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समाजवादी पार्टी के नेता संतोष पुनेम. (फोटो साभार: फेसबुक)

छत्तीसगढ़ः बीजापुर में समाजवादी पार्टी के नेता की अपहरण के बाद हत्या

पुलिस ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने समाजवादी पार्टी के नेता संतोष पुनेम को मंगलवार शाम को अगवा कर लिया गया था, बुधवार को उनका शव बरामद किया गया.

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छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिला को नक्सली बताकर जेल भेजने की सैन्य बलों की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

वीडियो: आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कांकेर ज़िले के ताड़ावायली गांव में एक आदिवासी महिला को नक्सली बताकर पुलिस ने उनके पति और दो साल की बेटी के साथ गिरफ़्तार कर लिया है.

नीला उइके और उनके पति लालसु उइके.

छत्तीसगढ़: आदिवासी महिला को नक्सली बताकर जेल भेजने की सैन्य बलों की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कांकेर ज़िले के ताड़ावायली गांव में एक आदिवासी महिला को नक्सली बताकर पुलिस ने उनके पति और दो साल की बेटी के साथ गिरफ़्तार कर लिया है.

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अबूझमाड़ में ‘एनकाउंटर’ में मारे गए 10 आदिवासी और कुछ तथ्य

7 फरवरी को अबूझमाड़ के ताड़बल्ला में हुए एक कथित एनकाउंटर को ग्रामीण एक सुनियोजित हमला बता रहे हैं. उन्होंने मारे गए 10 युवाओं के शवों के क्षत-विक्षत होने और मृतक लड़कियों के साथ संभावित यौन शोषण की बात कही है.

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नक्सली हमलों से 15 गुना अधिक हार्ट अटैक, डिप्रेशन, डेंगू से सीआरपीएफ जवानों की मौत

यह आंकड़ा सभी 11 नक्सल प्रभावित राज्यों का है. साल 2016 से जुलाई 2018 तक हार्ट अटैक, मलेरिया-डेंगू, आत्महत्या और अन्य गैर नक्सली कारणों से 1294 सीआरपीएफ जवानों की मौत हुई है.

एसआरपी कल्लूरी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: एसआरपी कल्लूरी का तबादला, बनाया गया परिवहन आयुक्त

विवादित पुलिस अधिकारी आईजी कल्लूरी को बीते दिनों आर्थिक अपराध विभाग और भ्रष्टाचार विरोधी विभाग की ज़िम्मेदारी देने पर भूपेश बघेल सरकार को ख़ासी आलोचना झेलनी पड़ी थी. 15 सांसदों ने कल्लूरी के ख़िलाफ़ जांच के लिए लिखा था सीएम को पत्र.

एसआरपी कल्लूरी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: 15 सांसदों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की आईजी कल्लूरी के ख़िलाफ़ जांच की मांग

केरल, असम, तमिलनाडु और त्रिपुरा के 15 सांसदों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है कि आईजी कल्लूरी के बीते पांच सालों के कार्यकाल की जांच करवाकर उनके किए ग़लत कामों की सज़ा दी जाए.

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कल तक कांग्रेस जिस कल्लूरी को ‘अपराधी’ बताती थी, वो आज उन्हें महत्वपूर्ण पद से क्यों नवाज़ रही है?

क्या सत्ता के चरित्र में ही कुछ ऐसा है कि वह आपको अधर्म की ओर ले जाती है? वो भूपेश बघेल जो एसआरपी कल्लूरी को जेल भेजना चाहते थे, वही उन्हें अब महत्वपूर्ण पद सौंप रहे हैं. बघेल कह सकते हैं कि तब वे विपक्ष में थे और उसका कर्तव्य निभा रहे थे और अब उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे यह काम करवा रही है.

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए यह प्रायश्चित करने का मौका है

जहां एक ओर कांग्रेस के लिए यह नक्सल समस्या को सुलझाने का एक नया मौका है, वहीं राहुल गांधी के लिए यह साबित करने का अवसर है कि वे और उनकी पार्टी वास्तव में देश के आदिवासियों की चिंता करते हैं.

Nandini Sundar Nai dunia

जागरण समूह के अख़बार ने सामाजिक कार्यकर्ता को बताया ‘माओवादी’

जागरण समूह के अख़बार नई दुनिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार को भेजे गए नोटिस की ख़बर में सुंदर को माओवादी कार्यकर्ता बताया है.

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छत्तीसगढ़ में ग्रामीणों का आरोप, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने पर नक्सलियों ने किया हमला

दंतेवाड़ा के ग्रामीणों ने एक फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि बीते दिनों माओवादियों द्वारा उन्हें बुरी तरह पीटा गया और गांव छोड़कर जाने को कहा गया, क्योंकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे.

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छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बल के जवान क्यों ले रहे हैं अपनी जान?

आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 2017 में सबसे अधिक 36 जवानों ने आत्महत्या की. वहीं, 2009 में 13 जवानों ने, 2016 में 12 जवानों ने तथा 2011 में 11 जवानों ने आत्महत्या की है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई

छत्तीसगढ़: पिछले 10 वर्षों में इस साल सबसे ज़्यादा सुरक्षाकर्मियों ने आत्महत्या की

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2007 से लेकिन अब तक कुल 115 सुरक्षाकर्मियों ने आत्महत्या की, इन दस सालों में 2017 में सबसे ज़्यादा 36 जवानों ने आत्महत्या कर ली.

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कथित नक्सली का एनकाउंटर और न्याय के लिए भटकती आदिवासी महिला का संघर्ष

झारखंड के गिरिडीह ज़िले में पुलिस द्वारा नक्सली बताकर मारे गए मोतीलाल बास्के की पत्नी पार्वती मुर्मू इंसाफ़ के लिए संघर्ष कर रही हैं.

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क्या एक आदिवासी की हत्या का जश्न मना रही है झारखंड पुलिस?

झारखंड के गिरिडीह ज़िले में पुलिस ने जिस व्यक्ति को नक्सली बताकर मार डाला था, उसे निर्दोष बताते हुए आदिवासी और मज़दूर संगठन प्रदेश में आंदोलन कर रहे हैं.

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बड़ी मुस्लिम आबादी होने के बावजूद आईएसआईएस भारत में पैर नहीं जमा पाया: राजनाथ

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने के मौके पर गृह मंत्री ने अपने मंत्रालय के कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नक्सली हिंसा पर जेएनयू से नहीं खनन माफियाओं से सवाल पूछे जाने चाहिए

अवैध खनन माफिया और नक्सलियों के बीच एक साझेदारी है- दोनों ही चाहते हैं कि छतीसगढ़ के जो ज़िले पिछड़े और दूरस्थ हैं, वे वैसे ही बने रहें क्योंकि इनके ऐसे बने रहने में ही इनका फायदा है.

दैनिक भारत डॉट ओआरजी द्वारा लगाई गई खबर का स्क्रीन शॉट.

जेएनयू में सुकमा हमले पर जश्न मनाने की फर्ज़ी ख़बर पर वेबसाइटों के ख़िलाफ़ एफआईआर

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष के मुताबिक, इस फर्ज़ी ख़बर के बाद जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों को हत्या और बलात्कार की धमकियां मिल रही हैं.

The Union Home Minister, Shri Rajnath Singh paying tributes to the martyred CRPF personnel, in Raipur, Chhattisgarh on April 25, 2017.
The Chief Minister of Chhattisgarh, Dr. Raman Singh and the Minister of State for Home Affairs, Shri Hansraj Gangaram Ahir are also seen.

माओवादियों की 50 साल की हिंसक राजनीति से क्या हासिल हुआ?

बस्तर में चलने वाले नक्सल राज की खूनी कहानी हर गांव में आपको सुनने को मिलेगी. बंदूक और हिंसा की राजनीति का नतीजा यह हुआ है कि शांतिपूर्ण जीवन के आदी आदिवासियों का जीवन बिखर चुका है.

Chattishgarh Moist PTI

झीरम घाटी हमले से पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों को पैसे भिजवाए थे: कांग्रेस

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने राज्य में पुलिस और नक्सलियों के बीच सांठगांठ होने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

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वीडियो: पत्रकार संतोष यादव से उनके जेल जाने और बस्तर में पत्रकारिता पर बातचीत

संतोष यादव को सितंबर 2015 में बस्तर पुलिस ने नक्सल समर्थक होने के आरोप में गिरफ्तार किया था. करीब डेढ़ साल बाद उन्हें ज़मानत मिली. संतोष से अजय आशीर्वाद महाप्रशस्त से बातचीत.

Soni Sori

बस्तर के आईने में भारतीय लोकतंत्र का चेहरा बेहद डरावना नज़र आता है

क्या बस्तर में भी भारतीय संविधान लागू है? क्या माओवाद से लड़ाई के नाम पर ग्रामीणों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर, महिलाओं के बलात्कार, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले और जेल आदि सब जायज़ हैं, जबकि माओवाद तो ख़त्म होने की जगह बढ़ रहा है?

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को सड़क पर कुचल देना चाहिए: सुकमा एसपी

सुकमा पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्यान एलेसेला ने कहा है कि ईशा खंडेलवाल और शालिनी गेरा जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को वाहन से सड़क पर कुचल देना चाहिए.

संतोष यफव'(फोटो एमेनेस्टी इंटरनेशनल )

नक्सलियों से संबंध के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार को 17 महीने बाद ज़मानत

बस्तर में कार्यरत संतोष को छत्तीसगढ़ पुलिस ने वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया था. वह नवभारत, पत्रिका और दैनिक छत्तीसगढ़ जैसे अख़बारों के लिए लिखा करते थे.