Hindi

श्रीराम लागू. (फोटो साभार: ट्विटर)

प्रख्यात अभिनेता श्रीराम लागू का निधन

कलाकार होने के अलावा प्रशिक्षित ईएनटी सर्जन श्रीराम लागू ने विजय तेंदुलकर, विजय मेहता और अरविंद देशपांडे के साथ आज़ादी के बाद महाराष्ट्र में रंगमंच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.

(फोटो: पीटीआई)

क्या उर्दू-फ़ारसी के निकलने से क़ानूनी भाषा आम लोगों के लिए आसान हो जाएगी?

हिंदी से फ़ारसी या अरबी के शब्दों को छांटकर बाहर निकाल देना असंभव है. एक हिंदी भाषी रोज़ाना अनजाने ही कितने फ़ारसी, अरबी या तुर्की के शब्द बोलता है, जिनके बिना किसी वाक्य की संरचना तक असंभव है.

Allison Busch

एलिसन बुश के स्नेह ने यह विश्वास दिलाया कि अब भी इस संसार में मन से रिश्ते बन सकते हैं

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हिंदी साहित्य पढ़ाने वाली प्रोफेसर एलिसन बुश बीते दिनों कैंसर से लड़ते हुए ज़िंदगी की लड़ाई हार गईं. हिंदी साहित्य में पीएचडी करने वाली बुश ने अपनी ‘पोएट्री ऑफ किंग्स’ नाम की किताब में रीतिकालीन साहित्य पर नए ढंग से विचार किया था.

Nagpur: Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) chief Mohan Bhagwat addresses during the 'Vijayadashami Utsav 2019', at RSS headquarter in Nagpur, Tuesday, Oct. 8, 2019. (PTI Photo)(PTI10_8_2019_000080B)

लिंचिंग एक साज़िश है, भारत को बदनाम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि संघ का नाम लेकर, हिंदुओं का नाम लेकर एक षडयंत्र चल रहा है, यह सबको समझना चाहिए. लिंचिंग कभी हमारे देश में रहा नहीं, आज भी नहीं है.

(फोटो साभार: ILO in Asia and the Pacific, CC BY-NC-ND 2.0)

हिंदी बनाम अन्य भाषाओं की लड़ाई में क्या हम प्रतिभाओं का गला घोंट रहे हैं?

जिस देश में यह कहावत हो कि ‘कोस-कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वाणी’, वहां हिंदी बनाम तमिल या अन्य प्रांतीय भाषाओं का विवाद ही ग़लत है.

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मीडिया बोल: अमित शाह का हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने का सुझाव कितना सही है?

वीडियो: हिंदी दिवस के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की अपील की थी. मीडिया बोल के इस अंक में उर्मिलेश इसी मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार बिराज स्वैन, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद और पत्रकार राहुल देव के साथ चर्चा कर रहे हैं.

गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अमित शाह की हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की अपील, विपक्षी नेताओं ने जताया विरोध

हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अनेक भाषा और बोलियां हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, परंतु ज़रूरत है कि देश की एक भाषा हो, जिसके कारण विदेशी भाषाओं को जगह न मिले.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

‘हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान’ के नारे ने हिंदी को वो कलंक दिया, जो अब तक नहीं मिट पाया है

आज हिंदी अपराध-बोध की भाषा है. इस पर यह गंभीर आरोप है कि इसने देश की अनेक बोलियों और भाषाओं का बेरहमी से सरकार की शह पर कत्ल किया है.

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हिंदी में छुआछूत की वही बीमारी है जो हमारे समाज में है

हिंदी दिवस पर विशेष: जितना बोझ आप बच्चों पर लाद रहे हैं डेढ़ लाख शब्दों का स्त्रीलिंग पुल्लिंग याद करने का, उतना मेहनत में बच्चा रॉकेट बना देगा.

