indira gandhi

FILE PHOTO: An Indian police officer stands behind the concertina wire during restrictions on Eid-al-Adha after the scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 12, 2019. REUTERS/Danish Ismail

सरकार अब संवाद से परे हो चुकी है…

एक तरफ कहा जाता है कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है, उस लिहाज़ से कश्मीरी भी अभिन्न होने चाहिए थे. तो फिर इस बदलाव की प्रक्रिया में उनसे बात क्यों नहीं की गई? उनकी राय क्यों नहीं पूछी गई?

Indian policemen stand guard in a deserted street during restrictions in Jammu on August 6.	Photo : Reuters

कश्मीर का मन मरघट बन गया है…

कहा जा रहा है कि लोकतंत्र बहुमत से ही चलता है और बहुमत है, लेकिन ‘बहुमत’ मतलब बहु-मत हों, विभिन्न मत, लेकिन संसद में क्या मतों का आदान-प्रदान हुआ? एक आदमी चीख रहा था, तीन सौ से ज्यादा लोग मेजें पीट रहे थे. यह बहुमत नहीं, बहुसंख्या है. आपके पास मत नहीं, गिनने वाले सिर हैं.

बीते 17 जुलाई को जमीन विवाद में सोनभद्र के उम्भा गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी. (फोटो साभार: वीडियोग्रैब)

कब तक भूख और गोली से मारे जाएंगे आदिवासी?

सोनभद्र में किसी ने उन आदिवासियों की भुखमरी के हालात की तह में जाने की कोशिश तक नहीं की, यह सवाल नहीं पूछा कि मौत का ख़तरा होते हुए भी वे इस अनउपजाऊ क्षेत्र में ज़मीन से क्यों चिपके हुए थे?

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

1984 सिख विरोधी दंगे: सुप्रीम कोर्ट ने 33 लोगों को जमानत दी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ दायर की गई याचिका पर यह फैसला दिया है. इससे पहले निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने इन लोगों को दोषी ठहराया था और पांच वर्ष जेल की सजा सुनाई थी.

Indira Collage

आपातकाल: नसबंदी से मौत की ख़बरें न छापी जाएं

आपातकाल के 44 साल बाद इन सेंसर-आदेशों को पढ़ने पर उस डरावने माहौल का अंदाज़ा लगता है जिसमें पत्रकारों को काम करना पड़ा था, अख़बारों पर कैसा अंकुश था और कैसी-कैसी ख़बरें रोकी जाती थीं.

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उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक भाजपा कांग्रेस की दिखाई राह पर चल रही है

भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार हो या केंद्र की मोदी सरकार, अपने फ़ैसलों में दोनों कदम-दर-कदम पुराने दिनों वाली कांग्रेसी सरकार के निर्णयों की ही पुनरावृत्ति करती दिखाई दे रही हैं. योगी सरकार ने ट्वीट के लिए गिरफ़्तारी करवाई है, वहीं इसी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के जीबी पंत ने गीतकार शैलेंद्र की एक कविता पर प्रतिबंध लगाया था.

Babu Jagjivan Ram Wikipedia

… तो देश को 1977 में ही मिल जाता पहला दलित प्रधानमंत्री

चुनावी बातें: 1977 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद जनसंघ के सांसद चाहते थे कि बाबू जगजीवन राम के रूप में पहला दलित प्रधानमंत्री देकर देश को नया संदेश दिया जाए, लेकिन राजनीतिक जटिलताओं के चलते ऐसा हो न सका.

लाल बहादुर शास्त्री और जवाहर लाल नेहरू. (फोटो साभार: ​​विकिपीडिया/ट्विटर)

अब तक गठित सोलह लोकसभाओं में तीसरी ने देखे सबसे बुरे दिन

चुनावी बातें: तीसरी लोकसभा के कार्यकाल के दौरान देश ने अपने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के आक्रमणों का मुक़ाबला किया और अपने दो प्रधानमंत्रियों को गंवाया.

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क्या मोदी ने भी वही क़ानून तोड़ा है, जिसके चलते इंदिरा गांधी को अयोग्य घोषित किया गया था?

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कथित तौर पर विभिन्न राज्यों के नौकरशाहों से उन जगहों के बारे में जानकारियां मांगी, जहां प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार के लिए जाना था. अगर यह साबित हो जाता है तो न केवल आदर्श आचार संहिता बल्कि जनप्रतिनिधि क़ानून का उल्लंघन होगा.

