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अयोध्या. (फोटो साभार: ​टूरिज़्म आॅफ इंडिया)

अयोध्या एक शहर का नाम है जिसमें इंसान रहते हैं

यह वह अयोध्या नहीं है जिसको सार्वजनिक कल्पना में विहिप और भाजपा या दिल्ली के तथाकथित लिबरल्स व मार्क्सवादी बुद्धिजीवियों ने स्थापित किया है. यह एक सामान्य शहर है.

Ayodhya Wikimedia

अयोध्या विवाद: इस देश की राजनीति धर्मनिरपेक्ष विरासत और संकल्प भूल चुकी है

देश के वामपंथी और समाजवादी बौद्धिकों ने धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का पूरा दारोमदार मंडलवादी और आंबेडकरवादी आंदोलनों पर डाल दिया लेकिन इन आंदोलनों ने देश को इतने भ्रष्ट नेता दिए कि उनके पास धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का नैतिक बल ही नहीं बचा.

फाइल फोटो: पीटीआई

विहिप ने अयोध्या को रणक्षेत्र बनाया तो ‘हिंदू’ हुई हिंदी पत्रकारिता

मुख्यधारा की पत्रकारिता तो शुरुआती दिनों से ही राम जन्मभूमि आंदोलन का अपने व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करती और ख़ुद भी इस्तेमाल होती रही.

The Reserve Bank of India (RBI) seal is pictured on a gate outside the RBI headquarters in Mumbai July 30, 2013. India's central bank left interest rates unchanged on Tuesday as it supports a battered rupee but said it will roll back recent liquidity tightening measures when stability returns to the currency market, enabling it to resume supporting growth.  REUTERS/Vivek Prakash (INDIA - Tags: BUSINESS LOGO) - RTX124GY

बैंकों ने पिछले छह महीने में 55,356 करोड़ रुपये का कर्ज़ माफ़ किया

पिछले नौ साल में बैंकों ने 2 लाख 28 हज़ार रुपये का लोन माफ़ कर दिया है. क्या इससे अर्थव्यवस्था पर कोई फर्क पड़ा, सिर्फ़ किसानों के समय फ़र्क पड़ता है.

सोहराबुद्दीन (फाइल फोटो)/रॉयटर्स

सोहराबुद्दीन मामला: सुनवाई की मीडिया रिपोर्टिंग पर अदालत की रोक

पत्रकारों ने इस पर एतराज़ जताते हुए कहा कि कार्यवाही की रिपोर्टिंग सही उद्देश्यों को लेकर है ताकि लोग मामले की प्रगति जान सकें.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 157: कॉरपोरेट क़र्ज़माफ़ी पर अरुण जेटली की सफ़ाई

जन गण मन की बात की 157वीं कड़ी में विनोद दुआ कॉरपोरेट क़र्ज़माफ़ी को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली की सफ़ाई के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 156: गुजरात मॉडल का सच और मोदी की चुनावी रैलियां

जन गण मन की बात की 156वीं कड़ी में विनोद दुआ गुजरात मॉडल के सच और नरेंद्र मोदी की गुजरात रैलियों के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 155: ईवीएम छेड़छाड़ और सीबीआई जज की ‘संदिग्ध’ मौत

जन गण मन की बात की 155वीं कड़ी में विनोद दुआ ईवीएम से छेड़छाड़ की हालिया ख़बर और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज बृजगोपाल लोया की ‘संदिग्ध’ मौत पर उठे सवालों के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 154: राजनीति में भाषा की शालीनता और स्वच्छ भारत अभियान

जन गण मन की बात की 154वीं कड़ी में विनोद दुआ यूथ कांग्रेस द्वारा ट्वीट किए गए मीम और स्वच्छ भारत अभियान के प्रचार पर हुए ख़र्च के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 153: राजनीति में वंशवाद और प्रदर्शनों की मीडिया कवरेज

जन गण मन की बात की 153वीं कड़ी में विनोद दुआ राजनीति में वंशवाद और मीडिया के विरोध प्रदर्शनों की कवरेज न करने पर चर्चा कर रहे हैं.

Patrika

राष्ट्रीय प्रेस दिवस: राजस्थान पत्रिका ने संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर राजस्थान की वसंधुरा सरकार के ‘काले क़ानून’ पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए राजस्थान पत्रिका अख़बार ने अपना संपादकीय ख़ाली छोड़ दिया.

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का फ़रमान- बग़ैर इजाज़त मीडिया से बात न करें अधिकारी

मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर अपने मातहत सभी विभागों से कहा कि वे सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बग़ैर मीडिया से बात न करें.

Mumbai: Union Defence Minister Manohar Parrikar during an interactive meeting with media in Mumbai on Friday. PTI Photo by Mitesh Bhuvad(PTI5_29_2015_000195B)

परशुराम को इंजीनियर बताने वाले पर्रिकर बोले, मीडिया के लिए वैज्ञानिक सोच ज़रूरी

इं​जीनियर दिवस पर बोले थे, ‘मेरा मानना है कि परशुराम इंजीनियरों की बिरादरी से ही रहे होंगे, जिन्होंने समुद्र से ज़मीन निकाल ली.’

