Ministry of Health

Muzaffarpur: People take part in a candle light march to protest against the death of children due to Acute Encephalitis Syndrome (AES), in Muzaffarpur, Sunday, June 23, 2019. (PTI Photo) (PTI6_23_2019_000113B)

बिहार: चमकी बुखार से मरने वालों में अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे, 62 फीसदी लड़कियां

बिहार में इस साल एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जिन बच्चों की मौत हुई उनमें से 85 फीसदी से अधिक परिवार दिहाड़ी मजदूर हैं. वहीं, इस साल मरने वाले 168 बच्चों में से 104 लड़कियां थीं.

एनएमसी बिल के विरोध में सोमवार को नई दिल्ली स्थित एम्स पर डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया. (फोटो साभार: फेसबुक)

‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से स्वास्थ्य सेवा की लागत बढ़ेगी, मेडिकल कॉलेज मनमानी पैसे वसूलेंगे’

संसद ने हाल ही में भारतीय चिकित्सा परिषद के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग गठित करने वाले विधेयक को मंजूरी दी. भारतीय चिकित्सा संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडेकर का कहना है कि ये फैसला जन विरोधी है. इससे स्वास्थ्य शिक्षा एवं डाक्टरों की गुणवत्ता में कमी आएगी.

New Delhi: Doctors and medical students of AIIMS display placards during a strike to protest the introduction of the National Medical Commission (NMC) Bill in the Rajya Sabha, in New Delhi, Thursday, Aug 01, 2019. (PTI Photo)(PTI8_1_2019_000129B)

एनएमसी विधेयक के ख़िलाफ़ डॉक्टरों का विरोध जारी, अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) विधेयक के कई प्रावधानों पर डॉक्टरों एवं मेडिकल छात्रों को आपत्ति है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा है कि कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिसमें एमबीबीएस डिग्री धारकों के अलावा गैर चिकित्सकीय लोगों या सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं को लाइसेंस देने की बात की गई है.

Muzaffarpur: A woman carrying a child showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) arrives at Shri Krishna Medical College and hospital for treatment, in Muzaffarpur, Sunday, June 16, 2019. With one more death of a child on Sunday morning, the death toll in the district rose to 83 this month. (PTI Photo) (PTI6_16_2019_000043B)

बिहार में इस साल एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी: सरकार

राज्यसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि बिहार में 2018 में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 33 बच्चों की मौत हुई थी, जबकि 2019 में दो जुलाई तक 162 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

बिहार में डॉक्टरों के 57 फीसदी और नर्सों के 71 फीसदी पद खाली

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाख़िल कर ये जानकारी दी. हाल ही में चमकी बुखार के कारण राज्य में 150 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

Gorakhpur: A child receives treatments in the Encephalitis  Ward at the Baba Raghav Das Medical College Hospital in Gorakhpur district on Sunday. More than 30 children have died at the hospital in the span of 48 hours. PTI Photo    (PTI8_13_2017_000201A)

असम में जापानी इंसेफलाइटिस के कारण 21 लोगों की मौत हुई: स्वास्थ्य अधिकारी

असम के दौरे पर गई चार सदस्यों की केंद्रीय टीम में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि जुलाई और अगस्त आने वाले दो महत्वपूर्ण महीने हैं. यह चुनौती होगी कि इन दो महीनों में इसका प्रकोप कम हो.

A relative sits next to a child patient who is suffering from acute encephalitis syndrome at a hospital in Muzaffarpur (Photo: Reuters)

‘सरकार ईमानदारी से काम करे, तो अगले साल इंसेफलाइटिस से एक भी बच्चे की जान नहीं जाएगी’

साक्षात्कार: बिहार में इस साल अब तक एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते मुज़फ़्फ़रपुर व उसके आसपास के ज़िलों में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. यह बीमारी 1995 में सामने आई थी, तब से हर साल बच्चों की मौत हो रही है, कभी कम तो कभी ज़्यादा. इस बीमारी के तमाम पहलुओं को लेकर मुज़फ़्फ़रपुर में साढ़े तीन दशक से काम कर रहे प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण शाह से उमेश कुमार राय की बातचीत.

