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सोहराबुद्दीन मामला: रिटायर्ड जज का आरोपियों की रिहाई पर सवाल, कहा- दोबारा जांच करे हाईकोर्ट

हाई-प्रोफाइल आरोपियों की रिहाई, ज़मानत और गवाहों पर दबाव होने जैसे कई सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय एम थिप्से ने इस मामले को न्यायतंत्र की असफलता कहा है.

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सोहराबुद्दीन मामला: सीबीआई को हाईकोर्ट की फटकार, पूछा गवाहों की सुरक्षा के लिए क्या किया

मामले में अब तक 30 गवाह बयान से मुकरे. नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि गवाहों को सुरक्षा देना सीबीआई का दायित्व. मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती.

The Wire Editorial

संपादकीय: मुंबई के पत्रकारों ने जो किया वो देश के पत्रकारों के लिए नज़ीर है

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदी को नौ पत्रकारों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह पाबंदी हटा दी. उनकी जीत पत्रकारिता की जीत है.

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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला: 40 गवाहों में से सोहराबुद्दीन की बहन समेत 27 बयान से मुकरे

कई पुलिसकर्मियों ने अपने उन पुराने सहकर्मी, जो इस मामले में आरोपी हैं, को पहचानने से इनकार कर दिया है.

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सोहराबुद्दीन मामला: कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदी को हाईकोर्ट ने हटाया

अदालत ने कहा कि इस तरह की पाबंदी अनुचित है और यह पत्रकारों के अभिव्यक्ति की आज़ादी के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है.

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सोहराबुद्दीन मामला: मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन के ख़िलाफ़ याचिका पर हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में चल रही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई की मीडिया रिपोर्टिंग पर बचाव पक्ष की अर्ज़ी के बाद रोक लगा दी गई थी, जिसके ख़िलाफ़ पत्रकारों ने याचिका दायर की है.

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सोहराबुद्दीन मामला: मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक के ख़िलाफ़ पत्रकारों ने की हाईकोर्ट में अपील

विभिन्न राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों से जुड़े 9 पत्रकारों ने अपनी याचिका में कहा कि सुनवाई की मीडिया कवरेज पर पाबंदी ग़ैर-क़ानूनी है.

(फोटो: रॉयटर्स)

गौरी लंकेश बनीं पत्रकारों के संघर्ष की प्रतीक, भारत में इस साल नौ पत्रकारों को गंवानी पड़ी जान

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने भारत में पत्रकारों की हत्या की निंदा करते हुए ऐसी घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की है.

सोहराबुद्दीन (फाइल फोटो)/रॉयटर्स

सोहराबुद्दीन मामला: सुनवाई की मीडिया रिपोर्टिंग पर अदालत की रोक

पत्रकारों ने इस पर एतराज़ जताते हुए कहा कि कार्यवाही की रिपोर्टिंग सही उद्देश्यों को लेकर है ताकि लोग मामले की प्रगति जान सकें.

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त्रिपुरा: दो महीने में दो पत्रकारों की हत्या को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने निंदा की

बंद के दौरान झड़पों में 11 घायल, एडिटर्स गिल्ड ने कहा, दो पत्रकारों की हत्या यह संकेत है कि त्रिपुरा में पत्रकारों पर गंभीर खतरा है, सरकार सुरक्षा दे.

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त्रिपुरा: पत्रकार की हत्या के विरोध में अख़बारों ने ख़ाली छोड़े संपादकीय

हत्या के विरोध में भाजपा, कांग्रेस ने किया त्रिपुरा बंद का ऐलान, सत्तारूढ़ माकपा ने कहा सरकार की उचित कार्रवाई के बावजूद हत्या का राजनीतिकरण कर रही हैं पार्टियां.

पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक. (फोटो साभार: फेसबुक)

त्रिपुरा में कथित तौर पर कॉन्स्टेबल ने की पत्रकार की हत्या

बीते 20 सितंबर को एक राजनीतिक पार्टी के प्रदर्शन को कवर करने गए टीवी पत्रकार शांतनु भौमिक की भी हत्या कर दी गयी थी.

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राष्ट्रीय प्रेस दिवस: राजस्थान पत्रिका ने संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर राजस्थान की वसंधुरा सरकार के ‘काले क़ानून’ पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए राजस्थान पत्रिका अख़बार ने अपना संपादकीय ख़ाली छोड़ दिया.

