Migrant Workers

लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन के बाहर उमड़ी प्रवासी मजदूरों की भीड़. (फोटो: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र: 15 दिन की पाबंदी की घोषणा के बाद मुंबई के स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़

मध्य रेलवे ने लोगों से परेशान नहीं होने और रेलवे स्टेशन पर भीड़ नहीं लगाने की अपील की है. महाराष्ट्र सरकार ने महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 14 अप्रैल रात आठ बजे से 15 दिनों के राज्यव्यापी प्रतिबंधों की घोषणा की है. सरकार ने फिल्म और टीवी शूटिंग पर रोक लगा दी है.

(फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रवासी बच्चों और उनकी स्थिति की जानकारी देने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश उस याचिका पर दिया, जिसमें कोविड-19 वैश्विक महामारी के बीच प्रवासी बच्चों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए और सबसे संवेदनशील स्थिति में हैं.

औरंगाबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर हुई मजदूरों की मौत के बाद घटनास्थल की जांच करती पुलिस. (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: रेल हादसे में मारे गए मज़दूरों के परिजनों को 10 माह बाद भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र

पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान आठ मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में रेल की पटरियों पर सो रहे 16 प्रवासी मज़दूरों की एक मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी. इनमें से 11 मज़दूर शहडोल ज़िले के थे एवं बाकी उमरिया ज़िले के थे.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19 लॉकडाउन में 1.14 करोड़ प्रवासी कामगार अपने गृह राज्यों को लौटे: सरकार

इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि पिछले साल कोविड-19 पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों की मौत के बारे में सरकार को कोई जानकारी नहीं है.

Ghaziabad: Migrants walk along a road on NH-24 to reach their native places, during the nationwide COVID-19 lockdown, in Ghaziabad, Saturday, May 30, 2020. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI30-05-2020 000024B)

पहली प्रवासी नीति: मज़दूरों के लिए वोट का अधिकार और माइग्रेशन विंग बनाने का प्रस्ताव

कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रवासी मज़दूरों के सामने खड़ी हुईं समस्याओं को दूर करने के लिए श्रम मंत्रालय नीति आयोग की अगुवाई में एक नीति तैयार कर रही है. मसौदा नीति में कहा गया है कि प्रवासी मज़दूरों का राजनीतिक समावेश किया जाना चाहिए, ताकि राजनीतिक नेतृत्व को उनके लिए जवाबदेह ठहराया जा सके.

New Delhi: A vendor looks for customers at Rajpath lawns during Unlock 4.0, in New Delhi, Wednesday, Sep 2, 2020. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI02-09-2020 000126B) *** Local Caption

बैंकों ने प्रशासन को लिखा, लॉकडाउन के चलते रेहड़ी विक्रेताओं को दिए लोन एनपीए में बदल रहे हैं

कोविड-19 लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को उनकी आजीविका फिर शुरू करने के लिए सस्ते कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री स्‍वनिधि की शुरुआत की गई थी. अब कुछ बैंकों ने स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर लोन वसूलने में मदद करने को कहा है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

गुजरात: फुटपाथ पर चढ़ा अनियंत्रित ट्रक, 13 प्रवासी मजदूरों समेत 15 की मौत

घटना सूरत से करीब 60 किलोमीटर दूर कोसांबा गांव के पास मंगलवार तड़के हुई, जहां एक ट्रैक्टर से टकराने के बाद बेक़ाबू हुआ ट्रक फुटपाथ पर सो रहे मज़दूरों पर चढ़ गया. मारे गए सभी मज़दूरों में से एक को छोड़कर बाकी सभी राजस्थान के रहने वाले थे.

(फोटो साभार: indiarailinfo)

उत्तर प्रदेश: कथित तौर पर आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने लगाई फांसी

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले का मामला है. किसान की पत्नी ने पुलिस को बताया कि उनके पति पर बैंक का 38 हज़ार रुपये का क़र्ज़ था और कोई काम न मिलने से परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली.

सिंघु बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 70 साल के संतोख सिंह को आंसू गैस के शेल से चोट लगने के बाद टांके लगाए गए थे. (फोटो: रॉयटर्स)

प्रतिरोध की लौ जलाए रखने वाला नागरिक ही ‘इंडियन ऑफ द ईयर’ है

चाहे शाहीन बाग़ हो या दिल्ली की विभिन्न सीमाओं की सड़कें, भारतीय नागरिक अपनी अस्मिता और अधिकारों के लिए खड़े हो रहे हैं.

बस्सीपट्टी में चुनाव को लेकर चौक-चौराहे पर होने वाली बहसों में पलायन कोई मुद्दा नहीं है. (सभी फोटो: हेमंत कुमार पांडेय)

बिहार चुनाव: पलायन से प्रभावित गांव में न सरकार से नाराज़गी है, न ही कोई उम्मीद

ग्राउंड रिपोर्ट: आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन की जिस बात को बिहार में चुनावी मुद्दा बताया जा रहा है, उसे मधुबनी ज़िले के बस्सीपट्टी गांव के लोग अपनी नियति मानकर स्वीकार कर चुके हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

‘बिहार में बीए, एमए किए लोग बेरोजगार घूम रहे हैं, पता नहीं सरकार क्या काम करती है’

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में लॉकडाउन में जैसे-तैसे अपने गांव-घर पहुंचे मज़दूर अब आजीविका कमाने वापस लौट चुके हैं, जो बचे भी हैं उनका कहना है कि उनके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया. वे चाहते हैं कि अब बदलाव होना चाहिए और उन्हें उनके प्रदेश में ही काम-काज मिलना चाहिए.

(फोटो: पीटीआई)

अप्रैल से सितंबर के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मिलीं 32,876 शिकायतें

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष (रिटा.) जस्टिस एचएल दत्तू ने बताया कि एक अक्टूबर 2019 से इ 30 सितंबर 2020 तक आयोग ने 73,729 शिकायतें दर्ज की हैं.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने श्रमिकों के काम के घंटे बढ़ाने वाले गुजरात सरकार के आदेश को ख़ारिज किया

गुजरात सरकार द्वारा 17 अप्रैल 2020 को जारी उस अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मज़दूरों के कई अधिकारों को रद्द कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि महामारी का हवाला देकर मज़दूरों के सम्मान और उनके अधिकारों के लिए बने क़ानूनों को ख़त्म नहीं किया जा सकता.

(फोटो: रॉयटर्स)

महामारी के बीच श्रम सुधार के नाम पर लाए गए तीन क़ानूनों का विरोध क्यों हो रहा है

मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम क़ानूनों में जहां एक ओर सामाजिक सुरक्षा के दायरे में ऐसे विभिन्न कामगारों को लाया गया है, जो अब तक इसमें नहीं थे, वहीं दूसरी ओर हड़ताल के नियम कड़े किए गए हैं. साथ ही नियोक्ता को बिना सरकारी मंज़ूरी के कामगारों को नौकरी देने और छंटनी के लिए अधिक छूट दी गई है.