Islam

नई दिल्ली का निज़ामुद्दीन मरकज इलाका (फोटो: पीटीआई)

कोविड-19 संक्रमण की आपराधिक जवाबदेही तबलीग़ी जमात के माथे ही क्यों है?

डब्ल्यूएचओ कहता है कि नागरिकों का स्वास्थ्य सरकारों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है. लेकिन भारत सरकार के यात्राओं पर प्रतिबंध, हवाई अड्डों पर सबकी स्क्रीनिंग के निर्णय में हुई देरी पर बात नहीं हुई, न ही कोविड जांच की बेहद कम दर की बात उठी. जमात ने ग़लती की है पर क्या सरकारों को कभी उनकी नाकामियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा?

Prayagraj: Police personnel during a search operation for devotees who had recently attended the religious congregation at Tabligh-e-Jamaats Markaz in Delhis Nizamuddin area, in Prayagraj, Wednesday, April 1, 2020. 24 people who attended the Markaz were found positive for COVID-19 as Nizamuddin area became countrys hotspot for the disease. (PTI Photo)(PTI01-04-2020 000087B)

भारतीय मुसलमानों के लिए दोहरी मार बनकर आया है कोरोना वायरस

सब जानते हैं कि कोविड-19 एक घातक वायरस की वजह से फैला है, लेकिन भारत में इसे सांप्रदायिक जामा पहना दिया गया है. आने वाले समय में यह याद रखा जाएगा कि जब पूरे देश में लॉकडाउन हुआ था, तब भी मुसलमान सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे थे.

New Delhi: People who came for ‘Jamat’, a religious gathering at Nizamuddin Mosque, being taken to LNJP hospital for COVID-19 test, after several people showed symptoms of coronavirus, during a nationwide lockdown, in New Delhi, Tuesday, March 31, 2020. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI31-03-2020 000142B)

तबलीग़ी जमात की ग़लती पर बिना दुर्भावना के बात होती, तो बेहतर होता

तबलीग़ी जमात की आलोचना सही है, लेकिन ज़रूरी है कि उनके इतिहास को पढ़ा जाए और सोच समझकर उनके बारे में कोई राय बनाई जाए.

पोस्टर साभार: ख़्वाब तन्हा कलेक्टिव

आईआईटी कानपुर की जांच समिति ने कहा, फ़ैज़ की नज़्म गाने का समय और स्थान सही नहीं था

आईआईटी कानपुर के छात्रों द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई दिल्ली पुलिस की बर्बर कार्रवाई और जामिया के छात्रों के समर्थन में फ़ैज अहमद फ़ैज़ की नज़्म ‘हम देखेंगे’ को सामूहिक रूप से गाए जाने पर फैकल्टी के एक सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज करवाई गई थी.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का ‘हम देखेंगे’ मज़हब का नहीं अवामी इंक़लाब का तराना है…

जो लोग ‘हम देखेंगे’ को हिंदू विरोधी कह रहे हैं, वो ईश्वर की पूजा करने वाले ‘बुत-परस्त’ नहीं, सियासत को पूजने वाले ‘बुत-परस्त’ हैं.

Coimbatore: Rescue work being carried out at the site of the wall collapse in Nadur village of Mettupalayam taluk, near Coimbatore, Monday, Dec. 2, 2019. Seventeen people were killed in the incident on Sunday night after the compound wall of three tile roofed houses collapsed on them, reportedly due to rains. (PTI Photo)   (PTI12_2_2019_000107B)

तमिलनाडु: जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए 3,000 दलितों ने इस्लाम अपनाने की बात कही

तमिलनाडु के नादुर गांव में दो दिसंबर को दीवार गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई थी. उस दीवार को एक व्यक्ति खुद के घर को दलितों से अलग करने के लिए बनाया था. उसके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं होने से दलित समुदाय के लोगों ने यह फैसला लिया है.

UNITED NATION : Imran Khan, Prime Minister of Pakistan, speaks to reporters during a news conference at United Nations headquarters Tuesday, Sept. 24, 2019. AP/PTI(AP9_25_2019_000010B)

नागरिकता विधेयक फासीवादी मोदी सरकार द्वारा प्रचारित संघ की ‘हिंदू राष्ट्र’ योजना का हिस्सा: इमरान ख़ान

भारतीय लोकसभा में पारित किए गए नागरिकता संशोधन विधेयक पर पाकिस्तान ने कहा है कि इसके पीछे बहुसंख्यक एजेंडा है. इस विधेयक ने आरएसएस-भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता को दुनिया के सामने ला दिया है.

