noteban

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम (फोटो: पीटीआई)

बड़ी मंदी की ओर बढ़ रहा भारत, आईसीयू में जा रही अर्थव्यवस्था: पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार

नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहते हुए अरविंद सुब्रमण्यन ने दिसंबर 2014 में दोहरे बैलंस शीट की समस्या उठाई थी, जिसमें निजी उद्योगपतियों द्वारा लिए गए कर्ज बैंकों के एनपीए बन रहे थे. सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से दोहरे बैलेंस शीट के संकट से जूझ रही है.

The Governor of Reserve Bank of India, Shri Raghuram Rajan calling on the Prime Minister, Shri Narendra Modi, in New Delhi on June 01, 2014.

सभी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन होना अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि भारत आर्थिक मंदी के घेरे में है. आर्थिक सुस्ती को दूर करने की शुरुआत के लिए यह जरूरी है कि मोदी सरकार सबसे पहले समस्या को स्वीकार करे.

(फोटो: रॉयटर्स)

लोग 2,000 के नोटों की जमाखोरी में लगे हैं, इन्हें बंद कर देना सहीः पूर्व वित्त सचिव

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकार को 72 पेज का एक नोट लिखा है, जिसमें उन्होंने दो हज़ार रुपये के नोट को प्रचलन से बाहर करने, सरकारी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण ख़त्म करने और निजीकरण को बढ़ावा देने समेत कई सुझाव दिए हैं.

रघुराम राजन. (फोटो:रॉयटर्स)

बहुसंख्यकवाद और अधिनायकवाद भारत को अंधेरे रास्ते पर ले जा रहा है: रघुराम राजन

अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में एक लेक्चर के दौरान पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि बिना सोच-विचार के नोटबंदी लाने और बुरी तरह से जीएसटी लागू करने की वजह से भारत इस समय आर्थिक सुस्ती की दौर से गुजर रहा है.

(फोटो: पीटीआई)

सरकार के दावों के उलट नोटबंदी के बाद नकली नोटों पर नहीं लगी लगाम, भारी बढ़ोतरी

रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2000 रुपये और 500 रुपये के नकली नोटों में क्रमश: 21.9 फीसदी और 221 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वहीं 200 रुपये के नकली नोटों में 161 गुना की वृद्धि हुई.

(फोटो: रॉयटर्स)

साल 2018-19 में नकदी 17 फीसदी बढ़कर 21.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंची: आरबीआई

नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.74 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा चलन में थी. इस तरह नोटबंदी से पहले की तुलना में नकद राशि यानि चलन में मुद्रा में करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

(फोटो: पीटीआई)

नोटबंदी से पहले की तुलना में करीब 22 फीसदी नकदी बढ़ी

राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक नोटबंदी से पहले चार नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में थी, लेकिन अब ये राशि बढ़कर 21.71 लाख करोड़ रुपये हो गई है.

Modi 2

नोटबंदी के दौरान लाई गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के पैसे का क्या हुआ, सरकार को नहीं पता

मोदी सरकार के दावे और उनकी ज़मीनी हक़ीक़त पर विशेष सीरीज: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत व्यक्ति को अघोषित आय का 30 फीसदी की दर से कर, कर के राशि का 33 फीसदी सरचार्ज और अघोषित आय का 10 फीसदी जुर्माने के तौर पर देना था. इस योजना को दिसंबर 2016 से 10 मई 2017 तक के लिए लाया गया था.

Bulletin 27th march

द वायर बुलेटिन: रघुराम राजन ने कहा, बिना रोजगार सृजन के सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर संदेह के घेरे में

मोदी के खिलाफ़ 111 किसान, भाजपा द्वारा उनकी मांगों को घोषणापत्र में शामिल करने के वादे समेत आज की बड़ी ख़बरें. दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट.

बसपा प्रमुख मायावती. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस की ‘न्याय’ योजना पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा, कांग्रेस-भाजपा एक ही थाली के चट्टे-बट्टे

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा का कांग्रेस पार्टी पर आरोप सही है कि उसकी गरीबी हटाओ 2.0 का नारा चुनावी धोखा है, लेकिन भाजपा खुद के अंदर भी झांके.

रघुराम राजन. (फोटो:रॉयटर्स)

बिना रोजगार सृजन के सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर संदेह के घेरे में है: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर उपजे संदेह को दूर करने के लिए एक निष्पक्ष समूह की नियुक्ति पर जोर दिया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

नोटबंदी से पहले की तुलना में 19.1 फीसदी बढ़ी नकदी

नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में थी, लेकिन अब 19.44 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ ये राशि बढ़कर 21.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. यह दर्शाता है कि वित्तीय प्रणाली में नकदी वापस आ गई है.

FILE PHOTO: A security personnel member stands guard at the entrance of the Reserve Bank of India (RBI) headquarters in Mumbai, India, August 2, 2017. REUTERS/Shailesh Andrade/File Photo

आरटीआई के तहत नोटबंदी से जुड़ी जानकारी नहीं देने पर सीआईसी ने आरबीआई को लगाई फटकार

सूचना आयुक्त सुरेश चंद्रा ने जानकारी नहीं देने के कारण आरबीआई के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. आरटीआई के तहत आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की उन सभी बैठकों से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी जिसके तहत नोटबंदी के निर्णय पर पहुंचा गया.