Myanmar

(फोटो: रॉयटर्स)

हर चार में से तीन ग्रामीण भारतीयों को नहीं मिल पाता पौष्टिक आहार: रिपोर्ट

हाल ही में जारी वैश्विक भूख सूचकांक 2020 में भारत को 107 देशों की सूची में 94वें स्थान पर रखा गया है और देश भूख की ‘गंभीर’ श्रेणी में है.

A boy eats at an orphanage run by a non-governmental organisation on World Hunger Day, in the southern Indian city of Chennai May 28, 2014. REUTERS/Babu

वैश्विक भूख सूचकांक में 107 देशों की सूची में भारत 94वें स्थान पर

वैश्विक भूख सूचकांक, 2020 में भारत पड़ोसी देशों- बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान के साथ ‘गंभीर’ श्रेणी में हैं. वहीं, नेपाल और श्रीलंका की स्थिति इन देशों की तुलना में ठीक है. सूची में ये ‘मध्यम’ श्रेणी में हैं.

प्रतीकात्मक फोटो (संभार रॉयटर्स)

म्यांमार के शरणार्थी शिविरों में अमानवीय स्थिति में रह रहे रोहिंग्या: मानवाधिकार संगठन

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि म्यांमार के पश्चिम रखाइन प्रांत में 24 शिविरों में अमानवीय स्थिति है और यह रोहिंग्याओं के जीवन के अधिकार एवं अन्य मूलभूत अधिकारों के लिए ख़तरा है. रिपोर्ट में इन शिविरों को खुली जेल बताया गया है.

A car sits in what remains of a Rohingya village near Maungdaw town in Rakhine State during the military crackdown in August 2017. REUTERS/Soe Zeya Tun

पहली बार म्यांमार के सैनिकों ने रोहिंग्या नरसंहार की बात स्वीकार की: रिपोर्ट

एक मानवाधिकार समूह ने कहा है कि म्यांमार की सेना छोड़कर भागने वाले दो सैनिकों ने वीडियो पर गवाही दी है कि उन्हें अधिकारियों द्वारा निर्देश दिया गया था, ‘जहां रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं वहां जिन्हें भी देखो और सुनो गोली मार दो.’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान. (फोटो: रॉयटर्स)

भाजपा की भारत में म्यांमार की तरह नरसंहार दोहराने की योजनाः इमरान खान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि म्यांमार में भी ऐसा हुआ था, वहां पहले रजिस्ट्रेशन एक्ट लाया गया और उसके बाद मुस्लिमों को इससे बाहर कर दिया था, जिसके बाद नरसंहार हुआ था. मुझे डर है कि भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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अंतरराष्ट्रीय अदालत ने म्यांमार को रोहिंग्या का जनसंहार रोकने का आदेश दिया

अदालत ने कहा कि उनका ये आदेश म्यांमार पर बाध्यकारी है और वे चार महीने में आईसीजे को रिपोर्ट देकर बताएं कि उन्होंने आदेश के अनुपालन के लिए क्या किया.

Rohingya refugees walk on a muddy path as others travel on a boat after crossing the Bangladesh-Myanmar border, in Teknaf, Bangladesh, September 6, 2017. REUTERS/Danish Siddiqui

म्यांमार: सरकार के पैनल ने रोहिंग्या जनसंहार से किया इनकार, मानवाधिकार समूहों ने की निंदा

अगस्त 2017 से शुरू हुए सैन्य अभियानों के चलते करीब 7,40,000 रोहिंग्या लोगों को सीमापार बांग्लादेश भागना पड़ा था. पिछले साल सितंबर महीने में संयुक्त राष्ट्र की एक टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि म्यांमार में करीब छह लाख रोहिंग्या मुसलमान नरसंहार के गंभीर ख़तरे का सामना कर रहे हैं.

(प्रती​कात्मक फोटो: रॉयटर्स)

केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों में छह और महीने के लिए लगाया आफस्पा

इसी साल अप्रैल महीने में आफस्पा क़ानून को तीन जिलों से आंशिक रूप से हटा दिया गया था. हालांकि, तिराप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ कुछ थाना क्षेत्रों में इसे 30 सितंबर तक लागू रखने का फैसला किया था, जिसे अब 31 मार्च, 2020 तक बढ़ा दिया.

Ahmed, a Rohingya refugee man cries as he holds his 40-day-old son, who died as a boat capsized in the shore of Shah Porir Dwip while crossing Bangladesh-Myanmar border, in Teknaf, Bangladesh. Reuters

म्यांमार में छह लाख रोहिंग्या ‘नरसंहार के गंभीर खतरे’ का सामना कर रहे हैं: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की फैक्ट फाइंडिंग मिशन ने एक रिपोर्ट में कहा कि म्यांमार लगातार नरसंहार की सोच को पनाह दे रहा है.

7th may 2018 bulletin thumbnail

द वायर बुलेटिन: सीजेआई को क्लीनचिट मिलने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

चुनाव आयोग द्वारा दो और मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट देने समेत दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट

Indian army soldiers march near an army base on India's Tezpur-Tawang highway in Arunachal Pradesh May 29, 2012. REUTERS/Frank Jack Daniel/Files

अरुणाचल प्रदेश: तीन जिलों से आंशिक रूप से हटा आफस्पा

फरवरी 1987 में प्रदेश के गठन के साथ ही वहां लागू विवादित आफस्पा क़ानून को 32 साल बाद पश्चिम कामेंग, पूर्वी कामेंग और पापुमपारे ज़िला से हटाने का फ़ैसला लिया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

केंद्र का राज्यों को आदेश, अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों की नए सिरे से पहचान करें

भारत सरकार अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में राज्यों से जुटाए गए बायोग्राफिक आंकड़ों को म्यांमार सरकार के साथ साझा करेगी. इसके आधार पर इनकी नागरिकता की पुष्टि की जा सकेगी.

Moreh Border: In this photo provided by Assam Police are seen seven Rohingya immigrants being handed over to Myanmar authorities after completing deportation formalities, at Moreh border post in Manipur, Thursday, Oct 4, 2018. The illegal immigrants were detained in 2012 and since then they were lodged in Cachar Central Jail in Assam's Silchar. (PTI Photo) (PTI10_4_2018_000067B)

भारत ने सात रोहिंग्या प्रवासियों को वापस म्यांमार भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने असम में अवैध रूप से आए सात रोहिंग्याओं को उनके मूल देश म्यांमार भेजने के सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

म्यांमार नेता आंग सान सू ची. (फोटो: रॉयटर्स)

रोहिंग्या संकट पर चुप्पी के चलते कनाडा ने आंग सान सू ची की मानद नागरिकता वापस ली

​नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित म्यांमार की नेता आंग सान सू ची को कनाडा की संसद ने 2007 में मानद नागरिकता दी थी.

म्यांमार नेता आंग सान सू ची. (फोटो: रॉयटर्स)

म्यांमार की नेता सू ची ने रॉयटर्स के पत्रकारों को जेल भेजने के अदालती फैसले का बचाव किया

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकारों को रखाइन में सैन्य कार्रवाई के दौरान हुए अत्याचारों की रिपोर्टिंग करते हुए देश के सरकारी गोपनीयता क़ानून तोड़ने के लिए पिछले सप्ताह सात-सात साल की जेल की सज़ा सुनाई गई.