Maharashtra Police

बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो : पीटीआई)

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोंसाल्विस से पूछा, ‘आपने घर पर ‘वार एंड पीस’ किताब क्यों रखी थी?’

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी वर्णन गोंसाल्विस और अन्य की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ‘वार एंड पीस’ जैसी किताबें राज्य के खिलाफ सामग्री की ओर इशारा करते हैं. ‘वार एंड पीस’ रूस के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्सटॉय का उपन्यास है.

कर्नाटक विधानसभा में एचडी कुमारस्वामी. (फोटो: पीटीआई)

कर्नाटकः विश्वास मत आज, स्पीकर ने बागी विधायकों को समन जारी कर मिलने बुलाया

कर्नाटक के विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने बागी विधायकों को समन जारी कर मंगलवार सुबह 11 बजे अपने ऑफिस में तलब किया है. यह समन विधायकों की अयोग्यता को लेकर गठबंधन के नेताओं की तरफ से दी गई याचिका के बाद दिया गया है.

कर्नाटक विधानसभा में एचडी कुमारस्वामी. (फोटो: पीटीआई)

कर्नाटक: विश्वास प्रस्ताव पर नहीं हुआ मतदान, विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस-जेडीएस सरकार के राज्यपाल द्वारा विश्वास मत पर मतदान कराने के लिए तय की गई दो समय सीमाओं को पूरा ना कर पाने पर सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया है.

Bengaluru: Karnataka Chief Minister H D Kumaraswamy leaves Vidhana Soudha after meeting with Speaker KR Ramesh Kumar in his chamber, in Bengaluru, Wednesday, July 17, 2019. (PTI Photo) (PTI7_17_2019_000194B)

कुमारस्वामी द्वारा विश्वास मत साबित किए बिना कर्नाटक विधानसभा स्थगित, भाजपा देगी धरना

कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 16 विधायकों के इस्तीफे के साथ सियासी संकट पैदा हो गया है. हालांकि इनमें से एक विधायक ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

कर्नाटक के बागी विधायकों को विधानसभा में आने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने यह भी कहा कि बागी विधायकों के इस्तीफे पर स्पीकर द्वारा फैसला लेने की कोई समयसीमा नहीं है. वे एक उचित समय में फैसला ले सकते हैं.

शनिवार को बेंगलूरू में राजभवन के बाहर खड़े इस्तीफा देने वाले कांग्रेस और जद(एस) विधायक. (फोटो: पीटीआई)

कर्नाटक: बागी विधायकों ने मुंबई पुलिस को पत्र लिख कहा- किसी कांग्रेस नेता से नहीं मिलना चाहते

विधायकों ने कहा, ‘मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद या महाराष्ट्र और कर्नाटक कांग्रेस के किसी अन्य नेताओं से मिलने की हमारी कोई इच्छा नहीं है. हमें इन लोगों से खतरे की आशंका है.’

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

कर्नाटक राजनीतिक संकट: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, शाम छह बजे तक स्पीकर के सामने पेश हों बागी विधायक

कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 16 विधायक इस्तीफ़ा दे चुके हैं. विधानसभा स्पीकर ने इनमें से 8 विधायकों का इस्तीफ़ा तय प्रारूप में न होने का हवाला देते हुए खारिज़ कर दिया था.

Bengaluru: JD(S) MLAs leave a hotel in Bengaluru, Monday, July 8, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI7_8_2019_000222B)

कर्नाटक सियासी संकट: दो और कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दिया, बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

इससे पहले कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 14 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. कांग्रेस के बागी विधायक मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं. कर्नाटक सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार बागी विधायकों से मिलने गए थे, तब मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

तेलुगू कवि वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई)

कर्नाटक पुलिस ने 14 साल पुराने मामले में वरवरा राव को हिरासत में लिया

तेलुगू कवि वरवरा राव भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे की यरवदा जेल में न्यायिक हिरासत में रखे गए थे. अब बेंगलुरु पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया है.

गौतम नवलखा (फोटो: यूट्यूब)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा के ख़िलाफ़ कुछ नहीं पाया, गिरफ़्तारी से संरक्षण बढ़ाया

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा और चार अन्य कार्यकर्ताओं पर माओवादियों से संबंध रखने का आरोप लगाया है.

गोविंद पानसरे (फोटो: पीटीआई)

गोविंद पानसरे हत्याकांड में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता शरद कालस्कर गिरफ़्तार

सीबीआई का कहना है कि गोविंद पानसरे की हत्या के अलावा शरद कालस्कर का नाम सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर और गौरी लंकेश की हत्या के मामले में भी सामने आया था और इन मामलों में उसकी गिरफ़्तारी भी हो चुकी है.

माओवादियों से संबंध और प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश के आरोप में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन महेश राउत और रोना विल्सन (बाएं से दाएं)

भीमा कोरेगांव: सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के एक साल बाद…

कार्यकर्ताओं के वकीलों का कहना है कि पुलिस की ओर से गिरफ़्तारी के बाद से ही मामले को लटकाने और बचाव पक्ष के जानकारियों तक पहुंचने के हर प्रयास को विफल करने की कोशिश की जा रही है.

