Milind Ekbote

मिलिंद एकबोटे. (फोटो: फेसबुक)

भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी हिंदुत्ववादी नेता एकबोटे पर आपत्तिजनक बयान के लिए केस दर्ज

हिंदूत्ववादी नेता मिलिंद एकबोटे द्वारा हाल ही में दिए गए बयान से कथित तौर पर दो समुदायों के बीच वैमनस्यता को प्रोत्साहन देने के आरोप में उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. पुणे शहर के कोंढवा इलाके में हज हाउस के निर्माण के विरोध में उन पर आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगा है.

मिलिंद एकबोटे और संभाजी भीड़े (फोटो साभार: फेसबुक)

भीमा-कोरेगांव: हिंदुत्ववादी नेताओं के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल करने के लिए मांगी मंज़ूरी

भीमा-कोरेगांव हिंसा के एक दिन बाद 2 जनवरी 2018 को एक दलित कार्यकर्ता ने श्री शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के अध्यक्ष संभाजी भिड़े और समस्त हिंदू अघाड़ी नेता मिलिंद एकबोटे के ख़िलाफ़ हिंसा को उकसाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था. महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने कहा कि सरकार को चार्जशीट के लिए मंज़ूरी का प्रस्ताव मिला है, इस पर निर्णय लिया जाएगा.

भीमा-कोरेगांव में बना विजय स्तंभ. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत दर्ज की थी. इसकी याद में कंपनी ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया था, जो दलितों का प्रतीक बन गया. कुछ विचारक और चिंतक इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों के उस समय की उच्च जातियों पर जीत के रूप में देखते हैं. हर साल 1 जनवरी को हजारों दलित लोग श्रद्धाजंलि देने यहां आते हैं. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

महाराष्ट्र: भीमा-कोरेगांव जांच आयोग का कार्यकाल सातवें और अंतिम बार बढ़ाया गया

साल 2018 में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ पर हिंसा की घटनाओं की जांच करने के लिए महाराष्ट्र की तत्कालीन देवेंद्र फड़णवीस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस जेएन पटेल की अध्यक्षता में दो सदस्यीय आयोग का गठन किया गया था.

मिलिंद एकबोटे और संभाजी भीड़े (फोटो साभार: फेसबुक)

क्यों भीमा-कोरेगांव हिंसा के पीड़ितों की न्याय पाने की आस धूमिल होती जा रही है

2018 में भीमा-कोरेगांव में दलित समुदाय के लोगों पर हिंसक भीड़ के हमले के एक दिन बाद एक कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कर हिंदुत्ववादी नेता मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े पर इस हमले के साज़िशकर्ता होने का आरोप लगाया था. घटना के क़रीब तीन साल बाद उन्हें इस मामले की सुनवाई की कोई उम्मीद नहीं दिखती.

Mumbai: NCP President Sharad Pawar gestures as he speaks during an exclusive interview with PTI, at his residence in Mumbai, Saturday, March 16, 2019. (PTI Photo) (Story No. BMM1) (PTI3_16_2019_000097B)

भीमा-कोरेगांव मामला: जांच आयोग ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार को गवाही के लिए भेजा समन

महाराष्ट्र के एक सामाजिक संगठन ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले की जांच कर रहे आयोग के सदस्यों से एनसीपी प्रमुख शरद पवार को तलब करने की मांग की थी.

Mumbai: Dalit groups protesting at Thane railway station during the Maharashtra Bandh on Wednesday following clashes between two groups in Bhima Koregaon near Pune, in Mumbai. PTI Photo(PTI1_3_2018_000115B)

भीमा-कोरेगांव: एनसीपी नेताओं ने कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाने की मांग की

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लिखे पत्र में एनसीपी नेता और विधायक धनंजय मुंडे ने दावा किया कि राज्य की पिछली देवेंद्र फड़णवीस सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत भीमा-कोरेगांव घटनाक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ ‘झूठे’ मामले दर्ज किए थे.

माओवादियों से संबंध और प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश के आरोप में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन महेश राउत और रोना विल्सन. (बाएं से दाएं)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट में देरी को स्वीकारा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को चार्जशीट दायर करने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार किया था. शीर्ष अदालत ने उसे ख़ारिज कर दिया और कहा कि अब जब चार्जशीट दायर हो चुकी है, तो मामले में गिरफ़्तार पांच कार्यकर्ता नियमित ज़मानत की मांग कर सकते हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

भीमा-कोरेगांवः सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ्तारी पर रोक 22 फरवरी तक बढ़ी

एल्गार परिषद/भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने तेलतुम्बड़े को 14 और 18 फरवरी को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने का आदेश दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

भीमा-कोरेगांवः सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ्तारी पर 12 फरवरी तक रोक

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आनंद तेलतुम्बड़े की अग्रिम ज़मानत संबंधी याचिका पर सुनवाई 11 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

अदालत ने आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ़्तारी को ग़ैरक़ानूनी कहा, रिहा करने का आदेश

पुणे पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के आरोप में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम सुरक्षा के बावजूद शनिवार को आनंद तेलतुम्बड़े को गिरफ्तार कर लिया था.

आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: फेसबुक)

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ़्तारी से सुरक्षा मिलने पर भी आनंद तेलतुम्बड़े गिरफ़्तार

भीमा-कोरेगांव हिंसा में कथित भूमिका और माओवादियों से कथित संबंधों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते 14 जनवरी को दलित शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा की अवधि चार सप्ताह और बढ़ा दी थी.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की अग्रिम ज़मानत याचिका पुणे की अदालत ने ख़ारिज की

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े को एल्गार परिषद/भीमा-कोरेगांव हिंसा में कथित भूमिका और माओवादियों से कथित संबंधों के मामले में आरोपी बनाया गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

आनंद तेलतुम्बड़े को गिरफ़्तार करने की कोशिश इस राजतंत्र के बढ़ते अहंकार का सबूत है

राजतंत्र हम सबको इतना मूर्ख समझ रहा है कि हम विश्वास कर लेंगे कि सामाजिक कार्यकर्ता इस देश में हिंसा की साज़िश कर रहे हैं. यह कहने वाले वे हैं जो दिन-रात मुसलमानों, ईसाईयों और सताए जा रहे लोगों के हक़ में काम करने वालों को शहरी माओवादी कहकर नफ़रत और हिंसा भड़काते रहते हैं.

मिलिंद एकबोटे. (फोटो: फेसबुक)

भीमा-कोरेगांव: आरोपी हिंदूवादी नेता मिलिंद एकबोटे को रैलियां करने, मीडिया से बातचीत की छूट

पुणे की एक अदालत ने कुछ शर्तों के साथ मिलिंद एकबोटे को राहत दी है. हिंसा के संबंध में एक दलित महिला द्वारा शिकायत के बाद एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

संभाजी भिड़े. (फोटो: पीटीआई)

भीमा-कोरेगांव हिंसा में आरोपी संभाजी भिड़े के ख़िलाफ़ दंगों के मामले वापस लिए गए: आरटीआई

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिणपं​थी नेता संभाजी भिड़े और उनके संगठन शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ छह मामले दर्ज किए गए थे. इसके अलावा भाजपा और शिवसेना नेताओं के ख़िलाफ़ दर्ज मामले भी महाराष्ट्र सरकार द्वारा वापस लिए गए.