India's Prime Minister Narendra Modi reacts as he speaks to members of the Australian-Indian community during a reception at the Allphones Arena located at Sydney Olympic Park in western Sydney in this November 17, 2014 file photograph. Since Modi came to power in May, ties between Israel and India have been in overdrive, with the two signing a series of defence and technology deals that have underscored their burgeoning commercial and political relationship. To match INDIA-ISRAEL/TIES REUTERS/Rick Stevens/Files (AUSTRALIA - Tags: POLITICS BUSINESS)

वन-मैन शो वाली सरकार चलाने वाले मोदी के लिए मुश्किल होगी गठबंधन की राह

अगर भाजपा पिछली बार जीती गई 282 सीटों से कम सीटें पाती है, तो पार्टी को सहयोगियों की ज़रूरत होगी. समीकरण जैसे भी बनें, यह निश्चित है कि अगली सरकार गठबंधन की या खिचड़ी सरकार होगी, जिसे मोदी बिल्कुल पसंद नहीं करते.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BJP senior leader LK Advani during BJP National Executive Meeting, in New Delhi, Saturday, Sept 8, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI9_8_2018_000103B)

मोदी की भाजपा पर लिखे आडवाणी के ब्लॉग में इंदिरा के ख़िलाफ़ लिखे उनके लेखों की झलक है

भाजपा के संस्थापक ने विरोधियों को एंटी-नेशनल कहने पर आपत्ति जताई है, जो मोदी-शाह की रणनीति और अभियान का प्रमुख तत्व रहा है. ऐसा ही कुछ लालकृष्ण आडवाणी ने 1970 के दशक के मध्य में आपातकाल के समय जेल में बंद होने के दौरान भी लिखा था.

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क्यों भारत ने 1971 के युद्ध के बाद 93,000 पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा किया था

1971 में पाकिस्तान के सरेंडर के बाद इंदिरा गांधी की सबसे बड़ी चिंता मुजीबुर्रहमान की हिफ़ाज़त थी. पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई वो क़ीमत थी, जो उन्होंने इस बांग्लादेशी नेता की सुरक्षित वापसी के लिए ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो को चुकाई थी.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और दीनदयाल उपाध्याय. (फोटो साभार: फेसबुक/bjp.org)

छत्तीसगढ़ सरकार ने योजनाओं से दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाकर इंदिरा और आंबेडकर पर रखा

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने विभिन्न योजनाओं के नाम से दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और भीमराव आंबेडकर का नाम जोड़ा गया. भाजपा ने जताई आपत्ति.

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प्रियंका गांधी का करिश्मा भी यूपी में कांग्रेस को हार से नहीं बचा सकता

भारतीय राजनीति में करिश्माई नेतृत्व ने कई करिश्मे दिखाए हैं, लेकिन किसी भी दौर में करिश्मे के मुकाबले ज़मीनी समीकरण और समुदायों की गोलबंदियां ज्यादा प्रभावी रही हैं. फिलहाल कांग्रेस कम से कम यूपी में तो इन दोनों मोर्चों पर पिछड़ती नज़र आ रही है.

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अपूर्वानंद की मास्टरक्लास, एपिसोड 01: सिख विरोधी दंगा मामले में सज्जन कुमार को उम्रक़ैद

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में 34 साल बाद कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. इस विषय पर अपूर्वानंद की पहली मास्टरक्लास.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

चौरासी के दंगों पर दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला महान भारत के नागरिकों की निर्ममता के ख़िलाफ़ आया है

2002 की बात को कमज़ोर करने के लिए 1984 की बात का ज़िक्र होता है, अब 1984 की बात चली है तो अदालत ने 2013 तक के मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों तक का ज़िक्र कर दिया है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए

‘अगर आप एक नेता हैं और आपकी नज़रों के सामने बड़ी संख्या में लोगों का क़त्ल किया जाता है, तब आप लोगों की ज़िंदगी बचा पाने में नाकाम रहने की जवाबदेही से मुकर नहीं सकते.’

