MNREGA

अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करते संजय साहनी. (सभी फोटो: उमेश कुमार राय)

बिहार: सियासी चेहरों के बीच चुनावी मैदान में उतरा एक मनरेगा मज़दूर

ग्राउंड रिपोर्ट: मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के रत्नौली गांव के रहने वाले 33 वर्षीय संजय साहनी कुढ़नी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार हैं. सातवीं तक पढ़े संजय लंबे समय तक प्रवासी कामगार के बतौर दिल्ली में रहे हैं और अब मनरेगा के तहत मज़दूरी करते हुए आसपास के गांवों में मनरेगा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं.

Migrant workers, who work in textile looms, are seen outside a loom after it was shut due to the 21-day nationwide lockdown to slow the spread of the coronavirus disease, in Bhiwandi on the outskirts of Mumbai, India, April 1, 2020. Photo: Reuters/Francis Mascarenhas/Files

अप्रैल से लेकर अब तक 83 लाख से अधिक नए मनरेगा कार्ड जारी, सात सालों में सर्वाधिक बढ़ोतरी: रिपोर्ट

वित्त वर्ष 2020-21 में एक अप्रैल से तीन सितंबर तक 83.02 लाख नए मनरेगा कार्ड जारी किए गए हैं, जो वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में 28.32 फीसदी अधिक है. 2019-20 में सिर्फ़ 64.70 लाख नए मनरेगा कार्ड जारी किए गए थे.

Kokrajhar Assam

असम: ग़रीबी और काम न मिलने से परेशान प्रवासी मज़दूर ने अपनी नवजात बच्ची को बेचा

मामला कोकराझार ज़िले का है. लॉकडाउन के दौरान गुजरात लौटे एक मज़दूर ने आर्थिक तंगी और काम न मिलने से परेशान होकर अपनी 15 दिन की बच्ची को 45 हज़ार रुपये में बेच दिया. पुलिस ने मज़दूर और बच्ची खरीदने वाली महिलाओं को गिरफ़्तार कर लिया है.

(फोटो साभार: indiarailinfo)

बांदा: लॉकडाउन में मुंबई से लौटे मज़दूर ने कथित तौर पर काम न मिलने से की आत्महत्या

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले के इंगुआ गांव का मामला. मृतक के भाई ने बताया कि मुंबई से लौटने के बाद गांव में उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा था, जिस वजह से वह आर्थिक रूप से परेशान थे.

Bihar Mushar Story

बिहार: कोरोना संकट में बढ़ गई हैं मुसहर समाज की मुश्किलें

लॉकडाउन के समय काम न होने से निम्न आर्थिक वर्ग के लोगों के पास न पैसा है न ही कमाई का अन्य कोई साधन. बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के बासमनपुर पंचायत के मुसहर टोले का हाल भी यही है. यहां के रहवासियों का कहना है कि रोजी-रोटी नहीं है और अब भुखमरी जैसे हालात बन रहे हैं.

(फोटो साभार: UN Women/Gaganjit Singh/Flickr CC BY-NC-ND 2.0)

2019-20 में 5.47 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत काम मांगा, पिछले नौ सालों में सर्वाधिक

मनरेगा के तहत काम मांगने वालों बढ़ती संख्या ये दर्शाता है कि ग्राम पंचायत ज़्यादा से ज़्यादा बेरोज़गारों को काम दे रहे हैं.

निर्मला सीतारमण. (फोटो: पीटीआई)

कोरोना राहत पैकेज: क्या वित्तमंत्री ने मनरेगा मज़दूरों के साथ धोखा किया है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कोरोना राहत पैकेज की घोषणा करते हुए मनरेगा मज़दूरी में वृद्धि की बात कही. हालांकि यह एक रूटीन वार्षिक कवायद थी, जिसे पहले ही ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था.

केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो साभार: फेसबुक)

सरकार मनरेगा को हमेशा चलाए रखने की पक्षधर नहीं: ग्रामीण विकास मंत्री

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए है और मोदी सरकार का लक्ष्य गरीबी को ख़त्म करना है. गरीबी दूर करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है.

(फोटो साभार: UN Women/Gaganjit Singh/Flickr CC BY-NC-ND 2.0)

आख़िर क्यों मनरेगा मज़दूरों को नहीं मिलती उचित मज़दूरी?

