Journalism

लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा. (फोटो साभार: द हिंदू)

गौरी लंकेश की हत्या को संघ परिवार से जोड़ने के आरोप में रामचंद्र गुहा के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज

इतिहासकार गुहा ने ट्वीट किया था, ‘आज के भारत में स्वतंत्र लेखकों और पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा, यहां तक कि हत्या कर दी जा रही, लेकिन हमें चुप नहीं किया नहीं जा सकता.’

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हत्यारों की भीड़ इस देश की नुमाइंदगी नहीं करती

अंग्रेज़ी प्रभावशाली भाषा है, मगर इसकी पहुंच सीमित है. क्षेत्रीय भाषाओं के पत्रकार असली असर पैदा कर सकते हैं. छोटे शहरों के ऐसे कई साहसी पत्रकार हैं, जिन्होंने अपने साहस की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई है.

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भाजपा ने देश में सांप्रदायिकता और नफ़रत का जिन्न छोड़ दिया है

आम आदमी पार्टी से जुड़े आशीष खेतान का कहना है, यूपीए सरकार भले ही अयोग्य रही हो, वह इन समूहों की विचारधारा से इत्तेफ़ाक नहीं रखती थी, लेकिन वर्तमान सत्ता को इन्हीं समूहों से समर्थन मिलता है.

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ये जो भक्त हैं, ये उन्हीं का वक़्त है

वे हत्या के पक्ष में दलीलें देने लगे. वे हत्यारों को बधाइयां देने लगे. उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या को सिर्फ जायज़ नहीं ठहराया. वे हत्या के बाद ठंडी पड़ चुकी उस लाश को गालियां देने लगे. जैसे वे उस पर और गोलियां चलाना चाहते हों.

Ravish Kumar

मैंने प्रधानमंत्री को गुंडा नहीं बोला: रवीश कुमार

मैंने आॅनलाइन जगत के एक हिस्से को गुंडा और हत्यारा ज़रूर कहा है. प्रधानमंत्री के लिए कभी ऐसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है.

New Delhi: Demonstrators hold placards with the picture of  journalist Gauri Lankesh during a 'Not In My Name' protest,  at Jantar Mantar in New Delhi on Thursday. PTI Photo(PTI9_7_2017_000160B)

गौरी लंकेश जैसी हत्याएं जारी रहेंगी क्योंकि हत्यारों को पता है कि उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा

गौरी की हत्या एक चेतावनी है. हत्यारों को पता है कि वे सुरक्षित हैं. वे बेखौफ़ होकर अपना काम करते रहेंगे.

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश (फोटो: गौरी लंकेश के फेसबुक वाल से)

भाजपा नेता बोले, गौरी लंकेश आरएसएस के ख़िलाफ़ न लिखतीं तो ज़िंदा होतीं

भाजपा विधायक डीएन जीवराज ने कहा कि गौरी लंकेश जिस तरह लिखती थीं, वो बर्दाश्त के बाहर था. गौरी मेरी बहन जैसी हैं लेकिन जिस तरह उन्होंने लिखा, वो स्वीकार नहीं किया जा सकता.’

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वो कौन लोग हैं जो एक निहत्थी महिला की हत्या का जश्न मना रहे हैं?

हमने बचपन से सुना था कि किसी की मौत के बारे में बुरा मत बोलो क्योंकि मरा आदमी अपनी सफाई नहीं दे सकता. पर ये लोग तो जैसे मरने का इंतज़ार कर रहे थे. ये कहां पले-बढ़े हैं, ये कहां से आते हैं?

Bhopal: Journalists, social workers and members of various organisations hold protest against the killing of journalist Gauri Lankesh, in Bhopal on Thursday. PTI Photo  (PTI9_7_2017_000135B)

जनता को झूठे सपनों, निराधार तथ्यों और धर्म की भांग ने मदमस्त कर रखा है

कभी-कभी मोमबत्तियां लेकर, मानव श्रृंखला बनाकर खड़ा होने वाला भारत का बौद्धिक वर्ग छोटे-छोटे स्वार्थों, छोटी-छोटी नौकरियों और बड़े-बड़े पैकेजों के चक्कर में अपना दायित्व भूल गया है.

Mumbai: Journalists pay tributes to journalist Gauri Lankesh, in Mumbai on Wednesday. PTI Photo(PTI9_6_2017_000159A)

असहिष्णु आवाज़ों को हमारी ख़ामोशी से ही ताकत मिलती है: गौरी लंकेश

गौरी का अख़बार उनके तेज़तर्रार और तर्कवादी पिता की ही तरह धर्मनिरपेक्षता, दलितों, महिलाओं और समाज में पिछड़े लोगों के अधिकारों के प्रति मुखर रहता था.

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‘संयोग है कि गोशाला खोलने का निर्णय तब लिया जब राजनीति गाय के इर्द​​​​-गिर्द केंद्रित है​​​​’

पत्रकारिता विश्वविद्यालयों को चढ़ा बाबागिरी का बुखार. आईआईएमसी में हवन के बाद अब माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय करेगा गोसेवा.

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आईआईएमसी में अब संस्कृत में भी पढ़ाई जाएगी पत्रकारिता

भारतीय जनसंचार संस्थान उर्दू, मराठी, मलयालम, मराठी के बाद संस्कृत में पत्रकारिता का तीन महीने का शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने जा रहा है.

