Indian Democracy

Kandhamaal: An elderly voter show her finger marked with indelible ink at Adabadi polling booth during the second phase of Lok Sabha elections in Kandhamaal, Thursday, April 18, 2019. PTI Photos

साल 2019 के लोकसभा चुनाव क्यों भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं

वीडियो: ये लोकसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं, बता रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद और द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन.

**FILE PHOTO** New Delhi: In this file photo dated January 22, 2018, Supreme Court judge Justice Jasti Chelameswar attends a book launch in New Delhi. The process for a possible elevation of Uttarakhand High Court Chief Justice K M Joseph as a Supreme Court judge might only get delayed as the apex court collegium, which had agreed in principle to reiterate his name to the Centre, will undergo a change due to the superannuation of Justice Jasti Chelameswar. (PTI Photo/Kamal Kishore)(PTI6_21_2018_000258B)

स्वतंत्र न्यायपालिका के बिना कोई भी लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता: जस्टिस चेलमेश्वर

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलमेश्वर सेवानिवृत्त. चार न्यायाधीशों की अपनी ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के संबंध में कहा कि मुझे बागी, काम बिगाड़ने वाला, वामपंथी और राष्ट्रद्रोही भी कहा गया लेकिन मैंने जनता के प्रति अपना दायित्व निभाया.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना है तो जमा करो 50,000 रुपये

उत्तर दिल्ली नगर निगम 2794 रुपये के बजट घाटे से जूझ रहा है. इस संस्था ने इस साल रामलीला मैदान से 21 लाख रुपये कमाए हैं और 10 लाख और कमाने की उम्मीद है.

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‘मोदी के पास दुनिया घूमने का समय है लेकिन दो साल से धरने पर बैठे सैनिकों से मिलने का वक्त नहीं है’

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को लेकर धरना देते हुए पूर्व सैनिकों को दो साल हो गए हैं. उनसे बातचीत.

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आख़िरकार दुनिया ने विश्वगुरु के ‘स्मार्ट कल्चर’ का लोहा मान लिया

‘जनता की मांग पूरी करने में इतनी बुद्धि, वक़्त और पैसा ठोंक दोगे तो अगला चुनाव कैसे लड़ोगे? जनता जो मांग रही है, वो सच में दे दिया तो अगले चुनावी घोषणापत्र में क्या सबको मंगल की सैर कराने का वादा करोगे?’

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू संविधान की प्रति पर दस्तख़त करते हुए. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

दो फैसले, जिन्होंने बताया कि संविधान संसद से ऊपर है

न्यायपालिका को कमज़ोर करने की कोशिशें भारतीय लोकतंत्र के मूल चरित्र के लिए ख़तरा हैं. मगर अफ़सोस की बात है कि इसे बहुमत का समर्थन हासिल है.

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ग्राउंड रिपोर्ट: हमारे लोकतंत्र में घुमंतू समुदाय को कब मिलेगा हक़?

घुमंतू समुदाय गांव के सार्वजनिक और सांस्कृतिक जीवन में घुले-मिले हैं. वे विकसित हो रहे जनतंत्र में अपना स्पष्ट हिस्सा मांग रहे हैं.

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भारत ने कैसे अपनी सेना को राजनीति से दूर रखा, यह जानने की ज़रूरत: पाक सेनाध्यक्ष

पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष क़मर जावेद बाजवा ने पाक सेना के अफसरों को भारतीय लोकतंत्र की सफलता पर आधारित किताब पढ़ने की सलाह दी है.