Media Censorship

New Delhi: Finance Minister Nirmala Sitharaman with MoS Anurag Thakur and others outside the North Block ahead of the presentation of Union Budget 2019-20 at Parliament, in New Delhi, Friday, July 05, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI7_5_2019_000014B)

एडिटर्स गिल्ड ने की वित्त मंत्रालय में मीडिया पर पाबंदी की आलोचना, कहा- वापस लें आदेश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि सभी मीडियाकर्मियों को मंत्रालय में प्रवेश से पहले अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी वरना उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.

नॉर्थ ब्लॉक. (फोटो साभार: वीकिमीडिया कॉमन्स)

अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद ही वित्त मंत्रालय में प्रवेश कर सकेंगे पत्रकार: केंद्र

बजट पेश होने से कुछ दिन पहले गोपनीयता बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती है, लेकिन बजट पारित होने के बाद ये पाबंदी हटा ली जाती है. हालांकि, इस बार ऐसा नहीं किया गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

मोदी सरकार ने तीन अख़बारों को सरकारी विज्ञापन देना बंद किया

सामूहिक रूप से 2.6 करोड़ मासिक पाठक वर्ग वाले तीनों बड़े अख़बार समूहों का कहना है कि मोदी के पिछले महीने लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से चुनकर सत्ता में आने से पहले ही उनके करोड़ों रुपये के विज्ञापनों को बंद कर दिया गया.

Bengaluru: JD(S) President H D Kumaraswamy speaks to media after the JD(S) legislative party meeting in Bengaluru on Wednesday. Congress has extended the support to JD(S) to form the new Government in Karnataka. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI5_16_2018_000109B)

मीडिया हमारा मज़ाक उड़ाती है, इसे नियंत्रित करने के लिए क़ानून की ज़रूरत: कर्नाटक मुख्यमंत्री

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ख़ुद एक कन्नड़ समाचार चैनल ‘कस्तूरी न्यूज़’ के मालिक हैं, जो उनकी पत्नी और विधायक अनीता कुमारस्वामी द्वारा चलाया जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अब मीडिया सरकार की नहीं बल्कि सरकार मीडिया की निगरानी करती है: पुण्य प्रसून बाजपेयी

विशेष: वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी बता रहे हैं कि न्यूज़ चैनलों पर नकेल कसने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के भीतर बनाई गई 200 लोगों की ‘गुप्त फ़ौज’ क्या और कैसे काम करती है.

Punya Prasun Bajpai

मुझे कहा गया कि न मोदी का नाम लूं, न ही उनकी तस्वीर दिखाऊं: पुण्य प्रसून बाजपेयी

बेस्ट ऑफ 2018: अपने इस लेख में मास्टरस्ट्रोक कार्यक्रम के एंकर रहे पुण्य प्रसून बाजपेयी उन घटनाक्रमों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं जिनके चलते एबीपी न्यूज़ चैनल के प्रबंधन ने मोदी सरकार के आगे घुटने टेक दिए और उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.

एबीपी न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मिलिंद खांडेकर (बाएं) और पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी (फोटो साभार: ट्विटर)

क्या एबीपी न्यूज़ के पत्रकारों ने मोदी सरकार की आलोचना की कीमत चुकाई है?

सूत्रों के अनुसार चैनल में हुए इन बदलावों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पिछले हफ्ते संसद भवन में कुछ पत्रकारों से कहते सुना गया था कि वे ‘एबीपी को सबक सिखाएंगे.’

(फोटो: रॉयटर्स)

मीडिया को नियंत्रित करने के लिए दक्षिण-वाम सब साथ हैं

साल दर साल भारत में मीडिया पर नियंत्रण और सेंसरशिप ख़त्म होने के बजाय बढ़ रही है. इस मामले में सभी राजनीतिक दल एक जैसे हैं. वे आज़ाद मीडिया की जगह नियंत्रित मीडिया को प्यार करते हैं.

media newspapers reuters

‘भारत में हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों के कारण मीडिया में सेल्फ सेंसरशिप की प्रवृत्ति बढ़ी’

अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि 2015 से अब तक सरकार की आलोचना करने वाले नौ पत्रकारों की हत्या कर दी गई.

Modi and Media 1 PTI

मोदी के राष्ट्रवाद से भारतीय पत्रकारिता ख़तरे में: रिपोर्ट

प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की ओर से किए गए एक अध्ययन में 180 देशों की सूची में भारत 136वें स्थान पर है.