Gujarat High Court

गुजरात: आरटीआई कार्यकर्ता हत्याकांड में भाजपा के पूर्व सांसद की आजीवन कारावास की सज़ा निलंबित

एक आरटीआई के माध्यम से साल 2010 में अमित जेठवा ने गिर वन क्षेत्र में चल रहीं अवैध खनन गतिविधियों में जूनागढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दीनू सोलंकी की संलिप्तता का खुलासा किया था. उन्होंने इस संबंध में गुजरात हाईकोर्ट में विशेष दिवानी आवेदन दाख़िल किया था. 20 जुलाई 2010 को जेठवा की हाईकोर्ट के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा- हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे तो ख़त्म हो जाएगा लोकतंत्र

गुजरात के गांधीनगर में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित भारत माता के मंदिर में मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि अगर अगले 1,000-2,000 वर्षों में हिंदुओं की संख्या कम हो जाती है और दूसरे धर्म के लोगों की संख्या बढ़ जाती है, तो कोई अदालत नहीं होगी, लोकसभा, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, ये सब कुछ हवाहवाई हो जाएगा, कुछ भी नहीं रहेगा.

सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने पर नागरिकों को तड़ीपार नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने 39 वर्षीय कार्यकर्ता कलीम सिद्दिक़ी के ख़िलाफ़ अहमदाबाद पुलिस की ओर से जारी तड़ीपार करने के आदेश को निरस्त कर दिया. सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के संबंध में सिद्दीक़ी को अहमदाबाद, गांधीनगर, खेड़ा और मेहसाणा ज़िलों में एक साल की अवधि के लिए प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया था.

धर्मांतरण विरोधी क़ानून संबंधी आदेश में बदलाव की गुजरात सरकार की अर्ज़ी ख़ारिज

गुजरात सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन क़ानून, 2021 की कुछ धाराओं पर हाईकोर्ट ने बीते दिनों रोक लगा दी थी. इसमें संशोधन के लिए सरकार ने अर्ज़ी दी थी. इस पर राज्य के गृह और कानून मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि लव जिहाद विरोधी क़ानून को बेटियों से दुर्व्यवहार करने वाली जिहादी ताक़तों को नष्ट करने के लिए एक हथियार के रूप में लाया गया था. राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.

गुजरात मद्य निषेध क़ानून के ख़िलाफ़ याचिकाएं विचार योग्य: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात मद्य निषेध क़ानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कहा है कि प्रावधान मनमाने, अतार्किक, अनुचित और भेदभावपूर्ण हैं और छह दशकों से अधिक समय से क़ानून के बावजूद तस्करों, संगठित आपराधिक गिरोह के नेटवर्क और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ के कारण शराब की आपूर्ति हो रही है. वहीं सरकार के वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ही इस पर फ़ैसला करने के लिए सही मंच है, न कि गुजरात हाईकोर्ट. 

गुजरात हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी नए क़ानून की अंतरधार्मिक विवाह संबंधी धाराओं पर लगाई रोक

गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा था कि यह क़ानून अंतरधार्मिक विवाह पर प्रतिबंध नहीं लगाता है. इस पर न्यायालय ने कहा कि संशोधित क़ानून की भाषा स्पष्ट नहीं है, नतीजतन अंतरधार्मिक विवाह करने वालों पर हमेशा तलवार लटकती रहेगी. जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात शाखा ने पिछले महीने एक याचिका में कहा था कि क़ानून की कुछ संशोधित धाराएं असंवैधानिक हैं.

वायुसेना ने कोविड-19 टीका लेने से इनकार करने पर एक कर्मचारी को बर्ख़ास्त किया है: केंद्र

वायुसेना से बर्ख़ास्त किए गए कर्मचारी ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने कहा था कि कोविड-19 टीका विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं. इसके जवाब में वायुसेना की ओर से कहा गया कि टीकाकरण एक सेवा आवश्यकता है और सशस्त्र बलों के लिए व्यक्तिगत विकल्प नहीं है, जैविक हथियारों के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए टीके की खुराक लेना आवश्यक है.

