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किसान आंदोलन: 27 सितंबर को ‘भारत बंद’ का आह्वान, संगठन ने कहा- शांतिपूर्ण रहेगा विरोध प्रदर्शन

चालीस से अधिक किसान संघों के निकाय  संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ 27 सितंबर के भारत बंद के लिए दिशानिर्देश जारी किए. कहा कि बंद दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, बाजारों, दुकानों, कारखानों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. सार्वजनिक और निजी परिवहन की अनुमति नहीं दी जाएगी. किसी भी सार्वजनिक समारोह की अनुमति नहीं दी जाएगी.

नए आईटी नियम: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ख़िलाफ़ कितने यूज़र शिकायत दायर कर रहे हैं?

फेसबुक-ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियों की अनुपालन रिपोर्ट से पता चलता है कि फ़िलहाल काफ़ी कम यूज़र नए आईटी नियमों के तहत शिकायतें दायर करा रहे हैं. ज़्यादातर कंपनियों को हर महीने एक हज़ार से कम शिकायतें मिल रही हैं.

बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने नए आईटी नियमों के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई

डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन, पत्रकार मुकुंद पद्मनाभन और संगीतकार टीएम कृष्णा की नए आईटी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर अदालत ने नियम 9 के उपबंध (1) एवं (3) पर रोक लगाई है. ये उप-खंड आचार संहिता के पालन को निर्धारित करते हैं. 

किसानों के प्रदर्शन के ‘प्रतिकूल प्रभाव’ पर मानवाधिकार आयोग ने चार राज्यों को नोटिस भेजा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों और पुलिस प्रमुखों को इस आरोप पर नोटिस भेजे हैं कि किसानों के जारी विरोध प्रदर्शनों से औद्योगिक इकाइयों और परिवहन पर ‘प्रतिकूल प्रभाव’ पड़ा है और आंदोलन स्थलों पर कोविड-19 सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया गया है.

क्या भारत एक ‘डेटा ब्लैकहोल’ बनने के रास्ते पर बढ़ रहा है

नीति संबंधी निर्णयों में आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है. सरकार यदि लोगों के जीवन, ख़ासकर स्वास्थ्य-शिक्षा, रोज़गार में सुधार लाना चाहती है, तो ज़रूरी है कि उनके पास इनका सही आकलन करने की क्षमता, सही आंकड़े व जानकारी हों. वर्तमान सरकार जिस तरह विभिन्न डेटा और रिकॉर्ड न होने की बात कह रही है, वो देश को उस ‘डेटा ब्लैकहोल’ की ओर ले जा रहे हैं, जिसके अंधेरे में सुधार की राह खो गई है.

साल 2014 से मोदी सरकार का प्रतिदिन दो कॉलेज स्थापित करने का भाजपा का दावा झूठा है

भाजपा ने एक ट्वीट में कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2014 से हर दिन दो कॉलेज स्थापित किए हैं. इस हिसाब से 30 सितंबर 2019 तक 3,906 कॉलेज स्थापित किए जाने चाहिए थे, हालांकि शिक्षा मंत्रालय के सर्वे के मुताबिक़, 30 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2019 तक कुल 1,335 नए सरकारी कॉलेज ही बने हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत ने सांप्रदायिकता पर वो चोट की है, जिसकी देश को सख़्त ज़रूरत थी

किसान आंदोलन के अराजनीतिक होने को उसकी अतिरिक्त शक्ति के रूप में देखें, तो कह सकते हैं कि हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की यह मुहिम राजनीतिक हानि-लाभ से जुड़ी न होने के कारण अधिक विश्वसनीय है और ज़्यादा उम्मीदें जगाती है.

कृषि क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट की समिति के सदस्य ने सीजेआई को लिखा- हमारी रिपोर्ट सार्वजनिक करें

तीन कृषि क़ानूनों पर विचार कर समाधान सुझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य और शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घानवत ने अपने पत्र में कहा है कि उनकी रिपोर्ट में किसानों की सभी चिंताओं का हल निकाला गया है. यदि इन्हें लागू किया जाता है तो वे अपना आंदोलन ख़त्म कर देंगे.

