Hindutva

Hyderabad: Congress MP Shashi Tharoor addresses a press conference at Gandhi Bhawan, in Hyderabad, Tuesday, Oct 2, 2018. (PTI Photo) (PTI10_2_2018_000215B)

कांग्रेस का कर्तव्य धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना है, सॉफ्ट हिंदुत्व से नहीं टलेगा संकट: थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि भाजपा की सफलता से भयभीत होने के बजाय कांग्रेस के लिए बेहतर होगा कि वह उन सिद्धांतों के लिए खड़ी हो, जिन पर उसने हमेशा ही विश्वास किया है.

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

असहिष्णुता और हिंसा की घटनाओं से राजनीतिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में असिहष्णुता, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, कुछ समूहों द्वारा पैदा की गई घृणा तथा भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने से जुड़ी हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अगर तिरंगा फहराना ही देशभक्ति है तो संघ पंद्रह साल पहले ही देशभक्त हुआ है

आज़ादी के 72 साल: क्या 2002 के पहले तिरंगा भारतीय राष्ट्र का राष्ट्रध्वज नहीं था या फिर आरएसएस खुद अपनी आज की कसौटी पर कहें तो देशभक्त नहीं था?

Srinagar Police Reuters

कश्मीर के भूगोल पर तो कब्ज़ा किया जा सकता है, पर कश्मीरियत का क्या होगा?

असुरक्षा का भाव समाज के सैन्यकरण की स्वीकृति का अनिवार्य तत्व होता है. सांप्रदायिक राजनीति उसके भीतर भी असुरक्षा बोध खड़ा करती है जिसके पक्ष में वह दिखना चाहती है और उसके भीतर भी, जिसे वह शत्रु के रूप में चित्रित करती है. कश्मीर में असुरक्षा की भावना का इस्तेमाल कश्मीरी हिंदुओं और कश्मीरी मुसलमानों दोनों के ख़िलाफ़ होता आ रहा है.

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अगर यह हिंदू राष्ट्र नहीं है तो और क्या है?

उदारवादी बौद्धिक जमात के लिए भारत भले ही अब तक हिंदू राष्ट्र न बना हो, लेकिन गलियों में घूमनेवाले हिंदुत्ववादियों के लिए यह एक हिंदू राष्ट्र है. इसके लक्षण भले छिपे हुए हों, लेकिन इसके समर्थक और पीड़ित, दोनों ही बहुत ही स्पष्ट तरीके से इसका अनुभव कर सकते हैं.

Home minister Amit Shah outside parliament. Image: PTI

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले को लेकर किए अमित शाह के दावों में कितनी सच्चाई है?

गृहमंत्री अमित शाह का दावा है कि पिछली सरकार ने हिंदू धर्म को आतंकवाद से जोड़ने के लिए असली दोषियों को छोड़ दिया था, यदि ऐसा है तो एनआईए उन्हें पकड़ने की दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है?

Rodolfo_Acquaviva_Dharma Wikimedia Commons

हिंदुत्व भारत में धर्म और इस्लाम के एक-दूसरे पर पड़े प्रभाव की अनदेखी करता है

ऐतिहासिक नज़रिये से देखें, तो इस्लाम और हिंदू धर्म का आमना-सामना दोनों के लिए फायदेमंद ही रहा है.

Varanasi: BJP workers celebrate party's lead in the Lok Sabha elections 2019, in Varanasi, Thursday, May 23, 2019. (PTI Photo) (PTI5_23_2019_000087B)

विपक्ष को विनम्रता से स्वीकारना चाहिए कि वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर विकल्प देने में असमर्थ रहे हैं

लोकसभा चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि तात्कालिक आर्थिक स्थितियां परिणामों को निर्धारित करनेवाला एकमात्र कारक नहीं होतीं, लोग अपने निर्णय उपलब्ध विकल्पों के आधार पर तय करते हैं.

Not In My Name PTI Photo

क्या हिंदुत्ववादियों का भारतीय मुसलमानों को लेकर फैलाया गया झूठ हक़ीक़त में बदल सकता है

2014 के बाद से बिना किसी प्रमाण के देश के मुसलमानों को हिंदू-विरोधी और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी बताया जा रहा है. लेकिन डर है कि अगले पांच सालों में उनमें से कुछ ऐसे चुनाव कर सकते हैं, जो उनके समुदाय के बारे में गढ़े गए झूठ को वास्तविकता में बदल देंगे.

