India

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मोदी के कार्यकाल में ‘पिंक रिवोल्यूशन’ और मज़बूत, मांस निर्यात 17 हज़ार टन बढ़ा

प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने मांस निर्यात को लेकर यूपीए सरकार पर हमला बोला था, लेकिन ख़ुद उनके कार्यकाल में मांस निर्यात बढ़ गया है.

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क्या चाइनीज़ सामान का विरोध करने वाले चीनी निवेश का विरोध करेंगे?

चीन के साथ कारोबारी रिश्तों को सरकार और अर्थव्यवस्था की कामयाबी के रूप में पेश किया जाता है लेकिन जब कभी दोनों देशों में विवाद होता है तब लड़ियों-फुलझड़ियों का विरोध शुरू हो जाता है.

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भारत विभाजन के पहले भी ऐसी ही भीड़-मानसिकता पैदा की गई थी

भीड़-मानसिकता को जब कोई सांप्रदायिक विचारधारा नियंत्रित करती है तो निश्चित रूप से नारे भले ही अखंड भारत के लगें, भीतर ही भीतर विभाजन की पूर्वपीठिका तैयार की जा रही होती है.

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‘चीन के अड़ियल रवैये का कारण उसकी नई अर्थव्यवस्था और मिलिट्री क्षमता है’

द वायर ने भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव पर पूर्व विदेश सचिव और चीन में भारतीय राजदूत रहीं निरूपमा राव से बातचीत की.

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पशुओं की ख़रीद-बिक्री संबंधी केंद्र की अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मवेशियों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी केंद्र की अधिसूचना पर मद्रास हाईकोर्ट की अंतरिम रोक बरकरार रहेगी और यह पूरे देश पर लागू होगी.

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मीडिया बोल, एपिसोड 05: सांप्रदायिक हिंसा और मीडिया कवरेज

मीडिया बोल की पांचवीं कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, द हूट की संपादक सेवंती निनान और एनडीटीवी की वरिष्ठ संपादक निधि कुलपति के साथ बंगाल के बसीरहाट और बादुरिया की सांप्रदायिक हिंसा के मीडिया कवरेज पर चर्चा कर रहे हैं.

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प्रोपेगैंडा तय करता है कि ख़ून का दाग़ भीड़ पर लगे और नेता निर्दोष नज़र आएं

भारत में सब हत्या करने वाली भीड़ को ही दोष दे रहे हैं. कोई नहीं जांच करता कि बिना आदेश के जो भीड़ बन जाती है उसमें शामिल लोगों का दिमाग़ किस ज़हर से भरा हुआ है.

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‘मोदी के पास दुनिया घूमने का समय है लेकिन दो साल से धरने पर बैठे सैनिकों से मिलने का वक्त नहीं है’

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को लेकर धरना देते हुए पूर्व सैनिकों को दो साल हो गए हैं. उनसे बातचीत.

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मीडिया बोल, एपिसोड 04: हिंदी मीडिया आज इतना बेदम और ग़ैर-पेशेवर क्यों?

मीडिया बोल की चौथी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, एनडीटीवी के सीनियर एंकर रवीश कुमार और वरिष्ठ पत्रकार विद्या सुब्रह्मण्यम के साथ हिंदी मीडिया के ग़ैर-पेशेवर रवैये पर चर्चा कर रहे हैं.

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क्या सिक्किम बॉर्डर पर भारत-चीन विवाद की असली वजह भूटान है?

चीन और भारत की सभी सरकारें ये स्वीकार करती आई हैं कि सिक्किम क्षेत्र में दोनों देशों के मध्य सीमा-निर्धारण हो चुका है.

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आपातकाल के 42 सालों के बाद एक बार फिर भारत का लोकतंत्र ख़तरे में है

‘एक ऐसी सरकार जो ‘सबका विकास’ के वादे पर सत्ता में आई थी, अब समाज के सबसे कमज़ोर लोगों को सुरक्षा देने को लेकर अनिच्छुक नज़र आ रही है.’

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मोदी के अमेरिका दौरे से देश को क्या हासिल हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया अमेरिका दौरे से देश को क्या कोई फायदा होगा? द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.  

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हमारे समाज को आजकल इतना गुस्सा क्यों आ रहा है?