(फोटो: पीटीआई)

आज हिंदुस्तानी मुसलमान को एक नए सामाजिक आंदोलन की ज़रूरत है

आज बहुत सुनियोजित ढंग से आरएसएस परिवार को छोड़कर सारी आवाज़ों को दबा दिया गया है. अगर कोई आवाज़ उठती भी है तो वह सिर्फ उनकी होती है, जो मुसलमानों को पिछड़ा, दकियानूसी और क़बायली साबित करती हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi paying respects to Dr. Babasaheb Ambedkar, at Chaitya Bhoomi, in Mumbai on October 11, 2015. 
The Governor of Maharashtra, Shri C. Vidyasagar Rao, the Chief Minister of Maharashtra, Shri Devendra Fadnavis and the Union Minister for Road Transport & Highways and Shipping, Shri Nitin Gadkari and other dignitaries are also seen.

मोदी ख़ुद को आंबेडकर का ‘शिष्य’ बताते हैं, लेकिन मनु पर दोनों के नज़रिये में फ़र्क़ दिखता है

पुस्तक अंश: मोदीनामा किताब का पांचवां अध्याय ‘मनु का सम्मोहन’ बताता है कि भारत के संविधान के ऐलान को डाॅ. आंबेडकर ने मनु के शासन की समाप्ति कहा था, बावजूद इसके मनु की वापसी हो रही है.

कोलकाता स्थित 33 पल्ली क्लब का दुर्गा पूजा पंडाल. (फोटो साभार: ट्विटर/@DebjaniBhatta20)

कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में कथित रूप से अज़ान की रिकॉर्डिंग बजाने पर विवाद

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बेलियाघाट 33 पल्ली दुर्गापूजा पंडाल का मामला. शिकायतकर्ता वकील ने कहा कि शहर की शांति बाधित करने की कोशिश की जा रही है. वहीं आयोजकों ने कहा ​कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह.(फोटो: एएनआई)

ममता बनर्जी अपनी भाषा और भाव बदल दें, वरना चिदंबरम जैसा हश्र होगा: भाजपा विधायक

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि अगर ममता बनर्जी को बांग्‍लादेशी घुसपैठियों के बल पर ही राजनीति करनी है तो उन्हें बांग्‍लादेश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए.

Jayanta-Shaw-Reuters

मध्य प्रदेश: अनुच्छेद 370 हटाने पर लिखी किताब बेचने वाले माकपा नेता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

यह मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर का है. माकपा नेता शेख अब्दुल गनी ‘धारा 370- सेतु या सुरंग’ नाम की किताब को बेच रहे थे, जिसके लेखक मध्य प्रदेश की माकपा इकाई के प्रमुख जसविंदर सिंह हैं.

नजीर अहमद रोंगा. (फोटो: फेसबुक)

मतदान के लिए प्रोत्साहित करने वाले कश्मीरी वकील विरोध प्रदर्शन के डर से हिरासत में

कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नजीर अहमद रोंगा को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म करने से एक दिन पहले 4 अगस्त को पीएसए के तहत गिरफ़्तार किया गया था. आरोप है कि वे इस निर्णय को लेकर लोगों को प्रभावित कर सकते थे.

A Kashmiri man holds stones during clashes with Indian security forces, after scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 23, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

अनुच्छेद 370: सरकार ने कश्मीरियों के घाव पर मरहम की जगह नमक रगड़ दिया है

श्रीनगर से ग्राउंड रिपोर्ट: मुख्यधारा के मीडिया में आ रही कश्मीर की ख़बरों में से 90 प्रतिशत झूठी हैं. कश्मीर के हालात मामूली प्रदर्शनों तक सीमित नहीं हैं और न ही यहां कोई सड़कों पर साथ मिलकर बिरयानी खा रहा है.

A Kashmiri woman shows her hand with a message as others shout slogans during a protest after the scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 11, 2019. REUTERS/Danish Siddiqui

चित्रकथा: जम्मू कश्मीर में बीते तीन हफ़्तों का सूरत-ए-हाल बयां करतीं तस्वीरें

बीते पांच अगस्त को केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के निर्णय लिया गया था.