Lal Qila

दिल्ली सरकार ने ट्रैक्टर रैली हिंसा मामले में अभियोजक नियुक्ति पर पुलिस का अनुरोध ख़ारिज किया

दिल्ली सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, बीते 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा और पिछले साल उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े मामलों में दिल्ली पुलिस के वकीलों की नियुक्ति करने संबंधी उपराज्यपाल अनिल बैजल की सिफ़ारिश को मंत्रिमंडल ने ख़ारिज कर दिया है. बताया जा रहा है कि इस क़दम से केंद्र और उपराज्यपाल के साथ दिल्ली सरकार का टकराव बढ़ सकता है.

दिल्ली: लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाने के मामले में पंजाब से 21 वर्षीय किसान गिरफ़्तार

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान बहुत से प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर चलाते हुए लाल किले तक पहुंच गए थे और वहां एक धार्मिक झंडा लगा दिया था. इस संबंध में पुलिस ने अमृतसर से 21 वर्षीय किसान गुरजोत सिंह को गिरफ़्तार किया है.

लाल किला मामले में दीप सिद्धू ने कहा- झंडा फहराना अपराध नहीं, लेकिन फेसबुक लाइव करके गलती की

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान बहुत से प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर चलाते हुए लाल किले तक पहुंच गए थे और वहां एक धार्मिक झंडा लगा दिया था. आरोप है कि ऐसा करने के लिए पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू ने उकसाया था.

दिल्ली: ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल क़िले की घटना का आरोपी दीप सिद्धू गिरफ़्तार

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों को वापस लेने की किसान संगठनों की मांग के समर्थन में 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान बहुत से प्रदर्शनकारी लाल क़िले तक पहुंच गए थे. बताया गया है कि अभिनेता से कार्यकर्ता बने दीप सिद्धू ने वहां एक ध्वज स्तंभ पर धार्मिक झंडा लगाया था.

ट्रैक्टर परेड हिंसा के बाद किसानों ने बजट के दिन संसद मार्च की योजना रद्द की

किसानों का कहना है कि कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ उनका आंदोलन चलता रहेगा और 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर देश भर में जनसभाएं और भूख हड़ताल की जाएंगी. किसान नेताओं ने हिंसा के लिए पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू और पंजाब किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

लाल क़िले पर सिखों का धार्मिक झंडा फ़हराना किसकी साज़िश?

वीडियो: केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर हज़ारों की संख्या में किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली थी. इस दौरान कई जगह किसानों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई और लाल क़िले पर सिखों का एक धार्मिक ध्वज लगा दिया था.

लाल क़िले पर तिरंगा नहीं हटाया गया, न ही लगाया गया झंडा खालिस्तानियों का है

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का यह दावा है कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल क़िले पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने खालिस्तान का झंडा फहरा दिया था, हालांकि फैक्ट चेक में ग़लत पाया गया है.

ट्रैक्टर परेडः क्या तय रूट पर पुलिस बैरिकेड की वजह से किसानों ने दूसरा रास्ता चुना?

गणतंत्र दिवस के दिन निकाले गए ट्रैक्टर परेड के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि आख़िर क्यों किसानों ने पुलिस द्वारा निर्धारित रास्ते पर परेड नहीं निकाला. हालांकि दिल्ली के कुछ इलाकों में देखा गया कि पुलिस ने इन रास्तों पर ही बैरिकेडिंग कर दी थी, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों को रास्ता बदलना पड़ा.

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जो झंडे गाड़े हैं, तिरंगा उनका रूप नहीं लगता

क्या भगवा झंडे के समर्थक संघ और संघ से जुड़े किसी भी व्यक्ति या दल की तिरंगे के प्रति ईमानदारी पर विश्वास किया जा सकता है?