Relatives visit child patients who suffer from acute encephalitis syndrome at a hospital in Muzaffarpur, in the eastern state of Bihar, India, June 20, 2019. Picture taken on June 20, 2019. REUTERS/Alasdair Pal

बिहार में बच्चों की मौत के लिए प्रशासनिक विफलता व राज्य की उपेक्षा ज़िम्मेदार: डॉक्टरों की टीम

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 150 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. अकेले मुज़फ़्फ़रपुर में तकरीबन 132 बच्चे इस बीमारी से मारे जा चुके हैं.

Vishesh Report

नीतीश सरकार ने चमकी बुखार पर शोध, जागरूकता, पुनर्वास के लिए कोई फंड नहीं मांगा

चमकी बुखार या एईएस से बिहार में अब तक क़रीब 150 बच्चों की मौत हो चुकी है. एईएस से निपटने के लिए बिहार सरकार की लापरवाही का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2019-20 के तहत इस पर शोध, पीड़ितों का पुनर्वास और लोगों को जागरूक करने के लिए किसी फंड की मांग नहीं की.

बिहार के हरिवंशपुर गांव में गिरफ्तार किए गए लोगों के रिश्तेदार. (फोटो साभार: एएनआई)

बिहार: चमकी बुखार से बच्चों की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले 39 लोगों पर केस दर्ज

बीते 18 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुज़फ्फ़रपुर दौरे पर जाने के दौरान हरिवंशपुर गांव के लोगों ने चमकी बुखार से बच्चों की मौत और पानी की कमी को लेकर सड़क का घेराव किया था, जिसके चलते पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. नामजदों में क़रीब आधे दर्जन वे लोग हैं जिनके बच्चों की मौत चमकी बुखार से हुई है.

Muzaffarpur: People take part in a candle light march to protest against the death of children due to Acute Encephalitis Syndrome (AES), in Muzaffarpur, Sunday, June 23, 2019. (PTI Photo) (PTI6_23_2019_000113B)

चमकी बुखार: अगर नीतीश सरकार ने समय रहते तैयारी की होती, तो बच्चों की जानें बच सकती थीं

ग्राउंड रिपोर्ट: मुज़फ़्फ़रपुर और आस-पास के जिलों में चमकी बुखार का प्रकोप अप्रैल से शुरू होता है और जून के महीने तक मानसून आने तक बना रहता है. इस लिहाज़ से लोगों को जागरूक करने के लिए और अन्य आवश्यक तैयारियां जनवरी माह से शुरू हो जानी चाहिए थीं लेकिन गांवों में जाने पर जागरूकता अभियान के कोई चिह्न दिखाई नहीं देते.

एईएस बीमारी से अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है.

चमकी बुखार से प्रभावित करीब 75 फीसदी परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं: रिपोर्ट

बिहार सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में ये जानकारी सामने आई है. राज्य में एईएस या चमकी बुखार से अब तक 130 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बिहार सरकार को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सात दिन के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताएं कि उन्होंने इंसेफलाइटिस से हो रहे बच्चों की मौत को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) being treated at a hospital in Muzaffarpur, Saturday, June 15, 2019. Four more children died Friday in Bihar's Muzaffarpur district reeling under an outbreak of brain fever, taking the toll to 57 this month (PTI Photo)(PTI6_15_2019_000045B)

क्यों 25 साल बाद भी हमें नहीं पता कि बच्चों को चमकी बुखार से कैसे बचाया जाए?

वर्ष 1995 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में यह एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम का पहला मामला सामने आने के बाद 25 साल गुज़र गए, इसके बाद भी इस बीमारी के सही कारणों और निदान का पता नहीं चल पाया है.

