Nationalism

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क्या उत्तर प्रदेश में रासुका का इस्तेमाल बतौर सियासी हथियार मुस्लिमों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है?

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के शुरुआती 10 महीने में तकरीबन 160 लोग रासुका के तहत गिरफ़्तार किए गए. इनमें शामिल पीड़ित मुस्लिम परिवारों का कहना है कि सांप्रदायिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं: विधि आयोग

आयोग ने कहा कि देशभक्ति का कोई एक पैमाना नहीं है. लोगों को अपने तरीके से देश के प्रति स्नेह प्रकट करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

Mumbai: Shivsena Chief Uddhav Thackeray with Yuva Sena Chief Aditya Thackeray address a press conference, in Mumbai on Thursday, May 31, 2018. (PTI Photo)(PTI5_31_2018_000185B)

इस देश में गाय सुरक्षित हैं, महिलाएं नहीं: उद्धव ठाकरे

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ को दिए साक्षात्कार में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी सहयोगी दल भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि जिस प्रकार आज देश में हिंदुत्व का पालन किया जा रहा है, उसे शिवसेना स्वीकार नहीं करती.

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कांग्रेस के वंदे मातरम के टुकड़े करने के चलते हुआ देश का विभाजन: अमित शाह

कोलकाता में हुए एक कार्यक्रम में बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम को धार्मिक रंग दिया. उसने अगर ऐसा नहीं किया होता, तो देश नहीं बंटता.

Varanasi: A bike in flames during clashes between the students and police at Banaras Hindu University in Varanasi, late Saturday night. Female students at the prestigious University were protesting against the administration's alleged victim-shaming after one of them reported an incident of molestation on Thursday. PTI Photo (PTI9_24_2017_000080A)

पिछले तीन सालों में विभाजन बढ़ा, धार्मिक मतभेद और राष्ट्रवादी राजनीति बड़ा ख़तरा: सर्वे

एक सर्वे के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर नस्लभेद और अप्रवासियों का भय वैश्वीकरण के लिए बड़ा ख़तरा हैं, लेकिन भारत के युवाओं का मानना है कि धार्मिक मतभेद और राष्ट्रवादी राजनीति दूसरे ख़तरों से बड़े हैं.

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‘भारत की राष्ट्रीयता किसी एक भाषा या एक धर्म पर आधारित नहीं है’

7 जून 2018 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पर हुए समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गया पूरा भाषण.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रवाद की गढ़ी जा रही अवधारणा का आज़ादी की लड़ाई के वक़्त की अवधारणा से मेल नहीं: इतिहासकार

इतिहासकार प्रोफेसर मृदुला मुखर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रवाद सर्वसमावेशी और बहुआयामी था, जिसमें हर क्षेत्र, धर्म, संप्रदाय, हर भाषा को बोलने वाले और सभी जनजातीय समूह के लोग शामिल थे.

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अपराधियों को मारना राम राज्य की शुरुआत: केशव प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद बढ़े एनकाउंटरों पर उपमुख्यमंत्री का कहना है कि यूपी अकेला ऐसा राज्य है जहां क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर क़दम उठाए जा रहे हैं.

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‘देश में राष्ट्रवाद के नाम पर नशा बांटा जा रहा है’

वीडियो: देश में बढ़ती सांप्रदायिक घटनाओं और बयानबाज़ी पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद से द वायर के कार्यकारी संपादक बृजेश सिंह की बातचीत.

Darbhanga: RSS Chief Mohan Bhagwat attends Nagar Ekatrikaran Conference in Darbhanga district on Wednesday. PTI Photo(PTI1_24_2018_000064B)

जातिगत राजनीति इसलिए होती है, क्योंकि लोग जाति के नाम पर वोट देते हैं: भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नेता एक निश्चित सीमा तक चीज़ों में सुधार कर सकते हैं और चीज़ों में सुधार के लिए अपने हितों के त्याग करने की ज़रूरत होती है.

पुस्तक मेले में आसाराम का स्टॉल, फोटो: Special Arrangement

क्या नेशनल बुक ट्रस्ट ने पुस्तक मेले के बहाने धर्म के प्रचार-प्रसार का ठेका ले लिया है?

विश्व पुस्तक मेला अब महज़ किताबों की ख़रीद-बिक्री, लेखकों एवं पाठकों का मिलन स्थल ही नहीं रहा बल्कि धर्म के प्रचार का केंद्र भी बन गया है.

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अन्य संस्कृतियों के प्रति अज्ञानता कट्टर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है: नोबेल पुरस्कार विजेता

भारत आए नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डेविड जोनाथन ग्रॉस ने कहा कि कट्टर राष्ट्रवाद के माहौल में ज्ञान की ज्योति जलाने की ज़िम्मेदारी युवाओं पर है.