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प्रेस को किसी की भी आलोचना करने का विशेषाधिकार नहीं: अदालत

अदालत ने कहा कि प्रेस को टिप्पणी करने, आलोचना करने या किसी मामले में तथ्यों की जांच करने के कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं हैं. प्रेस के लोगों के अधिकार आम आदमी के अधिकारों से ऊंचे नहीं.

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क्या टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादक ने अपने हित के लिए पत्रकारिता को ताक पर रख दिया?

अगर संपादक मंत्री से कहकर किसी नियुक्ति में कोई बदलाव करवा सकते हैं, तो क्या इसके एवज में मंत्रियों को अख़बारों की संपादकीय नीति प्रभावित करने की क्षमता मिलती है?

Indian press photographers stand behind a fence for security reasons as they take pictures of Belgium's Queen Paola in a school in Mumbai November 6, 2008. Belgium's King Albert II and Queen Paola are on a official state visit to India.     REUTERS/Francois Lenoir   (INDIA)

‘मीडिया मालिकों ने पत्रकारों को बंधुआ मजदूर बना रखा है’

पत्रकारों के लिए जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफ़ारिश और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से बातचीत.

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‘हम पत्रकारों को दरबारी नहीं बनना, सरकारी नहीं बनना’

पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘रेडइंक अवॉर्ड फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट’ से सम्मानित होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ ने यह भाषण सात जून को मुंबई में हुए सम्मान समारोह में दिया.

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हमारे न्यूज़ चैनल तू-तू, मैं-मैं पर क्यों उतर आए हैं?

न्यूज़ चैनल हर विषय पर दलीय प्रवक्ताओं की भीड़ क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं? क्या वे राजनीतिक दलों, ख़ासकर सत्ताधारी दल को हर मुद्दे पर अपना फोरम मुहैया कर खुश रखने की कोशिश करते हैं?

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को रेडइंक लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

विनोद दुआ भारत के पहले चुनाव विश्लेषकों में से एक हैं और वर्तमान में ‘द वायर’ पर ‘जन गण मन की बात’ कार्यक्रम के प्रस्तोता हैं.

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योगी जी के ‘रामराज’ को भला ‘जंगलराज’ कहने का दुस्साहस कौन करे

पर्दे और पन्नों पर बार-बार उभरता रहा है- जंगलराज! लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकार क्या बदली, मीडिया का वह ‘जंगलराज’ ग़ायब हो गया!

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वीडियो: पत्रकार संतोष यादव से उनके जेल जाने और बस्तर में पत्रकारिता पर बातचीत

संतोष यादव को सितंबर 2015 में बस्तर पुलिस ने नक्सल समर्थक होने के आरोप में गिरफ्तार किया था. करीब डेढ़ साल बाद उन्हें ज़मानत मिली. संतोष से अजय आशीर्वाद महाप्रशस्त से बातचीत.

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वीडियो: सीजीनेट स्वर के संस्थापक शुभ्रांशु चौधरी से बातचीत

सीजीनेट स्वर जन पत्रकारिता में क्षेत्र में काम करने वाला एनजीओ है. ये आदिवासियों को समस्याओं को उन्हीं की भाषा में रिकॉर्ड करके ब्लूटूथ के ज़रिये प्रसारित करता है. सीजीनेट स्वर के संस्थापक शुभ्रांशु चौधरी से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत. 

Photographers and video cameramen gather outside the special court in Mumbai May 18, 2007. The court on Friday commenced sentencing against the 100 people found guilty of involvement in the 1993 bombings in Mumbai which killed 257 people. REUTERS/Punit Paranjpe  (INDIA)

क्या हमारे मीडिया को अपनी आलोचना से डर लगने लगा है?

राज्यसभा में चुनाव सुधार पर केंद्रित लंबी चर्चा के दौरान विपक्षी नेताओं ने भारत में मीडिया की अंदरूनी संरचना और उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए.

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संसद में बोले शरद यादव, यह भाषण कोई नहीं छापेगा

राज्यसभा सांसद शरद यादव ने यह भाषण 22 मार्च 2017 को राज्यसभा में दिया. सदन में चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए शरद यादव ने देश में पत्रकारिता की ​दशा और दिशा पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. पढ़ें पूरा भाषण…

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‘एंटी रोमियो दस्ते के लोगों को किसी से प्रेम हो गया तो क्या होगा’

एंटी रोमियो दस्ते के किसी को प्रेम हो जाए तो प्रेम की तड़प में वे किसी पुराने कुर्ते की तरह चराचरा कर फट जाएंगे. दुआ करूंगा कि इस दस्ते को कभी किसी से प्यार न हो. प्रार्थना करूंगा कि उन्हें कम से कम किशोर कुमार के गाने सुनने की सहनशक्ति मिले.

संतोष यफव'(फोटो एमेनेस्टी इंटरनेशनल )

नक्सलियों से संबंध के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार को 17 महीने बाद ज़मानत

बस्तर में कार्यरत संतोष को छत्तीसगढ़ पुलिस ने वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया था. वह नवभारत, पत्रिका और दैनिक छत्तीसगढ़ जैसे अख़बारों के लिए लिखा करते थे.