बिहार के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पीछे पड़े कंकाल. (फोटो साभार: एएनआई)

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में अस्पताल के पीछे मिले मानव कंकाल

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित जिस अस्पताल के पीछे मानव कंकाल मिले हैं, वहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अभी तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है. बिहार में चमकी बुखार से अभी तक करीब 139 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Muzaffarpur: A view of an over-crowded ward with children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) as they undergo treatment at a hospital, in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. The death toll rose to 100 in Muzaffarpur and the adjoining districts in Bihar. (PTI Photo) (PTI6_17_2019_000139B)

बिहार: एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अब त​क 136 की मौत, 16 जिलों में फैला

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में सबसे अधिक अब तक 117 की मौत हुई है. इसके अलावा भागलपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सीतामढ़ी और समस्तीपुर से मौतों के मामले सामने आए हैं.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) undergoing treatment at Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH), in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. (PTI Photo)(PTI6_17_2019_000049B)

बिहार: इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 115 हुई, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और अश्विनी कुमार चौबे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ मुज़फ़्फ़रपुर की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है.

Muzaffarpur: A woman carrying a child showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) arrives at Shri Krishna Medical College and hospital for treatment, in Muzaffarpur, Sunday, June 16, 2019. With one more death of a child on Sunday morning, the death toll in the district rose to 83 this month. (PTI Photo) (PTI6_16_2019_000043B)

साल दर साल काल के गाल में समाते बच्चे और गाल बजाते नेता

सोमवार को मुज़फ़्फ़रपुर दौरे पर पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कई योजनाओं की घोषणा की, तो उन्हें 2014 में की गई घोषणाओं के बारे में ध्यान दिलाया गया, जिस पर वह असहज हो गए. दरअसल वे पांच साल पूर्व की गई अपनी ही घोषणाएं फिर से दोहरा रहे थे जो अब तक या तो अमल में ही नहीं आ सकी हैं या आधी-अधूरी हैं.

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मीडिया बोल: डॉक्टर-हड़ताल और अदावत का क्रिकेटी जलसा

मीडिया बोल की इस कड़ी में उर्मिलेश देश भर में हुई डॉक्टरों की हड़ताल पर वरिष्ठ पत्रकार गौतम लाहिड़ी, वरिष्ठ पत्रकार क़ुर्बान अली और बीएचयू के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओमशंकर से चर्चा कर रहे हैं.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की मौत के बाद जायजा लेने गए सीएम नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी

इंसेफलाइटिस की चपेट में आकर बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के ख़िलाफ़ परिवाद दायर. बिहार में अब तक तकरीबन 120 बच्चों की मौत इंसेफलाइटिस से हो चुकी है.

Bengaluru: A medical student during a demonstration protest to show solidarity with their counterparts against the assault in Kolkata, in Bengaluru, Friday, June 14, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)

हड़ताल ख़त्म कर काम पर लौटे डॉक्टर, अस्पतालों में सामान्य सेवाएं बहाल

हड़ताल ख़त्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई टाली. बीते 10 जून को पश्चिम बंगाल के एक अस्पताल में जूनियरों डॉक्टरों पर मरीज़ के परिजनों द्वारा कथित हमले के बाद सुरक्षा को लेकर डॉक्टर हड़ताल पर थे.

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुज़फ़्फ़रपुर: बच्चों की मौतों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री पूछते नजर आए कितने विकेट गिरे

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में बीते रविवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी मौजूद थे. इसी दिन भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट वर्ल्ड कप का मैच था.

Kolkata: West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee addresses media after comes out from Kolkata Police Commissioner Rajeev Kumar's residence, in Kolkata, Sunday late evening, Feb 03, 2019. (PTI Photo/Swapan Mahapatra) (PTI2_3_2019_000234B)

क्या ममता बनर्जी बंगाल को अपना खिलौना मान बैठी हैं?

‘बंगाल खिलौना नहीं है,’ यह कहा था ममता बनर्जी ने कुछ रोज़ पहले, लेकिन अब उनके आचरण से यही लगता है कि वे बंगाल को अपना खिलौना ही मान बैठी हैं, वरना वे राज्य में डॉक्टरों की हड़ताल चार दिन तक न खिंचने देतीं.