गोविंद पानसरे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और नरेंद्र दाभोलकर. (फोटो: पीटीआई)

दाभोलकर और पानसरे हत्या मामलों की धीमी जांच पर कोर्ट ने पूछा, मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे हत्या मामलों की धीमी जांच पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के पास गृह सहित 11 विभाग हैं लेकिन इस मामले को देखने के लिए उनके पास वक़्त नहीं है.

गोविंद पानसरे (फोटो: पीटीआई)

गोविंद पानसरे हत्या मामले की जांच से कोर्ट नाराज़, कहा- सरकार हंसी की पात्र बन गई है

बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य को अपने विचारकों और तर्कवादियों पर गर्व महसूस करना चाहिए.

गौतम नवलखा (फोटो: यूट्यूब)

भीमा-कोरेगांव: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गौतम नवलखा की याचिका पर आठ हफ़्तों में निर्णय ले हाईकोर्ट

सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट से भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है.

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प्रोफेसर राम पुनियानी का आरोप, सीआईडी ने घर आकर निजी सूचनाएं लेने का प्रयास किया

प्रख्यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता राम पुनियानी ने बताया कि शनिवार 9 मार्च को ख़ुद को सीआईडी से बताने वाले तीन लोग उनके घर आए और पासपोर्ट आवेदन के बहाने परिवार से जुड़ी जानकारियां मांगी. महाराष्ट्र सीआईडी ने कहा, नहीं की किसी तरह की छानबीन.

माओवादियों से संबंध और प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश के आरोप में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन महेश राउत और रोना विल्सन (बाएं से दाएं)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट में देरी को स्वीकारा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को चार्जशीट दायर करने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार किया था. शीर्ष अदालत ने उसे ख़ारिज कर दिया और कहा कि अब जब चार्जशीट दायर हो चुकी है, तो मामले में गिरफ़्तार पांच कार्यकर्ता नियमित ज़मानत की मांग कर सकते हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

भीमा-कोरेगांवः सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ्तारी पर रोक 22 फरवरी तक बढ़ी

एल्गार परिषद/भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने तेलतुम्बड़े को 14 और 18 फरवरी को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने का आदेश दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

आनंद तेलतुम्बड़े के समर्थन में आए 600 शिक्षाविद, कहा- बंद की जाएं सभी क़ानूनी कार्रवाई

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े पर भीमा कोरेगांव हिंसा और माओवादियों से कथित जुड़ाव के आरोपों को अमेरिका और यूरोप के अग्रणी शिक्षाविदों ने क़ानून का दुरुपयोग बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर गंभीर हमला है और इसके तुरंत समाधान की ज़रूरत है.

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अपूर्वानंद की मास्टरक्लास: क्यों आनंद तेलतुम्बड़े की आज़ादी ज़रूरी है

आज की मास्टर क्लास में अपूर्वानंद सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की संभावित गिरफ़्तारी पर चर्चा कर रहे हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

भीमा-कोरेगांवः सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ्तारी पर 12 फरवरी तक रोक

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आनंद तेलतुम्बड़े की अग्रिम ज़मानत संबंधी याचिका पर सुनवाई 11 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

अदालत ने आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ़्तारी को ग़ैरक़ानूनी कहा, रिहा करने का आदेश

पुणे पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के आरोप में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम सुरक्षा के बावजूद शनिवार को आनंद तेलतुम्बड़े को गिरफ्तार कर लिया था.

आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: फेसबुक)

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ़्तारी से सुरक्षा मिलने पर भी आनंद तेलतुम्बड़े गिरफ़्तार

भीमा-कोरेगांव हिंसा में कथित भूमिका और माओवादियों से कथित संबंधों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते 14 जनवरी को दलित शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा की अवधि चार सप्ताह और बढ़ा दी थी.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की अग्रिम ज़मानत याचिका पुणे की अदालत ने ख़ारिज की

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े को एल्गार परिषद/भीमा-कोरेगांव हिंसा में कथित भूमिका और माओवादियों से कथित संबंधों के मामले में आरोपी बनाया गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

आनंद तेलतुम्बड़े को गिरफ़्तार करने की कोशिश इस राजतंत्र के बढ़ते अहंकार का सबूत है

राजतंत्र हम सबको इतना मूर्ख समझ रहा है कि हम विश्वास कर लेंगे कि सामाजिक कार्यकर्ता इस देश में हिंसा की साज़िश कर रहे हैं. यह कहने वाले वे हैं जो दिन-रात मुसलमानों, ईसाईयों और सताए जा रहे लोगों के हक़ में काम करने वालों को शहरी माओवादी कहकर नफ़रत और हिंसा भड़काते रहते हैं.

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण. (फोटो: पीटीआई)

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों को असहमति जताने से गिरफ़्तार किया जा रहा है: प्रशांत भूषण

भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में बीते 28 अगस्त को माओवादियों से संबंध होने के आरोप में पांच कार्यकर्ताओं- कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस को गिरफ़्तार किया गया था.