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जब तक ‘काला क़ानून’ वापस नहीं होता, मुख्यमंत्री वसुंधरा का बहिष्कार करेंगे: राजस्थान पत्रिका

अख़बार के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने एक लेख में लिखा, वसुंधरा राजे जब तक विवादित क़ानून को वापस नहीं लेतीं, तब तक अख़बार उनसे संबंधित समाचारों का प्रकाशन नहीं करेगा.’

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सरकार मीडिया उद्योग को मदद करे, पत्रकारों के लिए वेजबोर्ड का कोई तुक नहीं है: आईएनएस

मीडिया मालिकों के संगठन इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी ने कहा, नोटबंदी के कारण विज्ञापनों में कमी आने से अख़बार प्रभावित हुए हैं.

New Delhi: Demonstrators hold placards with the picture of journalist Gauri Lankesh during a 'Not In My Name' protest at Jantar Mantar in New Delhi on Thursday. PTI Photo(PTI9_7_2017_000157B)

पाकिस्तान का वर्तमान अब भारत का भविष्य नज़र आने लगा है

शब्द और विचार हर किस्म के कठमुल्लों को बहुत डराते हैं. विचारों से आतंकित लोगों ने अब शब्दों और विचारों के ख़िलाफ़ ​बंदूक उठा ली है.

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ये जो भक्त हैं, ये उन्हीं का वक़्त है

वे हत्या के पक्ष में दलीलें देने लगे. वे हत्यारों को बधाइयां देने लगे. उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या को सिर्फ जायज़ नहीं ठहराया. वे हत्या के बाद ठंडी पड़ चुकी उस लाश को गालियां देने लगे. जैसे वे उस पर और गोलियां चलाना चाहते हों.

Ravish Kumar

मैंने प्रधानमंत्री को गुंडा नहीं बोला: रवीश कुमार

मैंने आॅनलाइन जगत के एक हिस्से को गुंडा और हत्यारा ज़रूर कहा है. प्रधानमंत्री के लिए कभी ऐसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है.

New Delhi: Demonstrators hold placards with the picture of  journalist Gauri Lankesh during a 'Not In My Name' protest,  at Jantar Mantar in New Delhi on Thursday. PTI Photo(PTI9_7_2017_000160B)

गौरी लंकेश जैसी हत्याएं जारी रहेंगी क्योंकि हत्यारों को पता है कि उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा

गौरी की हत्या एक चेतावनी है. हत्यारों को पता है कि वे सुरक्षित हैं. वे बेखौफ़ होकर अपना काम करते रहेंगे.

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश (फोटो: गौरी लंकेश के फेसबुक वाल से)

भाजपा नेता बोले, गौरी लंकेश आरएसएस के ख़िलाफ़ न लिखतीं तो ज़िंदा होतीं

भाजपा विधायक डीएन जीवराज ने कहा कि गौरी लंकेश जिस तरह लिखती थीं, वो बर्दाश्त के बाहर था. गौरी मेरी बहन जैसी हैं लेकिन जिस तरह उन्होंने लिखा, वो स्वीकार नहीं किया जा सकता.’

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वो कौन लोग हैं जो एक निहत्थी महिला की हत्या का जश्न मना रहे हैं?

हमने बचपन से सुना था कि किसी की मौत के बारे में बुरा मत बोलो क्योंकि मरा आदमी अपनी सफाई नहीं दे सकता. पर ये लोग तो जैसे मरने का इंतज़ार कर रहे थे. ये कहां पले-बढ़े हैं, ये कहां से आते हैं?

Bhopal: Journalists, social workers and members of various organisations hold protest against the killing of journalist Gauri Lankesh, in Bhopal on Thursday. PTI Photo  (PTI9_7_2017_000135B)

जनता को झूठे सपनों, निराधार तथ्यों और धर्म की भांग ने मदमस्त कर रखा है

कभी-कभी मोमबत्तियां लेकर, मानव श्रृंखला बनाकर खड़ा होने वाला भारत का बौद्धिक वर्ग छोटे-छोटे स्वार्थों, छोटी-छोटी नौकरियों और बड़े-बड़े पैकेजों के चक्कर में अपना दायित्व भूल गया है.