New Delhi: Bhartiya Janata Party workers welcome Prime Minister Narendra Modi as he, along with BJP President Amit Shah, arrives at the party headquarters to celebrate the party's victory in the 2019 Lok Sabha elections, in New Delhi, Thursday, May 23, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI5_23_2019_000482B)

‘बहुमत’ की खोज

पूर्व में बहुमत अंकगणित से हासिल होता था, जो सामाजिक समूहों को एक साथ जोड़कर होता था, यह बहुमत सिर्फ वैचारिक मंच पर ही नहीं, बल्कि सत्ता में सभी की भागीदारी का वादा करके हासिल होता था. 2014 में भाजपा ने ख़ुद को चुनावी अंकगणित से दूर कर लिया और ध्रुवीकरण की प्रक्रिया से राष्ट्रीय बहुमत हासिल किया.

(फोटो: पीटीआई)

जय श्रीराम का नारा राम की महिमा का उद्घोष नहीं, दबंगई का ऐलान है

लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि उनका राम अभियान धार्मिक नहीं था. वह राम के नाम की आड़ में एक मुसलमान घृणा से युक्त राजनीतिक हिंदू के निर्माण का अभियान था. जय श्रीराम इसी गिरोह का एक राजनीतिक नारा है. इस नारे का राम से और राम के प्रति श्रद्धा से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं. आप जब जय श्रीराम सुनें तो मान लें कि आपको जय आरएसएस कहने की और सुनने की आदत डाली जा रही है.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर और दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

प्रज्ञा ठाकुर के माध्यम से भाजपा किसकी आकांक्षा का प्रतिनिधित्व कर रही है

क्या वाकई देश का हिंदू अब इस अवस्था को प्राप्त कर चुका है जहां उसके इंसानी और नागरिक बोध का प्रतिनिधित्व प्रज्ञा ठाकुर जैसों के रूप में होगा?

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

इस चुनाव में मुसलमानों के लिए क्या है?

आज भारतीय राजनीति एक ऐसे दौर में है जब कोई भी राजनीतिक पार्टी मुस्लिम समुदाय की बात नहीं करना चाहती. वे राजनीतिक रूप से अछूत बना दिए गए हैं. अब उनका इस्तेमाल बहुसंख्यक आबादी को वोट बैंक में तब्दील करने के लिए किया जा रहा है.

रामदास अठावले. (फोटो साभार: ट्विटर)

मालेगांव धमाके में एटीएस के पास प्रज्ञा के ख़िलाफ़ सबूत थे, टिकट दिया जाना गलत: रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि लोगों को बचाने के लिए आतंकियों से लड़ते हुए करकरे शहीद हो गए थे. मैं करकरे को लेकर साध्वी के बयान से सहमत नहीं हूं. हम इसकी आलोचना करते हैं. यह फैसला करना अदालत का काम है कि क्या सही है और क्या गलत. अगर हमारी पार्टी की बात होती तो हम उन्हें नहीं खड़ा करते.

Congress President Rahul Gandhi with senior party leaders Sonia Gandhi and Manmohan Singh release party's manifesto for Lok Sabha polls 2019 in New Delhi on 2 April 2019. (Photo | PTI)

कांग्रेस का घोषणा-पत्र: चाय पर चर्चा से भली आय पर चर्चा

कांग्रेस का घोषणा-पत्र कम से कम इस अर्थ में बहुत सार्थक है कि तात्कालिक रूप से ही सही, देश के राजनीतिक विमर्श की दशा व दिशा बदलने के संकेत मिल रहे हैं.

Ayodhya: Congress General Secretary and Uttar Pradesh - East incharge Priyanka Gandhi Vadra greets her supporters during a roadshow on the last day of her 3-day campaign ahead of Lok Sabha elections, in Ayodhya, Friday, March 29, 2019. (PTI Photo/Nand Kumar) (PTI3_29_2019_000138B)

प्रियंका गांधी के अयोध्या जाने से भाजपा क्यों बौखलाई हुई है

बीते दिनों अयोध्या स्थित हुनमानगढ़ी मंदिर में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के जाने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कई नेताओं ने सवाल उठाया है.

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उर्दू वाला चश्मा: भारत की आत्मा को बचाने की लड़ाई

उर्दू वाला चश्मा की इस कड़ी में नूपुर शर्मा ज़िया उस सलाम की किताब के ज़रिए बहुसंख्यक (हिंदुत्व) की भीड़ द्वारा मुस्लिमों की पीट-पीटकर हो रही हत्या की घटनाओं पर चर्चा कर रही हैं.

