Juvenile Justice Board

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

किसी नाबालिग को जेल में या पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

उत्तर प्रदेश और दिल्ली में नाबालिगों को हिरासत में लेने से जुड़े आरोपों पर शीर्ष अदालत ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड मूकदर्शक बने रहने और मामला उनके पास आने पर ही आदेश पारित करने के लिए नहीं बनाए गए हैं. अगर उनके संज्ञान में किसी बच्चे को जेल या पुलिस हिरासत में बंद करने की बात आती है, तो वह उस पर कदम उठा सकता है.

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12 साल से छोटी बच्चियों से बलात्कार पर फांसी तक की सज़ा दिलाने वाला विधेयक मंजूर

12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए दंड को सात वर्ष के न्यूनतम कारावास से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रावधान किया गया है. 16 वर्ष से कम की लड़की से बलात्कार में सज़ा 20 वर्ष से कम नहीं होगी और इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा.

जस्टिस मदन बी. लोकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/National Commission for Protection of Child Rights)

जघन्य अपराधों के हर मामले में किशोर मुजरिमों को सज़ा-ए-मौत उचित नहीं: जस्टिस लोकुर

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर ने बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों को संवेदनशील बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा हम इस देश में यूं बर्बर नहीं हो सकते.

(फोटो: पीटीआई)

रेयान मामला: बच्चे के पिता ने दावा किया मंत्री ने कहा था सीबीआई जांच की मांग मत करो

पिता ने किशोर न्याय बोर्ड से अनुरोध किया कि जांच के दौरान आरोपी छात्र के ख़िलाफ़ एक वयस्क की तरह केस चलाया जाए.