Mumbai: Journalists pay tributes to journalist Gauri Lankesh, in Mumbai on Wednesday. PTI Photo(PTI9_6_2017_000159A)

असहिष्णु आवाज़ों को हमारी ख़ामोशी से ही ताकत मिलती है: गौरी लंकेश

गौरी का अख़बार उनके तेज़तर्रार और तर्कवादी पिता की ही तरह धर्मनिरपेक्षता, दलितों, महिलाओं और समाज में पिछड़े लोगों के अधिकारों के प्रति मुखर रहता था.

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मीडिया बोल, एपिसोड 05: सांप्रदायिक हिंसा और मीडिया कवरेज

मीडिया बोल की पांचवीं कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, द हूट की संपादक सेवंती निनान और एनडीटीवी की वरिष्ठ संपादक निधि कुलपति के साथ बंगाल के बसीरहाट और बादुरिया की सांप्रदायिक हिंसा के मीडिया कवरेज पर चर्चा कर रहे हैं.

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मीडिया बोल, एपिसोड 04: हिंदी मीडिया आज इतना बेदम और ग़ैर-पेशेवर क्यों?

मीडिया बोल की चौथी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, एनडीटीवी के सीनियर एंकर रवीश कुमार और वरिष्ठ पत्रकार विद्या सुब्रह्मण्यम के साथ हिंदी मीडिया के ग़ैर-पेशेवर रवैये पर चर्चा कर रहे हैं.

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‘जब भी कोई दल बहुमत से सत्ता में होता है, तब प्रेस की आज़ादी पर हमले होते हैं’

वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन ने प्रेस की आज़ादी और लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा समर्थित प्रेस और मीडिया को ही एकमात्र उपाय बताया.

कर्णाटक विधानसभा (फोटो: पीटीआई)

कर्नाटक विधानसभा से जेल की सज़ा को पत्रकारों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

विधायकों के ख़िलाफ़ अवमानना वाले लेख लिखने के आरोप में पत्रकारों को कर्नाटक विधानसभा ने एक वर्ष की कैद और 10 हज़ार जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.

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मीडिया बोल, एपिसोड 03: भारतीय मीडिया में दलित पत्रकार कहां हैं?

मीडिया बोल की तीसरी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, जेएनयू में समाजशास्त्र के प्रोफेसर विवेक कुमार और वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह के साथ मीडिया में दलित पत्रकारों की स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं.

Indian press photographers stand behind a fence for security reasons as they take pictures of Belgium's Queen Paola in a school in Mumbai November 6, 2008. Belgium's King Albert II and Queen Paola are on a official state visit to India.     REUTERS/Francois Lenoir   (INDIA)

‘मीडिया मालिकों ने पत्रकारों को बंधुआ मजदूर बना रखा है’

पत्रकारों के लिए जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफ़ारिश और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से बातचीत.

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मीडिया बोल, एपिसोड 02: किसको चाहिए आज़ाद मीडिया?

मीडिया बोल की दूसरी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, हिंदुस्तान टाइम्स के राजनीतिक संपादक विनोद शर्मा और नेपाल वन टीवी की मैनेजिंग एडीटर व वरिष्ठ पत्रकार नलिनी सिंह के साथ मीडिया की आज़ादी पर चर्चा कर रहे हैं.

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वो मीडिया को उस कुत्ते में बदल रहे हैं जिसके मुंह में विज्ञापन की हड्डी है, ताकि वह उन पर न भौंके

शुक्रवार, 9 जून को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने मीडिया के वर्तमान परिदृश्य पर अपने विचार रखे. पढ़ें उनका पूरा भाषण…

Fake News

पहले मामूली चूक पर भी संपादक शर्मिंदा होता था, अब पूरी ख़बर फर्ज़ी हो तब भी दांत दिखाकर हंसेगा

वेबसाइट की सफलता के लिए जितना झूठ परोसेंगे, उतना हिट मिलेगा. जितना हिट मिलेगा, उतना विज्ञापन मिलेगा. झूठ का कारोबार आज सच के लिए चुनौती बन गया है.

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हमारे न्यूज़ चैनल तू-तू, मैं-मैं पर क्यों उतर आए हैं?

न्यूज़ चैनल हर विषय पर दलीय प्रवक्ताओं की भीड़ क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं? क्या वे राजनीतिक दलों, ख़ासकर सत्ताधारी दल को हर मुद्दे पर अपना फोरम मुहैया कर खुश रखने की कोशिश करते हैं?