Labourers

Chennai: Migrants arrive at Central Railway Station to board a Shramik Special train for West Bengal, during ongoing COVID-19 lockdown, in Chennai, Wednesday, June 3, 2020. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI03-06-2020_000261B)

लॉकडाउन में श्रमिकों के मौत का आंकड़ा सरकार ने इकट्ठा किया, फ़िर भी संसद को बताने से इनकार

द वायर द्वारा भारतीय रेल के 18 ज़ोन में दायर आरटीआई आवेदनों के तहत पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले कम से कम 80 प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है. केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में ये जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसने संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया.

स्वामी अग्निवेश. (फोटो साभार: फेसबुक/@swamiagnivesh)

स्वामी अग्निवेश: आधुनिक आध्यात्मिकता का खोजी

स्वामी अग्निवेश गांधी की परंपरा के हिंदू थे, जो मुसलमान, सिख, ईसाई या आदिवासी को अपने रंग में ढालना नहीं चाहता और उनके लिए अपना खून बहाने को तत्पर खड़ा मिलता है. वे मुसलमानों और ईसाइयों के सच्चे मित्र थे और इसीलिए खरे हिंदू थे.

विशेष श्रमिक ट्रेन. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए रेलवे ने श्रमिकों से वसूला करोड़ों रुपये किराया

सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को दिए एक आदेश में कहा था कि ट्रेन या बस से यात्रा करने वाले किसी भी प्रवासी मज़दूर से किराया नहीं लिया जाएगा. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद रेलवे द्वारा श्रमिक ट्रेनों के यात्रियों से किराया लिया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से रेलवे ने कमाए 429 करोड़ रुपये

एक आरटीआई आवेदन के जवाब में मिले आंकड़ों के अनुसार 29 जून तक 4,615 ट्रेनें चलीं और रेलवे ने इनसे 428 करोड़ रुपये कमाए. इसके साथ ही जुलाई में 13 ट्रेनें चलाने से रेलवे को एक करोड़ रुपये की आमदनी हुई.

Prayagraj: A railway staff member distributes food packets among migrants sitting in Shramik Special train to reach their native places, during ongoing COVID-19 lockdown, at Prayagraj Railway Station, Sunday, May 31, 2020. (PTI Photo)(PTI31-05-2020_000074B)

श्रमिक ट्रेनों में हुई मौतों का डेटा तैयार कर रहा है रेलवे, सौ के पार जा सकता है आंकड़ा

लॉकडाउन के दौरान मज़दूरों को उनके घर ले जा रहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में हुई मुसाफ़िरों की मौतों की आलोचना के बाद रेलवे ने अधिकतर मामलों में मृतकों की पुरानी बीमारियों और उनकी शारीरिक अवस्था को ज़िम्मेदार ठहराया था.

बीट वन ग्राम. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

यूपी: कृषि संसाधन होते हुए भी क्यों पलायन को मजबूर हुईं वनटांगियों की कई पीढ़ियां

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-महराजगंज ज़िले को कभी बेशकीमती साखू-सागौन के जंगल लगाकर आबाद करने वाले वनटांगियों के पास पर्याप्त ज़मीन और कृषि संसाधन थे, लेकिन समय के साथ नई पीढ़ियां उचित आय और आजीविका के अभाव में शहर की राह पकड़ने को विवश हो गईं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

केरल से बिहार के कटिहार पहुंचे मज़दूरों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज

कटिहार स्टेशन पर भोजन और बस की व्यवस्था न होने से नाराज़ मज़दूरों ने चक्काजाम कर दिया था और तक़रीबन 40 मिनट तक बिहार सरकार और प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की थी. हालांकि पुलिस ने लाठीचार्ज की बात से इनकार किया है.

Jabalpur: Railway official provides drinking water from a distance to migrants travelling by a train to their native places, during the ongoing nationwide COVID-19 lockdown, at a railway station in Jabalpur, Wednesday, May 27, 2020. (PTI Photo) (PTI27-05-2020 000149B)(PTI27-05-2020 000198B)

‘मुंबई से गांव आने के लिए निकले, लेकिन उनका सफ़र रास्ते में ही ख़त्म हो गया’

बीते 26 मई को झांसी से गोरखपुर जा रही एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार आज़मगढ़ के 45 वर्षीय प्रवासी श्रमिक रामभवन मुंबई से अपने परिवार सहित घर लौट रहे थे, जब रास्ते में अचानक उनकी तबियत ख़राब होने लगी. परिजनों का कहना है कि समय पर उचित मेडिकल सहायता न मिलने के कारण उन्होंने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर दम तोड़ दिया.

