Indian languages

हिंदी थोपने की अनावश्यक आक्रामकता ख़ुद उसके लिए नुक़सानदेह है

अक्सर देखा गया है कि ग़ैर-हिंदीभाषियों को हिंदी अपनाने का उपदेश देने वाले ख़ुद अंग्रेज़ी की राह पकड़ लेते हैं. यह प्रश्न बार-बार उठा है कि कितने हिंदीभाषियों ने अन्य भारतीय भाषाएं सीखी हैं?

लोकभाषाओं के बढ़ते जश्न और घटता ओहदा

विश्व में वैज्ञानिक लेखों का दो तिहाई हिस्सा अंग्रेज़ी में लिखा जाता है और बिना अंग्रेज़ी के आजकल विद्यावर्धन नहीं हो सकता. पर यह भी महत्वपूर्ण है कि ऐसे लेखों का एक तिहाई, जो भी एक बड़ी संख्या है, दूसरी भाषाओं में है. पर इनमें भारत की बड़ी लोकभाषाएं शामिल क्यों नहीं हैं?

हिंदी में छुआछूत की वही बीमारी है जो हमारे समाज में है

हिंदी दिवस पर विशेष: जितना बोझ आप बच्चों पर लाद रहे हैं डेढ़ लाख शब्दों का स्त्रीलिंग पुल्लिंग याद करने का, उतना मेहनत में बच्चा रॉकेट बना देगा.

मैं तुम्हारी भाषा से प्यार करता हूं

हिंदी दिवस पर विशेष: हम अपनी भाषा की महानता की गाथा में दूसरी भाषाओं के प्रति एक स्पर्धाभाव ले आते हैं. यह ठीक बात नही है. इससे किसी भी भाषा को आगे बढ़ने और दूसरे भाषायी-सांस्कृतिक स्थलों पर फूलने-फलने की संभावना न्यूनतम हो जाती है.

38 भाषाओं को संवैधानिक दर्जा देने की मांग पर निश्चित मानदंड तैयार नहीं हुआ

लोकसभा में किरण रिजिजू ने बताया कि भाषा का विकास सामाजिक आर्थिक राजनैतिक विकासों द्वारा प्रभावित होता है, भाषा संबंधी कोई मानदंड निश्चित करना कठिन है.

क्या विश्व पुस्तक मेले से गायब हो जाएंगी भारतीय भाषाएं?

दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में शामिल होने वाले विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रकाशकों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है.