तकनीक के अधकचरे इस्तेमाल ने दरअसल एक अधकचरी पढ़ी-लिखी हिंसा को भी जन्म दिया है. इस हिंसा का शिकार हर वैसा वर्ग और व्यक्ति हो रहा है, जो एक मदमाती सत्ता से सवाल पूछता है.

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मीडिया बोल, एपिसोड 03: भारतीय मीडिया में दलित पत्रकार कहां हैं?

मीडिया बोल की तीसरी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, जेएनयू में समाजशास्त्र के प्रोफेसर विवेक कुमार और वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह के साथ मीडिया में दलित पत्रकारों की स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: रॉयटर्स

भारतीय मीडिया में दलित पत्रकार क्यों नहीं हैं?

अंग्रेजी पत्रकारिता में आपको खुलेआम खुद को समलैंगिक बताने वाले लोग ज्यादा मिल जाएंगे, बनिस्बत ऐसे लोगों के जो खुल कर अपना दलित होना कुबूल करते हों.

Indian press photographers stand behind a fence for security reasons as they take pictures of Belgium's Queen Paola in a school in Mumbai November 6, 2008. Belgium's King Albert II and Queen Paola are on a official state visit to India.     REUTERS/Francois Lenoir   (INDIA)

‘मीडिया मालिकों ने पत्रकारों को बंधुआ मजदूर बना रखा है’

पत्रकारों के लिए जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफ़ारिश और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से बातचीत.

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‘अनशन में चतुर खिलाड़ी नहीं मरते. वे एक आंख मेडिकल रिपोर्ट पर और दूसरी मध्यस्थ पर रखते हैं’

हरिशंकर परसाई का व्यंग्य: बाबा ने शान्ति से कहा, ‘देवी, तू तो ‘इशू’ है. ‘इशू’ से थोड़े ही पूछा जाता है. गोरक्षा आंदोलन वालों ने गाय से कहां पूछा था कि तेरी रक्षा के लिए आंदोलन करें या नहीं.’

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‘किसानों के छोटे क़र्ज़ से दिक्कत है, उन उद्योगपतियों से नहीं जो हज़ारों करोड़ का लोन डकार जाते हैं’

कृषि, रोज़गार और महंगाई समेत दूसरे आर्थिक मसलों पर द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु से अमित सिंह की बातचीत.

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चित्रकथा: तस्वीरों के आईने में भारतीय नस्लवाद का चेहरा

फोटोग्राफर महेश शांताराम ने भारत में रह रहे अफ्रीकी छात्रों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव को कैमरे में कैद किया है.

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हमारे न्यूज़ चैनल तू-तू, मैं-मैं पर क्यों उतर आए हैं?

न्यूज़ चैनल हर विषय पर दलीय प्रवक्ताओं की भीड़ क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं? क्या वे राजनीतिक दलों, ख़ासकर सत्ताधारी दल को हर मुद्दे पर अपना फोरम मुहैया कर खुश रखने की कोशिश करते हैं?

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भारत में एक दशक में हुए एक करोड़ 20 लाख बाल विवाह: रिपोर्ट

साल 2011 की जनगणना में पाया गया कि तकरीबन 70 लाख लड़कों की शादी 21 साल से कम उम्र में जबकि लगभग 52 लाख लड़कियों का विवाह 18 साल से कम उम्र में हो गया था.

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साक्षात्कार: पुरुषों को यह समझना होगा कि पितृसत्ता ने उन्हें अमानवीय बना दिया है

भूमंडलीकरण, भारत-पाक संबंध, दक्षिण एशिया में नारीवाद व पितृसत्ता आदि विषयों पर समाजविज्ञानी व नारीवादी​ चिंतक कमला भसीन से विस्तृत बातचीत.

Harishankar Parsai The Wire Hindi

दूसरे देशों में गाय दूध के लिए होती है, हमारे यहां दंगा करने के लिए

जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलझा देना चाहिए. क्रांति की तरफ बढ़ती जनता को हम रास्ते में ही गाय के खूंटे से बांध देते हैं.

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भाजपाई मुख्यमंत्री पेमा खांडू बोले- मैं भी खाता हूं बीफ, इसमें कुछ ग़लत नहीं

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री खांडू ने कहा, ‘केंद्र सरकार को इस नोटिफिकेशन पर दोबारा सोचना चाहिए. पूरे नॉर्थ ईस्ट में आदिवासियों की अच्छी ख़ासी संख्या है और वे मांसाहारी हैं.’