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जब प्रेमचंद ने महात्मा गांधी का भाषण सुनकर सरकारी नौकरी छोड़ दी थी…

वह असहयोग आंदोलन का ज़माना था, प्रेमचंद गंभीर रूप से बीमार थे. बेहद तंगी थी, बावजूद इसके गांधी जी के भाषण के प्रभाव में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

बजट 2019ः गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित

नई योजना के तहत ऐसे स्थानों पर उर्दू शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी, जहां की 25 फीसदी से अधिक आबादी उर्दू बोलती है. हालांकि, देश में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई योजना के लिए इस साल बजट आवंटित नहीं किया गया.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

हिंदी सहित छह क्षेत्रीय भाषाओं में अपने फैसले का अनुवाद उपलब्ध कराएगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट हिंदी के अलावा जिन भाषाओं में अपने फैसलों का अनुवाद उपलब्ध कराएगा उनमें असमिया, कन्नड़, मराठी, उड़िया और तेलुगू शामिल हैं.

Shivkuti Lal Verma Pehleebar wordpress com

शिवकुटी लाल वर्मा: फैक्ट्रियों, मिलों की इमारतों के बीच किसी झोपड़पट्टी की ख़ाली ज़मीन हूं मैं

शिवकुटी लाल वर्मा ने अपनी कविता में वह सब महसूस किया, जिसे देश की दलित, पीड़ित व शोषित जनता आज तक महसूस करती आई है. उन्होंने न केवल इसे महसूस किया बल्कि इसे लेकर लगातार सवाल भी किए.

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शिव प्रसाद गुप्त: गांधी ने जिन्हें राष्ट्ररत्न कहा था, लोगों ने उन्हें भुला दिया

वाराणसी के समाजसेवी शिवप्रसाद गुप्त को आज उनके शहर के बाहर कोई जयंती या पुण्यतिथि पर भी याद नहीं करता, लेकिन कभी देश की आज़ादी की लड़ाई के साथ समाज के उत्थान में उनके योगदान के चलते महात्मा गांधी उन्हें राष्ट्ररत्न कहा करते थे.

फोटो साभार: Harish Sharma/Pixabay

सत्ता के मन में उपजे हिंदी प्रेम के पीछे राजनीति है, न कि भाषा के प्रति लगाव

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पहले मसौदे में हिंदी थोपने की कथित कोशिश पर मचे हंगामे को देखते हुए एक बात साफ है कि इस हो-हल्ले का हिंदी से कोई वास्ता नहीं है. हिंदी थोपने या ख़ारिज करने की इच्छा का संबंध हिंदी राष्ट्रवाद, धर्म, जाति और अंग्रेज़ी से एक असहज जुड़ाव जैसी बातों से हो सकता है, मगर इसका संबंध उस भाषा से कतई नहीं है, जिसका नाम हिंदी है.

Mamta Kalia The Wire

‘अपनी रचनाओं में स्त्रियों के लिए जो टैगोर, शरतचंद ने किया, वो अब के लेखक नहीं कर पाए हैं’

साक्षात्कारः हिंदी की वरिष्ठ लेखिका और साहित्यकार ममता कालिया का कहना है कि स्त्री विमर्श के लिए हमें सिमोन द बोउआर तक पहुंचने से पहले महादेवी वर्मा को पढ़ना पड़ेगा, जिन्होंने 1934 में ही लिख दिया था कि हम स्त्री हैं. हमें न किसी पर जय चाहिए, न पराजय, हमें अपनी वह जगह चाहिए जो हमारे लिए निर्धारित है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: संस्कृत में भी जारी होंगी सरकारी विज्ञप्तियां और मुख्यमंत्री के भाषण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि उनके भाषण और मीडिया को दिए जाने वाले संदेश हिंदी, अंग्रेज़ी के अलावा संस्कृत में भी तैयार किए जाएं और इसके लिए भाषा विशेषज्ञ रखे जाएं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

हिंदी भाषा विवाद: नई शिक्षा नीति के संशोधित मसौदे पर दो सदस्यों ने जताई आपत्ति

नई शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लेकर उठे विवाद के बीच सोमवार को मसौदा नीति का संशोधित प्रारूप जारी किया गया, जिसमें ग़ैर-हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी अनिवार्य किए जाने का उल्लेख नहीं है.

