Lok Sabha

A trader wearing protective hand gloves counts Indian currency notes at a market during a 21-day nationwide lockdown to limit the spreading of coronavirus disease (COVID-19), in Kochi, India, March 27, 2020. REUTERS/Sivaram V

‘एनजीओ को निशाना बनाने के लिए एफसीआरए लाया गया, तो पीएम केयर्स को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं’

कई ग़ैर सरकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि नए एफसीआरए संशोधनों के कारण उनके काम में बाधा आएगी और कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है. इस विधेयक के प्रावधानों से छोटे एनजीओ के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा.

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एफसीआरए में संशोधन कैसे नौकरियों और एनजीओ को प्रभावित करेगा

वीडियो: बीते 20 सितंबर को विपक्ष ने लोकसभा में पेश किए गए एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक का विरोध यह कहते हुए किया कि सरकार इसके जरिये ‘आलोचकों पर निशाना’ साधना चाह रही है. इस क़ानून और इसके प्रभावों के बारे में बता रहे हैं द वायर के डिप्टी एडिटर गौरव विवेक भटनागर.

संसद भवन. (फोटो: पीटीआई)

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट: संसद के नए भवन के निर्माण की अनुमानित लागत 971 करोड़ रुपये

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत संसद भवन की त्रिकोणीय इमारत, एक साझा केंद्रीय सचिवालय और राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे राजपथ के पुनर्विकास की परिकल्पना की गई है. हालांकि इस योजना का विभिन्न स्तरों पर विरोध हो रहा है.

REPRESENTATIVE IMAGE: An Indian army soldier keeps guard from a bunker near the border with Pakistan in Abdullian, southwest of Jammu, September 30, 2016. REUTERS/Mukesh Gupta/File Photo

केंद्रीय सशस्त्र बलों में एक लाख से अधिक पद ख़ाली: केंद्र सरकार

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि सबसे अधिक 28,926 पद बीएसएफ में ख़ाली हैं. इसके बाद दूसरे स्थान पर सीआरपीएफ में 26,506 और तीसरे स्थान पर सीआईएसएफ में 23,906 पद ख़ाली हैं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

असम में 86 हज़ार से अधिक लोगों को बीते पांच वर्षों में विदेशी घोषित किया गया: केंद्र

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को बताया कि असम में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों का निस्तारण करने वाले न्यायाधिकरण के समक्ष ‘डाउटफुल वोटर्स’ के 83,008 मामले लंबित हैं.

(फोटो: पीटीआई)

पहले इनकार करने के बाद अब सरकार ने माना, श्रमिक ट्रेनों में 97 लोगों की मौत हुई

बीते 14 सितंबर को शुरू हुई संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा में कुल 10 सांसदों ने प्रवासी श्रमिकों की मौत से जुड़े सवाल पूछे थे, लेकिन सरकार ने ये जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया. श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय में राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि​ ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखा जाता है.

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लॉकडाउन: श्रमिकों की मौत का आंकड़ा सरकार ने इकट्ठा किया, फ़िर भी संसद को बताने से इनकार

वीडियो: द वायर द्वारा भारतीय रेल के 18 ज़ोन में दायर आरटीआई आवेदनों के तहत पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले कम से कम 80 प्रवासी श्रमिकों की मौत हुई है. केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में ये जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसने संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया.

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कश्मीर और प्रवासी मज़दूरों पर मोदी सरकार के दो सबसे बड़े झूठ

वीडियो: द वायर द्वारा दायर आरटीआई आवेदनों से पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले करीब 80 प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है. केंद्र के पास ये जानकारी होने के बावजूद संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया गया. वहीं, सरकार का कहना है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की घटनाएं कम हुई हैं. इस मुद्दे पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

महाराष्ट्र में डाक मतपत्र का इस्तेमाल करते मतदाता. (फोटो: पीटीआई)

डाक-मतपत्र से वोट देने की आयु सीमा कम करने का फैसला वापस ले चुनाव आयोग: कांग्रेस

कोरोना वायरस से वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा का हवाला देते हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में डाक-मतपत्र के लिए मतदाताओं की आयु सीमा 80 साल से घटाकर 65 साल कर दी गई है. विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग बिना विमर्श चुनावी प्रक्रिया बदलने के लिए एकतरफ़ा क़दम उठा रहा है.

Kandhamaal: An elderly voter show her finger marked with indelible ink at Adabadi polling booth during the second phase of Lok Sabha elections in Kandhamaal, Thursday, April 18, 2019. PTI Photos

कोविड-19: लोकसभा और विधानसभा चुनावों में डाक मतपत्र से मतदान की आयु सीमा घटाई गई

कोरोना वायरस को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के मद्देनज़र विधि मंत्रालय ने 19 जून को जारी संशोधन में 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों को डाक मतपत्र के इस्तेमाल की अनुमति दी है. इससे पहले यह आयु सीमा 80 वर्ष थी.

New Delhi: President Ram Nath Kovind speaks during the inauguration of the 20th National Technology Day 2018 function in New Delhi on Friday. (PTI Photo / Kamal Singh)(PTI5_11_2018_000050B)

विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से लोकतंत्र कमजोर होता है: रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट सत्र के पहले दिन अपने अभिभाषण में कहा कि संसद ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर महात्मा गांधी के विचारों का सम्मान किया है. हालांकि इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करते हुए इसका कड़ा विरोध किया.

आशीष नंदी, अमिताव घोष, मीरा नायर और नसीरुद्दीन शाह. (फोटो साभार: विकिपीडिया/फेसबुक)

नसीरुद्दीन शाह, मीरा नायर समेत 300 हस्तियों ने नागरिकता कानून के खिलाफ खुला बयान जारी किया

बयान में कहा गया है, ‘हम सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले और बोलने वालों के साथ खड़े हैं. संविधान के बहुलवाद और विविध समाज के वादे के साथ भारतीय संविधान के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए उनके सामूहिक विरोध को सलाम करते हैं.’

CANNES: Director Nandita Das poses for photographers during a photo call for the film 'Manto' at the 71st international film festival, Cannes, southern France, Monday, May 14, 2018. AP/PTI(AP5_14_2018_000121B)

नागरिकता कानून विरोध प्रदर्शन को नंदिता दास का समर्थन, कहा- देश में हर जगह शाहीन बाग बन रहे हैं

अभिनेत्री नंदिता दास ने नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का विरोध करते हुए कहा कि दोनों को जोड़ना बेहद खतरनाक है. उन्होंने कहा कि यह बांटने वाला कानून है.

New Delhi: Home Minister Amit Shah during the 32nd Intelligence Bureau (IB) Centenary Endowment Lecture at Siri Fort auditorium, Monday, Dec. 23, 2019. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_23_2019_000017B)

जिसे विरोध करना हो करे, मगर नागरिकता कानून वापस नहीं होने वाला: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से पूछा कि जब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में करोड़ों लोग धर्म के आधार पर मारे गए तब आप कहां थे?

New Delhi: Vice- President Venkaiah Naidu gestures as he addresses a gathering during Rajya Sabha Day celebrations at Parliament Library in New Delhi on Tuesday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI4_10_2018_000070B)

केंद्र को असंतोष प्रकट कर रहे लोगों की आशंकाओं को दूर करना चाहिए: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जैसे मुद्दों पर विचारपूर्ण और सकारात्मक बहस जरूरी है और प्रदर्शन के दौरान हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. लोकतंत्र में सहमति, असहमति बुनियादी सिद्धांत है. दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए.