Migrant Workers

क्या भारत एक ‘डेटा ब्लैकहोल’ बनने के रास्ते पर बढ़ रहा है

नीति संबंधी निर्णयों में आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है. सरकार यदि लोगों के जीवन, ख़ासकर स्वास्थ्य-शिक्षा, रोज़गार में सुधार लाना चाहती है, तो ज़रूरी है कि उनके पास इनका सही आकलन करने की क्षमता, सही आंकड़े व जानकारी हों. वर्तमान सरकार जिस तरह विभिन्न डेटा और रिकॉर्ड न होने की बात कह रही है, वो देश को उस ‘डेटा ब्लैकहोल’ की ओर ले जा रहे हैं, जिसके अंधेरे में सुधार की राह खो गई है.

श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए आधार अनिवार्य, संगठन ने कहा- यह डिजिटल डिवाइड बढ़ाता है

केंद्र ने ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत की है, जहां असंगठित क्षेत्र और प्रवासी श्रमिकों का राष्ट्रीय स्तर पर डेटा उपलब्ध होगा. हालांकि श्रम मामलों पर कार्य करने वाले वर्किंग पीपुल्स चार्टर ने कहा है कि रजिस्ट्रेशन की पूरी व्यवस्था ऐसे श्रमिकों के लिए अवरोध बन रहा है, जिनके पास इंटरनेट इत्यादि के ज़रिये इस तक पहुंचने की जानकारी नहीं है. संगठन ने कहा कि वोटर आईडी कार्ड को आधार कार्ड के विकल्प में वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए.

प्रवासी मज़दूरों के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र का लापरवाह रवैया अक्षम्य

प्रवासी कामगारों को खाद्य सुरक्षा, नकदी हस्तांतरण, परिवहन सुविधा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए तीन कार्यकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 जुलाई तक ‘एक देश, एक राशन कार्ड योजना’ लागू करने का निर्देश दिया है.

देश के बड़े अनौपचारिक कार्यबल को कोविड-19 टीकाकरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए

एक अनुमान के अनुसार लगभग 70% शहरी कार्यबल अनौपचारिक रूप से कार्यरत हैं. अनौपचारिक श्रमिकों के काम की अनिश्चित प्रकृति पहले ही जोखिम भरी होती है, जिससे उनके कोविड-19 के संपर्क में आने का ख़तरा बढ़ जाता है. मौजूदा टीकाकरण ढांचे में कई बाधाओं के चलते ऐसे कामगारों के टीकाकरण की संभावना कम है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों से एक देश-एक राशन कार्ड योजना लागू करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करने के लिए असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों के पंजीकरण के लिए सॉफ्टवेयर विकास में देरी पर कड़ा रुख़ जताया और कहा कि वह इस बात से चिंतित है कि जिन प्रवासी श्रमिकों के पास राशन कार्ड नहीं हैं, वे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ कैसे उठा पाएंगे.

माकपा ने मनरेगा में जाति आधारित मज़दूरी देने की एडवाइज़री पर सवाल उठाए

माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भेजे एक पत्र में केंद्र की ओर से राज्यों को भेजे गए उस परामर्श के पीछे की मंशा को लेकर सवाल खड़े किए, जिसमें कहा गया है कि मनरेगा के तहत अनुसूचित जाति-जनजाति व अन्य के लिए मज़दूरी के भुगतान को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाए.

कोविड संबंधी योजनाओं के लाभ के लिए प्रवासी कामगारों के पंजीकरण प्रक्रिया बेहद धीमी: अदालत

सुप्रीम कोर्ट तीन मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से दाख़िल आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रवासी कामगारों को खाद्य सुरक्षा, नकदी हस्तांतरण, परिवहन सुविधा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित करने के निर्देश केंद्र और राज्य सरकारों को देने का अनुरोध किया गया है.

प्रवासी कामगारों के लिए सामुदायिक रसोई, खाद्यान्न और परिवहन की व्यवस्था करें सरकारें: अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खाद्यान्न देते हुए प्रशासन उन प्रवासी कामगारों को पहचान पत्र दिखाने पर ज़ोर न दे, जिनके पास फ़िलहाल दस्तावेज़ नहीं हैं. पीठ ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों को यह निर्देश भी दिया कि वे कोविड-19 के कारण फंसे प्रवासी कामगारों में से जो घर जाना चाहते हैं, उनके लिए परिवहन की समुचित व्यवस्था करें.

नया सामाजिक सुरक्षा क़ानून मज़दूरों के हक़ में कितना हितकारी होगा

सितंबर 2020 में भारत सरकार द्वारा मज़दूरों के हित का दावा करते हुए लाए गए सामाजिक सुरक्षा क़ानून में असंगठित मज़दूरों के लिए बहुत कुछ नहीं है, जबकि देश के कार्यबल में उनकी 91 प्रतिशत भागीदारी है.

महाराष्ट्र: 15 दिन की पाबंदी की घोषणा के बाद मुंबई के स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़

मध्य रेलवे ने लोगों से परेशान नहीं होने और रेलवे स्टेशन पर भीड़ नहीं लगाने की अपील की है. महाराष्ट्र सरकार ने महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 14 अप्रैल रात आठ बजे से 15 दिनों के राज्यव्यापी प्रतिबंधों की घोषणा की है. सरकार ने फिल्म और टीवी शूटिंग पर रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रवासी बच्चों और उनकी स्थिति की जानकारी देने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश उस याचिका पर दिया, जिसमें कोविड-19 वैश्विक महामारी के बीच प्रवासी बच्चों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए और सबसे संवेदनशील स्थिति में हैं.

लॉकडाउन: रेल हादसे में मारे गए मज़दूरों के परिजनों को 10 माह बाद भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र

पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान आठ मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में रेल की पटरियों पर सो रहे 16 प्रवासी मज़दूरों की एक मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी. इनमें से 11 मज़दूर शहडोल ज़िले के थे एवं बाकी उमरिया ज़िले के थे.

कोविड-19 लॉकडाउन में 1.14 करोड़ प्रवासी कामगार अपने गृह राज्यों को लौटे: सरकार

इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि पिछले साल कोविड-19 पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों की मौत के बारे में सरकार को कोई जानकारी नहीं है.

पहली प्रवासी नीति: मज़दूरों के लिए वोट का अधिकार और माइग्रेशन विंग बनाने का प्रस्ताव

कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रवासी मज़दूरों के सामने खड़ी हुईं समस्याओं को दूर करने के लिए श्रम मंत्रालय नीति आयोग की अगुवाई में एक नीति तैयार कर रही है. मसौदा नीति में कहा गया है कि प्रवासी मज़दूरों का राजनीतिक समावेश किया जाना चाहिए, ताकि राजनीतिक नेतृत्व को उनके लिए जवाबदेह ठहराया जा सके.

बैंकों ने प्रशासन को लिखा, लॉकडाउन के चलते रेहड़ी विक्रेताओं को दिए लोन एनपीए में बदल रहे हैं

कोविड-19 लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को उनकी आजीविका फिर शुरू करने के लिए सस्ते कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री स्‍वनिधि की शुरुआत की गई थी. अब कुछ बैंकों ने स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर लोन वसूलने में मदद करने को कहा है.