New Education Policy

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई शिक्षा नीति में नया क्या है

सरकार द्वारा हाल ही में लाई गई नई शिक्षा नीति को लेकर विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों की विभिन्न राय है. कुछ लोग जहां इसे प्रगतिशील दस्तावेज़ बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि यह हाशिये पर पड़े लोगों एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों, एससी/एसटी, ओबीसी जैसे वर्ग को कोई ख़ास राहत प्रदान नहीं करती है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी (फोटोः पीटीआई)

तमिलनाडु में लागू नहीं होने देंगे तीन भाषा फॉर्मूलाः पलानीस्वामी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर निराशा जताते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य में कई दशकों से दो भाषा नीति का पालन किया जा रहा है, इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोबारा विचार करने का भी आग्रह किया.

प्रतीकात्मक फोटो

नई शिक्षा नीति में मध्याह्न भोजन के साथ स्कूली बच्चों को सुबह नाश्ता देने का प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति में प्रस्ताव किया गया है कि मध्याह्न भोजन के दायरे का विस्तार कर उसमें नाश्ते का प्रावधान जोड़ा जाए. सुबह के समय पोषक नाश्ता मिलना अधिक मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकर हो सकता है.

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क्या भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सूरत बदलने में कारगर होगी नई शिक्षा नीति?

वीडियो: बीते दिनों केंद्रीय कैबिनेट ने देश की नई शिक्षा नीति को मंज़ूरी दी है. 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में हुए इस बदलाव को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. इस बारे में विभिन्न विशेषज्ञों से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (फोटो: पीटीआई)

नई शिक्षा नीति अत्यधिक विनियमित, कमज़ोर फंडिग मॉडल पेश करती है: मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने नई शिक्षा नीति को ‘प्रगतिशील दस्तावेज़’ बताते हुए कहा कि इसमें मौजूदा शिक्षा प्रणाली की ख़ामियों की पहचान तो की गई है, लेकिन यह पुरानी परंपराओं के दबाव से मुक्त नहीं हो पा रहा है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय बना शिक्षा मंत्रालय, नई शिक्षा नीति की घोषणा

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि देश में 34 साल बाद शिक्षा नीति में परिवर्तन किया गया है. नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है, साथ ही एमफिल को ख़त्म किया गया है.

A student takes classes online with his companions using the Zoom app at home in El Masnou, north of Barcelona, Spain April 2, 2020. REUTERS/Albert Gea

संकट की घड़ी में ऑनलाइन शिक्षा सही है, पर इसे कक्षाओं का विकल्प नहीं बनाया जा सकता

कोरोना संकट के दौर में शैक्षणिक संस्थानों के आगे जो चुनौती है उसमें ऑनलाइन एक स्वाभाविक विकल्प है. ऐसे समय में विद्यार्थियों से जुड़ना समय की ज़रूरत है, लेकिन इस व्यवस्था को कक्षाओं में आमने-सामने दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प बताना भारत के भविष्य के लिए अन्यायपूर्ण है.

भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद आईआईएमसी के छात्र. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

आईआईएमसी के छात्रों ने फीस बढ़ोतरी के खिलाफ भूख हड़ताल समाप्त की

आईआईएमसी के छात्रों ने कहा कि प्रशासन द्वारा उनकी मांगे माने जाने के बाद उन्होंने शुल्क वृद्धि के खिलाफ अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. प्रशासन ने दूसरे सेमेस्टर की फीस जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2020 तक या नई शुल्क संरचना जारी होने तक बढ़ा दी है.

आईआईएमसी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

फीस बढ़ोतरी को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे आईआईएमसी के छात्र

भारतीय जनसंचार संस्थान के छात्रों ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में प्रशासन ने एक समिति बनाने की घोषणा की थी जो शुल्क के मुद्दे पर दो मार्च तक अपनी सिफारिशें देने वाली थी. अब प्रशासन की ओर से फीस जमा करने के लिए नया सर्कुलर जारी किया गया है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: पीटीआई)

जेएनयू: एचआरडी मंत्रालय की समिति ने कहा, शैक्षणिक सत्र के बीच फीस बढ़ाने का औचित्य नहीं

जेएनयू की हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित समिति का सुझाव है कि फंडिंग के लिए अन्य वैकल्पिक स्रोत खोजे जाने चाहिए.

फोटो साभार: ट्विटर

आईआईएमसी: लिखित आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने फीस बढ़ोतरी के खिलाफ धरना ख़त्म किया

असंगत शिक्षण शुल्क के ख़िलाफ़ नई दिल्ली स्थित आईआईएमसी के छात्र बीते तीन दिसंबर से ही धरने पर बैठे थे. अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद प्रशासन ने कार्यकारी परिषद की बैठक बुलाने और फीस की समीक्षा करने की बात कही है. इसके साथ ही अगले आदेश तक सेकेंड सेमेस्टर की फीस जमा करने के सर्कुलर पर रोक लगा दी गई है.

फोटो साभार: ट्विटर

‘जब 250 बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था नहीं हो रही, तब करोड़ों बच्चों के भविष्य का क्या होगा?’

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध के बीच भारतीय जनसंचार संस्थान में भी फीस बढ़ाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है. बीते 10 सालों में दोगुनी से अधिक बढ़ चुकी फीस को कम करने की मांग को लेकर संस्थान के छात्र पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University students display placards during a protest against the administration's 'anti-students' policy, in New Delhi, Monday, Nov. 11, 2019. Students wanted to march towards the All India Council for Technical Education (AICTE), where Vice President Venkaiah Naidu was addressing the university's convocation at an auditorium. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI11_11_2019_000109B)

जेएनयू पर इसलिए हमला किया जा रहा है ताकि जियो यूनिवर्सिटी के मॉडल को स्थापित किया जा सके

अजीब बात है कि देश के प्रधानमंत्री लगातार पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन 5000 बच्चों को पढ़ाने के लिए देश की सरकार के पास पैसा नहीं है.

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जेएनयू: क्या सस्ती शिक्षा लोगों का अधिकार नहीं है?

वीडियो: दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में बीते तीन हफ्तों से फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है. इस मुद्दे पर द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी, द वायर के पत्रकार अविचल दुबे, आईसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एनसाई बालाजी और जेएनयू के छात्र अनिकेत सिंह के साथ चर्चा कर रही हैं.

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जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लोकसभा में गूंजा

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, कांग्रेस सदस्य टीएन प्रतापन और बसपा के कुंवर दानिश अली ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान ये मुद्दा उठाया.