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(फोटो: रॉयटर्स)

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन, फिल्म निर्माताओं ने केंद्र से सिनेमाघरों को खोलने की मांग की

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से कहा गया है कि सिनेमा उद्योग देश की संस्कृति का न सिर्फ अंतर्निहित हिस्सा है, बल्कि अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा भी है जिससे लाखों लोगों की आजीविका चलती है.

फिल्म गर्म हवा का एक दृश्य. (फोटो साभार: ट्विटर)

भारतीय फिल्मों में कभी अल्पसंख्यकों को सही तरह से दिखाया ही नहीं गया: एमएस सथ्यू

साक्षात्कार: भारतीय उपमहाद्वीप के बंटवारे का जो असर समाज पर पड़ा, उसकी पीड़ा सिनेमा के परदे पर भी नज़र आई. एमएस सथ्यू की ‘गर्म हवा’ विभाजन पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है. इस फिल्म समेत सथ्यू से उनके विभिन्न अनुभवों पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ भाटिया की बातचीत.

अभिनेता जगदीप. (फोटो साभार: ट्विटर)

मशहूर कलाकार और हास्य अभिनेता जगदीप का निधन

जगदीप ने अपने 50 साल के करिअर में क़रीब 400 फिल्मों में काम किया. 1975 में आई फिल्म शोले के सूरमा भोपाली के उनके किरदार को प्रशंसक आज भी याद करते हैं. उनका डायलॉग ‘हमारा नाम सूरमा भोपाली एसे ही नहीं है’ काफी मशहूर है.

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ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट अपने दायरे में लाने की तैयारी में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

डिजिटली प्रसारित होने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म्स आईटी मंत्रालय के तहत आते हैं. अब इन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है.

बासु चटर्जी. (फोटो साभार: ट्विटर/@FilmHistoryPic)

प्रख्यात फिल्मकार बासु चटर्जी का निधन

बासु चटर्जी को सारा आकाश, रजनीगंधा, छोटी-सी बात, उस पार, चितचोर, खट्टा मीठा, बातों बातों में, शौकीन, एक रुका हुआ फैसला और चमेली की शादी जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है. दूरदर्शन पर प्रसारित चर्चित धारावाहिक ब्योमकेश बक्शी और रजनी का निर्देशन भी उन्होंने ही किया था.

New Delhi: People wearing mask to mitigate the spread of coronavirus, walk past a cinema hall, in New Delhi, Thursday, March 12, 2020. Cinema halls in Delhi will be shut till March 31 as a preventive measure following Coronavirus outbreak. (PTI Photo/Vijay Verma)  (PTI12-03-2020_000215B)

लॉकडाउन: क्या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म सिनेमाघरों के लिए चुनौती बनकर उभर रहे हैं?

कोरोना वायरस के मद्देनज़र लागू लॉकडाउन के बीच अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ सिनेमाघरों की बजाय सीधे ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हो रही है. कुछ और फिल्में हैं, जो अब सीधे इन्हीं प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होने वाली हैं. ऐसे में बंदी के दौर से गुज़र रहे सिनेमाघरों के सामने ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने नया संकट खड़ा कर दिया है.

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काम पर असर न हो इसलिए एक्टर्स को चुप्पी रखनी पड़ती है: जावेद जाफ़री

वीडियो: कोरोना वायरस और लॉकडाउन से बॉलीवुड पर क्या असर पड़ रहा है?समाज के इस संकट काल में बॉलीवुड सितारों की क्या ज़िम्मेदारी है? इन्हीं सब सवालों पर अभिनेता जावेद जाफ़री से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

ईरान की राजधानी तेहरान के मिलाद पार्किंग एरिया में ड्राइव इन सिनेमा का मज़ा लेते लोग. (फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना वायरस महामारी के बीच ईरान में दशकों बाद कार में बैठकर फिल्म देखने की आज़ादी मिली

फारसी भाषा में इसे सिनेमा मशीन कहते हैं. कार पार्किंग में ही एक पर्दा लगा होता है और दर्शकों को फिल्म की आवाज़ उनकी कार में मौजूद एफएम रेडियो स्टेशन के ज़रिये सुनाई देती है. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ड्राइव-इन थियेटर की सुविधा ईरान में बंद कर दी गई थी.

ऋषि कपूर. (फोटो साभार: ट्विटर/@chintskap)

अभिनेता ऋषि कपूर का 67 साल की उम्र में निधन

साल 2018 में ऋषि कपूर के कैंसर से पीड़ित होने के बारे में पता चला था. इसके बाद वे इलाज के लिए अमेरिका चले गए थे और क़रीब एक साल वहां रहने के बाद पिछले साल सितंबर में मुंबई लौटे थे.

इरफ़ान ख़ान. (फोटो साभार: फेसबुक/Irrfan)

प्रख्यात अभिनेता इरफ़ान ख़ान का निधन

साल 2018 में न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर होने के बाद इरफ़ान ख़ान के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका था. इरफ़ान की 95 वर्षीय मां का चार दिन पहले ही जयपुर में इंतकाल हो गया था. लॉकडाउन के कारण वह उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे.

Mumbai: Bollywood actor Saif Ali Khan attends the ‘GQ Men of the Year Awards’, in Mumbai, Thursday, September 27, 2018. (PTI Photo)(PTI9_28_2018_000049B)

देश के मौजूदा हालात देखकर लगता है कि हम सेकुलरिज़्म से दूर जा रहे हैं: सैफ़ अली ख़ान

अपनी हालिया फिल्म तानाजी को लेकर अभिनेता सैफ़ अली ख़ान ने कहा कि एक अभिनेता के रूप में फिल्म में उनका किरदार बहुत अच्छा है, लेकिन फिल्म में जो दिखाया गया है, वो इतिहास नहीं है. अंग्रेज़ों के आने से पहले ‘इंडिया’ का कोई कॉन्सेप्ट नहीं था.

अमिताभ बच्चन (फोटो साभार: फेसबुक/अमिताभ बच्चन)

अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने के मायने…

समय के साथ अमिताभ बच्चन ने सतत तरीके से अपने को नए-नए रंगों में ढाला है और जोखिम लेने से गुरेज़ नहीं किया. दूसरे प्रतिक्रिया दें, इससे पहले ही वे बदलाव की नब्ज़ पकड़ने में कामयाब रहे.

(फोटो साभार: फेसबुक)

भारत की तरफ से ऑस्कर में भेजी गई फिल्म ‘गली बॉय’

‘गली बॉय’ के अलावा भारत की ओर से ऑस्कर के लिए फिल्म ‘बधाई हो’, ‘अंधाधुन’, ‘आर्टिकल 15’, ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘बदला’, ‘केसरी’ और ‘द ताशकंद फाइल्स’ होड़ में थीं.