Justice Arun Mishra

पूर्वोत्तर में आफ़स्पा के चलते मानवाधिकार उल्लंघन होने की आम राय बनाना ग़लत: एनएचआरसी प्रमुख

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि आयोग सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम यानी आफ़स्पा की वैधता या संवैधानिकता की पड़ताल नहीं कर सकता या इस पर बहस नहीं कर सकता. अधिनियम लागू करने या वापस लेने की आवश्यकता की समीक्षा सरकार करेगी.

फ़र्ज़ी एनकाउंटर के लिए कोई जगह नहीं, सरकार अपने लोगों के प्रति जवाबदेह: एनएचआरसी प्रमुख

विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने न्याय मिलने में देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसकी वजह से लोग क़ानून अपने हाथ में लेते हैं.

पेटेंट धारकों के अधिकारों से ज़्यादा प्रबल जीवन का अधिकार होना चाहिए: एनएचआरसी प्रमुख

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा मानवाधिकार परिषद की एक डिजिटल वैश्विक बैठक में कहा कि जीवन का अधिकार प्रबल होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दुनिया भर में कोविड से संबंधित जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की कमी दूर हो. इसके अलावा निर्धन लोगों को दवाएं और टीके किफ़ायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकें.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अगले अध्यक्ष होंगे पूर्व जज जस्टिस अरुण मिश्रा

इस पद के लिए तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को भी शॉर्टलिस्ट किया गया था, लेकिन इन सबको दरकिनार कर चयन समिति ने जस्टिस अरुण मिश्रा को तरजीह दी. पिछले साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर होते हुए भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ की थी, जिसके कारण उनकी आलोचना हुई थी कि वह किस हद तक सरकार के क़रीबी हैं.

लोकतंत्र बचा सकने वाली अकेली संस्था ही इसका गला घोंटने में मदद कर रही है

भारत में अक्सर न्यायिक आज़ादी के रास्ते में कार्यपालिका और कभी-कभी विधायिका द्वारा बाधा डालने की संभावनाएं देखी जाती हैं, लेकिन जब न्यायपालिका के भीतर के लोग ही अन्य शाखाओं के सामने झुक जाते हैं, तो स्थिति बिल्कुल अलग हो जाती है.

जस्टिस अरुण मिश्रा के न्यायिक परंपराओं की अनदेखी की वजह उनका रूढ़िवादी नज़रिया है

जस्टिस अरुण मिश्रा द्वारा प्रार्थनास्थलों पर सरकार की नीति, अश्लीलता और लैंगिक न्याय को लेकर दिए गए फ़ैसले क़ानूनी पहलुओं से ज़्यादा उनके निजी मूल्यों पर आधारित नज़र आते हैं.

प्रशांत भूषण ने 1 रुपये का जुर्माना भरा, कहा- इसका मतलब ये नहीं कि फैसला स्वीकार कर लिया

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को न्यायपालिका एवं जजों को लेकर अपने दो ट्वीट के चलते अदालत की अवमानना का दोषी क़रार दिया गया था और एक रुपये जुर्माने की सज़ा दी गई थी.

अवमानना मामला: दो​षसिद्धि के ख़िलाफ़ अपील का अधिकार पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भूषण

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को न्यायपालिका एवं जजों को लेकर अपने दो ट्वीट के चलते अदालत की अवमानना का दोषी क़रार दिया गया था और 31 अगस्त को एक रुपये जुर्माने की सज़ा दी गई थी.

जस्टिस अरुण मिश्रा के सुप्रीम कोर्ट के सबसे प्रभावशाली जज बनने की कहानी

भारत के राजनीतिक तौर पर सर्वाधिक संवेदनशील मामलों को अनिवार्य रूप से जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ को ही भेजा जाता था और देश के सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम जज इसकी वजह जानने के लिए इतिहास में पहली बार मीडिया के सामने आए थे.

अदालत की अवमानना का अधिकार क्षेत्र ख़तरनाक, इस व्यवस्था को ख़त्म होना चाहिए: प्रशांत भूषण

बीते दिनों अवमानना के दोषी ठहराए गए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय प्रणाली और कोर्ट के कामकाज से वाक़िफ़ हर नागरिक को स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से उसे अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताकर अवमानना के रूप में लिया जाता है.

सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर आ गया है कि जज बार से भयभीत होने लगे हैं: बार एसोसिएशन अध्यक्ष

बुधवार को रिटायर हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा को उनके सहयोगियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विदाई दी गई. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने इस आयोजन में उन्हें बोलने का मौक़ा न दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है.

भूषण अवमानना मामला: जस्टिस मिश्रा ने 2018 में हुई चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना की

अवमानना की कार्रवाई के दौरान प्रशांत भूषण और उनके वकील ने कहा था कि 2018 में चार जजों द्वारा अदालत और सीजेआई पर सवाल उठाने को लेकर अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं हुई थी. जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने सोमवार को अपने फ़ैसले में लिखा कि वह इस तरह की पहली और आख़िरी प्रेस वार्ता थी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हुए मैं एक रुपये का जुर्माना भर दूंगा: प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने ट्विटर पर की गई दो टिप्पणियों के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को 15 सितंबर तक एक रुपये का जुर्माना भरने की सज़ा सुनाई है. जुर्माना न देने पर उन्हें तीन महीने जेल होगी और तीन साल तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा.

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपये का जुर्माना लगाया

ट्विटर पर की गई दो टिप्पणियों के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को सज़ा सुनाते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने निर्देश दिया कि 15 सितंबर तक जुर्माना न देने पर उन्हें तीन महीने जेल होगी और तीन साल तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा.

भूषण अवमानना केस: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा, पूछा- माफ़ी मांगने में ग़लत क्या है

दो ट्वीट्स के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा माफ़ी मांगने से इनकार के बाद उनकी सज़ा को लेकर हुई सुनवाई में जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि अगर आप माफ़ी मांगते हैं तो गांधीजी की श्रेणी में आएंगे. ऐसा करने में छोटा महसूस करने जैसा कुछ नहीं है.