Cotton Farmers Reuters

महाराष्ट्र: कपास किसानों की कब्रगाह बन चुके पश्चिमी विदर्भ का चुनावी हाल

महाराष्ट्र के पश्चिमी विदर्भ की चार यवतमाल-वासिम, अकोला, बुलढाणा और अमरावती सीटों की स्थिति. महाराष्ट्र का यह वो क्षेत्र, जहां बुलेट ट्रेन की कोई चर्चा ही नहीं. नाराज काश्तकारों में किसान सम्मान योजना के प्रति भी ज़्यादा रुचि नहीं. भंवर जांगिड़ की रिपोर्ट.

नामवर सिंह. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन/फेसबुक)

हजारी प्रसाद द्विवेदी के बाद सबसे यशस्वी आलोचक नामवर जी थे: मैनेजर पांडेय

वीडियो: लेखक और आलोचक नामवर सिंह का बीते दिनों निधन हो गया, उनसे जुड़ी यादों को साझा कर रहे हैं साहित्यकार और आलोचक मैनेजर पांडेय.

नामवर सिंह. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन/फेसबुक)

नामवर सिंह: एक दौर की विदाई

आलोचना को सामान्यतया एक नीरस अकादमिक काम माना जाता है और आलोचकों को रचनाकारों की तरह बड़ी संख्या में प्रशंसक पाठक नसीब नहीं होते. नामवर सिंह इसके विराट अपवाद थे.

नामवर सिंह. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन/फेसबुक)

नामवर सिंह को क्यों लगता था कि हिंदी समाज को अपने साहित्यकारों से लगाव नहीं है

एक साक्षात्कार में नामवर सिंह ने कहा था कि विदेश में दो लोग जब बात करते हैं तो कुछ देर के अंदर ही उनकी बातचीत में मिल्टन, शेक्सपियर, चेखव के उद्धरण आने लगते हैं, लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं दिखता. हिंदी में बहुत से जनकवि हैं लेकिन हिंदी जगत में उनकी रचनाएं उस रूप में प्रचारित नहीं होतीं.

कृष्णा सोबती (जन्म- 18 फरवरी 1925, अवसान- 25 जनवरी 2019)

शासकों द्वारा दिए गए सम्मान से कोई बड़ा नहीं हो जाता: कृष्णा सोबती

साक्षात्कार: बीते दिनों ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मानित साहित्यकार कृष्णा सोबती का निधन हो गया. उनके चर्चित उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’ के पचास साल पूरे होने पर साल 2016 में उनसे हुई बातचीत.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

केंद्रीय विद्यालयों में ‘हिंदू प्रार्थनाओं’ के ख़िलाफ़ याचिका को संविधान पीठ के पास भेजा

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थनाओं पर हिंदू धर्म से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि बच्चों की आस्था और विश्वास का ख़्याल किए बिना इन्हें थोपा जा रहा है.

वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णा सोबती. (फोटो साभार: ranjana-bisht.blogspot.in)

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार कृष्णा सोबती का निधन

कृष्णा सोबती को साल 2017 में साहित्य के क्षेत्र में दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है. 2015 में देश में असहिष्णुता के माहौल से नाराज़ होकर उन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस लौटा दिया था.

Chitra Mudgal Rahman Abbas Sahitya Academy

हिंदी में चित्रा मुद्गल और उर्दू में रहमान अब्बास समेत 24 लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार

चित्रा मद्गल को उनके उपन्यास ‘पोस्ट बॉक्स नं. 203-नाला सोपारा’, रहमान अब्बास को उनके उर्दू उपन्यास ‘रोहज़िन’ और अंग्रेजी में अनीस सलीम को उनके उपन्यास ‘द ब्लाइंड लेडीज़ डीसेंडेंट्स’ के लिए साहित्य अकादमी से नवाज़ा जाएगा.

स्वच्छ भारत मिशन (फोटो: swachhbharatmission.gov.in)

खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बावजूद गुजरात में लाखों शौचालयों की ज़रूरत: आरटीआई

केंद्र सरकार ने इस साल फरवरी में लोकसभा को बताया था कि गुजरात सहित 11 राज्यों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ घोषित किया गया है.