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1984, 1993, 2002 के दंगों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया, नेता-पुलिस का था सहयोग: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकै़द की सज़ा देते हुए कहा कि मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और नरसंहार हमारे घरेलू क़ानून का हिस्सा नहीं हैं. इन कमियों को ख़त्म करने की जल्द से जल्द ज़रूरत है.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार दोषी क़रार, उम्रक़ैद की सज़ा

मामला दक्षिण पश्चिम दिल्ली की पालम कॉलोनी में एक सिख परिवार के पांच सदस्यों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आगे लगाने से जुड़ा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़ित को यह एहसास कराना ज़रूरी है कि कितनी भी चुनौती आए, लेकिन सत्य की जीत होगी.

(फोटो: रॉयटर्स)

1984 सिख विरोधी दंगे: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 88 लोगों की दोषसिद्धि को बरक़रार रखा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 सिख विरोधी दंगों मामले में एक निचली अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ की गई दोषियों की 22 वर्ष पुरानी अपीलों को ख़ारिज कर दिया और सज़ा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने को कहा.

New Delhi: Former Union minister and Congress leader Jairam Ramesh addresses a press conference at AICC headquarters in New Delhi on Saturday, Aug 11, 2018. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI8_11_2018_000055B)

पर्यावरण से जुड़े क़ानूनों और मंत्रालय को कमज़ोर कर रही मोदी सरकार: जयराम रमेश

पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और ख़ुद को पर्यावरण संरक्षण के चैंपियन के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन जब निर्णय लेने का वक़्त आता है तो कुछ नहीं करते.

अरुण शौरी. (फोटो: पीटीआई)

मोदी सरकार में स्थितियां आपातकाल से भी बदतर: अरुण शौरी

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा, ‘1975 में बेहतर और निश्चित विपक्ष था. लेकिन आज विपक्ष बिखरा हुआ है. मैं कह सकता हूं कि इंदिरा और नरेंद्र मोदी के बीच अंतर यह है कि इंदिरा को अपने किए का पछतावा था.’

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी. (फोटो: रॉयटर्स)

‘आपातकाल’ और ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ इंदिरा गांधी की दो गंभीर गलतियां थीं: नटवर सिंह

अपनी नई किताब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह ने लिखा है कि अक्सर इंदिरा गांधी को गंभीर और क्रूर बताया जाता है. कभी-कभार ही यह कहा गया कि वह सुंदर, गरिमामयी और शानदार इंसान के साथ एक विचारशील मानवतावादी एवं अध्ययन करने वाली महिला थीं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 72nd Independence Day, in Delhi on August 15, 2018.

देश में संविधान लागू है और क़ानून अपना काम कर रहा है

रोजगार नहीं है. उत्पादन घट गया है. किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नसीब नहीं हो रहा है. हेल्थ सर्विस चौपट हो चली है. शिक्षा-व्यवस्था डांवाडोल है. मुस्लिम ख़ामोश हो गया है. दलित चुपचाप है लेकिन आवाज़ नहीं उठनी चाहिए क्योंकि देश में क़ानून अपना काम कर रहा है.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 296: नोटबंदी पर आरबीआई की रिपोर्ट और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी

जन गण मन की बात की 296वीं कड़ी में विनोद दुआ नोटबंदी पर आरबीआई की ​हालिया रिपोर्ट और भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं पर चर्चा कर रहे हैं.

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​​​जन गण मन की बात, एपिसोड 295: भीमा कोरेगांव मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और राहुल गांधी

जन गण मन की बात की 295वीं कड़ी में विनोद दुआ भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं और राहुल गांधी के 1984 के दंगों को लेकर दिए गए बयान पर चर्चा कर रहे हैं.​

फोटो: पीटीआई

न चौरासी के दंगों में कांग्रेस का हाथ था, न 2002 में भाजपा का!

राहुल गांधी की कांग्रेस को सिख दंगों से अलग करने की कोशिश वैसी ही है, जैसी मोदी ने विकास के नारे में गुजरात के दाग़ छुपाकर की थी.

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जो आज दूसरों को ‘एंटी नेशनल’ बता रहे हैं, कभी वे भी ‘देशद्रोही’ हुआ करते थे

एंटी-नेशनल, भारत विरोधी जैसे शब्द आपातकाल के सत्ताधारियों की शब्दावली का हिस्सा थे. आज कोई और सत्ता में है और अपने आलोचकों को देश का दुश्मन बताते हुए इसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है.

