Indian Films

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अनुभव सिन्हा ने जातीय भेदभाव पर क्यों बनाई फिल्म आर्टिकल 15?

वीडियो: जातिगत भेदभाव पर आधारित फिल्म ‘आर्टिकल 15’ के निर्देशक अनुभव सिन्हा से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

कराची के एक सिनेमा हॉल में भारतीय फिल्म का पोस्टर (फोटो साभार: www.kbcuratorial.com)

वायुसेना की एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध

पाकिस्तानी सूचना एवं प्रसारण मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन ने बताया कि पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी को भारतीय विज्ञापनों पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.

फिल्मकार मृणाल सेन (बीच में) और उनकी फिल्म ‘भुवन शोम’ और ‘कलकत्ता 71’ का पोस्टर.

मृणाल सेन का सिनेमा संसार

मृणाल सेन का सिनेमा कलात्मक और बौद्धिक संवेदना का नायाब संयोजन था. वह चाहते थे कि सिनेमा उपेक्षितों के पास और सुदूर देहातों में पहुंचे. उन्हें ‘नए सिनेमा’ से यह उम्मीद थी. उनकी फिल्म देखने के बाद बहुत देर तक उसकी छवियां बेताल की तरह सिर पर नाचती रहती हैं.

अभिनेत्री सुजाता कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर)

इंग्लिश विंग्लिश में श्रीदेवी की बहन का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सुजाता कुमार का निधन

रांझणा, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों जैसी फिल्मों में काम करने वाली सुजाता गायिका सुचित्रा कृष्णमूर्ति की बहन थीं. वह मेटास्टैटिक कैंसर के चौथे चरण से जूझ रही थीं.

सत्यजीत रे. (फोटो साभार: क्रियेटिव कॉमन्स)

सत्यजीत रे: जिन्होंने परदे पर हीरो नहीं, बल्कि आम आदमी को रचा 

सत्यजीत रे ने देश की वास्तविक तस्वीर और कड़वे सच को बिना किसी लाग-लपेट के ज्यों का त्यों अपनी फिल्मों में दर्शाया. 1943 में बंगाल में पड़े अकाल को उन्होंने ‘पाथेर पांचाली’ दिखाया तो वहीं ‘अशनि संकेत’ में अकाल की राजनीति और ‘घरे बाइरे’ में हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद पर चोट की.

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दादा साहब फाल्के: सिनेमा की शुरुआत करने वाले की पहचान सिर्फ़ एक अवॉर्ड तक सीमित

जयंती विशेष: 1944 में उनकी एक गुमनाम शख़्स की तरह मौत हो गई जबकि तब तक उनका शुरू किया हुआ कारवां काफी आगे निकल चुका था. फिल्मी दुनिया की बदौलत कुछ शख़्सियतों ने अपना बड़ा नाम और पैसा कमा लिया था. घुंडीराज गोविंद फाल्के को हम आम तौर […]

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विभाजन से जुड़ी फिल्मों से पाकिस्तान डरता क्यों है?

पाकिस्तान से विशेष: अगर बेग़म जान या पाकिस्तान के बाहर विभाजन पर बनी कोई फिल्म सरकार को इतना डरा देती है कि उसे बैन करने से पहले देखना तक ज़रूरी नहीं समझा जाता, तो यह दिखाता है कि ये मुल्क किस कदर असुरक्षा और डर में जी रहा है.