हिंदुत्व के ‘विचारधारात्मक पुरखों’ का स्याह अतीत: अंग्रेज़ों की हिमायत और मुस्लिम लीग का समर्थन

कांग्रेस का घोषणा पत्र सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे मुस्लिम लीग से जोड़ा था. क्या यह बेतुकी तुलना भाजपा की उस ग्रंथि को दर्शाती है जब आज़ादी से पहले जिन्ना की अगुआई वाली इसी लीग के साथ मिलकर उसके ‘विचारधारात्मक पुरखों’ ने गुल खिलाए थे!

आंध्र प्रदेश: भाजपा के नाम बदलने की मांग के बाद जिन्ना टावर को तिरंगे के रंग में रंगा गया

आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले में स्थित जिन्ना टावर पर बीते 26 जनवरी तिरंगा फहराने की कोशिश करते दक्षिणपंथी समूह ‘हिंदू वाहिनी’ के तीन सदस्यों को हिरासत में लिए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया था. पिछले साल दिसंबर में भाजपा ने मांग की थी कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के सम्मान में टावर का नाम बदला जाए. उन्होंने धमकी दी कि अगर वाईएसआर कांग्रेस सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो वे स्मारक को नष्ट कर

जिन्ना के ‘महिमामंडन’ के सवाल पर भाजपा के खाने के दांत और हैं, दिखाने के और

अगर जिन्ना, जो कम से कम 1937 तक देश के साझा स्वतंत्रता संघर्ष का हिस्सा थे, की प्रशंसा करना अपराध है तो हमारे निकटवर्ती अतीत में भाजपा के कई बड़े नेता ऐसे अपराध कर चुके हैं.

अगर जिन्ना देश के पहले प्रधानमंत्री बनते तो भारत विभाजन से बच सकता था: भाजपा नेता

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइज़र पत्रिका के पूर्व संपादक शेषाद्री चारी ने कहा कि दुर्भाग्य से हमारे नेताओं ने इस बारे में नहीं सोचा. अगर हमारे नेताओं ने तब इस बारे में सोचा होता और जिन्ना को प्रधानमंत्री पद की पेशकश की होती तो कम से कम विभाजन नहीं होता. हालांकि ये अलग मुद्दा है कि उनके बाद प्रधानमंत्री कौन बनता.

कश्मीर और 370 से लेकर विभाजन तक नेहरू के प्रति भाजपा की नफ़रत झूठ की बुनियाद पर टिकी है

गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त 2019 में दिए एक भाषण में कहा था कि अगर नेहरू न होते, तो पाक अधिकृत कश्मीर भारत के कब्ज़े में होता. सच तो यह है कि अगर आज कश्मीर भारत का हिस्सा है तो यह केवल नेहरू के चलते ही है.

दिग्गज विज्ञापन निर्माता और निर्देशक एलेक पदमसी का निधन

एलेक पदमसी ने भारत के कुछ मशहूर विज्ञापन बनाए जिसमें सर्फ के लिए ‘ललिताजी’, आॅटो कंपनी बजाज के लिए ‘हमारा बजाज’, ‘चेरी ब्लॉसम’ शू पॉलिश के लिए ‘चेरी चार्ली’ और ‘लिरिल’ के लिए झरने के नीचे मॉडल वाला विज्ञापन शामिल है.

अमित शाह की तुलना मुहम्मद अली जिन्ना से की जा सकती है: रामचंद्र गुहा

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि कुछ मायने में अमित शाह की तुलना जिन्ना से की जा सकती है. शाह कहते हैं, ‘जो भी हो मैं चुनाव जीतूंगा’ और जिन्ना कहते थे कि ‘जो भी हो मैं पाकिस्तान लेकर रहूंगा चाहे इसके लिए लाशें बिछ जाएं.’

जिन्ना को आरोपों से बरी करने का वक़्त आ गया है

यह सही है कि विभाजन से भारतीय मुसलमानों का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ, लेकिन इसके लिए जिन्ना या मुस्लिम लीग को क़सूरवार ठहराना इतिहास का सही पाठ नहीं है.

हम भी भारत, एपिसोड 34: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना विवाद

हम भी भारत की 34वीं कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर हुए विवाद पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों से बात कर रही हैं.​

जिन्ना की तस्वीर पर विवाद बेकार का मुद्दा: एएमयू कुलपति

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति तारिक़ मंसूर ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट और साबरमती आश्रम समेत कई और जगहों पर भी जिन्ना की तस्वीर लगी है और अब तक किसी को इन तस्वीरों से कोई परेशानी नहीं हुई.

मीडिया बोल, एपिसोड 48: एएमयू में जिन्ना विवाद और मीडिया

मीडिया बोल की 48वीं कड़ी में उर्मिलेश अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर हुए विवाद और उसकी मीडिया कवरेज पर वरिष्ठ पत्रकार सबा नक़वी और प्रोफेसर सलिल मिश्रा से चर्चा कर रहे हैं.

अपने-अपने जिन्ना

भारतीय राजनीति में जिन्ना के बरक्स अगर किसी दूसरे व्यक्तित्व को खड़ा किया जा सकता है तो वो हैं वीर सावरकर. संयोग नहीं है कि अपनी ज़िंदगी के पहले हिस्से की उपलब्धियों को अपनी बाद की ज़िंदगी में धो डालने वाले यह दोनों नेता विभाजन के द्विराष्ट्र सिद्धांत के पैरोकार थे.

अलीगढ़ ज़िले में इंटरनेट सेवाओं पर रोक, एएमयू में छात्रों का धरना जारी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर हुए विवाद को देखते हुए प्रशासन ने उठाया क़दम. ज़िले में धारा 144 भी लागू.

‘एएमयू पर हमला करने वाले याद रखें कि सावरकर ने जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया था’

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर मोहम्मद सज्जाद का कहना है कि सरकार की तरह एएमयू इतिहास को अपने हिसाब से तोड़ने-मरोड़ने में विश्वास नहीं रखता.

जिन्ना नहीं चाहते थे कि पाकिस्तान बने: फ़ारूक़ अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के लिए नेहरू, पटेल और मौलाना आज़ाद को ज़िम्मेदार ठहराया.