(फोटो: पीटीआई)

फिल्म शुरू होने से पहले सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना स्वैच्छिक: सुप्रीम कोर्ट

साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले बिना किसी नाटकीयता के राष्ट्रगान अनिवार्य रूप से बजाया जाना चाहिए.

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क्या भारत की राजनीति ने अपना धर्म चुन लिया है?

कभी हाशिये पर रही हिंदुत्व की राजनीति आज मुख्यधारा की राजनीति बन चुकी है. संघ के लिए इससे बड़ी सफलता भला और क्या हो सकती है कि देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां नरम/गरम हिंदुत्व के नाम पर प्रतिस्पर्धा करने लगें.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

साल 2018 में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द संविधान से हटाए बिना ही चलन से बाहर कर दिया जाएगा

नरेंद्र मोदी सरकार कई अहम मोर्चों, मसलन रोज़गार और निवेश पर नाकाम रही है. जैसा कि हमने उत्तर प्रदेश और अब गुजरात में देखा, जब बाकी सारी चीज़ें चुक जाती हैं, तब हिंदुत्व काम आता है.

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भीमा-कोरेगांव युद्ध को याद करने वाले किस आधार पर ‘देशद्रोही’ सिद्ध किए जा रहे हैं?

जो लोग भीमा-कोरेगांव युद्ध की याद में आयोजित समारोह के आयोजकों को राष्ट्रद्रोही सिद्ध कर रहे हैं वो यह क्यों छुपा ले जाते हैं कि न जाने कितनी बार मराठों ने भी अंग्रेज़ों के साथ मिलकर अन्य राज्यों के ख़िलाफ़ लड़ाइयां लड़ी हैं.

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप. (फोटो साभार यू-ट्यूब)

कुछ लोग ख़बरों में बने रहने के लिए राष्ट्रवाद का बिल्ला दिखाते फिरते हैं: अनुराग कश्यप

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने कहा कि आज के समय में राष्ट्रवाद के बिना खेल आधारित बायोपिक फिल्में बनाना असंभव है.

भीमा-कोरेगांव में बना विजय स्तंभ. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत दर्ज की थी. इसकी याद में कंपनी ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया था, जो दलितों का प्रतीक बन गया. कुछ विचारक और चिंतक इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों के उस समय की उच्च जातियों पर जीत के रूप में देखते हैं. हर साल 1 जनवरी को हजारों दलित लोग श्रद्धाजंलि देने यहां आते हैं. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

भीमा-कोरेगांव युद्ध को सिर्फ़ जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए

जब आंबेडकर ने भीमा कोरेगांव युद्ध को पेशवाओं के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ महारों के संघर्ष के रूप में पेश किया, तब वे असल में एक मिथक रच रहे थे.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा. (फोटो साभार: फेसबुक)

इतिहासकारों का राजनीतिक विचारधारा या धर्म के प्रति झुकाव नहीं होना चाहिए: गुहा

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, इतिहास सामाजिक विज्ञान और साहित्य का मिश्रण है और वह कभी एक आयामी नहीं हो सकता.

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भारत मां को सलाम नहीं करेंगे तो किसे करेंगे, अफ़ज़ल गुरु को: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने विहिप नेता अशोक सिंहल को सर्वकालिक लोकप्रिय संगठनकर्ता और निष्काम सेवा का प्रतीक बताया.

गिरिराज सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

बहुसंख्यकों की आबादी गिरेगी, उस दिन लोकतंत्र ख़तरे में होगा: केंद्रीय मंत्री

केंद्र सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, भारत में जम्हूरियत भी तभी तक है और लोकतंत्र तभी तक सुरक्षित है जब तक बहुसंख्यकों की आबादी है.

शायर और गीतकार जावेद अख़्तर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नेताओं को पता होना चाहिए कि उन्होंने देश नहीं बनाया, जनता ने बनाया है: जावेद अख़्तर

मशहूर शायर व गीतकार ने कहा, टीपू सुल्तान भारतीय नहीं थे और अगर मैं इससे सहमत नहीं, तो मैं राष्ट्रद्रोही बन जाऊंगा, तो मैं राष्ट्रद्रोही हूं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रगान विवाद: जो चीज़ें अहम होतीं हैं उन्हें आम नहीं बनाना चाहिए

सिनेमाघर न तो पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी का लाल किला है, न ही उन तमाम स्कूलों और कॉलेजों का मैदान, जहां इन दो दिनों पर राष्ट्रगान भी होता है और ‘रंगारंग कार्यक्रम’ भी.

