NSA

Activists display placards during a protest against the arrests of activists in New Delhi | Kamal Kishore/PTI

साल 2019 में बढ़े राजद्रोह के मामले, दोषसिद्धि न्यूनतम रही: एनसीआरबी

साल 2019 में राजद्रोह के 93 मामले दर्ज किए गए थे, जो इससे पहले के सालों के मुक़ाबले अधिक हैं, हालांकि केवल तीन फीसदी राजद्रोह मामलों में ही आरोपों को साबित किया जा सका.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

साल 2016-18 के बीच यूएपीए के तहत 3005 मामले दर्ज, सिर्फ़ 821 केस में चार्जशीट दाख़िल: सरकार

सरकार ने संसद में यह जानकारी भी ​दी कि साल 2017 और 2018 में देश भर में 1,198 लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या रासुका के तहत हिरासत में लिया गया. मध्य प्रदेश में रासुका के तहत साल 2017 और 2018 में सर्वाधिक लोगों को हिरासत में लिया गया. इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है.

(प्रतीकात्म​क फोटो: रॉयटर्स)

उत्तर प्रदेश में इस साल 139 लोगों पर एनएसए लगा, आधे से ज़्यादा मामले गोहत्या से जुड़े: रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के मुताबिक, इस साल 19 अगस्त तक यूपी पुलिस ने राज्य में 139 लोगों के खिलाफ एनएसए लगाया है, जिनमें से 76 मामले गोहत्या से जुड़े हैं. 31 अगस्त तक अकेले बरेली पुलिस जोन में ही 44 लोगों पर एनएसए के तहत मामला दर्ज किया गया.

श्रीनगर स्थित पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का मुख्यालय (फोटोः पीटीआई)

जम्मू कश्मीरः पीडीपी नेताओं का घर से बाहर न निकलने देने का आरोप, पार्टी की बैठक रद्द

सरकार द्वारा नेताओं के नज़रबंद होने और उनके आने-जाने पर पाबंदी न होने के दावों के उलट पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी की एक बैठक इसलिए रद्द करनी पड़ी क्योंकि पुलिस ने पार्टी नेताओं को घर से निकलने नहीं दिया. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह पीडीपी की पहली बैठक थी.

KK.00_18_23_11.Still003

मुझे जेल में मारा पीटा गया, भूखा रहने पर मजबूर किया गया: डॉ. कफ़ील ख़ान

वीडियो: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पिछले साल दिसंबर में कथित भड़काऊ भाषण देने के मामले में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. बीते एक सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन पर लगाए राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को रद्द कर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था. रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो: पीटीआई)

क्या रिहाई के बाद और बढ़ सकती हैं डॉ. कफ़ील ख़ान की मुश्किलें

बीते साल ऑक्सीजन हादसे की विभागीय जांच में दो आरोपों में मिली क्लीनचिट के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान की बहाली की संभावनाएं बनी थीं, लेकिन सरकार ने नए आरोप जोड़ते हुए दोबारा जांच शुरू कर दी. मथुरा जेल में रिहाई के समय हुई हुज्जत यह इशारा है कि इस बार भी हुकूमत का रुख़ उनकी तरफ नर्म होने वाला नहीं है.

मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो: पीटीआई)

योगी सरकार के आगे नहीं झुकूंगा, अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहूंगा: डॉ. कफ़ील ख़ान

एएमयू में सीएए के ख़िलाफ़ कथित ‘भड़काऊ भाषण’ देने के आरोप में जनवरी से मथुरा जेल में बंद डॉ. कफ़ील ख़ान को हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार देर रात रिहा कर दिया गया. उनका कहना है कि उन्हें इतने दिन जेल में इसलिए रखा गया क्योंकि वे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर करते रहते हैं.

AKI 1 September 2020.00_24_24_16.Still002

डॉ. कफ़ील ख़ान को ज़मानत और गर्त में अर्थव्यवस्था

वीडियो: पिछले साल दिसंबर में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में 29 जनवरी को गिरफ्तार किए गए डॉ. कफ़ील ख़ान को ज़मानत मिल गई है. दूसरी ओर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इस मुद्दे पर अर्थशास्त्री अरुण कुमार से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

डॉ. कफील. (फोटो साभार: फेसबुक/drkafeelkhanofficial)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ रासुका के आरोप हटाने और तुरंत रिहाई का आदेश दिया

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पिछले साल दिसंबर में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद रिहा करने के बजाय उन पर रासुका लगा दिया गया था.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/MYogiAdityanath)

उत्तर प्रदेश: योगी आदित्यनाथ ने ‘लव जिहाद’ रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए

उत्तर प्रदेश गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि यह एक सामाजिक मुद्दा है. इसे रोकने के लिए इसे गंभीरता से लेना होगा. आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की ज़रूरत है. इसके लिए हमें सख़्त होना होगा.

Lakhimpur Kheri

उत्तर प्रदेश: बलात्कार के बाद किशोरी की हत्या, आरोपी गिरफ़्तार

मामला लखीमपुर खीरी ज़िले का है. बीते दस दिनों में जनपद में बलात्कार और हत्या का यह दूसरा मामला है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपी पर रासुका के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है.

डॉ. कफील खान. (फाइल फोटो: पीटीआई)

15 दिन में तय करें कि डॉ. कफ़ील को रिहा कर सकते हैं या नहीं: सुप्रीम कोर्ट

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले साल दिसंबर में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद रिहा करने के बजाय उन पर रासुका लगा दिया गया था.

डॉ. कफील. (फोटो साभार: फेसबुक/drkafeelkhanofficial)

क्या ऑक्सीजन कांड में चुप न रहने की सज़ा काट रहे हैं डॉ. कफील ख़ान

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुए ऑक्सीजन कांड के तीन बरस पूरे हो गए. लेकिन इस दौरान हादसे में ‘विलेन’ बना दिए गए डॉ. कफील ख़ान के अलावा नौ आरोपियों में से कोई इस प्रकरण पर बोलने के लिए सामने नहीं आया. शायद यही वजह है कि इन तीन बरसों में डॉ. कफील ने अधिकतर समय जेल में बिताया है.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/MYogiAdityanath)

यूपी: आइसोलेशन में रखे गए तबलीग़ी जमात के लोगों पर नर्सों से छेड़छाड़ का आरोप, रासुका लगा

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद शहर के एक अस्पताल की महिला स्टाफ के सामने तबलीग़ी जमात से जुड़े लोगों द्वारा अश्लील गाने सुनने और अभद्र हरक़त करने की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके ख़िलाफ़ रासुका के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है.

(फोटो साभार: यूट्यूब वीडियोग्रैब)

कोरोना वायरस: इंदौर में डॉक्टरों की टीम पर हमला करने के संबंध में रासुका के तहत चार गिरफ़्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के टाटपट्टी बाखल इलाके में बीते एक अप्रैल को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अभियान चला रहे स्वास्थ्यकर्मियों की टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया था. इंदौर में 24 मार्च से दो अप्रैल के बीच संक्रमण के 75 मामले सामने आए हैं.