साहित्यकार नयनतारा सहगल (फाइल फोटो: Wikimedia Commons)

हमें आज़ादी और फासीवाद के बीच चुनाव करने की जरूरत है: नयनतारा सहगल

लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा कि आज हम एक ऐसी स्थिति में हैं जो कि संवैधानिक तौर पर एक लोकतंत्र है लेकिन उसमें तानाशाही के सभी गुण मौजूद हैं.

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आम चुनावों में पहली बार कश्मीर मुद्दे का पूरी तरह राजनीतिकरण होगा

पुलवामा हमले के बाद हालात ऐसे हैं कि भाजपा इसका राजनीतिक लाभ लेने के लोभ से बच ही नहीं सकती. नरेंद्र मोदी के लिए इससे बेहतर और क्या होगा कि नौकरियों की कमी और कृषि संकट से ध्यान हटाकर चुनावी बहस इस बात पर ले आएं कि देश की रक्षा के लिए सर्वाधिक योग्य कौन है?

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

गोरक्षा के नाम पर पिछले तीन साल में करीब 44 लोगों की हत्या हुई: रिपोर्ट

न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच समूह ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारत में कथित गोरक्षकों द्वारा मारे गए 44 लोगों में से 36 लोग मुस्लिम समुदाय से थे.

कांग्रेस नेता हरीश रावत. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस सत्ता में आएगी तभी राम मंदिर बनेगा: हरीश रावत

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि भाजपा बेईमान लोगों की पार्टी है जिन्हें न तो नीतियों की परवाह है और न ही मर्यादा की, वे मर्यादा पुरुषोत्तम राम के भक्त कैसे हो सकते हैं.

साहित्यकार नयनतारा सहगल (फाइल फोटो: Wikimedia Commons)

मराठी साहित्य सभा: आयोजकों ने साहित्यकार नयनतारा सहगल को कार्यक्रम में आने से मना किया

यवतमाल में 11 जनवरी से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन अंग्रेज़ी की प्रख्यात लेखिका नयनतारा सहगल को करना था. रविवार को आयोजकों ने ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देते हुए उनका आमंत्रण वापस ले लिया.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

सप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाली

अगला आदेश तीन जजों की एक उपयुक्त पीठ द्वारा पारित किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की समयबद्ध सुनवाई की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी.

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अयोध्या विवाद न दो धर्मों का है और न मंदिर-मस्जिद का

फैज़ाबाद से निकलने वाले हिन्दी दैनिक जनमोर्चा के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह की किताब ‘अयोध्या- रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद का सच’ बताती है कि अयोध्या विवाद में सारी पेचीदगियां राजनीति द्वारा अपनी स्वार्थ साधना के लिए इस मुद्दे के बेजा इस्तेमाल से पैदा हुई हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए

‘अगर आप एक नेता हैं और आपकी नज़रों के सामने बड़ी संख्या में लोगों का क़त्ल किया जाता है, तब आप लोगों की ज़िंदगी बचा पाने में नाकाम रहने की जवाबदेही से मुकर नहीं सकते.’

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो साभार: पीटीआई/फेसबुक)

मध्य प्रदेश: भाजपा और कांग्रेस की हिंदुत्ववादी सियासत के बीच विकास के मुद्दे कहीं गुम से गए हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही मध्य प्रदेश को हिंदुत्व की प्रयोगशाला में तब्दील कर दिया है. विस्थापन, आदिवासी अधिकार, कुपोषण, भुखमरी, खेती-किसानी जैसे मुद्दों पर कोई भी बात नहीं कर रहा है.

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हिंदुत्व विचारक राजीव मल्होत्रा और स्वपन दासगुप्ता जेएनयू में मानद प्रोफेसर नियुक्त

हिंदुत्ववादी विचारक राजीव मल्होत्रा के साथ पत्रकार से राज्यसभा सांसद बने भाजपा समर्थक स्वपन दासगुप्ता भी विश्वविद्यालय द्वारा मानद प्रोफेसर बनाए गए हैं.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फोटो: Shivraj Singh Chouhan/facebook)

शिवराज सिंह चौहान: ‘पप्पू’ से ‘मामा’ तक का सफ़र

विशेष रिपोर्ट: बाहरी तौर पर शिवराज सिंह चौहान आरएसएस के तय मानकों से ज़्यादा सेकुलर लगते हैं, लेकिन निजी रूप में वे नरेंद्र मोदी की तरह कट्टर हिंदुत्व में विश्वास रखते हैं.