Chidambaram Photo by The Wire

मोदी अब अच्छे दिन के बारे में बात नहीं करते, उन्हें पता है कि लोग हंसेंगे: पी.चिदंबरम

साक्षात्कार: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से नरेंद्र मोदी सरकार, जीएसटी, रॉबर्ट वाड्रा, कार्ति चिदंबरम, विपक्ष, गुजरात चुनाव समेत विविध विषयों पर विस्तृत बातचीत.

National Anthem PTI

देशभक्ति साबित करने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान पर खड़ा होना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा, नागरिकों को अपनी आस्तीनों पर देशभक्ति लेकर चलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

Premchand

‘विपक्ष का ख़त्म होना चिंता का विषय होना चाहिए’

पुण्यतिथि विशेष: प्रेमचंद लिखते हैं, ‘राष्ट्रीयता वर्तमान युग का कोढ़ है, उसी तरह जैसे मध्यकालीन युग का कोढ़ सांप्रदायिकता थी.’

TN Hindi

जन गण मन की बात, ​एपिसोड 98: संघ की देशभक्ति और जन आंदोलन  

जन गण मन की बात की 98वीं कड़ी में विनोद दुआ संघ की देशभक्ति और विभिन्न मुद्दों को लेकर देश में जारी जन आंदोलनों पर चर्चा कर रहे हैं.

Golwalker

‘राष्ट्रवाद पर गोलवरकर के विचारों को सही तरीके से समझा नहीं गया’

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित इंडियन काउंसिल फॉर फिलॉसफिकल रिसर्च का मानना है कि गोलवरकर के विचारों को सही परिप्रेक्ष्य में समझे जाने की ज़रूरत है.

Amit-Shah-and-Ambedkar

आंबेडकरवादी प्रतीकों के साथ संघ की सोशल इंजीनियरिंग

सेकुलर शक्तियों को याद रखना चाहिए कि 1974 के बाद से ही संघ परिवार बड़ी होशियारी के साथ दलित और पिछड़े प्रतीकों को हड़प के अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने के कौशल को विकसित करने में लगा हुआ है.

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क्या हम सैन्यवादी राष्ट्रवाद की ओर बढ़ रहे हैं?

इसके पहले किसी जनरल या सैन्य अधिकारी के प्रेस कांफ्रेंस की कोई मिसाल हमें याद नहीं. पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के समय भी नहीं.

भारतीय जनसंचार संस्थान के बाहर यज्ञ कराने और बस्तर के पूर्व आईजी एसआरपी कल्लूरी को बुलाने के विरोध करते छात्र. (फोटो: पीटीआई)

मीडिया का एक वर्ग माफिया की तरह व्यवहार कर रहा है: आईआईएमसी प्रमुख

आईआईएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश ने परिसर में यज्ञ कराने और विवादित आईजी एसआरपी कल्लूरी को आमंत्रित करने का किया बचाव.

भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (फोटो: आईआईएमसी)

आईआईएमसी कराएगा यज्ञ, आईजी कल्लूरी देंगे वंचितों के सवाल पर भाषण

लगातार विवादों में घिरा सरकारी पत्रकारिता संस्थान आईआईएमसी अब परिसर के भीतर यज्ञ आयोजित कर रहा है जिसमें आरएसएस मुखपत्र पाञ्चजन्य के प्रकाशक भी शामिल होंगे.

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नक्सली हिंसा पर जेएनयू से नहीं खनन माफियाओं से सवाल पूछे जाने चाहिए

अवैध खनन माफिया और नक्सलियों के बीच एक साझेदारी है- दोनों ही चाहते हैं कि छतीसगढ़ के जो ज़िले पिछड़े और दूरस्थ हैं, वे वैसे ही बने रहें क्योंकि इनके ऐसे बने रहने में ही इनका फायदा है.

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जन की बात: तमिलनाडु के सूखाग्रस्त किसान और देशभक्ति की चाशनी, एपिसोड 20

जन की बात की 20वीं कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ तमिलनाडु के सूखा पीड़ित किसान और देशभक्ति की आड़ में मुद्दों को भटकाने की राजनीति पर चर्चा कर रहे हैं.

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दस कहानियां: मैं देश से बहुत प्रेम करता हूं

देश के सबसे बड़े देशप्रेमी ने देशप्रेम नापने की एक मशीन बनवाई है . इस मशीन में आदमी बैठ जाता है और सुई घूमने लगती है. पता चल जाता है कि कौन देश से कितना प्रेम करता है.