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जब तक ‘काला क़ानून’ वापस नहीं होता, मुख्यमंत्री वसुंधरा का बहिष्कार करेंगे: राजस्थान पत्रिका

अख़बार के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने एक लेख में लिखा, वसुंधरा राजे जब तक विवादित क़ानून को वापस नहीं लेतीं, तब तक अख़बार उनसे संबंधित समाचारों का प्रकाशन नहीं करेगा.’

U.S. President Donald Trump takes questions during a news conference at the White House in Washington, U.S., February 16, 2017.  REUTERS/Carlos Barria

ट्रंप ने बड़े मीडिया नेटवर्कों के लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी

एनबीसी न्यूज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि ट्रंप अपने परमाणु हथियारों में दस गुना बढ़ोत्तरी चाहते हैं. ट्रंप ने इस ख़बर को फ़र्ज़ी बताया.

दलित समाजशास्त्री और लेखक कांचा इलैया (फोटो: फेसबुक)

भावनाएं आहत करने के आरोप में लेखक कांचा इलैया के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

पु​स्तक के ज़रिये कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में हैदराबाद पुलिस ने कांचा इलैया के विरुद्ध मामला दर्ज किया है.

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मानहानि-मानहानि, घोघो रानी, कितना पानी

क्या अंग्रेज़ी अख़बारों में छपी ख़बरों का हिंदी में अनुवाद करने पर भी मानहानि हो जाती है? अनुवाद की ख़बरों या पोस्ट से मानहानि का रेट कैसे तय होता है, शेयर करने वालों या शेयर किए गए पोस्ट पर लाइक करने वालों पर मानहानि का रेट कैसे तय होता है?

Kancha Ilaiah

‘क्या आर्य-वैश्यों के पास कोई ऐसा अर्थशास्त्री नहीं है, जो मेरी किताब पर तर्क कर सके?’

साक्षात्कार: लेखक और चिंतक कांचा इलैया शेपहर्ड अपनी किताब ‘पोस्ट-हिंदू इंडिया’ के लिए विवादों में हैं. उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है. उनसे बातचीत.

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मीडिया का काम सवाल पूछना है, न कि सत्ता से गलबहियां करना

मोदी की पहचान एक ‘संवाद में माहिर’ नेता की है, लेकिन कुर्सी पर बैठने के बाद से अब तक उन्होंने एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है. किसी लोकतंत्र के प्रधानमंत्री द्वारा प्रेस कांफ्रेंस करना मीडिया पर किया जाने वाला एहसान नहीं है, बल्कि सरकार की ज़िम्मेदारी है.

Indian Prime Minister Narendra Modi (R) listens to Finance Minister Arun Jaitley during the Global Business Summit in New Delhi, India, in this January 16, 2015 file photo. After a drubbing in a state poll in November, Modi wants to overhaul his cabinet to weed out underperformers and improve his government's image. Problem is, several sources said, he can't find the right replacements.   REUTERS/Anindito Mukherjee/Files

बिगड़ती अर्थव्यवस्था के लिए जेटली से ज़्यादा मोदी ज़िम्मेदार हैं

डूबती अर्थव्यवस्था को लेकर कई भाजपा नेता लगातार वित्त मंत्री पर हमला कर रहे हैं, लेकिन जिन आर्थिक फैसलों से यह स्थिति आई है, उन्हें लेने में प्रधानमंत्री की भूमिका पर एक चुप्पी छाई हुई है.

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राम रहीम के ‘कुकर्मों का खुलासा’ कर रहा मीडिया अब तक क्यों उनकी गोद में बैठा था?

राम रहीम पर लगे आरोप डेढ़ दशक पुराने हैं, लेकिन मीडिया तब जागा, जब दो बहादुर बेटियों और एक जांबाज़ पत्रकार ने जान की बाज़ी लगाकर न्याय की लड़ाई जीत ली.

New Delhi: Demonstrators hold placards with the picture of  journalist Gauri Lankesh during a 'Not In My Name' protest,  at Jantar Mantar in New Delhi on Thursday. PTI Photo(PTI9_7_2017_000160B)

गौरी लंकेश जैसी हत्याएं जारी रहेंगी क्योंकि हत्यारों को पता है कि उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा

गौरी की हत्या एक चेतावनी है. हत्यारों को पता है कि वे सुरक्षित हैं. वे बेखौफ़ होकर अपना काम करते रहेंगे.

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‘हमारा देश इतना महान है कि हैदर जैसी भारत-विरोधी फिल्म को भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिल जाता है’

साक्षात्कार: सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के रूप में पहलाज निहलानी का ढाई साल का कार्यकाल कई तरह के विवादों में रहा. उनसे बातचीत.