New Delhi: A woman sells the Indian national flag on a roadside ahead of Republic Day, in New Delhi on Wednesday. (PTI Photo by Ravi Choudhary)(PTI1_24_2018_000293B)

स्वतंत्रता के सात दशक बाद मिली भीख मांगकर भूख मिटाने की ‘आज़ादी’ का ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है जहां सरकार भोजन या नौकरियां प्रदान करने में असमर्थ है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addressing the nation from the ramparts of the historic Red Fort on the occasion of the 71st Independence Day, in New Delhi on Tuesday. PTI Photo / PIB (PTI8_15_2017_000059B) *** Local Caption ***

15 अगस्त 1975 ​के लाल क़िले और 15 अगस्त 2018 के लाल क़िले का फ़र्क़

इमरजेंसी लगाकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘नए भारत’ का उद्घोष किया था. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘न्यू इंडिया’ का ऐलान करेंगे.

Nagaon: People wait to check their names on the final draft of the state's National Register of Citizens after it was released, at an NRC Seva Kendra in Nagaon on Monday, July 30, 2018. (PTI Photo) (PTI7_30_2018_000127B)

एनआरसी की जड़ें असम के इतिहास से जुड़ी हुई हैं

असम देश का इकलौता राज्य है, जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी बनाया जा रहा है. एनआरसी क्या है? असम में ही इसे क्यों लागू किया गया है और इसे लेकर विवाद क्यों है?

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1978 में इंदिरा ने जो किया, क्या उसे फिर दोहराया जा सकता है?

अगर 1977 भारत की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के सत्ता में आने के कारण भारतीय राजनीति का एक बड़ा पड़ाव है तो 1978 को इंदिरा गांधी के उस जुझारूपन के कारण याद रखा जाना चाहिए, जिसके बल पर उन्होंने अपनी वापसी की इबारत लिखी.

Student Protest Reuters

सरकार चाहती है देश का युवा समझे कि प्रतिरोध करना राष्ट्रद्रोह और ग़ैर-लोकतांत्रिक है

हमारी राष्ट्रीय राजनीति और भाजपा कांग्रेस विरोधी आंदोलन यानी प्रतिरोध का ही नतीजा हैं, लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं करता. ख़ुद भाजपा भी नहीं. वे चाहते हैं कि हम इमरजेंसी के बारे में जानें लेकिन उतना, जितने से उन्हें नुकसान न पहुंचे.

Modi Emergency Mumbai BJP Twitter 2

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘आपातकाल’ इतना प्रिय क्यों है?

राजनीतिक विमर्श में आपातकाल नरेंद्र मोदी का प्रिय विषय रहता है. यह और बात है कि मोदी आपातकाल के दौरान एक दिन के लिए भी जेल तो दूर, पुलिस थाने तक भी नहीं ले जाए गए थे. भूमिगत रहकर उन्होंने आपातकाल विरोधी संघर्ष में कोई हिस्सेदारी की हो, इसकी भी कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं मिलती.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi visiting the Terracota Warriors Museum, in Xi'an, Shaanxi, China on May 14, 2015.

क्या आपातकाल को दोहराने का ख़तरा अब भी बना हुआ है?

आपातकाल कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि सत्ता के अतिकेंद्रीकरण, निरंकुशता, व्यक्ति-पूजा और चाटुकारिता की निरंतर बढ़ती गई प्रवृत्ति का ही परिणाम थी. आज फिर वैसा ही नज़ारा दिख रहा है. सारे अहम फ़ैसले संसदीय दल तो क्या, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की भी आम राय से नहीं किए जाते, सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री की चलती है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the Indian Community, at the ‘Bharat Ki Baat, Sabke Saath’ programme, at Westminster, London on April 18, 2018.

कहीं प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुद को ही तो भारत नहीं मान लिया है?

लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हाल में हुए दो घंटों से ज़्यादा के कार्यक्रम ‘भारत की बात, सबके साथ’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से लेकर अंत तक अपनी ही बात करते रह गए.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फोटो: पीटीआई)

राजनीति में आप बुरी ताक़तों से लड़ते हैं और अच्छाई के लिए खड़े होते हैं तो मरना होगा: राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनके पिता और दादी की हत्या इसलिए हुई कि वे राजनीति में थे और बदलाव लाना चाहते थे.

जयराम रमेश. (फाइल फोटो: पीटीआई)

उद्योगों के पक्ष में पर्यावरण क़ानूनों को कमज़ोर कर रहा है केंद्र: जयराम रमेश

पूर्व पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि नरेंद्र मोदी पर्यावरण संरक्षण के बारे में जो उपदेश देते हैं, उसका पालन नहीं करते.