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‘ज़बान वो ख़त्म होती है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी से न निकली हो’

वीडियो: उर्दू को अवाम तक पहुंचाने में देवनागरी और हिंदी की भूमिका, हिंदी में नुक़्ते के चलन और उर्दू के भविष्य पर विनोद दुआ से द वायर उर्दू के फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

साहित्यकार विष्णु खरे. (जन्म: 9 फरवरी 1940 - अवसान: 19 सितंबर 2018) (फोटो साभार: हिंदी कविता/यूट्यूब)

विष्णु खरे: एक सांस्कृतिक योद्धा जो आख़िर तक वैचारिक युद्ध लड़ता रहा

विष्णु खरे ने न सिर्फ एक नई तरह की भाषा और संवेदना से समकालीन हिंदी कविता को नया मिज़ाज़ दिया बल्कि उसे बदला भी. एक बड़े कवि की पहचान इस बात से भी होती है कि वह पहले से चली आ रही कविता को कितना बदलता है. और इस लिहाज़ से खरे अपनी पीढ़ी और समय के एक बड़े उदाहरण हैं.

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मीडिया बोल, एपिसोड 67: हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज

मीडिया बोल की 67वीं कड़ी में उर्मिलेश हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज पर पॉलिटिकल साइंटिस्ट सविता सिंह और जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार से चर्चा कर रहे हैं.

Sarveshwar Dayal Saxena Photo Rajkamal Publication

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: मैं साधारण हूं और साधारण ही रहना चाहता हूं, आतंक बनकर छाना नहीं चाहता

जिस तरह केन नदी केदारनाथ अग्रवाल के संसार में बहती दिखती है ठीक वैसे ही कुआनो सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के संसार में बह रही है. हम सभी के संसार में कोई न कोई भुला दी गई नदी बह रही है. सर्वेश्वर बस इसलिए अलग थे कि वह उस नदी और उसके पास लगने वाले फुटहिया बाज़ार को कभी भूले नहीं. वहां मुर्दा जलते और अधजले रह जाते. धोबी कपड़े धोते. औरतें छुपकर सिगरेट पीतीं.

New Delhi: HRD Minister Prakash Javadekar speaks during a press conference at BJP Headquarter in New Delhi, on Friday. PTI Photo by Manvender Vashist(PTI3_23_2018_000241B)

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में फैकल्टी के 5,600 तो आईआईटी में 2,800 से ज़्यादा पद खाली: केंद्र सरकार

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार, एनआईटी और भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईईएसटी) में 1870 पद खाली हैं जबकि आईआईएम संस्थानों में 258 पद खाली हैं.

(फोटो: सुमन शेखर)

दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में पढ़ाई करने आए विद्यार्थी प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म के छात्र-छात्राओं का आरोप है कि मोटी फीस वसूलने के बाद भी प्रशासन उन्हें बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराने में असफल रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: क़र्ज़ से परेशान किसान ने परिवार संग की ख़ुदकुशी

अपेक्षित फसल न होने से हताश किसान मुथुसामी ने अपने 2 बच्चों की हत्या कर 70 वर्षीय मां संग फांसी लगा ली. मुथुसामी पर करीब 13 लाख रुपये का क़र्ज़ बकाया था.

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प्रेमचंद का ‘सूरदास’ आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है

1925 में आए प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि में किसान सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ खड़े हो जाते हैं. जो बात रंगभूमि में सूरदास ने कहने की कोशिश की थी, वही आज जब कोई किसान कह रहा है तो उसे निशाना साधकर गोली मारी जा रही है.

Premchand

प्रेमचंद को क्यों पढ़ें

प्रेमचंद की प्रासंगिकता का सवाल बेमानी जान पड़ता है, लेकिन हर दौर में उठता रहा है. अक्सर कहा जाता है कि अब भी भारत में किसान मर रहे हैं, शोषण है, इसलिए प्रेमचंद प्रासंगिक हैं. प्रेमचंद शायद ऐसी प्रासंगिकता अपनी मृत्यु के 80 साल बाद न चाहते.