देश में दूसरे रोज़गारों की उपलब्धता इतनी कम है कि ग्रामीणों को मजबूरन मनरेगा में काम करना पड़ रहा है. इस स्थिति में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मनरेगा में कार्यरत ग्रामीण बंधुआ मज़दूर बन गए हैं. उनके लिए न तो एक सम्मानजनक मानदेय है और न ही समय पर मज़दूरी मिलने की कोई उम्मीद.

Village women work at a dry pond under the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MNREGA) in a village on the outskirts of Kolkata, 11 February 2014. (Photo: Reuters)

चुनावी मौसम में मज़दूर राजनीतिक विमर्श से ग़ायब क्यों हैं?

किसी भी राष्ट्र के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा जहां करोड़ों मज़दूरों की दुर्दशा राष्ट्रीय चेतना और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा ही नहीं है.

Job seekers fill up forms for registration in Chinchwad, India, February 7, 2019 (Danish Siddiqui / REUTERS)

नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम: 20 लाख युवाओं को करना था रोज़गार के लिए तैयार, हुए सिर्फ 2.90 लाख

मोदी सरकार के दावे और उनकी ज़मीनी हक़ीक़त पर विशेष सीरीज: 2016 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य रोज़गार के अवसर पैदा करना और युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोज़गार देना था. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2018 तक 20 लाख प्रशिक्षुओं को तैयार करने का लक्ष्य था, जिसमें से केवल 2.90 लाख प्रशिक्षु तैयार हुए. इनमें से भी महज़ 17, 493 को इस योजना का लाभ मिला.

**BEST QUALITY AVAILABLE** Narayanpet: People gather at the site where many labourers reportedly died after a mound of earth collapsed on them, at Narayanpet district, Telangana, Wednesday, April 10, 2019. (PTI Photo)(PTI4_10_2019_000049B)

तेलंगाना: मनरेगा मज़दूरों पर मिट्टी का ढेर गिरा, 10 महिला श्रमिकों की मौत

तेलंगाना के नारायणपेट ज़िले का मामला. मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने इस घटना पर दुख जताते हुए इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया. अधिकारियों को घायल और मृतकों के परिवार को हरसंभव मदद पहुंचाने का निर्देश दिया है.

Labourers load a truck as they try to revive a dried lake under the National Rural Employment Guarantee Act (NREGA) at Ibrahimpatnam, on the outskirts of Hyderabad, June 17, 2009. The government has started a pilot project to quantify climate benefits from the NREGA, the anti-poverty scheme that could become one of the country's main weapons to fight criticism it is not doing enough to tackle global warming. The flagship anti-poverty plan, started three years ago, provides 100 days of employment every year to tens of millions of rural poor, a move that partly helped the Congress party-led coalition return to power in a general election. REUTERS/Krishnendu Halder (INDIA ENVIRONMENT BUSINESS EMPLOYMENT) - RTR24QZU

मोदी सरकार ने मनरेगा मज़दूरी में सबसे कम बढ़ोतरी की, मात्र 1-5 रुपये ही बढ़ाए गए

केंद्र की मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राज्यवार मनरेगा मज़दूरी को अधिसूचित किया है. इसके तहत छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मज़दूरों की रोज़ाना मज़दूरी में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है.

राहुल गांधी. (फोटो साभार: ट्विटर/@INCIndia)

नरेंद्र मोदी अमीरों को पैसा देते हैं, कांग्रेस ग़रीबों को पैसा देगीः राहुल गांधी

एक चुनावी सभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि न्यूनतम आय योजना के बारे में कहा कि हमने मनरेगा-1 के जरिए 14 करोड़ भारतीयों को ग़रीबी से बाहर निकाला था. यह मनरेगा का दूसरा चरण है, जहां हम 25 करोड़ लोगों को ग़रीबी से बाहर निकालेंगे.

(फोटो: रॉयटर्स)

ग्रामीण संकट: आठ सालों में पिछले साल मनरेगा के तहत नौकरियों की सबसे अधिक मांग रही

मौजूदा वित्त वर्ष (25 मार्च तक) में मनरेगा के तहत 255 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस पैदा किया गया जो कि 2010-11 के बाद से इस योजना के तहत व्यक्ति कार्य दिवस की सबसे अधिक संख्या है.