Kolkata: Junior doctors hold placards during a demonstration after an intern doctor was attacked and seriously injured over the death of a 75-year-old patient, at Nil Ratan Sircar Medical College and Hospital, in Kolkata, Thursday, June 13, 2019. Emergency wards, outdoor facilities, pathological units of many government medical colleges and hospitals, and a number of private medical facilities in the state have remained closed over the past two days in the wake of the protest. (PTI Photo/Ashok Bhaumik)(PTI6_13_2019_000065B)

पश्चिम बंगाल: डॉक्टरों ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव, कहा- पहले मुख्यमंत्री माफ़ी मांगें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गतिरोध का समाधान निकालने के लिए राज्य सचिवालय में डॉक्टरों को बैठक में आमंत्रित किया था. इस बीच, दिल्ली स्थित एम्स और सफदरजंग अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने ममता बनर्जी को राज्य के आंदोलनकारी डॉक्टरों की मांगों को पूरा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.

Bengaluru: Doctor and medical students hold placards as they protest to show solidarity with their counterparts against the assault on their colleagues in Kolkata, in Bengaluru, Friday, June 14, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI6_14_2019_000160B)

डॉक्टरों ने ममता बनर्जी को माफ़ी मांगने कहा, आंदोलन वापस लेने के लिए शर्तें ​रखीं

पश्चिम बंगाल में मरीज़ के परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर किए गए हमले के विरोध में पिछले चार दिनों से राज्य भर के डॉक्टर हड़ताल पर हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान किया. कई राज्यों में डॉक्टरों ने हड़ताल का समर्थन किया.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1000 से अधिक मामले, एक की मौत: रिपोर्ट

दिल्ली में स्वाइन फ्लू से कम से कम 14 मौतें हुई हैं, जिनमें सफदरजंग अस्पताल में तीन, राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 10 और एम्स में एक मौत हुई है. हालांकि, दिल्ली के ये आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डाटा में प्रदर्शित नहीं किए गए हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

उच्चतम न्यायालय ने सेरिडॉन और तीन अन्य दवाओं की बिक्री की अनुमति दी

बीते 13 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 328 ऐसी दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो दो या उससे अधिक दवाओं के संयोजन से बनी थीं और जिन्हें बिना मेडिकल पर्चे के केमिस्ट की दुकान से ख़रीदा जा सकता था. यह प्रतिबंध सात सितंबर से लागू हुआ है.

Gorakhpur: A child receives treatments in the Encephalitis  Ward at the Baba Raghav Das Medical College Hospital in Gorakhpur district on Sunday. More than 30 children have died at the hospital in the span of 48 hours. PTI Photo    (PTI8_13_2017_000201A)

पैसे नहीं दे पाने पर मरीज़ या शव को रोक नहीं सकेंगे अस्पताल: स्वास्थ्य मंत्रालय का मसौदा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा तैयार की गई ‘मरीजों के अधिकारों पर चार्टर’ के मुताबिक मरीज़ को ये अधिकार है कि डॉक्टर द्वारा लिखी दवा को वो अपने पसंद की फार्मेसी से ख़रीदे.

VOVERAN

दर्दनिवारक इंजेक्शन वोवेरान पर लगा प्रतिबंध, किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व पाए गए

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर भारतीय दवा नियंत्रक ने प्रतिबंध लगाया है. दवा में ट्रांसक्योटोल तत्व पाया गया जो कि पूरी दुनिया में प्रतिबंधित है.

Kozhikode: Doctors wear safety masks as a precaution after the outbreak of 'Nipah' virus, at a hospital in Kozhikode, on Monday. (PTI Photo)(PTI5_21_2018_000161B)

केरल के कोझीकोड में निपाह वायरस से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

आठ लोगों को निगरानी में रखा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित डॉक्टरों का उच्च स्तरीय दल केरल पहुंचा. निपाह वायरस के स्वाभाविक वाहक चमगादड़ हैं.

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अनावश्यक सिज़ेरियन डिलीवरी के ख़िलाफ़ अभियान

पिछले दिनों एक ऑनलाइन याचिका पर संज्ञान लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध किया है कि अस्पतालों द्वारा की गई सिजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा सार्वजानिक किया जाए.