कवि वरवर राव. (फोटो साभार: फेसबुक/@VaraVaraRao)

तेलुगू कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को पुणे पुलिस ने हिरासत में लिया

वरवर राव पर माओवादियों से संपर्क रखने का आरोप है. पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा के संबंध में बीते 28 अगस्त को पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. वरवर राव उनमें से एक थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राव अब तक हैदराबाद के अपने घर में नज़रबंद थे.

इतिहासकार रोमिला थापर. (फोटो: द वायर)

भीमा-कोरेगांव: सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई वाली रोमिला थापर की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज

इतिहासकार रोमिला ठाकुर ने पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं- कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस को रिहा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाख़िल की थी.

सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज. (फोटो: द वायर)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज गिरफ़्तार

पुणे की एक अदालत ने बीते शुक्रवार को सुधा भारद्वाज, वर्णन गोंसाल्विस और अरुण फरेरा की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी, जिसके बाद देर शाम वर्णन गोंसाल्विस और अरुण फरेरा को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

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भीमा कोरेगांव मामला: वर्णन गोंसाल्विस और अरुण फरेरा गिरफ़्तार

पुणे की स्थानीय अदालत द्वारा इन सामाजिक कार्यकर्ताओं की ज़मानत याचिका और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा नज़रबंदी की अवधि बढ़वाने की याचिका ख़ारिज होने के बाद पुणे पुलिस ने इन दो कार्यकर्ताओं को ठाणे और मुंबई से गिरफ़्तार किया है.

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भीमा-कोरेगांव: महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी

भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच पूरी करने की अवधि बढ़ाने के निचली अदालत के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया गया था. इस संबंध में गिरफ़्तार पांच में से चार कार्यकर्ताओं को नज़रबंद रखा गया है. एक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की नज़रबंदी ख़त्म कर दी गई है.

गौतम नवलखा (फोटो: यूट्यूब)

भीमा-कोरेगांव: नवलखा की नज़रबंदी ख़त्म करने के ख़िलाफ़ शीर्ष अदालत पहुंची महाराष्ट्र सरकार

बीते एक अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा की नज़रबंदी ख़त्म कर दी थी. भीमा-कोरेगांव हिंसा के संबंध में बीते 28 अगस्त को गौतम नवलखा समेत पांच कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नज़रबंद रखा गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा. (फोटो: पीटीआई)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कार्यकर्ता गौतम नवलखा की नज़रबंदी ख़त्म की

गौतम नवलखा ने कहा कि नज़रबंदी के दौरान, पाबंदियां लागू होने के बावजूद इस अवधि को अच्छी तरह से इस्तेमाल किया, इसलिए मुझे कोई शिकायत नहीं है.

Bhima koregaon

भीमा-कोरेगांव मामला: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच की मांग को किया ख़ारिज

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के संबंध में माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस बीते 29 अगस्त से नज़रबंद हैं.

माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर नज़रबंद किए गए कवि वरावरा राव, सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अरुण फरेरा, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्णन गोंसाल्विस. (बाएं से दाएं)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: न्यायालय में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सुनवाई पूरी, फैसला बाद में

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के संबंध में माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस बीते 29 अगस्त से नज़रबंद हैं.

माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर नज़रबंद किए गए कवि वरावरा राव, सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अरुण फरेरा, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्णन गोंसाल्विस. (बाएं से दाएं)

यदि साक्ष्य गढ़े गए तो विशेष जांच का आदेश दिया जा सकता है: कार्यकर्ता गिरफ़्तारी मामले पर सुप्रीम कोर्ट

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के संबंध में माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस की नज़रबंदी की अवधि 19 सितंबर तक बढ़ी.

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सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारियों का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है

भीमा कोरगांव हिंसा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की कथित साज़िश रचने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के बाद से एल्गार परिषद चर्चा में है. एल्गार परिषद के माओवादी कनेक्शन समेत तमाम दूसरे आरोपों पर इसके आयोजक और बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल का पक्ष.

माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर नज़रबंद किए गए ​कवि वरावरा राव, सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अरुण फरेरा, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्णन गोंसाल्विस. (बाएं से दाएं)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: सामाजिक कार्यकर्ताओं की नज़रबंदी की अवधि 17 सितंबर तक बढ़ी

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के संबंध में माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस को नज़रबंद किया गया है.

(फोटो साभार: @akashbanerjee/Twitter)

क्या ‘मैं भी अर्बन नक्सल’ का नारा बुनियादी सवालों से दूर ले जा रहा है?

सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हालिया कार्रवाई के ख़िलाफ़ जो जनाक्रोश उभरा है उसमें ‘नक्सल’ शब्द और इसके पीछे के ठोस ऐतिहासिक संदर्भों को बार-बार सामने रखना ज़रूरी है ताकि यह शब्द महज़ एक आपराधिक प्रवृत्ति के तौर पर ही न देखा जाए बल्कि इसके पीछे मौजूद सरकारों की मंशा भी उजागर होती रहे.