Finance Ministry

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: रॉयटर्स)

नोटबंदी के कारण अगले एक साल तक अर्थव्यवस्था धीमी रहेगी: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, नोटबंदी कालेधन का उचित समाधान नहीं है, इसने आर्थिक विकास की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया.

Ahmedabad: Former prime minister Manmohan Singh addresses a press conference in Ahmedabad on Tuesday. PTI Photo  (PTI11_7_2017_000101A)

जल्दबाज़ी में जीएसटी के क्रियान्वयन से हुई अर्थव्यवस्था धीमी: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के फैसले को ऐतिहासिक भूल बताया. साथ ही वाम दलों से केंद्र सरकार की गलत नीतियों के ख़िलाफ़ लड़ने में कांग्रेस नेतृत्व का साथ देने को कहा.

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नोटबंदी-जीएसटी से धीमी हुई अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए 9 लाख करोड़ का पैकेज

ढांचागत परियोजनाओं में 6.92 लाख करोड़ ख़र्च होंगे और 2.11 लाख करोड़ रुपये एनपीए के बोझ से दबे सरकारी बैंकों का आधार मजबूत करने के लिए होंगे.

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जय शाह और खंडवाला के कारोबारी रिश्ते पर कुछ सवाल

सरकार न सिर्फ़ शाह का गवाह बनकर कूद पड़ी, बल्कि न्यायिक मदद का पूर्वानुमान लगाते हुए स्टोरी छपने के पहले ही इसके लिए एडिशनल साॅलिसिटर जनरल को इजाज़त भी दे दी.

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विश्व बैंक ने कहा, नोटबंदी और जीएसटी के कारण कम रह सकती है भारत की वृद्धि दर

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने भी वृद्धि दर अनुमान घटाया, ओपेक ने कहा भारत मज़बूत वृद्धि के रास्ते पर.

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14 लाख इकाइयों ने नहीं दाख़िल किया जीएसटीआर, जेटली बोले जीएसटी को बेपटरी करने के प्रयास विफल

जुलाई महीने का जीएसटीआर दाख़िल करने की अंतिम तारीख़ 10 अक्टूबर, सरकार का और समय देने से इनकार.

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जीएसटी की मार से व्यापारी बेहाल

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार बता रहे हैं कि टैक्स वसूलने को लेकर सरकार और व्यापारियों के बीच एक तरह की जंग चल रही है. व्यापारी डर के मारे बोल नहीं पा रहे हैं. कैमरा आॅन होता है तो तारीफ करने लगते हैं.

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मोदी सरकार ने अडानी समूह को 500 करोड़ का फ़ायदा पहुंचाया

सरकार ने चुपके से स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन से जुड़े नियमों में बदलाव किए, जिसका सीधा फ़ायदा अडानी समूह को पहुंचा.

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‘बड़े संगठन हमेशा से छोटे व्यापारियों के नाम पर राजनीति करते आए हैं’

जीएसटी के मसले पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के साथ द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु की बातचीत.

फोटो: रॉयटर्स

जीएसटी: ‘नई आज़ादी’ के आधी रात के जश्न में गुम न हो जाएं ये सवाल

जीएसटी को लागू किए जाने से पहले सरकार ने छोटे कारोबारियों की चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया. किसी को जीएसटी के जटिल प्रारूप के कारण छोटे व्यापारियों पर पड़नेवाले प्रभावों का आकलन करने की फुर्सत नहीं है, जिन पर वकील और सीए अभी से ही शिकारी बाज़ की तरह झपट पड़े हैं.

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क्या टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादक ने अपने हित के लिए पत्रकारिता को ताक पर रख दिया?

अगर संपादक मंत्री से कहकर किसी नियुक्ति में कोई बदलाव करवा सकते हैं, तो क्या इसके एवज में मंत्रियों को अख़बारों की संपादकीय नीति प्रभावित करने की क्षमता मिलती है?

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सरकार मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा क्यों छीन रही है?

मज़दूरों को न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उनके कार्य क्षेत्र से जुड़े उपक्रमों पर एक उपकर (सेस) लगाया गया था, जिसे सरकार ख़त्म करती जा रही है.