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मद्रास उच्च न्यायालय ने पशुओं की ख़रीद-बिक्री संबंधी अधिसूचना पर रोक लगाई

उच्च न्यायालय ने वध के लिए पशुओं की ख़रीद-बिक्री पर पाबंदी संंबंधी केंद्र की अधिसूचना पर मंगलवार को चार हफ्तों के लिए रोक लगा दी.

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मवेशियों की ख़रीद-फरोख़्त पर नई नियमावली जारी, वध के लिए नहीं बेचे जा सकेंगे

सरकार ने जीवों से जुड़ीं क्रूर परंपराओं पर भी प्रतिबंध लगाया है, जिसमें उनके सींग रंगना तथा उन पर आभूषण या सजावट के सामान लगाना भी शामिल है.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 59: समाचार चैनलों पर पाकिस्तान से जंग और आदर्श ग्राम योजना

जन गण मन की बात की 59वीं कड़ी में विनोद दुआ समाचार चैनलों पर पाकिस्तान से जंग को लेकर हो रही बहस और सांसद आदर्श ग्राम योजना पर चर्चा कर रहे हैं.

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योगी जी के ‘रामराज’ को भला ‘जंगलराज’ कहने का दुस्साहस कौन करे

पर्दे और पन्नों पर बार-बार उभरता रहा है- जंगलराज! लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकार क्या बदली, मीडिया का वह ‘जंगलराज’ ग़ायब हो गया!

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जन गण मन की बात, एपिसोड 57: हाशिमपुरा नरसंहार के 30 साल और स्वच्छ भारत अभियान

जन गण मन की बात की 57वीं कड़ी में विनोद दुआ हाशिमपुरा नरसंहार और स्वच्छ भारत अभियान की वर्तमान स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं.

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विधायिका में मुसलमानों की घटती नुमाइंदगी लोकतंत्र के लिए बेहतर संकेत नहीं है

आंकड़े बताते हैं कि देश में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत तेज़ी से गिरता जा रहा है, जिसका मतलब होगा कि वह पूरी तरह से हाशिये पर चले जाएंगे.

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भारत में करीब 28 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में पिछले साल संघर्ष और हिंसा के चलते तकरीबन साढ़े चार लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

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अब सुनने में आता है कि हर पांच मिनट में एक भारतीय लेखक का जन्म हो रहा है: अनीता देसाई

तीन बार बुकर पुरस्कार के लिए नामित और 17 से ज़्यादा किताबों की लेखक अनीता देसाई को हाल ही में इंटरनेशनल लिटरेरी ग्रैंड प्राइज़ से सम्मानित किया गया है.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 54: छोटे-मझोले उद्योगों की अनदेखी और विपक्ष पर हमला

जन गण मन की बात की 54वीं कड़ी में विनोद दुआ बैंकों द्वारा छोटे और मझोले उद्योगों को कर्ज़ देने से मना करने और सरकार द्वारा विपक्ष को घेरने की कोशिशों पर चर्चा कर रहे हैं.

Varun Gandhi at parliament House on Wednesday. Express Photo by Praveen Jain. 06.08.2014.

‘जब एक फीसदी लोगों का आधे से अधिक संसाधनों पर नियंत्रण हो तब न्याय की बात खोखली लगती है’

भाजपा सांसद वरुण गांधी ने बड़े उद्योग घरानों की कर्ज़ माफी पर सवाल खड़ा किया और किसानों के आत्महत्या करने पर दुख जताया है.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 53: मोदी सरकार के तीन साल और आईटी क्षेत्र में छंटनी

जन गण मन की बात की 53वीं कड़ी में विनोद दुआ मोदी सरकार के तीन साल और आईटी क्षेत्र में हो रही छंटनी पर चर्चा कर रहे हैं.

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हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच 1947 में हुआ बंटवारा आज भी जारी है

निदा किरमानी मूल रूप से हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों से हैं. वे सोचती थीं कि क्यों कभी उन्हें इनमें से किसी एक को चुनना होगा? पर बीते दिनों उन्हें एक देश चुनने पर मजबूर होना पड़ा.