कोर्ट ने एससी महिला की नियुक्ति पर गुजरात लोकसेवा आयोग के फ़ैसले को अवैध बताया

याचिकाकर्ता महिला ने जीपीएससी के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें बिक्री कर विभाग में सहायक आयुक्त के पद पर नियुक्ति दी गई थी, जो उनकी तीसरी वरीयता थी, जबकि सामान्य वर्ग में 110वीं रैंक लाने वाली महिला की पुलिस उपाधीक्षक के पद पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई थी, जो याचिकाकर्ता की पहली वरीयता थी.

हाईकोर्ट ने नए धर्मांतरण रोधी क़ानून पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात इकाई ने गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम 2021 के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है. उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले की वर्चुअल सुनवाई के दौरान कहा कि संशोधित क़ानून में अस्पष्ट शर्तें हैं, जो विवाह के मूल सिद्धांतों और संविधान के अनुच्छेद 25 में निहित धर्म के प्रचार, आस्था और अभ्यास के अधिकार के ख़िलाफ़ है.

भारत में चीन जैसा अनुशासन संभव नहीं, स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने पर ध्यान दें: गुजरात हाईकोर्ट

अदालत ने कहा कि गुजरात सरकार को इस बात को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के ढांचे का विकास करना चाहिए कि महामारी की तीसरी या चौथी लहर आ सकती है, क्योंकि लोग मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और स्वच्छता जैसे नियमों का पालन नहीं करने जा रहे. अदालत ने ब्लैक फंगस के इलाज के लिए अस्पतालों को संबंधित इंजेक्शन के वितरण को लेकर राज्य सरकार की अधिसूचना अस्पष्ट और दोषपूर्ण बताया है.

केंद्र और राज्य के बीच रेमडेसिविर को लेकर समन्वय की कमी: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर गुजरात की मांग क्यों नहीं पूरी की जा रही है. हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने से राज्य को प्रतिदिन करीब 16,000 शीशियों की आपूर्ति जारी रखी है, जबकि मांग प्रतिदिन लगभग 25,000 शीशियों की थी.

गुजरात सरकार ने डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन को मृत्यु प्रमाण पत्र और मौत के आंकड़ों में फ़र्क़ की वजह बताया

गुजराती दैनिक दिव्य भास्कर ने एक रिपोर्ट में बताया है कि राज्य में 1 मार्च से 10 मई के बीच 1.23 लाख मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, लेकिन इस बीच सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 4,218 कोरोना मौतें दर्ज हैं. इस पर गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने कहा है कि सर्टिफिकेट के आधार पर मौतों की संख्या बताना सही नहीं है.

गुजरात: कथित तौर पर कोविड के ख़ात्मे के लिए दो धार्मिक जुलूस निकाले गए, क़रीब 70 लोग गिरफ़्तार

बीते चार दिनों में गुजरात के दो गांवों में ‘कोविड-19 ख़त्म करने’ के लिए धार्मिक जुलूस निकालने के आरोप में पुलिस ने 69 लोगों को गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने कहा कि गांव के लोगों के एक वर्ग का मानना था कि उनके स्थानीय देवता के मंदिर पर पानी डालने से कोविड-19 का ख़ात्मा हो सकता है.

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा- कोविड संक्रमण को रोकने के लिए उठाए गए क़दम ‘पर्याप्त नहीं’

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि यह सच है कि राज्य सरकार द्वारा क़दम उठाए गए हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह पर्याप्त नहीं है और वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आगे भी जनता को महामारी के गंभीर प्रभाव के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है. वर्तमान परिस्थितियों में और अधिक प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचा जा सकता है.

कोविड-19 से निपटने का गुजरात सरकार का तरीका संतोषजनक नहीं है: हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने के राज्य सरकार के तरीके पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि डॉक्टरों के मरीज़ों को नहीं देखने के कारण अस्पतालों के बाहर संक्रमितों की मौत हो रही है. हाईकोर्ट ने अहमदाबाद में निर्धारित कोविड-19 अस्पतालों पर सवाल उठाया, जो केवल ‘108’ एंबुलेंस में आने वाले मरीज़ों को ही भर्ती कर रहे थे और निजी वाहनों में लाए गए मरीज़ों की अनदेखी कर रहे थे.