Ministry of Electronics and Information Technology

(फोटो: द वायर)

कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र और एनआईसी को आरोग्य सेतु का डेटा शेयर करने से रोका

डेटा प्राइवेसी के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकार प्राप्त समूह द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल के अनुसार प्राइवेसी पॉलिसी में ये बताया जाना चाहिए कि किस उद्देश्य के लिए यूज़र्स के डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन आरोग्य सेतु ऐप की पॉलिसी में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है.

(फोटो: रॉयटर्स)

सीआईसी के सामने आरोग्य सेतु को लेकर ग़ैरज़िम्मेदाराना जवाबों के लिए केंद्र ने मांगी माफ़ी

एक आरटीआई कार्यकर्ता सीआईसी के समक्ष एक याचिका दायर की थी, क्योंकि उन्हें इसके बारे में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिला था. उन्होंने आरोग्य सेतु ऐप के निर्माण से जुड़ी पूरी फाइल और इस प्रक्रिया में शामिल कंपनियों, लोगों और सरकारी विभागों का ब्योरा मांगा था.

(फोटो: द वायर)

आरोग्य सेतु ऐप ने कितनों को दी कोरोना जांच की सलाह, सरकार के पास जानकारी नहीं

विशेष रिपोर्ट: कोरोना संक्रमण के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है और एक्टिव केस के मामले में तीसरे पर. ऐसे समय में आरोग्य सेतु ऐप की उपयोगिता और किसी भी तरह से संक्रमण रोकने में इसके कारगर होने को लेकर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरोग्य सेतु ऐप किसने बनाया सरकार को नहीं पता, सीआईसी ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

सरकार द्वारा एक याचिकाकर्ता को आरोग्य सेतु ऐप के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कहने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि जब ऐप को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा डिजाइन और विकसित बताया गया है, तब कैसे संभव है कि उनके पास कोई जानकारी ही नहीं है.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरोग्य सेतु ऐप न होने पर सुविधाएं देने से इनकार नहीं कर सकतीं सरकारें: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि किसी क़ानून की अनुपस्थिति में न तो राज्य सरकारें, न केंद्र और न ही उनकी एजेंसियां इस आधार पर नागरिकों को लाभ या सुविधाएं देने से इनकार कर सकते हैं कि उनके फोन में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड नहीं है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

आरोग्य सेतु ऐप के प्रचार में सरकार ने साढ़े तीन महीने में ख़र्च किए 4.15 करोड़ रुपये

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए मोदी सरकार द्वारा अप्रैल में लाया गया आरोग्य सेतु ऐप शुरुआत से ही नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा और इसकी उपयोगिता को लेकर विवादों में घिरा हुआ है.

जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा. (फोटो: पीटीआई)

आरोग्य सेतु ऐप के उपयोग को अनिवार्य बनाना गैरकानूनी: जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा

निजी डेटा सुरक्षा विधेयक का पहला मसौदा लेकर आने वाली समिति के अध्यक्ष जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा ने कहा कि आरोग्य सेतु के उपयोग को अनिवार्य बनाने के लिए जारी दिशानिर्देशों को पर्याप्त कानूनी समर्थन नहीं माना जा सकता है.

(फोटो साभार: फेसबुक/MyGovIndia)

आरोग्य सेतु को लेकर नए दिशानिर्देश जारी, डेटा से छेड़छाड़ पर जेल का प्रावधान

12 मई से शुरू हो रही विशेष राजधानी ट्रेनों के यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप को अनिवार्य कर दिया गया है. केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों के बाद ऐप का डेटा इकट्ठा होने के ठीक 180 दिन बाद डिलीट हो जाएगा.

(फोटो साभार: ट्विटर)

क्या नागरिकों की सुरक्षा और निजता को आरोग्य सेतु ऐप दांव पर लगा रहा है?

सरकार का दावा कि इस ऐप के जरिये कुछ विशेष दूरी तक के ही संक्रमण की जानकारी मिल सकती है. हालांकि एक फांसीसी हैकर ने पीएमओ और रक्षा मंत्रालय जैसे हाईप्रोफाइल जगहों का डेटा सार्वजनिक करते हुए सिद्ध किया है कि इस ऐप के जरिये देश के कोने-कोने की जानकारी मिल सकती है.

(फोटो साभार: फेसबुक/MyGovIndia)

आरोग्य सेतु ऐप पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम बताया है. हालांकि ऐप की क्षमताओं को लेकर विशेषज्ञों की राय सरकार के दावों के उलट है.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन. (फोटो: ट्विटर)

झारखंड ने एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया, एनपीआर को 2010 की तरह लागू करने की मांग

इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद राज्य की विधानसभा को कोरोना वायरस के मद्देनजर अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दिया गया है.

राज्यसभा में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का प्रस्ताव रखा. (फोटो: आरएसटीवी/पीटीआई)

एनपीआर में कोई दस्तावेज़ नहीं मांगा जाएगा, किसी को ‘संदिग्ध’ नहीं माना जाएगा: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में कहा, ‘एनपीआर के लिए कोई दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे. अगर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है तो उसे साझा करने की जरूरत नहीं है.’

NPR Files

एक्सक्लूसिव: एनपीआर पर जनता को गुमराह करती मोदी सरकार

वीडियो: द वायर द्वारा प्राप्त किए गए आधिकारिक दस्तावेज़ों से खुलासा होता है कि किस तरह केंद्र की मोदी सरकार काफी पहले से एनपीआर में आधार को ‘अनिवार्य’ करने का न सिर्फ़ मन बना चुकी थी, बल्कि करीब 60 करोड़ आधार नंबर को एनपीआर से जोड़ने का काम भी पूरा हो चुका है.

नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ख़ुद कहा था कि एनपीआर के साथ आधार ज़रूर जोड़ा जाना चाहिए

विशेष रिपोर्ट: द वायर द्वारा प्राप्त किए गए आधिकारिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 15 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तत्कालीन प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें आधार जारी करने, एनपीआर डेटाबेस के साथ आधार नंबर को जोड़ने और समय-समय पर एनपीआर में आधार नंबर अपडेट करने को लेकर चर्चा की गई थी.

Aadhaar The Wire

गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 में एनपीआर के लिए आधार नंबर अनिवार्य करने का किया था प्रस्ताव

द वायर एक्सक्लूसिव: दस्तावेज़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने एनपीआर में अनिवार्य रूप से आधार इकट्ठा करने के लिए आधार क़ानून या नागरिकता क़ानून में भी संशोधन करने का प्रस्ताव रखा था.