Media Gag

(फोटो साभार: फेसबुक)

अमरावती ज़मीन घोटाला मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगाई

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो द्वारा एक पूर्व क़ानून अधिकारी और अन्य आरोपियों पर दर्ज एफआईआर के संदर्भ में है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ब्यूरो उनके ख़िलाफ़ ग़लत इरादे से काम कर रहा है और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने के साथ मीडिया ट्रायल में बदला जा रहा है.

(फोटो: द वायर)

लॉकडाउन के दौरान 55 पत्रकारों को मिली धमकियां, मुक़दमे और गिरफ़्तारी: रिपोर्ट

कोविड-19 महामारी के दौरान मीडिया को लेकर जारी राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार 25 मार्च से 31 मई, 2020 के बीच विभिन्न पत्रकारों के ख़िलाफ़ 22 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि कम से कम 10 को गिरफ़्तार किया गया. इस अवधि में मीडियाकर्मियों पर सर्वाधिक 11 हमले उत्तर प्रदेश में हुए.

(फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: आलोचना के बाद सरकार ने वापस लिया कोविड वार्ड में मोबाइल पर पाबंदी का फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कोविड अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर पाबंदी इसलिए लगाई गई है ताकि अस्पतालों की दुर्दशा का सच जनता तक ना पहुंचे.

Bihar Bhaskar Quarantine Centre Report

बिहार: क्वारंटीन सेंटर में अव्यवस्थाओं की रिपोर्ट पर दैनिक भास्कर के पत्रकार के ख़िलाफ़ एफआईआर

सीतामढ़ी ज़िले में एक क्वारंटीन सेंटर में अव्यवस्थाओं के लेकर हुए प्रवासी मज़दूरों के हंगामे की ख़बर करने वाले पत्रकार पर प्रशासन की ओर से मामला दर्ज करवाते हुए कहा गया है कि पत्रकार ने मज़दूरों को उकसाया था. बेगूसराय में भी एक स्थानीय पत्रकार के ख़िलाफ़ एफआईआर हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

क्वारंटीन सेंटर की बदहाली दिखाने पर उत्तर प्रदेश में पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज

मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का है. एक न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार रविंद्र सक्सेना को सरकारी काम में बाधा डालने, आपदा प्रबंधन और हरिजन एक्ट आदि के तहत आरोपी बनाया गया है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

हिमाचल प्रदेश: लॉकडाउन में सरकार की विफलता पर रिपोर्ट करने वाले छह पत्रकारों पर 14 एफआईआर दर्ज

कोरोना वायरस को फैलने के रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान हिमाचल प्रदेश में प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं को सामने लाने और प्रशासनिक कमियों को उजागर करने के कारण कम से कम छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गई है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटो साभार: ट्विटर/आम आदमी पार्टी)

दिल्ली में 529 पत्रकारों की कोरोना वायरस की जांच हुई, तीन संक्रमित पाए गएः केजरीवाल

दिल्ली में बुधवार तक कोरोना वायरस के 3439 मामले सामने आए जिसमें से 1092 लोगों का इलाज हो चुका है और 56 लोगों की मौत हो चुकी है.

फोटो: रॉयटर्स

महाराष्ट्र सरकार ने समाचार पत्रों के वितरण संबंधी नियमों में संशोधन किया

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के घरों तक वितरण पर रोक लगाने के पिछले सप्ताह के अपने दिशानिर्देशों में मंगलवार को संशोधन करते हुए कहा कि यह रोक केवल मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और पुणे में लागू होगी.

(फोटो: पीटीआई)

कोरोना वायरस: तमिल समाचार चैनल के 25 लोग संक्रमित पाए गए

तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अनेक पत्रकारों के संक्रमित लोगों के संपर्क में आने पर चिंता जताते हुए सरकार तथा अन्य लोगों से अपील की है कि लॉकडाउन समाप्त होने तक सभी संवाददाता सम्मेलन स्थगित कर दिये जाएं तथा राज्य सरकार सभी पत्रकारों की कोरोना जांच युद्धस्तर पर कराए.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना वायरस: मुंबई में 171 में से 53 मीडियाकर्मी से संक्रमित पाए गए

मुंबई के मामलों के सामने आने के बाद ही सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अखबार और मीडिया प्रतिष्ठानों को एक सलाह जारी की जा रही है. देश में कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र अब तक संक्रमण के 4,666 मामले सामने आ चुके हैं और 232 लोग जान गंवा चुके हैं.

फोटो: पीटीआई

कोरोना वायरस: महाराष्ट्र में घर-घर जाकर अखबार और पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने को कहा गया

अखबारों और पत्रिकाओं को घर-घर पहुंचाने से बचने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले की निंदा करते हुए मुंबई प्रेस क्लब ने अपील की कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, आदेश वापस ले और अखबारों को घर-घर तक पहुंचाने दे.

Bikaner: People watch Prime Minister Narendra Modi's address to the nation on coronavirus pandemic in Bikaner, Thursday, March 19, 2020. (PTI Photo)(PTI19-03-2020_000246B)

कोई भी लोकतंत्र मीडिया का मुंह बंद करके वैश्विक महामारी से नहीं लड़ रहा है: एडिटर्स गिल्ड

इस हफ़्ते की शुरुआत में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि मीडिया कोरोना वायरस संबंधी कोई भी जानकारी छापने या दिखाने से पहले सरकार से इसकी पुष्टि कराए. इसके बाद अदालत ने मीडिया को निर्देश दिया कि वे ख़बरें चलाने से पहले उस घटना पर आधिकारिक बयान लें.

Supreme Court Modi PTI

क्या कोरोना वायरस की कवरेज को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से मीडिया सेंसरशिप लागू की जा रही है?

सरकार से पुष्टि के बाद कोरोना वायरस से संबंधित ख़बरें मीडिया द्वारा चलाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अलग-अलग मायने निकले जा सकते हैं. हो सकता है कि केंद्र इसे मीडिया सेंसरशिप के लिए इस्तेमाल करने लगे या मीडिया सेल्फ सेंसरशिप करने लगे. अगर ऐसा होता है तो यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए गंभीर ख़तरा होगा.

Indian press photographers stand behind a fence for security reasons as they take pictures of Belgium's Queen Paola in a school in Mumbai November 6, 2008. Belgium's King Albert II and Queen Paola are on a official state visit to India.     REUTERS/Francois Lenoir   (INDIA)

कोरोना: पीआईबी और प्रेस काउंसिल ने मीडिया से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने की अपील की

बीते मंगलवार को केंद्र सरकार की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से कहा था कि वह सरकार से पुष्टि के बाद ही कोरोना वायरस से संबंधित खबरें चलाए.

​​(फोटो: पीटीआई)

सरकार से पुष्टि के बाद ही कोरोना वायरस से संबंधित खबरें चलाए मीडिया: सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश दिए जाने की मांग की थी कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए सिस्टम से कोरोना वायरस पर तथ्यों की पुष्टि किए बिना कोई भी मीडिया प्रतिष्ठान किसी खबर का प्रकाशन अथवा प्रसारण न करे.