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क्यों भारत ने 1971 के युद्ध के बाद 93,000 पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा किया था

1971 में पाकिस्तान के सरेंडर के बाद इंदिरा गांधी की सबसे बड़ी चिंता मुजीबुर्रहमान की हिफ़ाज़त थी. पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई वो क़ीमत थी, जो उन्होंने इस बांग्लादेशी नेता की सुरक्षित वापसी के लिए ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो को चुकाई थी.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और दीनदयाल उपाध्याय. (फोटो साभार: फेसबुक/bjp.org)

छत्तीसगढ़ सरकार ने योजनाओं से दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाकर इंदिरा और आंबेडकर पर रखा

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने विभिन्न योजनाओं के नाम से दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और भीमराव आंबेडकर का नाम जोड़ा गया. भाजपा ने जताई आपत्ति.

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प्रियंका गांधी का करिश्मा भी यूपी में कांग्रेस को हार से नहीं बचा सकता

भारतीय राजनीति में करिश्माई नेतृत्व ने कई करिश्मे दिखाए हैं, लेकिन किसी भी दौर में करिश्मे के मुकाबले ज़मीनी समीकरण और समुदायों की गोलबंदियां ज्यादा प्रभावी रही हैं. फिलहाल कांग्रेस कम से कम यूपी में तो इन दोनों मोर्चों पर पिछड़ती नज़र आ रही है.

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अपूर्वानंद की मास्टरक्लास, एपिसोड 01: सिख विरोधी दंगा मामले में सज्जन कुमार को उम्रक़ैद

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में 34 साल बाद कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. इस विषय पर अपूर्वानंद की पहली मास्टरक्लास.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

चौरासी के दंगों पर दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला महान भारत के नागरिकों की निर्ममता के ख़िलाफ़ आया है

2002 की बात को कमज़ोर करने के लिए 1984 की बात का ज़िक्र होता है, अब 1984 की बात चली है तो अदालत ने 2013 तक के मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों तक का ज़िक्र कर दिया है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए

‘अगर आप एक नेता हैं और आपकी नज़रों के सामने बड़ी संख्या में लोगों का क़त्ल किया जाता है, तब आप लोगों की ज़िंदगी बचा पाने में नाकाम रहने की जवाबदेही से मुकर नहीं सकते.’

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1984, 1993, 2002 के दंगों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया, नेता-पुलिस का था सहयोग: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकै़द की सज़ा देते हुए कहा कि मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और नरसंहार हमारे घरेलू क़ानून का हिस्सा नहीं हैं. इन कमियों को ख़त्म करने की जल्द से जल्द ज़रूरत है.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार दोषी क़रार, उम्रक़ैद की सज़ा

मामला दक्षिण पश्चिम दिल्ली की पालम कॉलोनी में एक सिख परिवार के पांच सदस्यों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आगे लगाने से जुड़ा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़ित को यह एहसास कराना ज़रूरी है कि कितनी भी चुनौती आए, लेकिन सत्य की जीत होगी.

(फोटो: रॉयटर्स)

1984 सिख विरोधी दंगे: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 88 लोगों की दोषसिद्धि को बरक़रार रखा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 सिख विरोधी दंगों मामले में एक निचली अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ की गई दोषियों की 22 वर्ष पुरानी अपीलों को ख़ारिज कर दिया और सज़ा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने को कहा.

New Delhi: Former Union minister and Congress leader Jairam Ramesh addresses a press conference at AICC headquarters in New Delhi on Saturday, Aug 11, 2018. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI8_11_2018_000055B)

पर्यावरण से जुड़े क़ानूनों और मंत्रालय को कमज़ोर कर रही मोदी सरकार: जयराम रमेश

पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और ख़ुद को पर्यावरण संरक्षण के चैंपियन के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन जब निर्णय लेने का वक़्त आता है तो कुछ नहीं करते.

अरुण शौरी. (फोटो: पीटीआई)

मोदी सरकार में स्थितियां आपातकाल से भी बदतर: अरुण शौरी

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा, ‘1975 में बेहतर और निश्चित विपक्ष था. लेकिन आज विपक्ष बिखरा हुआ है. मैं कह सकता हूं कि इंदिरा और नरेंद्र मोदी के बीच अंतर यह है कि इंदिरा को अपने किए का पछतावा था.’

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी. (फोटो: रॉयटर्स)

‘आपातकाल’ और ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ इंदिरा गांधी की दो गंभीर गलतियां थीं: नटवर सिंह

अपनी नई किताब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह ने लिखा है कि अक्सर इंदिरा गांधी को गंभीर और क्रूर बताया जाता है. कभी-कभार ही यह कहा गया कि वह सुंदर, गरिमामयी और शानदार इंसान के साथ एक विचारशील मानवतावादी एवं अध्ययन करने वाली महिला थीं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 72nd Independence Day, in Delhi on August 15, 2018.

देश में संविधान लागू है और क़ानून अपना काम कर रहा है

रोजगार नहीं है. उत्पादन घट गया है. किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नसीब नहीं हो रहा है. हेल्थ सर्विस चौपट हो चली है. शिक्षा-व्यवस्था डांवाडोल है. मुस्लिम ख़ामोश हो गया है. दलित चुपचाप है लेकिन आवाज़ नहीं उठनी चाहिए क्योंकि देश में क़ानून अपना काम कर रहा है.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 296: नोटबंदी पर आरबीआई की रिपोर्ट और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी

जन गण मन की बात की 296वीं कड़ी में विनोद दुआ नोटबंदी पर आरबीआई की ​हालिया रिपोर्ट और भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं पर चर्चा कर रहे हैं.