Finance Ministry

(फोटो: पीटीआई)

भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के अनुमान क्या वास्तविक तस्वीर दिखा रहे हैं

मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होने के आशावादी अनुमानों का समर्थन न करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सतर्क किया है कि अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार होगा.

(फोटो: पीटीआई)

बदहाल अर्थव्यवस्था को कृषि के ज़रिये उबारने की आशाओं के बीच ग्रामीण क्षेत्र में संकट के संकेत

ग्रामीण क्षेत्र में प्रमुख फसलों को छोड़कर बागवानी, दूध और मुर्गी पालन के बाज़ार मूल्य में गिरावट देखने को मिल रही है. प्रवासियों के अपने घरों को लौटने के कारण शहर से पैसे भेजने की दर में काफी कमी आई है, जिसके कारण आने वाले समय में इस क्षेत्र की वृद्धि थम सकती है.

(फोटो: पीटीआई)

गर्त में जीडीपी: मोदी के ‘सब चंगा सी’ रवैये से इस संकट का हल नहीं निकलेगा

मुख्य आर्थिक सलाहकार आश्वस्त कर रहे हैं कि सरकार के पास भविष्य में सही समय पर जारी करने के लिए काफी संसाधन हैं. लेकिन सौ सालों में एक बार आने वाले आर्थिक संकट का सामना कर रही अर्थव्यवस्था के पास बस एक ही चीज़ की किल्लत होती है और वह है समय.

(फोटो: पीटीआई)

अर्थव्यवस्था को उबारने में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी: वित्त मंत्रालय रिपोर्ट

आर्थिक मामलों के विभाग की ओर से जारी जुलाई महीने की आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था का बुरा समय बीत गया है, भारत अब अनलॉक के चरण में हैं. हालांकि कोविड-19 के बढ़ते मामलों और विभिन्न राज्यों में बारी-बारी से लग रहे लॉकडाउन से जोखिम कायम है.

Gurugram: Migrants wait to board a bus for Bihar at Tau Devi Lal Stadium, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Gurugram, Tuesday, June 2, 2020. (PTI Photo)(PTI02-06-2020_000216B)

ग्रेच्युटी की समयसीमा पांच साल से घटाकर एक साल की जाए: संसदीय समिति

श्रम पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफ़ारिश की है कि ग्रेच्युटी की सुविधा को सभी प्रकार के कर्मचारियों तक बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें ठेका मज़दूर और दैनिक या मासिक वेतन कर्मचारी शामिल हैं.

(फोटो साभार: ईपीएफओ)

लॉकडाउन: ईपीएफओ से पैसा निकालने वालों में 74 फीसदी का वेतन 15,000 से कम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान अप्रैल और मई महीने में कुल 11,540 करोड़ रुपये के 36.02 लाख दावों का निपटारा किया गया है.

(फोटो साभार: ईपीएफओ)

कोरोना लॉकडाउन प्रभाव: 6,50,000 से ज्यादा कर्मचारियों ने ईपीएफ से पैसा निकाला

अप्रैल महीने में प्रति कार्य दिवस औसतन 30,000-35,000 लोगों ने अपनी भविष्य निधि से पैसा निकाला है, जो कि दर्शाता है कि लोग किस स्तर के संकट से जूझ रहे हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

आईआरएस अधिकारियों का अमीरों पर कोरोना टैक्स का सुझाव, वित्त मंत्रालय ने ‘गैरजिम्मेदार कदम’ कहा

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कहा कि आयकर विभाग के उन 50 आईआरएस अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की जा रही है, जिन्होंने कोविड-19 से जुड़े राहत उपायों के लिए राजस्व जुटाने पर एक अवांछित रिपोर्ट तैयार की है और इसे बिना अनुमति के सार्वजनिक भी कर दिया.

निर्मला सीतारमण. (फोटो: पीटीआई)

केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि पर लगाई रोक, विपक्ष ने कहा- ये कदम अन्यायपूर्ण

केंद्र ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में अगले साल जुलाई तक कोई वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है. इस फैसले का केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों तथा 61 लाख पेंशनभोगियों पर असर पड़ेगा.

(फाइल फोटो, पीटीआई)

सरकार ने पीपीएफ और वरिष्ठ नागरिकों की बचत योजनाओं की ब्याज दरों में की भारी कटौती

सरकार ने राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र और लोक भविष्य निधि समेत लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें 2020-21 की पहली तिमाही के लिए 1.4 फीसदी तक घटा दी हैं.

Chennai: Defence Minister Nirmala Sitharaman addresses a press conference at Officers Training Academy (OTA), in Chennai, Saturday, Sept 29, 2018. (PTI Photo) (PTI9_29_2018_000115B)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- एसबीआई हृदयहीन और अक्षम है

ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कॉनफेडरेशन ने एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कथित रूप से फटकार लगाए जाने की ओलाचना की. हालांकि इसके बाद सीतारमण ने एक ट्वीट किया, जिसमें एआईबीओसी द्वारा ईमेल करके अपना बयान वापस लेने की जानकारी दी गई थी.

(फोटो: फेसबुक)

श्रम मंत्रालय ईपीएफ जमा पर 8.65 प्रतिशत की ब्याज दर कायम रखने का इच्छुक

वित्त मंत्रालय श्रम मंत्रालय पर इस बात के लिए दबाव बना रहा है कि ईपीएफ पर ब्याज दर को सरकार द्वारा चलाई जाने वाली अन्य लघु बचत योजनाओं मसलन भविष्य निधि जमा और डाकघर बचत योजनाओं के समान किया जाए.

(फोटो: पीटीआई)

चुनावी बॉन्ड: चुनाव आयोग ने क़ानून मंत्रालय के अलावा संसदीय समिति को भी पत्र लिख जताई थी चिंता

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की संसदीय समिति को बताया था कि यह समय में पीछे जाने वाला क़दम है और इसकी वजह से राजनीतिक दलों की फंडिंग से जुड़ी पारदर्शिता पर प्रभाव पड़ेगा.