फोटो साभार: cobrapost.com

दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया कोबरापोस्ट की डॉक्यूमेंट्री सार्वजनिक करने से रोकने वाला आदेश

बीते मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने कोबरापोस्ट के ऑपरेशन- 136 पर दैनिक भास्कर समूह की याचिका के बाद रोक लगा दी थी. शुक्रवार को इस आदेश को रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि कथित अपमानजनक सामग्री दुर्भावनापूर्ण या झूठी है, तब तक एकतरफा रोक का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks during a book release function in New Delhi, Thursday, Sep 20, 2018. (PTI Photo/Subhav Shukla) (PTI9_20_2018_000153B)

संघ से संवाद: दक़ियानूसी विचारों को नई पैकेजिंग के ज़रिये आकर्षक बनाने का पैंतरा

वे सभी लोग जो नए कलेवर में प्रस्तुत संघ को लेकर प्रसन्न हो रहे हैं, उन्हें यह जानना होगा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब संघ इस क़वायद में जुटा है. उन्हें 1977 के अख़बारों को पलट कर देखना चाहिए जब यह बात फैलाई जा रही थी कि संघ अब अपनी कतारों में मुसलमानों को भी शामिल करेगा. लेकिन यह शिगूफ़ा साबित हुआ.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks on the last day at the event titled 'Future of Bharat: An RSS perspective', in New Delhi, Wednesday, Sept 19, 2018. (PTI Photo) (PTI9_19_2018_000185B)

भागवत जी, आपकी कथनी के करनी में बदल जाने तक उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता

संघ प्रमुख के हालिया बयानों की गंभीरता और विश्वसनीयता को इस कसौटी पर परखा जाना चाहिए कि आरएसएस से संबद्ध संगठन अपना आगामी चुनाव अभियान किस तरह से चलाते हैं.

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बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद से भारत की धर्मनिरपेक्षता को नुकसान पहुंच रहा है: रिपोर्ट

अमेरिका की एक संसदीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में हिंदू राष्ट्रवाद उभरता राजनीतिक बल है और देश की धार्मिक स्वतंत्रता पर नए हमलों की वजह बन रहा है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi at the concluding session of the National Executive Committee meeting of BJP's all wings (morchas)' at Civic Centre in New Delhi, on Thursday. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI5_17_2018_000163B)

हिंदुत्व की विचारधारा से और लोगों को जोड़ने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें: मोदी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू समुदाय से एकजुट होकर मानव कल्याण के लिए काम करने की अपील की.

Demonstrators from the Jat community sit on top of a truck as they block the Delhi-Haryana national highway during a protest at Sampla village in Haryana, India, February 22, 2016. REUTERS/Adnan Abidi

अब पराया लगता है यह देश

हम देश के एक छोटे से क़स्बे में पले-बढ़े लेकिन उस दौर में लोगों का दिलो-दिमाग राजनीति ने इतना छोटा नहीं था, जबकि देश का विभाजन हुए बहुत अरसा भी नहीं बीता था. नफ़रत की ऐसी आग नहीं लगी हुई थी, जैसी आज लगी है.

फोटो: पीटीआई

न चौरासी के दंगों में कांग्रेस का हाथ था, न 2002 में भाजपा का!

राहुल गांधी की कांग्रेस को सिख दंगों से अलग करने की कोशिश वैसी ही है, जैसी मोदी ने विकास के नारे में गुजरात के दाग़ छुपाकर की थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

हमें वाजपेयी के बिना ‘मुखौटे’ वाले असली चेहरे को नहीं भूलना चाहिए

1984 के राजीव गांधी और 1993 के नरसिम्हा राव की तरह वाजपेयी इतिहास में एक ऐसे प्रधानमंत्री के तौर पर भी याद किए जाएंगे, जिन्होंने पाठ तो सहिष्णुता का पढ़ाया, मगर बेगुनाह नागरिकों के क़त्लेआम की तरफ़ से आंखें मूंद लीं.

S Gurumurthy Rediff PTI Featured

मोदी सरकार में एस. गुरुमूर्ति होने के मायने

हाल ही में रिज़र्व बैंक के बोर्ड में शामिल हुए स्वामीनाथन गुरुमूर्ति की नरेंद्र मोदी के नोटबंदी जैसे आर्थिक नीति संबंधी फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका रही है.