मुझे नज़रबंद किया गया, कश्मीर में स्थिति सामान्य होने के दावों की सच्चाई सामने आई: मुफ़्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां भारत सरकार अफ़ग़ानिस्तान में लोगों के अधिकारों के लिए चिंता व्यक्त कर रही है, वहीं कश्मीरियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है.

मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत का असर सिर्फ़ उत्तर प्रदेश नहीं पूरे भारत पर पड़ेगा

वीडियो: संयुक्त किसान मोर्चा ने मुज़फ़्फ़रनगर की किसान महापंचायत से एक बार फिर अपने आंदोलन को धार देने का प्रयास किया. इस महापंचायत में किसानों का बड़ा हुजूम देख देखा गया. खासकर, पश्चिम उत्तर के किसान बड़ी तादाद में यहां पहुंचे. द वायर ने महापंचायत में शामिल किसानों से बात की.

किसान महापंचायत: टिकैत बोले, देश में ‘सेल फॉर इंडिया’ का बोर्ड लग चुका है, आंदोलन चलाने पड़ेंगे

उत्तर प्रदेश के अलावा कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन तेज़ करने की रणनीति के तहत कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से मुज़फ़्फ़रनगर में महापंचायत का आयोजन किया गया. महापंचायत का जहां विपक्ष के नेताओं ने समर्थन किया है, वहीं भाजपा ने इसे चुनावी रैली क़रार दिया है. हालांकि भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कहा है कि किसानों के साथ फ़िर से बातचीत शुरू करनी चाहिए.

भाजपा के नेताओं और मंत्रियों के महंगाई पर अजब-गजब बयान

वीडियो: भारत की जनता महंगाई की मार झेल रही है. पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है. इस साल जनवरी से सितंबर तक रसोई गैस के दाम 190 रुपये तक बढ़ गए, वहीं पेट्रोल के दाम 100 के पार भी गए. इस बीच भाजपा के नेताओं और मंत्रियों के अजब-गजब बयान आते रहे. सरकार में आने से पहले और बाद में भाजपा मंत्रियों और नेताओं के बयानों को सुना जाना चाहिए.

कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में 68 जजों की सिफ़ारिश की, इसमें से 12 पर केंद्र ने जताई थी आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने केंद्र की दलीलों को दरकिनार करते हुए 12 ऐसे नामों को दोहराया है, जिस पर मोदी सरकार ने पूर्व में आपत्ति जताई थी. नियम के मुताबिक यदि कॉलेजियम किसी सिफ़ारिश को दोहराती है तो केंद्र सरकार को हर हाल में उसकी नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी.

राष्ट्रपति जी, ‘राम सबके और सबमें हैं’ उन्हें समझाइए जो राम नाम पर हमवतनों का जीना मुहाल किए हैं

अयोध्या में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपने संबोधन में न अवध की ‘जो रब है वही राम है’ की गंगा-जमुनी संस्कृति की याद आई, न ही अपने गृहनगर कानपुर के उस रिक्शेवाले की, जिसे बीते दिनों बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम होने के चलते पीटा और जबरन ‘जय श्रीराम’ बुलवाकर अपनी ‘श्रेष्ठताग्रंथि’ को तुष्ट किया था.

26 जनवरी की घटनाओं के संबंध में किसानों को जारी नोटिस पर मोर्चा ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की

दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि पुलिस केंद्र सरकार के इशारे पर इस प्रकार के असंवैधानिक और अवैध कार्य कर रही है, क्योंकि जिन किसानों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके नाम एफ़आईआर में नहीं हैं और न ही उन्होंने किसी हिंसक गतिविधि में भाग लिया है. बीते 26 जनवरी को कृषि क़ानूनों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर परेड का आयोजन किया गया था. इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई थी.