemic, in Jodhpur, Wednesday, March 25, 2020. (PTI Photo) (PTI25-03-2020 000208B)

साल 2020 में देश को किस नज़र से देख रही है युवा आबादी

आज सवाल ये नहीं है कि बच्चे इस बार इम्तिहानों में पास होंगे या नहीं, सवाल ये है कि यह देश और हम हिंदुस्तानी उनकी निगाहों में कितना फेल होते जा रहे है.

(फोटो: रॉयटर्स)

ऑनलाइन शिक्षा: राज्य ने अपनी ज़िम्मेदारी जनता के कंधों पर डाल दी है

संरचनात्मक रूप से ऑनलाइन शिक्षण में विश्वविद्यालय की कोई भूमिका नहीं है, न तो किसी शिक्षक और न ही किसी विद्यार्थी को इसके लिए कोई संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यानी शिक्षा, जो सार्वजनिक और सांस्थानिक ज़िम्मेदारी थी वह इस ऑनलाइन मॉडल के चलते व्यक्तिगत संसाधनों के भरोसे है.

(फोटो: रॉयटर्स)

आज के परिवेश में गुरु की भूमिका क्या है

बचपन से ही सुनते आए हैं कि गुरु-शिष्य परंपरा के समाप्त हो जाने से ही शिक्षा व्यवस्था में सारी गड़बड़ी पैदा हुई है. लेकिन इस परंपरा की याद किसके लिए मधुर है और किसके लिए नहीं, इस सवाल पर विचार तो करना ही होगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

बिहार: क्या डिजिटल शिक्षा की रेस में पिछड़ रहे हैं सरकारी स्कूलों के छात्र

कोविड-19 के चलते स्कूल बंद होने के बाद अब राज्य सरकारें मोबाइल और टीवी के ज़रिये छात्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. ऐसी कोशिश बिहार सरकार द्वारा भी की गई है, लेकिन आर्थिक-सामाजिक असमानता के बीच प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों तक इन माध्यमों से शिक्षा पहुंचा पाना बेहद कठिन है.

(फोटो साभार: ट्विटर/GEMReport)

स्कूल की पाठ्य पुस्तकों में महिलाओं को कम आंका गया: रिपोर्ट

ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट 2020 के मुताबिक स्कूल की टेक्स्टबुक में शामिल महिला छवियों की संख्या न सिर्फ पुरुषों की तुलना में कम होती हैं बल्कि महिलाओं को कम प्रतिष्ठित पेशों में अंतर्मुखी एवं दब्बू लोगों की तरह दर्शाया गया है.

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आदिवासी महिला बनीं वाइस चांसलर: ‘संस्कृत आर्यों की भाषा है, तुम सबसे ज़्यादा नंबर क्यों लाती हो’

वीडियो: प्रोफेसर सोना झरिया मिंज को झारखंड के दुमका स्थित सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है. प्रो. मिंज जेएनयू में स्कूल ऑफ कम्प्यूटर एंड सिस्टम्स साइंसेज में प्रोफेसर हैं. उनसे द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

Malappuram

केरल: ऑनलाइन क्लास में हिस्सा न ले पाने से क्षुब्ध छात्रा ने आत्महत्या की

घटना मलप्पुरम के वलान्चेरी की है. पुलिस के अनुसार एक दिहाड़ी मज़दूर की यह 14 वर्षीय बेटी दसवीं में पढ़ती थी. सोमवार से राज्य में स्कूलों की ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुई थीं, घर में टीवी या स्मार्टफोन न होने के चलते वह इसमें हिस्सा न ले पाने के चलते परेशान थी.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली विश्वविद्यालय के ओपन बुक एग्जाम मोड का विरोध क्यों हो रहा है?

दिल्ली विश्वविद्यालय ने घरेलू परीक्षाओं को ‘ओपन बुक एग्जाम’ मोड में लेने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए तकनीकी संसाधन अनिवार्य हैं. लेकिन असमान वर्गों से आने वाले छात्रों के पास ये संसाधन हैं, यह कैसे सुनिश्चित किया गया? अगर विश्वविद्यालय ने उन्हें दाखिले के समय लैपटॉप या स्मार्ट फोन मुहैया नहीं करवाया तो वह इनके आधार पर परीक्षा लेने की बात कैसे कर सकता है?