(फोटो: पीटीआई)

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अब तक कम से कम 80 लोगों की मौत: आरपीएफ

रेलवे सुरक्षा बल के आंकड़ों के मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में करीब 80 लोगों की मौत 9 मई से 27 मई के बीच हुई है. इनमें चार वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक के यात्री शामिल थे.

Prayagraj: A mother covers her childs head to beat the heat while waiting to board a bus to reach her native place after arriving via special train at Prayagraj Junction, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Prayagraj, Tuesday, May 26, 2020. (PTI Photo)(PTI26-05-2020 000043B)

स्पेशल ट्रेन चलने के बाद भी क्यों श्रमिकों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं?

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अपने घरों को लौट रहे प्रवासी मज़दूरों को न सिर्फ़ खाने-पीने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, बल्कि रेलवे द्वारा रूट बदलने के कारण कई दिनों की देरी से वे अपने गंतव्य तक पहुंच पा रहे हैं. इस दौरान भूख-प्यास और भीषण गर्मी के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोग दम तोड़ चुके हैं.

पश्चिम बंगाल के नैहट्टी जूट मिल में लगा ताला. (सभी फोटो: उमेश कुमार राय)

लॉकडाउन: भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके बंगाल जूट मिल मज़दूरों की आपबीती

विशेष रिपोर्ट: विभिन्न कारणों से जूट मिलों में आए दिन तालाबंदी से ये मज़दूर वैसे ही परेशान थे, फिर भी किसी तरह जी रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अचानक हुए लॉकडाउन के कारण मिलों की मशीनें जब खामोश हो गई हैं तो मजदूरों के सामने दाना-पानी का संकट पहाड़ की तरह खड़ा हो गया है.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली से बिहार लौटे मजदूरों का किराया देने से बिहार सरकार ने क्यों इनकार कर दिया?

दिल्ली सरकार ने बिहार के 1200 प्रवासी मजदूरों की सूची बनाकर उनका किराया रेलवे को सौंप दिया और इसका पैसा सीधे बिहार सरकार से मांगा. हालांकि, बिहार सरकार ने दिल्ली सरकार द्वारा मांगे गए करीब 6.5 लाख रुपये को वापस करने से इनकार कर दिया है.

ट्रेन के लिए राह देख रहे प्रवासी मजदूर (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: ‘जिस तकलीफ़ से घर लौटा हूं, अब से काम के लिए दूसरे राज्य जाने की हिम्मत नहीं होगी’

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के किराये को लेकर सरकार के विभिन्न दावों के बीच गुजरात से बिहार लौटे कामगारों का कहना है कि उन्होंने टिकट ख़ुद खरीदा था. उन्होंने यह भी बताया कि डेढ़ हज़ार किलोमीटर और 31 घंटे से ज़्यादा के इस सफ़र में उन्हें चौबीस घंटों के बाद खाना दिया गया.

AKS TEJ 4 May.00_25_43_23.Still001

मज़दूरों को वापस बुलाने का फैसला पहले लिया होता तो इतनी बुरी हालत न होती: तेजस्वी यादव

वीडियो: लॉकडाउन के बीच विभिन्न राज्यों में फंसे बिहार के मज़दूरों को वापस बुलाने के मुद्दे पर राजद नेता तेजस्वी यादव से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

Thane: Migrant workers from Lucknow walk along Mumbai-Nashik highway to reach their native places, during a nationwide lockdown in the wake of coronavirus, in Thane, Wednesday, April 29, 2020. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad) (PTI29-04-2020_000060B)

क्या समाज के लिए मज़दूर सीमेंट, ईंट और गारे की तरह संसाधन मात्र हैं?

मज़दूरों के हित निजी संपत्ति के मालिकों के हितों पर ही निर्भर हैं. सरकार सामाजिक व्यवस्था भी उन्हीं के लिए कायम करती है. अंत में यही कहा जाएगा कि उसने रेल भी मज़दूरों के हित में रद्द की हैं, उन्हें रोज़गार देने के लिए!