A U.S. Marine tank launches flamethrower in action near Da Nang, Vietnam, 1965.  REUTERS/Courtesy U.S. Army

यह याद रखना चाहिए सरकार का विरोध करना अपराध नहीं है

आज के नव उग्र-राष्ट्रवादी समय में यह याद करना फ़ायदेमंद होगा कि परिपक्व राष्ट्र युद्ध के समय भी साधारण व्यक्तियों या सुपरस्टारों को भी आधिकारिक ‘लकीर’ से अलग चलने की आज़ादी देता है.

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जब पूर्वोत्तर और कश्मीर में मीडिया पर हमला होता है, तब प्रेस की आज़ादी की चर्चा क्यों नहीं होती?

दशकों से उत्तर-पूर्व और कश्मीर के मीडिया संस्थान अपनी आज़ादी की लड़ाई राष्ट्रीय मीडिया के समर्थन के बगैर लड़ रहे हैं.

फोटो: रॉयटर्स

भारतीय मीडिया में दलित पत्रकार क्यों नहीं हैं?

अंग्रेजी पत्रकारिता में आपको खुलेआम खुद को समलैंगिक बताने वाले लोग ज्यादा मिल जाएंगे, बनिस्बत ऐसे लोगों के जो खुल कर अपना दलित होना कुबूल करते हों.

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क्या टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादक ने अपने हित के लिए पत्रकारिता को ताक पर रख दिया?

अगर संपादक मंत्री से कहकर किसी नियुक्ति में कोई बदलाव करवा सकते हैं, तो क्या इसके एवज में मंत्रियों को अख़बारों की संपादकीय नीति प्रभावित करने की क्षमता मिलती है?

Indian press photographers stand behind a fence for security reasons as they take pictures of Belgium's Queen Paola in a school in Mumbai November 6, 2008. Belgium's King Albert II and Queen Paola are on a official state visit to India.     REUTERS/Francois Lenoir   (INDIA)

‘मीडिया मालिकों ने पत्रकारों को बंधुआ मजदूर बना रखा है’

पत्रकारों के लिए जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफ़ारिश और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से बातचीत.

Fake News

पहले मामूली चूक पर भी संपादक शर्मिंदा होता था, अब पूरी ख़बर फर्ज़ी हो तब भी दांत दिखाकर हंसेगा

वेबसाइट की सफलता के लिए जितना झूठ परोसेंगे, उतना हिट मिलेगा. जितना हिट मिलेगा, उतना विज्ञापन मिलेगा. झूठ का कारोबार आज सच के लिए चुनौती बन गया है.

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हमारे न्यूज़ चैनल तू-तू, मैं-मैं पर क्यों उतर आए हैं?

न्यूज़ चैनल हर विषय पर दलीय प्रवक्ताओं की भीड़ क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं? क्या वे राजनीतिक दलों, ख़ासकर सत्ताधारी दल को हर मुद्दे पर अपना फोरम मुहैया कर खुश रखने की कोशिश करते हैं?

अरुंधति रॉय और परेश रावल (फोटो: फेसबुक से साभार)

अरुंधति रॉय वाली ख़बर फ़र्ज़ी थी तो भी मुझे कोई खेद नहीं है: परेश रावल

परेश रावल ने कहा, ‘अगर उन्हें सेना की जीप से बांधा जाता तो पथराव करने वाला कोई भी व्यक्ति उन पर हमला नहीं करता क्योंकि वह उनकी विचारधारा का समर्थन करती हैं.’

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सच कुछ भी हो, मीडियावाले वही अर्थ निकालेंगे जो उन्हें पसंद हो

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हिंदुओं पर रोज़ा थोपने की बात झूठी है, लेकिन यह झूठ ही चैनल के करोड़ों दर्शकों के लिए असली सच है. एएमयू के हिंदू छात्र लाख खंडन करते फिरें, संदेश यही जाएगा कि वे किसी दबाव में ऐसा कर रहे हैं.

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झूठी ख़बरों पर भरोसा करने के पीछे का विज्ञान

हम अक्सर किसी टिप्पणी या दलील को महज़ इसलिए स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि वे हमारी परंपरागत मान्यताओं के अनुरूप होती हैं. ऐसा करते वक़्त हम न तो इनके पीछे के तर्कों की परवाह करते हैं, न दावों की प्रामाणिकता जांचने की ज़हमत उठाते हैं.

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योगी जी के ‘रामराज’ को भला ‘जंगलराज’ कहने का दुस्साहस कौन करे

पर्दे और पन्नों पर बार-बार उभरता रहा है- जंगलराज! लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकार क्या बदली, मीडिया का वह ‘जंगलराज’ ग़ायब हो गया!

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जिस ख़बर के आधार पर परेश रावल और मीडिया ने अरुंधति पर हमला बोला, वो फर्ज़ी थी

परेश रावल और उनके समर्थकों का कहना था कि उनका गुस्सा अरुंधति रॉय की कश्मीर पर की गई हालिया टिप्पणी पर था. पर असलियत ये है कि अरुंधति ने ये टिप्पणी कभी की ही नहीं थी.